Sakat Chauth 2023 [Hindi] : जानिए आयु में वृद्धि करने वाला वास्तविक विघ्नहर्ता परमात्मा कौन है?

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Last Updated on 11 January 2023, 9:57 PM IST: Sakat Chauth 2023 [Hindi]: सकट चौथ या संकटा चौथ एक लोकप्रिय हिंदू त्योहार है जो भगवान गणेश को समर्पित है। इस साल यह कल मंगलवार यानी 10 जनवरी को मनाया गया। इस दिन सकट चौथ की कथा सुनी जाती है। इस दिन विवाहित हिंदू महिलाएँ व्रत रखती हैं और अपने पुत्र की लंबी उम्र की कामना करती हैं। आइये जानते हैं कि हमारी आयु में वृद्धि और प्रत्येक संकट से रक्षा करने वाला वास्तविक विघ्नहर्ता परमात्मा कौन है?

Sakat Chauth 2023 [Hindi] : मुख्य बिंदु

  • हिंदुओं का लोकप्रिय त्योहार सकट चौथ व्रत कल 10 जनवरी को मनाया गया।
  • पुत्र की लंबी उम्र के लिए महिलाओं द्वारा मनाया जाता है यह त्योहार।
  • माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र श्री गणेश जी को समर्पित है यह पर्व।
  • वेदों अनुसार संकटों से रक्षा और आयु में वृद्धि कविर्देव यानी कबीर साहेब ही कर सकता है।
  • कबीर परमेश्वर की वास्तविक भक्ति विधि वर्तमान समय में जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज बता रहे हैं।

सकट चौथ या संकटा चौथ व्रत कब मनाया जाता है?

Sakat Chauth 2023 [Hindi]: हिन्दू पंचांग के अनुसार सकट चौथ व्रत का त्योहार माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस साल तिलकुट चौथ (Sakat Chauth 2023) कल मंगलवार यानी 10 जनवरी को मनाया गया। 

सकट चौथ (Sakat Chauth 2023) से संबंधित लोक मान्यता

हिंदू धर्म में मान्यता है कि माघ महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन ही भगवान गणेश ने माता पार्वती और भगवान शिव की परिक्रमा की थी। इसलिए सकट चौथ या तिलकुट चौथ (Tilkut Chauth 2023) व्रत को संतान के लिए फलदायी माना जाता है और मान्यता है कि इस उपवास को करने से संतान को लंबी आयु यानी दीर्घायु की प्राप्ति होती है जो कि पूर्ण रूप से गलत है।

सकट चौथ के अन्य नाम 

कल देशभर में सकट चौथ (Sakat Chauth 2023) का पर्व मनाया गया। हिंदू धर्म में इसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है। आपको बता दें कि इसे तिलकुट चौथ (Tilkut Chauth 2023), तिलकुट चतुर्थी, तिलकुटा चौथ, संकटा चौथ, तिल चौथ, संकटा गणेश चतुर्थी, गणेश चतुर्थी व्रत, माघी चतुर्थी आदि नामों से जाना जाता है।

किन देवताओं को है सकट चौथ व्रत समर्पित?

Sakat Chauth 2023 [Hindi] : लोक मान्यताओं के अनुसार श्री शिव जी और माता पार्वती के पुत्र श्रीगणेश जी को विघ्नहर्ता मानते हुए सकट चौथ व्रत श्रीगणेश को समर्पित है। इस व्रत में भगवान गणेश के अलावा सकट माता और चंद्रमा पूजन का किया जाता है। जबकि वास्तविक विघ्नहर्ता परमात्मा की सम्पूर्ण जानकारी आपको इसी लेख में नीचे मिलेगी। हम आपको यहां बताना उचित समझते हैं कि पवित्र श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 9 श्लोक 25 तथा अध्याय 7 श्लोक 21-23 में कहा गया है कि देवताओं को पूजने वाले देवताओं को प्राप्त होते हैं लेकिन इन अल्पबुद्धि वालों का फल नाशवान यानी क्षणिक है।

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तथा पवित्र गीता अध्याय 6 श्लोक 16 में व्रत, उपवास करने को स्पष्ट रूप से मना किया गया है जिससे सकट चौथ व्रत गीता विरुद्ध यानी शास्त्र विरुद्ध है और श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 16 श्लोक 23 के अनुसार शास्त्रविरुद्ध क्रियाओं के करने से कोई लाभ व सुख प्राप्त नहीं होता। इसलिए श्लोक 24 में कहा है कि अर्जुन तू शास्त्र अनुकूल कर्तव्य कर्म कर।

गीता अध्याय 16 श्लोक 23, 24

सकट चौथ (Sakat Chauth) क्यों मनाया जाता है?

सकट चौथ ज्यादातर उत्तरभारत में मनाया जाने वाला लोकप्रिय पर्व है। महिलाओं द्वारा सकट चौथ का व्रत रखकर संतान की लंबी आयु के लिए प्रार्थना की जाती है। सकट चौथ पर गणेश जी के साथ ही माता सकट की भी पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को रखने से भगवान श्रीगणेश प्रसन्न होकर हमारे सभी संकटों से रक्षा करते हैं। इसलिए सकट चौथ (Sakat Chauth 2023) के दिन महिलाएं व्रत रखती हैं जिससे कि उनका वैवाहिक जीवन सुखी रह सके। लेकिन हम आपको शास्त्रों अनुसार यह बताते चलें कि जीवन में सुख प्राप्त करने और संकटों से रक्षा प्राप्ति तथा दीर्घायु के लिए पूर्णब्रह्म कबीर साहेब जी की भक्ति करना अतिआवश्यक है।

कबीर साहेब जी हैं वास्तविक विघ्नहर्ता

हिन्दू धर्म में लोक मान्यताओं के अनुसार गौरी पुत्र श्रीगणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है और यहीं वजह है कि उन्हें लोग अपने विघ्नों, संकटों के निवारण के लिए पूजते हैं। जबकि वेदों अनुसार वास्तविकता में विघ्नहर्ता आदि गणेश कबीर साहेब जी हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि हमारे जीवन रूपी मार्ग में पापों के कारण ही दुःख, संकट (विघ्न) आते हैं और इन संकटों के समाप्त हो जाने पर सुख प्राप्त होता है। तो वास्तविक सुखदायक परमात्मा कबीर साहेब जी ही हैं।

ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 82 मंत्र 1-3, यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 32, यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13 आदि वेद मंत्रों से यह स्पष्ठ है कि कविर्देव (कबीर साहेब जी) अपने भक्तों के घोर से घोर पाप को भी समाप्त कर देता है। वहीं, ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 86 मंत्र 26, 27 में कहा गया है कि भक्ति करने वाले भक्तों के लिए कबीर परमात्मा, रास्तों को सुगम करता हुआ अर्थात जीवन रूपी मार्ग में आने वाले दुःखों को रहित बनाता है। उनके विघ्नों यानी संकटों को समाप्त करता है।

पूर्णब्रह्म कबीर ही कर सकते हैं आयु में वृद्धि

यदि बात करें आयु वृद्धि की तो यह शक्ति भी कविर्देव (पूर्णब्रह्म/परम अक्षर ब्रह्म कबीर साहेब जी) के पास ही है बाकी अन्य कोई भी देवी देवता श्री ब्रह्मा, श्री विष्णु, श्री शिव, श्री गणेश, माता दुर्गा, ब्रह्म और परब्रह्म अपने भक्तों की आयु में वृद्धि नहीं कर सकते है। ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 161 मंत्र 2, मण्डल 9 सूक्त 80 मंत्र 2 और सामवेद संख्या न. 822 अध्याय 3 खंड न. 5 श्लोक न. 8 में प्रमाण है कि वह पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब (कविर्देव) जी सच्चे भक्त की यदि मृत्यु निकट है तो उसकी आयु में वृद्धि कर उसकी उम्र बढ़ा देता है।

संत रामपाल जी बता रहे हैं कबीर परमेश्वर की वास्तविक भक्ति विधि

वैसे तो इस पृथ्वी में अनेकों पंथ हैं जो सतभक्ति प्रदान करने का दावा करते हैं लेकिन कबीर साहेब जी का वास्तविक भक्ति मार्ग आज पूरी दुनिया में जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ही सर्व धर्म शास्त्रों से प्रमाण सहित बता रहे हैं। संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताई गई भक्ति विधि से लोगों के दुःख, संकट समाप्त हो रहे हैं यहाँ तक कि लोगों की आयु में भी वृद्धि हुई है। जोकि केवल पूर्णब्रह्म की भक्ति से ही संभव होता है।

वास्तविक भक्ति विधि की सम्पूर्ण जानकारी के लिए Satlok Ashram Youtube Channel पर जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के मंगलमय प्रवचन का श्रवण कीजिये या आज ही प्ले स्टोर से Sant Rampal Ji Maharaj App डाउनलोड कीजिये।

Sakat Chauth 2023 [Hindi] : FAQ

Q. वास्तविक विघ्नहर्ता, संकट मोचन परमात्मा कौन है?

Ans. पूर्णब्रह्म कविर्देव (कबीर साहेब) जी

Q. किस परमात्मा द्वारा भक्त की आयु में वृद्धि की जा सकती है?

Ans. परमेश्वर कबीर साहेब (कविर्देव) जी 

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