आओ जानें ईसाई धर्म को

Published on

spot_img
ईसाई धर्म एकेश्वरवादी धर्म है जो जीसस क्राइस्ट के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित है। इसके अनुयायी, जो ईसाई के रूप में जाने जाते हैं, का मानना ​​है कि यीशु “मसीह” हैं, जिनके मसीहा के रूप में आने की भविष्यवाणी हिब्रू बाइबिल में की गई थी, जिसे ईसाई धर्म में पुराना नियम कहा जाता है।
एकेश्वरवाद में विश्वास रखने वाले ईसाई भगवान के भेजे दूत को मसीहा और परमात्मा को निराकार मानते हैं? एकेश्वरवाद की परिभाषा केवल एक ही भगवान के अस्तित्व में विश्वास है जिसने दुनिया को बनाया है, जो शक्तिशाली है, दुनिया का पालनकर्ता और असली मसीहा होता है। यह बिल्कुल सत्य है की सृष्टि का रचयिता एक ही पूर्ण परमात्मा है जो राजा के समान दर्शनीय है परंतु निराकार नहीं है वह तो मनुष्य के समान दिखाई देता है।

यीशु, पूर्ण परमात्मा के पुत्र हैं

आमतौर पर ईसाई यीशु को भगवान के पुत्र के रूप में मानते हैं – जो लोगों के लिए अवतरित हुए – जो पीड़ित हुए और एक क्रॉस पर मारे गए, लेकिन मानव जाति के उद्धार के लिए एक बार फिर से जी उठे; जैसा कि बाइबल (शास्त्र) में सुसमाचार की महत्ता है, जिसका अर्थ है “अच्छी खबर”,  यीशु के जीवन और शिक्षाओं का वर्णन करते हुए मैथ्यू, मार्क, ल्यूक और जॉन के चार गॉस्पेल यहूदी ओल्ड टेस्टामेंट के साथ सुसमाचार की किताबों के रूप में विहित हैं।
बाइबिल ईसाईयों का पवित्र ग्रंथ है। बाइबिल के अलग-अलग हिस्सों को ईश्वरीय प्रेरणा का उत्पाद माना जाता है और ईसाई, यहूदी, सामरी और रास्तफ़ेरियन लोगों द्वारा भगवान और मनुष्यों के बीच संबंध का एक रिकॉर्ड है। क्रिस्चियन न्यू टेस्टामेंट प्रारंभिक ईसाइयों द्वारा लिखे गए लेखों का एक संग्रह है।
ईश्वर कौन है? वो कैेसा दिखाई देता है? क्या वह वास्तव में साकार है? क्या वह हमारी परवाह करता है? परमेश्वर और उसकी विशेषताओं के बारे में सवाल उठना सामान्य है। हमने कई बाइबल छंद एकत्र किए हैं जो आपके लिए इन सवालों के जवाब देने में हमारी मदद करेंगे! चाहे आप यीशु को मसीह और ईसाई धर्म को मानते हैं परंतु बाइबल को ठीक से नहीं समझ पाएं हैं तो आगे की जानकारी आपको एक ईश्वर को पहचानने में मदद करेगी। पता लगाने के लिए शुरुआत कर रहे हैं, शास्त्र भगवान के बारे में ज्ञान का एकमात्र सच्चा स्रोत होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को यह पता होना चाहिए कि पूर्ण परमात्मा कौन है?

आइए जानते हैं पवित्र बाइबल से

पवित्र बाइबल में भगवान का नाम कबीर है – अय्यूब 36:5 कबीर ही वह शक्तिशाली परमात्मा है।
अय्यूब 36:5 (और्थोडौक्स यहूदी बाइबल – OJB)
परमेश्वर कबीर (शक्तिशाली) है, किन्तु वह लोगों से घृणा नहीं करता है। परमेश्वर कबीर (सामर्थी) है और विवेकपूर्ण है।

पवित्र बाईबल में प्रभु मानव सदृश साकार का प्रमाण है।

‘‘पवित्र बाईबल में साकार पूर्ण परमात्मा के विषय में वर्णन‘‘ उत्पत्ति ग्रन्थ, पृष्ठ नं. 1 से 3
परमेश्वर ने छः दिन में सृष्टि रची तथा सातवें दिन विश्राम किया, प्रभु ने पाँच दिन तक अन्य रचना की, फिर छटवें दिन ईश्वर ने कहा कि हम मनुष्य को अपने ही स्वरूप में बनायेंगे। फिर परमेश्वर ने मनुष्य को अपना ही स्वरूप बनाया, नर-नारी करके उसकी सृष्टि की।

मनुष्य की परवाह करता है परमात्मा।

फिर ईश्वर ने मनुष्यों के खाने के लिए केवल फलदार वृक्ष तथा बीजदार पौधे दिए। जो हमारे भोजन के लिए हैं। छः दिन में पूरा कार्य करके परमेश्वर ऊपर तख्त पर जा विराजा अर्थात् विश्राम किया।
ईश्वर ने प्रथम आदम बनाया फिर उसकी पसली निकाल कर नारी (हव्वा) बनाई तथा दोनों को एक वाटिका में छोड़कर तख्त पर जा बैठे। फिर पृष्ठ नं. 8 पर लिखा है कि ईश्वर ने मनुष्य जाति के खाने के लिए फलदार पेड़ तथा बीजदार पौधे बनाए और वन प्राणियों के लिए घास व पौधे बनाए। भगवान ने मनुष्य को अपना प्रति रूप बनाया। इससे स्वसिद्ध है कि भगवान (अल्लाह) आकार में है और वह मनुष्य जैसा है।
इसके बाद अव्यक्त प्रभु (काल/ज्योति निरंजन) की भूल-भुलईयाँ प्रारम्भ हो गई। (उत्पत्ति ग्रन्थ पृष्ठ नं. 2 पर, अ. 1:20 – 2:5 पर)
उसके बाद इस लोक की बाग डोर ब्रह्म ने संभाल ली। इसने कसम खाई है कि ,” मैं सबके सामने कभी नहीं आऊँगा। इसलिए सभी कार्य अपने तीनों पुत्रों (ब्रह्मा, विष्णु तथा शिव) के द्वारा करवाता रहता है या स्वयं किसी के शरीर में प्रवेश करके प्रेत की तरह बोलता है या आकाशवाणी करके आदेश देता है। उत्पत्ति 18:1
 प्रेत, पितर तथा अन्य देवों (फरिश्तों) की आत्माऐं भी किसी के शरीर में प्रवेश करके अपना आदेश करती हैं। परन्तु श्रद्धालुओं को पता नहींं चलता कि यह कौन शक्ति बोल रही है।

मांस खाने का आदेश ब्रह्म (काल) ने दिया

पूर्ण परमात्मा ने माँस खाने का आदेश कभी नहीं दिया। पवित्र बाईबल उत्पत्ति विषय में सर्व प्राणियों के खाने के विषय में पूर्ण परमात्मा का प्रथम तथा अन्तिम आदेश है कि मनुष्यों के लिए फलदार वृक्ष तथा बीजदार पौधे दिए हैं जो तुम्हारे खाने के लिए हैं तथा अन्य प्राणियों को जिनमें जीवन के प्राण हैं उनके लिए छोटे-छोटे पेड़ अर्थात् घास, झाडि़याँ तथा बिना फल वाले पेड़ आदि खाने को दिए हैं। (उत्पत्ति ग्रन्थ 1:29,1:28) इसके बाद पूर्ण प्रभु का आदेश न पवित्र बाईबल में है तथा न किसी कतेब (तौरत, इंजिल, जुबुर तथा कुरान शरीफ) में है। इन कतेबों में ब्रह्म, उसके फरिश्तों तथा पित्तरों व प्रेतों का मिला-जुला आदेश रूप ज्ञान है।

क्या बाबा आदम से पहले भी सृष्टि थी ?

जब व्यक्ति यह नहीं जानते थे कि कौन कहाँ रहता है। ऐसे स्थान पर ब्रह्म ने फिर से मनुष्य आदि की सृष्टि की। हजरत आदम तथा हव्वा की उत्पत्ति ऐसे स्थान पर की जो अन्य व्यक्तियों से कटा हुआ था। काल के पुत्र ब्रह्मा के लोक से यह पुण्यात्मा (बाबा आदम) अपना कर्म संस्कार भोगने आया था। फिर शास्त्र अनुकूल साधना न मिलने के कारण पितर योनी को प्राप्त होकर पितर लोक में चला गया। बाबा आदम से पूर्व फरिश्ते थे। पवित्र बाईबल ग्रन्थ में लिखा है यदि अल्लाह का आदेश मनुष्यों को माँस न खाने का है तो बाईबल तथा कुरान शरीफ में कैसे लिखा गया ? बाबा आदम तथा अन्य नबियों को अव्यक्त अल्लाह (काल) के फरिश्ते तथा पितर आदि ने अपने आदेश दिए हैं। जो बाद में कुरान शरीफ तथा बाईबल में लिखे गए हैं।
अव्यक्त प्रभु काल ने यह सर्व वास्तविक ज्ञान छुपाया है तो पूर्ण परमात्मा का संकेत किसलिए किया ?
ज्योति निरंजन(अव्यक्त माना जाने वाला प्रभु) पूर्ण परमात्मा के डर से यह नहीं छुपा सकता कि पूर्ण परमात्मा कोई अन्य है। यह पूर्ण प्रभु की वास्तविक पूजा की विधि से अपरिचित है। इसलिए यह केवल अपनी साधना का ज्ञान ही प्रदान करता है तथा महिमा गाता है पूर्ण प्रभु की।

परमात्मा, ब्रह्म और अन्य सभी देवता साकार हैं।

“पवित्र ईसाई तथा मुसलमान धर्मों के अनुयायियों को कर्माधार से लाभ-हानि करने वाले भी (श्री ब्रह्मा, विष्णु तथा शिव) तीन ही देवता”
हजरत आदम तथा उसकी पत्नी हव्वा तथा अन्य प्राणियों व सर्व ब्रह्मण्डों की उत्पत्ति करके कुरान व बाइबल बोलने वाले प्रभु को सौंप गया। बाइबल के उत्पत्ति ग्रंथ से भी सिद्ध होता है कि परमात्मा मनुष्य जैसा है। क्योंकि प्रभु ने मनुष्य को अपने जैसा बनाया तथा सात दिन के बाद का वर्णन कुरान शरीफ व बाईबल ज्ञान दाता (काल/ज्योति निरंजन) की लीला का है। पवित्र बाईबल में लिखा है कि ‘फिर यहोवा परमेश्वर ने कहा, मनुष्य भले-बुरे का ज्ञान पाकर हम में से एक के समान हो गया है। इसलिए अब ऐसा न हो कि वह हाथ बढ़ा कर जीवन के वृक्ष का फल भी तोड़ कर खा ले और सदा जीवित रहे। परमेश्वर ने उसे अदन के उद्यान से निकाल दिया। उपरोक्त विवरण से यह भी सिद्ध होता है कि जो आदम का जो प्रभु है, ऐसे कोई और भी है तथा वह साकार है। इसीलिए तो कहा है कि मनुष्य जीवन फल को खाकर हम में से एक के समान हो गया है। क्योंकि बाईबल के उत्पत्ति ग्रन्थ में ही लिखा है कि आदम ने भले-बुरे के ज्ञान वाला फल तोड़ कर खा लिया तो उसे पता चला वह नंगा है। यहोवा परमेश्वर टहलते हुए आ गया। उसने आदम को पुकारा तू कहाँ है? तब आदम ने कहा मैं तेरी आवाज सुनकर छुप गया हूँ, क्योंकि मैं नंगा हूँ। फिर परमेश्वर ने आदम तथा उसकी पत्नी हव्वा के वस्त्र बनवाए।
विचार करें उपरोक्त विवरण स्वयं सिद्ध कर रहा है कि पूर्ण परमात्मा भी सशरीर मनुष्य जैसे आकार का है तथा अन्य प्रभु भी मनुष्य जैसे आकार के हैं, जिसे पवित्र ईसाई तथा मुसलमान धर्म निराकार मानता है तथा प्रभु एक से अधिक भी हैं।

काल अपने तीनों पुत्रों से सब काम करवाता है

काल ब्रह्म स्वयं सामने नहीं आता, उसने अपने तीनों पुत्रों (रजगुण ब्रह्मा जी, सतगुण विष्णु जी, तमगुण शिव जी) के द्वारा एक ब्रह्मण्ड का कार्य चला रखा है। हजरत आदम जी भगवान ब्रह्मा के अवतार हैं। हजरत आदम को श्री ब्रह्मा जी ने बहका कर रखा था, उसी ने उसको वहाँ से निकाला था। क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों देव हैं, हजरत ईसा के अवतार धारण करने के विषय में पवित्र बाईबल में लिखा है कि प्रभु ईश्वर ने पृथ्वी पर बढ़ रहे दुराचार के अन्त के लिए अपने पुत्र को भेजा था, क्योंकि हजरत ईसा जी भगवान विष्णु के अवतार हैं। विष्णु लोक से कोई देव आत्मा का जन्म मरियम के गर्भ से फरिश्ते (देव) द्वारा हुआ था।

‘‘पवित्र ईसाई धर्म का परिचय‘‘

विशेष :श्री मनु जी के पुत्र इक्ष्वाकु हुए तथा इसी वंश में राजा नाभीराज हुए। राजा नाभीराज के पुत्र श्री ऋषभदेव जी हुए जो पवित्र जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर माने जाते हैं। यही श्री ऋषभदेव जी का जीवात्मा ही बाबा आदम हुए। जैन धर्म की पुस्तक ‘‘आओ जैन धर्म को जानें‘‘ पृष्ठ 154 पर लिखा है।}
बाबा आदम व उनकी पत्नी हव्वा के संयोग से दो पुत्र उत्पन्न हुए। एक का नाम काईन तथा दूसरे का नाम हाबिल रखा।
आगे चलकर इसी परंपरा में ईसा मसीह जी का जन्म हुआ। इनकी पूज्य माता जी का नाम मरियम तथा पूज्य पिता जी का नाम यूसुफ था। परन्तु कुँवारी मरियम को गर्भ एक देवता से रहा था। इस पर यूसुफ ने आपत्ति की तथा मरियम को त्यागना चाहा तो स्वपन में (फरिश्ते) देवदूत ने ऐसा न करने को कहा तथा यूसुफ ने डर के मारे मरियम का त्याग न करके उसके साथ पति-पत्नी रूप में रहे। देवता से गर्भवती हुई मरियम ने हजरत ईसा को जन्म दिया। हजरत ईसा से पवित्र ईसाई धर्म की स्थापना हुई। ईसा मसीह के नियमों पर चलने वाले भक्त आत्मा ईसाई कहलाए तथा पवित्र ईसाई धर्म का उत्थान हुआ। प्रमाण के लिए कुरान शरीफ में सूरः मर्यम-19 में तथा पवित्र बाईबल में मती रचित सुसमाचार मती=1:25 पृष्ठ नं. 1-2 पर। विस्तार में जानने के लिए पढ़ें पुस्तक ज्ञान गंगा।

हज़रत ईसा ने समझाया था पूर्ण परमात्मा का मार्ग

हजरत ईसा जी को भी पूर्ण परमात्मा सत्यलोक से आकर मिले तथा एक परमेश्वर का मार्ग समझाया। इसके बाद ईसा जी एक ईश्वर की भक्ति समझाने लगे। लोगों ने बहुत विरोध किया। फिर भी वे अपने मार्ग से विचलित नहीं हुए। परन्तु बीच-बीच में ब्रह्म(काल/ज्योति निरंजन) के फरिश्ते हजरत ईसा जी को विचलित करते रहे तथा वास्तविक ज्ञान को दूर रखा। हजरत यीशु का जन्म तथा मृत्यु व जो जो भी चमत्कार किए वे पहले ब्रह्म (ज्योति निरंजन) के द्वारा निर्धारित थे। यह प्रमाण पवित्र बाईबल में यूहन्ना ग्रन्थ अध्याय 9 श्लोक 1 से 34 में है कि एक व्यक्ति जन्म से अंधा था। वह हजरत यीशु मसीह के पास आया तथा हजरत यीशु जी के आशीर्वाद से स्वस्थ हो गया उसे आँखों से दिखाई देने लगा। शिष्यों ने पूछा हे मसीह जी! इस व्यक्ति ने या इसके माता-पिता ने कौन-सा ऐसा पाप किया था जिस कारण से यह अंधा हुआ तथा माता-पिता को अंधा पुत्र प्राप्त हुआ। यीशु जी ने कहा कि इसका कोई पाप नहीं है जिसके कारण यह अंधा हुआ है तथा न ही इसके माता-पिता का कोई पाप है जिस कारण उन्हें अंधा पुत्र प्राप्त हुआ। यह तो इसलिए हुआ है कि प्रभु की महिमा प्रकट करनी है। भावार्थ यह है कि यदि पाप होता तो हजरत यीशु आँखे ठीक नहीं कर सकते थे। तथा काल रूपी ब्रह्म ने यीशु जी की महिमा बनाने के लिए अपनी शक्ति से किसी प्रेत द्वारा अन्धा करा रखा था। जो यीशु जी के पास आते ही निकल गया और व्यक्ति को दिखाई देने लगा था। यह सर्व काल ज्योति निरंजन (ब्रह्म) का सुनियोजित जाल है। जिस कारण उसके द्वारा भेजे अवतारों की महिमा बन जाए तथा सर्व आस पास के प्राणी उस पर आसक्त होकर उसके द्वारा बताई ब्रह्म साधना पर अटल हो जाऐं। जब परमेश्वर का संदेशवाहक आए तो कोई विश्वास न करें। जैसे हजरत ईसा मसीह के चमत्कारों में लिखा है कि एक प्रेतात्मा से पीडि़त व्यक्ति को ठीक कर दिया। यह काल स्वयं ही किसी प्रेत तथा पित्तर को प्रेरित करके किसी के शरीर में प्रवेश करवा देता है। फिर उसको किसी के माध्यम से अपने भेजे नबी के पास भेजकर किसी फरिश्ते को नबी के शरीर में प्रवेश करके उसके द्वारा प्रेत को भगा देता है। उसके अवतार (मसीह/नबी) की महिमा बन जाती है। या कोई साधक पहले का भक्ति युक्त होता है। उससे भी ऐसे चमत्कार उसी की कमाई से करवा देता है तथा उस साधक की महिमा करवा कर हजारों को उसका अनुयाई बनवा कर काल जाल में फंसा देता है तथा उस पूर्व भक्ति कमाई युक्त सन्त साधक की कमाई को समाप्त करवा कर उस सन्त को नरक में डाल देता है।
इसी तरह का उदाहरण पवित्र बाईबल ‘शमूएल‘ नामक अध्याय 16:14-23 में है कि शाऊल नामक व्यक्ति को एक प्रेत दुःखी करता था। उसके लिए बालक दाऊद को बुलाया जिससे उसको कुछ राहत मिलती थी। क्योंकि हजरत दाऊद भी ज्योति निरंजन का भेजा हुआ पूर्व शक्ति युक्त साधक पूर्व कमाई वाला था।

हजरत ईसा मसीह की मृत्यु पूर्व निर्धारित थी

स्वयं ईसा जी ने कहा कि मेरी मृत्यु निकट है तथा तुम (मेरे बारह शिष्यों) में से ही एक मुझे विरोधियों को पकड़ाएगा। उसी रात्रि में सर्व शिष्यों सहित ईसा जी एक पर्वत पर चले गए। वहाँ उनका दिल घबराने लगा। अपने शिष्यों से कहा कि आप जागते रहना। मेरा दिल घबरा रहा है। मेरा जी निकला जा रहा है। तुम भी परमात्मा से मेरे जीवन की रक्षा के लिए, प्रार्थना करो, ऐसा कह कर हजरत यीशु जी ने कुछ दूरी पर जाकर स्वयं हजरत ईसा जी ने मुंह के बल पृथ्वी पर गिरकर प्रार्थना की (38,39), वापिस चेलों के पास लौटे तो वे सो रहे थे। यीशु ने कहा क्या तुम मेरे साथ एक पल भी नहीं जाग सकते। जागते रहो, प्रार्थना करते रहो, ताकि तुम परीक्षा में असफल न हो जाओ। मेरी आत्मा तो मरने को तैयार है, परन्तु शरीर दुर्बल है। इसी प्रकार यीशु मसीह ने तीन बार कुछ दूर पर जाकर प्रार्थना की तथा फिर वापिस आए तो सर्व शिष्यो को तीनों बार सोते पाया। ईसा मसीह के प्राण जाने को थे, परन्तु चेला राम मस्ती में सोए पड़े हैं। गुरु जी की आपत्ति का कोई गम नहीं।
तीसरी बार भी सोए पाया तब कहा मेरा समय आ गया है, तुम अब भी सोए पड़े हो। इतने में तलवार तथा लाठी लेकर बहुत बड़ी भीड़ आई तथा उनके साथ एक ईसा मसीह का खास शिष्य था, जिसने तीस रूपये के लालच में अपने गुरु जी को विरोधियों के हवाले कर दिया।(मत्ती 26:24-55 पृष्ठ 42-44)
उपरोक्त विवरण से स्पष्ट है कि पुण्यात्मा ईसा मसीह जी को केवल अपना पूर्व निर्धारित जीवन काल ही प्राप्त हुआ।

ईसा मसीह की मृत्यु

एक पर्वत पर ईसा जी 30 वर्ष की आयु में प्रभु से प्राण रक्षा के लिए घबराए हुए बार-बार प्रार्थना कर रहे थे। उसी समय उन्हीं का एक शिष्य 30 रूपये के लालच में अपने गुरु जी के विरोधियों को साथ लेकर उसी पर्वत पर आया वे तलवार तथा लाठियां लिए हुए थे। विरोधियों की भीड़ ने उस गुप्त स्थान से ईसा जी को पकड़ा जहाँ वह छुप कर रात्रि बिताया करता था।
क्योंकि हजरत मूसा जी के अनुयाई यहूदी ईसा जी के जानी दुश्मन हो गए थे। उस समय के महन्तों तथा संतों व मन्दिरों के पुजारियों को डर हो गया था कि यदि हमारे अनुयाई हजरत ईसा मसीह के पास चले जायेंगे तो हमारी पूजा का धन कम हो जाएगा। ईसा मसीह जी को पकड़ कर राज्यपाल के पास ले गए तथा कहा कि यह पाखण्डी है। झूठा नबी बन कर दुनिया को ठगता है। इसने बहुतों के घर उजाड़ दिए हैं। इसे रौंद(क्रस) दिया जाए। राज्यपाल ने पहले मना किया कि संत, साधु को दुःखी नहीं करते, पाप लगता है। परन्तु भीड़ अधिक थी, नारे लगाने लगे कि इसे रौंद दो। तब राज्यपाल ने कहा जैसे उचित समझो करो। तीस वर्ष की आयु में ईसा जी को दीवार के साथ लगे अंग्रेजी के अक्षर टी के आकार की लकड़ी के साथ खड़ा करके दोनों हाथों की हथेलियों में लोहे की मोटी कील (मेख) गाड़ दी। ईसा जी की मृत्यु असहनीय पीड़ा से हो गई। मृत्यु से पहले हजरत ईसा जी ने उच्चे स्वर में कहा – हे मेरे प्रभु ! आपने मुझे क्यों त्याग दिया ? कुछ दिनों के बाद हजरत ईसा जी फिर दिखाई दिए तथा फिर कुछ स्थानों पर दर्शन व प्रवचन करके अन्तर्ध्यान हो गए। (पवित्र बाईबल मती 27 तथा 28/20 पृष्ठ 45 से 48)
उपरोक्त विवरण से स्पष्ट है कि यह ब्रह्म (काल/ज्योति निरंजन) अपने अवतार को भी समय पर धोखा दे जाता है। पूर्ण परमात्मा ही भक्ति की आस्था बनाए रखने के लिए स्वयं प्रकट होता है। पूर्ण परमात्मा ने ही ईसा जी की मृत्यु के पश्चात् ईसा जी का रूप धारण करके प्रकट होकर ईसाईयों के विश्वास को प्रभु भक्ति पर दृढ़ रखा, नहीं तो ईसा जी के पूर्व चमत्कारों को देखते हुए ईसा जी का अंत देखकर कोई भी व्यक्ति भक्ति साधना नहीं करता, नास्तिक हो जाते। (प्रमाण पवित्र बाइबल में यूहन्ना ग्रन्थ अध्याय 16 श्लोक 4 से 15) ब्रह्म(काल) यही चाहता है। काल (ब्रह्म) पुण्यात्माओं को अपना अवतार (रसूल) बना कर भेजता है। फिर चमत्कारों द्वारा उसको भक्ति कमाई रहित करवा देता है। उसी में कुछ फरिश्तों (देवताओं) को भी प्रवेश करके कुछ चमत्कार फरिश्तों द्वारा उनकी पूर्व भक्ति धन से करवाता है। उनको भी शक्ति हीन कर देता है। काल के भेजे अवतार अन्त में वे किसी तरह कष्ट प्राप्त करके मृत्यु को प्राप्त हों। इस प्रकार ब्रह्म (काल/ज्योति निरंजन) के द्वारा भेजे नबियों (अवतारों) की महिमा हो जाती है। अनजान साधक उनसे प्रभावित होकर उसी साधना पर अडिग हो जाते हैं। जब पूर्ण परमात्मा या उनका संदेशवाहक वास्तविक भक्ति ज्ञान व साधना समझाने की कोशिश करता है तो कोई नहीं सुनता तथा अविश्वास व्यक्त करते हैं। यह जाल काल प्रभु का है। जिसे केवल पूर्ण परमात्मा ही बताता है तथा सत्य भक्ति प्रदान करके आजीवन साधक की रक्षा करता है। सत्य भक्ति करके साधक पूर्ण मोक्ष को प्राप्त करता है।
जैसा कि ईसाई धर्म में आस्था रखने वालों का मानना ​​है कि विश्व और मानवता के पुनरुत्थान में हुई भविष्यवाणियों को पूरा करने के लिए यीशु मसीह वापस आएंगे। हम आपको बताना चाहेंगे कि यीशु (जीसस क्राइस्ट) के पिता पूर्ण ब्रह्म परमात्मा इस समय संत के अवतार में मानव कल्याण और परमात्मा प्रेमी आत्माओं से पुनर्मिलन के लिए अवतरित हो चुके हैं।
बाईबल की विस्तृत और सरलतम जानकारी के लिए देखें हमारी website

reality of christianity

Latest articles

संत रामपाल जी महाराज ने गांव पेटवाड़ में किसान मजदूर बचाओ अभियान चरण 2 के तहत राहत सामग्री पहुंचाई

हरियाणा राज्य के हिसार/हाँसी जिले के नारनौंद तहसील के ग्राम पंचायत पेटवाड़ में पिछले...

Gaj Laxmi Vrat 2026: क्या गजलक्ष्मी व्रत करने से लाभ तथा पूर्ण मोक्ष संभव है?

Gaj Laxmi Vrat 2026 (गजलक्ष्मी व्रत): Gaj Laxmi Vrat 2026 (गजलक्ष्मी व्रत) को लेकर...

International Day of Sign Languages 2026: Worship of Supreme God Kabir – The True Sign for Humanity’s Salvation

International Day of Sign Languages is observed annually so as to raise awareness about the hardships a physically challenged individual has to go through. Thus making everyone aware about the need for the education about sign languages to the needy as early as possible into their lives. While Supreme God Kabir is the most capable; giving us anything through His method of worship whether it is aiding a deaf, dumb or blind.

गिरावड़ में पेयजल संकट दूर करने की दिशा में कदम, संत रामपाल जी महाराज द्वारा दो 10 एचपी ट्यूबवेल सेट सौंपे गए

हरियाणा के रोहतक जिले के गांव गिरावड़ में पेयजल की समस्या के स्थायी समाधान...
spot_img

More like this

संत रामपाल जी महाराज ने गांव पेटवाड़ में किसान मजदूर बचाओ अभियान चरण 2 के तहत राहत सामग्री पहुंचाई

हरियाणा राज्य के हिसार/हाँसी जिले के नारनौंद तहसील के ग्राम पंचायत पेटवाड़ में पिछले...

Gaj Laxmi Vrat 2026: क्या गजलक्ष्मी व्रत करने से लाभ तथा पूर्ण मोक्ष संभव है?

Gaj Laxmi Vrat 2026 (गजलक्ष्मी व्रत): Gaj Laxmi Vrat 2026 (गजलक्ष्मी व्रत) को लेकर...

International Day of Sign Languages 2026: Worship of Supreme God Kabir – The True Sign for Humanity’s Salvation

International Day of Sign Languages is observed annually so as to raise awareness about the hardships a physically challenged individual has to go through. Thus making everyone aware about the need for the education about sign languages to the needy as early as possible into their lives. While Supreme God Kabir is the most capable; giving us anything through His method of worship whether it is aiding a deaf, dumb or blind.