हरियाणा के भिवानी जिले की बवानी खेड़ा तहसील का गाँव रतेरा पिछले कई सालों से एक अभिशाप झेल रहा था। यह अभिशाप था, बाढ़ और जलभराव। गाँव वालों के लिए बरसात का मौसम खुशहाली नहीं, बल्कि बर्बादी लेकर आता था। 2018 से लगातार यहाँ घग्घर ड्रेन के ओवरफ्लो होने और जल स्तर बढ़ने के कारण खेतों में 4-5 फीट पानी जमा हो जाता था। नतीजा? खरीफ की फसल पूरी तरह नष्ट। किसान कर्ज़ में डूब रहे थे और प्रशासन कुंभकरण की नींद सो रहा था।
प्रशासन की नाकामी और किसानों का दर्द
गाँव के सरपंच राजेश और युवा साथी मंजीत चौहान ने बताया कि उन्होंने ऐसा कोई दरवाज़ा नहीं छोड़ा जहाँ दस्तक न दी हो। जेई से लेकर एसडीएम और विधायकों तक, सबके चक्कर काटे। अधिकारी आते, मुआयना करते और चले जाते। सरकार की तरफ से मुआवजे़ के नाम पर जो 6000 रुपये मिलते थे, वो किसानों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा था। मंजीत ने बताया, “हम रात-रात भर जागकर पहरा देते थे कि कहीं पानी गाँव में न घुस जाए, लेकिन हमारे सारे प्रयास नाकाफी थे। हम थक चुके थे।”
संत रामपाल जी के दरबार में आखिरी उम्मीद
जब चारों ओर अंधेरा था, तब रतेरा वासियों को एक रोशनी दिखाई दी। उन्होंने देखा कि पड़ोसी गाँवों, सीपर और रोहनात, में जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने बाढ़ से मुक्ति दिला दी है। इसी विश्वास के साथ, रतेरा की पंचायत ने बरवाला स्थित सतलोक आश्रम ऑफिस में अर्जी लगाई। उन्होंने अपनी व्यथा सुनाई कि हमारे खेत डूबे हुए हैं और हमारे पास पानी निकालने का कोई साधन नहीं है।
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ऐतिहासिक मदद: घर बैठे लाखों का सामान

अर्जी देने के कुछ ही दिनों के भीतर, रतेरा गाँव में एक विशाल काफिला दाखिल हुआ। यह नज़ारा देखकर गाँव वाले दंग रह गए। संत रामपाल जी महाराज ने न केवल उनकी सुनी, बल्कि उम्मीद से कहीं ज़्यादा दिया:
- 11,000 फीट पाइप: 8 इंच की पाइपलाइन का एक विशाल नेटवर्क, ताकि पानी को गाँव से बहुत दूर निकाला जा सके।
- दो विशाल मोटरें: 15-15 हॉर्स पावर की क्रॉम्पटन (Crompton) कंपनी की ब्रांड न्यू मोटरें।
- पूरा साजो-सामान: मदद सिर्फ बड़ी चीजों तक सीमित नहीं थी। स्टार्टर, बैंड, फुट वॉल्व, स्टील के नट-बोल्ट, रस्सा, चाबी-पाना और यहाँ तक कि पाइप जोड़ने के लिए फेविकोल भी साथ भेजा गया।
- शून्य खर्च: सरपंच जी ने गदगद होकर कहा, “हमारा एक रुपया तो छोड़ो, अठन्नी भी नहीं लगी। सब कुछ हमारे घर तक पहुंचा दिया गया।”
“अन्नपूर्णा मुहिम”: कलयुग में सतयुग का आगाज
यह सेवा संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ का हिस्सा है। सेवादारों ने बताया कि गुरुजी का संकल्प है कि कोई भी व्यक्ति भूख से न मरे और किसी किसान को आत्महत्या न करनी पड़े। जहाँ आज के दौर में धर्मगुरु और कथावाचक लाखों रुपए दक्षिणा लेते हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज, समाज का पैसा, समाज की सेवा में ही लगा रहे हैं।
युवा मंजीत चौहान ने एक दिल छू लेने वाली बात कही: “देश के प्रधानमंत्री को भी शायद एक गाँव की इतनी चिंता नहीं होगी, जितनी संत रामपाल जी महाराज ने जताई है। उनका संदेश आया है कि सामान चाहे कितना भी ले लो, लेकिन फसल की बिजाई होनी चाहिए। यह फिक्र केवल एक रक्षक ही कर सकता है।”
ग्रामीणों की भावनाएं: “साक्षात् भगवान का रूप”
गाँव में खुशी का माहौल था, हालांकि एक परिवार में गमी (निधन) होने के कारण ढोल-नगाड़े नहीं बजाए जा सके, लेकिन दिलों में कृतज्ञता के ढोल बज रहे थे।
- एक बुजुर्ग किसान ने कहा: “भगवान कभी खुद चलकर नहीं आते, वो अपने रूप भेजते हैं। हमारे लिए तो संत रामपाल जी महाराज ही भगवान हैं जिन्होंने हमें बचा लिया।”
- सरपंच राजेश: “हम इस एहसान को कभी नहीं भूल सकते। यह मदद परमानेंट है। अब यह सामान गाँव की संपत्ति है और भविष्य में भी काम आएगा।”
संकल्प और अनुशासन
सेवादारों ने पंचायत को एक निवेदन पत्र सौंपा, जिसमें लिखा था कि इस सामग्री का उपयोग पारदर्शिता से हो और जल्द से जल्द पानी निकाला जाए। पूरी पंचायत ने इस पत्र पर हस्ताक्षर किए और वादा किया कि वे दिन-रात एक करके पानी निकालेंगे और लहलहाती हुई फसल की वीडियो बनाकर गुरुजी के चरणों में भेजेंगे।
मानवता की जीत और एक नई सुबह
रतेरा गाँव की कहानी यह साबित करती है कि जब मानवीय व्यवस्थाएं फेल हो जाती हैं, तब ईश्वरीय सत्ता ही सहारा बनती है। संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजे गए ये 11,000 फीट पाइप केवल प्लास्टिक के टुकड़े नहीं, बल्कि वो जीवनरेखाएं हैं जिन्होंने रतेरा के किसानों को फिर से जीने की वजह दी है। आज गाँव में मोटरें चल रही हैं, पानी घट रहा है और उम्मीदें बढ़ रही हैं। रतेरा का हर नागरिक आज नतमस्तक होकर कह रहा है, धन्य हैं संत रामपाल जी महाराज!



