हरियाणा के हिसार जिले में स्थित रावलवास खुर्द गांव की यह गाथा केवल जलभराव से मुक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक अटूट विश्वास और दैवीय चमत्कार का जीवंत प्रमाण है। महीनों से गांव की सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि और रिहायशी इलाके 6 फीट गहरे पानी में समाए हुए थे। किसानों की मेहनत आंखों के सामने सड़ रही थी और बिजाई का समय निकला जा रहा था।
जब प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह विफल हो गया और गांव के 300 लोग खाली हाथ लौटे, तब संत रामपाल जी महाराज ने इस गांव को विनाश से उबारा। यह लेख विस्तार से बताता है कि कैसे एक पूर्ण संत की दया ने रावलवास खुर्द की किस्मत बदल दी।
गांव की वर्तमान स्थिति
बाढ़ की विभीषिका ने रावलवास खुर्द को एक टापू में बदल दिया था। लगभग 500 एकड़ से अधिक कृषि भूमि जलमग्न थी और कई घरों की नींव हिल चुकी थी। खेतों में 5 से 6 फीट तक पानी खड़ा था, जिससे खरीफ की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई थी। ग्रामीणों ने बताया कि जहां कभी फसलें लहलहाती थीं, वहां नाव चलने जैसे हालात बन गए थे।
पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया था और किसानों के मन में अगली फसल (गेहूं) की बिजाई को लेकर भारी निराशा थी। सरकारी दफ्तरों के अनगिनत चक्कर काटने के बावजूद जब कोई समाधान नहीं निकला, तो ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया।
ग्रामीणों की मार्मिक मांग
जब हर मानवीय प्रयास विफल रहा, तब गांव के केवल 10 व्यक्तियों ने एक अंतिम उम्मीद के साथ संत रामपाल जी महाराज के ट्रस्ट कार्यालय में अपनी अर्जी लगाई। उनकी मांगें निम्नलिखित थीं:
- भारी मात्रा में जल निकासी के लिए शक्तिशाली मोटरें
- खेतों से दूर पानी छोड़ने के लिए लंबी पाइपलाइन
- स्टार्टर, केबल और अन्य विद्युत उपकरण
यह प्रार्थना जब संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची, तो बिना किसी कागजी देरी के तत्काल सहायता का आदेश जारी कर दिया गया।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सहायता
मात्र 48 घंटों के भीतर, संत रामपाल जी महाराज की विशेष कृपा से राहत का एक विशाल काफिला रावलवास खुर्द पहुंचा। यह सहायता न केवल त्वरित थी बल्कि इसकी मात्रा ने पूरे क्षेत्र को अचंभित कर दिया। संत जी द्वारा प्रदान की गई सामग्री निम्नलिखित है:

- 21,000 फीट (लगभग 6.5 किलोमीटर) लंबी 8-इंच की हाई-प्रेशर पाइपलाइन
- 15 HP की तीन शक्तिशाली मोटरें
- विद्युत स्टार्टर, केबल, जॉइंट और फिटिंग्स का पूरा सेट
यह पूरी सहायता निःशुल्क प्रदान की गई और इसे गांव की स्थायी धरोहर के रूप में पंचायत को सौंपा गया। संत रामपाल जी महाराज ने सुनिश्चित किया कि किसानों को एक कील तक बाजार से न खरीदनी पड़े।
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रावलवास खुर्द में बिजाई का चमत्कार
राहत सामग्री पहुंचने के बाद, शक्तिशाली मोटरों ने दिन-रात कार्य किया और देखते ही देखते 5-6 फीट पानी को गांव की सीमाओं से बाहर खदेड़ दिया। आज रावलवास खुर्द की 100% भूमि सूख चुकी है और वहां गेहूं की बिजाई का कार्य सफलतापूर्वक शुरू हो गया है। जहां कुछ समय पहले केवल जल प्रलय दिखाई देता था, वहां अब ट्रैक्टरों की गूंज सुनाई दे रही है। ग्रामीणों ने इन पाइपों को हमेशा के लिए जमीन के नीचे दबा दिया है ताकि भविष्य में ऐसी विपदा कभी न आए।
ग्रामीणों की आवाज़
गांव के सरपंच और किसानों ने अपनी भावनाओं को साझा करते हुए संत रामपाल जी महाराज का आभार व्यक्त किया:
- एक ग्रामवासी: “प्रशासन के पास 300 लोग गए और व्यवस्था में हमें कुछ नहीं मिला, लेकिन मात्र हमारे 10 लोग संत रामपाल जी महाराज के पास गए और जो मांगा वो तुरंत मिल गया।”
- “मैं तो यह मान के चलता हूं कि उनके शिष्य नहीं आए, खुद गुरु जी महाराज (भगवान) इस गांव में आए हैं।”
- किसान हनुमान: “महाराज जी हमारे लिए भगवान के रूप में आए। 5-6 फीट पानी एक महीने में गायब हो गया, जो हमारे लिए नामुमकिन था।”
- एक बुजुर्ग ग्रामीण: “जो काम सरकार नहीं कर पाई, वह संत रामपाल जी ने कर दिखाया। अब हम हर दिवाली उनके नाम का दीपक जलाएंगे।”
विशेष घटना: दीपावली जैसा स्वागत
जब राहत सामग्री से भरे ट्रक गांव पहुंचे, तो रावलवास खुर्द में उत्सव जैसा माहौल था। युवाओं और बुजुर्गों ने ट्रैक्टरों का एक विशाल काफिला बनाकर सामग्री का अभिनंदन किया। ग्रामीणों का कहना था कि यह मदद किसी राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि मानवता के लिए थी। इस उपकार के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए ग्रामीणों ने संकल्प लिया है कि जिस प्रकार भगवान राम के वनवास से लौटने पर अयोध्या में घी के दीये जले थे, वैसे ही अब रावलवास खुर्द में हर साल दिवाली पर एक दीपक संत रामपाल जी महाराज के नाम का जलेगा।
जवाबदेही और पारदर्शिता
संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम अपनी पारदर्शिता के लिए जानी जाती है। इस राहत कार्य में भी जवाबदेही सुनिश्चित की गई:
- जल निकासी से पहले और बाद के ड्रोन फुटेज लिए गए।
- सामग्री का उपयोग सामूहिक रूप से करने के निर्देश दिए गए।
- यह सुनिश्चित किया गया कि दान का एक-एक पैसा सीधे पीड़ित किसान तक पहुंचे।
निष्कर्ष: विश्व उद्धारक संत रामपाल जी महाराज
आज रावलवास खुर्द की हरियाली इस बात की गवाह है कि जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ही वर्तमान में एकमात्र ‘किसान मसीहा’ और ‘विश्व उद्धारक’ हैं। जहां सरकारें केवल वादे और कागजी प्रक्रियाएं करती हैं, वहीं संत जी अपने दिव्य मार्गदर्शन से धरातल पर परिवर्तन ला रहे हैं। वे कबीर परमेश्वर के एकमात्र प्रतिनिधि हैं जो मानवता की सेवा को ही परम धर्म मानते हैं। उनकी यह निस्वार्थ सेवा दर्शाती है कि पूर्ण संत के संरक्षण में ‘असंभव’ भी ‘संभव’ हो जाता है।
आप भी उस पूर्ण परमात्मा की शरण ग्रहण करें और संत रामपाल जी महाराज के आध्यात्मिक ज्ञान को समझने के लिए यूट्यूब चैनल ‘Sant Rampal Ji Maharaj’ अवश्य देखें।



