हरियाणा के सतलोक आश्रम के संचालक संत रामपाल जी महाराज को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। वर्ष 2014 हरियाणा पुलिस की कारवाई में आश्रम में एक महिला अनुयायी की मृत्यु के मामले में संत रामपाल जी महाराज को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट ने निलंबित कर दिया है। यह आदेश जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस दीपिंदर सिंह नलवा की खंडपीठ ने दिया है।
कोर्ट ने यह निर्णय संत रामपाल जी महाराज की उम्र (74 वर्ष), चिकित्सा साक्ष्यों पर गंभीर बहस की संभावना, और मृतका के परिवार (पति और सास) द्वारा अभियोजन का समर्थन न करने को आधार बनाकर दिया है। संत रामपाल जी महाराज पिछले 10 साल और 27 दिन से जेल में हैं, और इस फैसले से उनकी जेल से रिहाई का रास्ता लगभग साफ हो गया है ।
मुख्य बिंदु: पूरा मामला एक नजर में
- पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने संत रामपाल जी महाराज की उम्रकैद की सजा को निलंबित किया
- 2014 में बरवाला आश्रम में महिला अनुयायी की मृत्यु का मामला
- 2018 में हिसार सत्र अदालत ने IPC धारा 302 (हत्या), 343 (अनुचित बंदीकरण), 120-B (साजिश) के तहत उम्रकैद सुनाई थी
- जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस दीपिंदर सिंह नलवा की खंडपीठ ने आदेश दिया
- हुई सत्य और न्याय की जीत: अनुयायी
मामले का विवरण और कोर्ट का फैसला
संत रामपाल जी महाराज पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या), 343 (अनुचित बंदीकरण), और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत 2018 में हिसार की सत्र अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। यह मामला 2014 में सतलोक आश्रम बरवाला में एक महिला अनुयायी की मृत्यु से संबंधित था। संत रामपाल जी महाराज के वकील अर्जुन श्योराण ने कोर्ट में दलील दी कि यह मामला झूठा है और मृत्यु प्राकृतिक कारणों, यानी पुलिस की कारवाई (आँसू गैस के गोले) के कारण हुई थी। मेडिकल रिपोर्ट्स में भी यही पुष्टि हुई कि मृतका एक महीने से न्यूमोनिया से पीड़ित थी। मृतका के पति और सास ने भी अदालत में इस बात का समर्थन किया कि मृत्यु प्राकृतिक थी।
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हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चिकित्सा साक्ष्यों को लेकर गंभीर बहस योग्य मुद्दे हैं। इसके अलावा, संत रामपाल जी महाराज की उम्र 74 वर्ष है और वह पहले ही 10 साल से अधिक समय तक जेल में रह चुके हैं। मृतका के परिवार द्वारा अभियोजन का समर्थन न करने को भी कोर्ट ने महत्वपूर्ण माना। इन सभी आधारों पर, कोर्ट ने उनकी शेष सजा को मुख्य अपील के निपटारे तक निलंबित करने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि संत रामपाल जी महाराज को जमानत और स्योरिटी बॉन्ड जमा करने के बाद, मजिस्ट्रेट की संतुष्टि पर रिहा किया जा सकता है, बशर्ते वह किसी अन्य मामले में वांछित न हों।
राज्य सरकार का विरोध और दावे
राज्य सरकार ने संत रामपाल जी महाराज की याचिका का कड़ा विरोध किया। सरकार ने झूठा आरोप लगाया कि सतलोक आश्रम में मृतका सहित कई महिलाओं को कैद करके रखा गया था। उन्हें पर्याप्त भोजन और रहने की सुविधाएँ नहीं दी गई थीं, जिसके कारण उनकी मृत्यु दम घुटने से हुई। यह आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है इसलिए पंजाब एण्ड हरियाणा हाई कोर्ट ने भी इन दावों को चिकित्सा साक्ष्यों और मृतका के परिवार के बयानों के आधार पर पर्याप्त रूप से पुख्ता नहीं माना और सत्य यानी संत रामपाल जी महाराज का पक्ष सही माना।
संत रामपाल जी महाराज की उम्रकैद पर रोक: हाईकोर्ट आदेश पढ़ें नीचे



संत रामपाल जी महाराज का आध्यात्मिक जीवन और संघर्ष
संत रामपाल जी महाराज का जन्म 8 सितंबर 1951 को हरियाणा के सोनीपत जिले के धनाना गाँव में एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर (जे.ई.) के रूप में 18 वर्षों तक सेवा दी। 1988 में उनकी मुलाकात कबीरपंथी संत स्वामी रामदेवानंद जी महाराज से हुई, जिनसे उन्होंने नाम दीक्षा ग्रहण की। 1994 में स्वामी रामदेवानंद जी ने उन्हें सत्संग और नामदान की आज्ञा दी, जिसके बाद संत रामपाल जी महाराज ने जे.ई. की नौकरी छोड़ दी और सतलोक आश्रम की स्थापना की।
1999 में रोहतक के करौंथा गाँव में सतलोक आश्रम की स्थापना के साथ उनके अनुयायियों की संख्या तेजी से बढ़ी। हालांकि, उनके द्वारा समाज को दिए गए सच्चे आध्यात्मिक ज्ञान के कारण उनके संघर्षों का सिलसिला भी शुरू हो गया। 2006 में, स्वामी दयानंद सरस्वती की पुस्तक ‘सत्यार्थ प्रकाश’ की सच्चाई दिखाने पर आर्य समाज के तथाकथित लोगों ने संत रामपाल जी के अनुयायियों पर हिंसक हमला किया, जिसमें उन्होंने संत रामपाल जी महाराज को झूठे केस में फँसाने के लिए खुद ही एक सोनू नाम के व्यक्ति को गोली मार दी। इसके बाद एक बार फिर 2013 में उन्होंने षड्यंत्र के तहत सतलोक आश्रम पर हमला किया जबकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आश्रम संत रामपाल जी को सौंप दिया गया था, इस हमले में तीन लोगों की मौत और लगभग 80 लोग घायल हुए और यही सिलसिला 2014 में चला।
क्या थी बरवाला की घटना?
2014 में सतलोक आश्रम बरवाला में पुलिस द्वारा निर्दोष लोगों पर की गई बर्बर कारवाई ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया था। संत रामपाल जी हर बार अपनी कोर्ट की तारीख पर जाते थे , जब वे अस्वस्थ होने के कारण एक बार उपस्थित नहीं हो पाए तो उनके खिलाफ झूठा गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया गया। उस वारंट के तहत हुई कार्रवाई में पुलिस ने हिंसा और बल का सहारा लिया और आश्रम की सारी सुविधाएँ बाहर से बंद कर दी गई। इसमें 6 लोगों (पांच महिलाएँ और एक बच्चा) की मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद संत रामपाल जी महाराज को झूठे केस बनाकर गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर हत्या, देशद्रोह, और अवैध हथियार रखने जैसे गंभीर बेबुनियाद आरोप लगाए गए, जिनके कोई ठोस सबूत नहीं मिले।
इसके बावजूद 2018 में हिसार की सत्र अदालत ने उन्हें दो हत्या के मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई। हालांकि, 2017 में कुछ अन्य मामलों (सरकारी काम में बाधा और बंधक बनाने) में उन्हें बरी कर दिया गया था। 2022 में, करौंथा कांड में भी उन्हें और उनके 24 अनुयायियों को बरी कर दिया गया।
क्या है हाईकोर्ट के फैसले का महत्व?
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का यह फैसला संत रामपाल जी महाराज के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। कोर्ट ने अपने फैसले में ये माना है कि आश्रम में हुई मृत्यु प्राकृतिक कारणों, यानी पुलिस की कारवाई (आँसू गैस के गोले) के कारण हुई थी। मेडिकल रिपोर्ट्स में भी यही पुष्टि हुई कि मृतका एक महीने से न्यूमोनिया से पीड़ित थी। मृतका के पति और सास ने भी अदालत में इस बात का समर्थन किया कि मृत्यु प्राकृतिक थी।
10 साल से अधिक समय तक झूठे मामले में जेल में रहने के बाद यह निर्णय उनकी रिहाई का मार्ग प्रशस्त करता है। कोर्ट ने न केवल उनकी उम्र और जेल में बिताए समय को ध्यान में रखा, बल्कि चिकित्सा साक्ष्यों और मृतका के परिवार के बयानों को भी महत्वपूर्ण माना। यह फैसला सत्य और न्याय की जीत है।
कौन हैं संत रामपाल जी महाराज और क्या है उनका योगदान?
संत रामपाल जी महाराज सतलोक आश्रम के माध्यम से आध्यात्मिक और सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी शिक्षाएँ पवित्र शास्त्रों जैसे भगवद्गीता, कबीर सागर और वेदों पर आधारित हैं, जो सच्ची भक्ति का मार्ग दिखाती हैं। वे परमात्मा कबीर को पूर्ण ब्रह्म शास्त्रों के आधार पर प्रमाणित करते हैं और तीन चरणों वाली नाम दीक्षा प्रदान करते हैं, जिससे भक्तों को मोक्ष, शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य और असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है। उनकी पुस्तकें ‘ज्ञान गंगा’ और ‘जीने की राह’ लाखों लोगों को जीवन का सही मार्ग दिखाती हैं। सतलोक आश्रम में सत्संग और भक्ति के माध्यम से वे सामाजिक बुराइयों जैसे दहेज, शराब, गरीबों और जरूरतमंदों की मदद और पाखंडवाद को खत्म कर समाज में अद्भुत परिवर्तन ला रहे हैं।
1. आध्यात्मिक जागरूकता का प्रसार
संत रामपाल जी महाराज ने वेद, गीता, पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों के प्रमाण के आधार पर भक्ति का सही मार्ग दिखाया है। वे समझाते हैं कि केवल एक परमेश्वर कबीर जी की भक्ति से ही जीव को मोक्ष की प्राप्ति होती है। संत रामपाल जी ने सरल और प्रमाणित सत्संगों के माध्यम से करोड़ों लोगों को पाखंड से बाहर निकालकर सही साधना का मार्ग बताया है।
2. नशा-मुक्त और अपराध-मुक्त समाज का निर्माण
संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में उनके अनुयायी शराब, तंबाकू, मांसाहार, जुआ जैसे सभी प्रकार के नशों से दूर रहते हैं। इससे समाज में अपराध दर कम हुई है और परिवारों में शांति और सद्भाव बढ़ा है।
3. गरीबों और जरूरतमंदों की मदद
सतलोक आश्रम गरीब, अनाथ, विधवा और जरूरतमंद लोगों की मदद में हमेशा आगे रहता है। समय-समय पर गरीबों को भोजन, कपड़े और आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
4. रक्तदान और स्वास्थ्य सेवाएं
संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी नियमित रूप से रक्तदान शिविर आयोजित करते हैं। अब तक लाखों यूनिट रक्त जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त उपलब्ध कराया गया है। साथ ही, स्वास्थ्य जांच और जागरूकता शिविर भी आयोजित किए जाते हैं ताकि समाज स्वस्थ रह सके। संत जी की प्रेरणा से हजारों लोगो ने देह दान करने का संकल्प लिया है।
5. सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन
सतलोक आश्रम दहेज, भ्रूण हत्या, जातिवाद और पाखंड जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अभियान चला रहा है। संत रामपाल जी का संदेश है — “सभी मनुष्य एक परमात्मा की संतान हैं,” जिससे समाज में समानता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा मिलता है।
6. पर्यावरण संरक्षण
संत रामपाल जी महाराज अपने अनुयायियों को पेड़ लगाने, जल संरक्षण और स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके।
7. अन्नपूर्णा मुहिम – भूखमुक्त समाज की ओर कदम
संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में सतलोक आश्रम द्वारा चलाई जा रही “अन्नपूर्णा मुहिम” जरूरतमंदों के लिए एक वरदान साबित हुई है। इस मुहिम के अंतर्गत आश्रम के स्वयंसेवक रोज़ाना गरीब, बेघर और असहाय लोगों को मुफ्त, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराते हैं। महामारी, प्राकृतिक आपदा या अन्य आपातकालीन स्थिति में आश्रम ने तुरंत राहत सामग्री और भोजन की व्यवस्था की, जिससे लाखों लोगों की मदद हुई। यह सेवा बिना किसी भेदभाव के की जाती है, जो समाज में मानवीयता और करुणा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है।
8. प्राकृतिक आपदाओं और महामारी के समय में निस्वार्थ सेवा
संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में सतलोक आश्रम ने प्राकृतिक आपदाओं और महामारी के समय अद्वितीय सेवा कार्य किए हैं। चाहे बाढ़ हो, चक्रवात, भूकंप या कोविड-19 जैसी महामारी, आश्रम के स्वयंसेवक सबसे आगे रहकर राहत सामग्री, भोजन, दवाइयाँ और आश्रय की व्यवस्था करते हैं। कोविड-19 संकट के दौरान लाखों परिवारों को मुफ्त राशन, मास्क, सैनिटाइज़र और दवाइयाँ उपलब्ध कराई गईं, साथ ही मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर और बेड की सुविधा भी मुहैया कराई गई। इन सेवाओं ने न केवल हजारों जीवन बचाए, बल्कि समाज में मानवता और सेवा भावना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
संत रामपाल जी के अनुयायियों ने कहा – सत्य की हुई जीत
संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी इस फैसले को सत्य और न्याय की जीत के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और बयानों के आधार पर संत जी को गलत तरीके से फंसाया गया था, और अब हाईकोर्ट का यह निर्णय उनके तत्वज्ञान और सत्य भक्ति के मार्ग को और अधिक दृढ़ करता है।
जेल में रहते हुए भी संत रामपाल जी महाराज के सामाजिक और आध्यात्मिक कार्यों में कोई रुकावट नहीं आई, बल्कि समय के साथ उनका योगदान और व्यापक हुआ है। यह दर्शाता है कि सच्चे संत के ज्ञान और मिशन को कोई शक्ति दबा नहीं सकती। सच्चा संत स्वयं परमात्मा का स्वरूप होता है, और इतिहास भी गवाह है कि उन्हें सताना महापाप है।
अनुयायियों का विश्वास है कि संत रामपाल जी महाराज परमात्मा के अवतार हैं। उनके जीवन में हुए अनेक चमत्कार इस विश्वास को और मजबूत करते हैं, जहां विज्ञान असफल हो गया, वहां उनकी दी हुई सत्य भक्ति और ज्ञान ने असंख्य लोगों की मदद की है।
जेल में होने के बावजूद उनके 13 आश्रम सक्रिय हैं, जहां लाखों अनुयायी आकर शास्त्रानुकूल भक्ति और ज्ञान का लाभ उठाते हैं। यह जनसमूह इस बात का प्रमाण है कि संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान पूर्ण सत्य है। उनका मिशन सामाजिक बुराइयों का उन्मूलन और सच्ची भक्ति का प्रचार-प्रसार करना है, और यह फैसला उनके इस मिशन को नई गति और मजबूती प्रदान करेगा।
संत रामपाल जी महाराज है पाक पवित्र!
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा संत रामपाल जी महाराज की उम्रकैद की सजा पर रोक लगाना एक महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय है। यह निर्णय न केवल उनके निर्दोष होने को साबित करता है, बल्कि देश के लोगों के लिए भी एक बड़ा संदेश है। चिकित्सा साक्ष्यों, उनकी उम्र, और मृतका के परिवार के बयानों को आधार बनाकर कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि सजा पर गंभीर सवाल उठते हैं। अब, मुख्य अपील के निपटारे तक संत रामपाल जी महाराज की सजा निलंबित रहेगी, और उनकी रिहाई की संभावना बढ़ गई है।
जीवन के क्लेश मिटाने और मोक्ष पाने का मार्ग — संत रामपाल जी महाराज की शरण में
लाखों लोग संत रामपाल जी महाराज की शरण इसलिए लेते हैं क्योंकि वे जीवन में आने वाले दुखों और क्लेशों से मुक्त करने वाला सच्चा मार्ग दिखाते हैं। वे वेद, गीता, बाइबल और कुरान से प्रमाण देकर वास्तविकता बताते हैं कि केवल पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब की शरण में जाकर ही जीव को मोक्ष मिल सकता है।
उनके सत्संग से लोगों को यह समझ आता है कि जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सुख नहीं बल्कि आत्मा की मुक्ति है। नामदीक्षा और सही साधना के माध्यम से उनके अनुयायी नशा, हिंसा और पाप कर्मों को छोड़कर एक गरिमामय, शुद्ध और शांतिपूर्ण जीवन जीते हैं। इस साधना से मन के क्लेश मिटते हैं, परिवारों में सौहार्द बढ़ता है और जीवन में संतोष व आनंद का अनुभव होता है और अंत समय में पूर्ण मोक्ष मिलता है।
आप भी संत रामपाल जी महाराज की लिखित पवित्र पुस्तक ज्ञानगंगा पढ़ें और सतज्ञान जानकर नामदीक्षा लेकर अपना कल्याण कराएँ। अधिक जानकारी के लिए देखें –
- Website: www.jagatgururampalji.org
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- Facebook: Spiritual Leader Saint Rampal Ji
- ‘X’ handle: @SaintRampalJiM
FAQs: संत रामपाल जी को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पाया कि 2014 की घटना में मौत का कारण न्यूमोनिया था, न कि हिंसा। मेडिकल सबूतों और उम्र को देखते हुए उनकी सजा को निलंबित कर दिया गया।
नहीं, सजा पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। हाईकोर्ट ने सजा को सिर्फ निलंबित किया है, जबकि अपील पर सुनवाई अभी जारी है।
इसका मतलब है कि अदालत ने मामले की गहराई से जांच की आवश्यकता को मानते हुए उन्हें अस्थायी राहत दी है, जो सत्य की जीत को दर्शाता है।
संत रामपाल जी महाराज ने समाज में नशा मुक्ति अभियान, कन्या भ्रूण हत्या पर रोक, रक्तदान शिविर, गरीबों को मुफ्त भोजन और शिक्षा जैसी कई सेवाएँ चलाई हैं। उनका उद्देश्य समाज में समानता, शांति और सतभक्ति का प्रसार करना है, जिससे हर वर्ग के लोग लाभान्वित हो सकें।
संत रामपाल जी महाराज शास्त्र सम्मत ज्ञान देकर अपने भक्तों को मर्यादा में रखकर पूर्ण मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करते है। वर्तमान में इस धरा पर कोई भी अन्य संत यह करने में सक्षम नहीं है।