भिवानी के पुर गांव में बाढ़ से तबाह किसानों के लिए जीवनदान बनी संत रामपाल जी महाराज की राहत सेवा

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Last Updated on 1 March 2026 IST: हरियाणा के भिवानी जिले का पुर गांव बीते दिनों ऐसी प्राकृतिक आपदा से गुजरा, जिसने किसानों की सालभर की मेहनत को मिनटों में मिट्टी में मिला दिया। बाढ़ भयंकर तबाही लेकर आई थी। खेत, रास्ते, तालाब सब कुछ पानी में डूब चुका था। ऐसे संकट की घड़ी में जिस मदद की उम्मीद ग्रामीणों ने नहीं की थी, वही आशा बनकर गांव पहुंची संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई सुपरफास्ट बाढ़ राहत सेवा।

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संत रामपाल जी महाराज जी ने भेजी तीसरी बार मदद 

भिवानी ज़िले की भवानी खेड़ा तहसील का पुर गांव, आज भी कीचड़, ठहरे पानी और डूबे खेतों के बीच सांस ले रहा है। यहां की गलियों में चलते हुए पैरों के नीचे सिर्फ़ मिट्टी नहीं, किसानों की महीनों की चिंता चरमराती सुनाई देती है। दो बार मदद आ चुकी थी, फिर भी पानी नहीं उतरा; खेत सूखे नहीं, दिल सूखने लगे थे।

सरपंच और गांव वाले तीसरी बार मांगने में हिचकिचाए, कहीं भरोसा भारी न पड़ जाए। लेकिन जब वे संत रामपाल जी महाराज के पास पहुंचे, तो पंद्रह मिनट में बात तय हो गई। तीसरी बार राहत आई, 17,608 फीट 8-इंची पाइप और 20 एचपी की मोटर। कुल मिलाकर गांव को अब तक करीब 37,000 फीट (लगभग 11 किलोमीटर) पाइप और चार बड़ी मोटरें मिल चुकी हैं। गांव के बुज़ुर्ग कहते हैं, संत रामपाल जी महाराज जी ने करोड़ों की मदद की है।

लेकिन यहां आंकड़ों से ज़्यादा मायने उस पल के हैं, जब ट्रकों से पाइप उतरे और लोगों की आंखों में पहली बार उम्मीद चमकी—अब पानी निकलेगा, अब खेत सांस लेंगे।

पानी उतरेगा तो फसल बचेगी, फसल बचेगी तो ज़िंदगी

सुबह के वक्त मंगलाचरण के बाद जब काफ़िला गांव में दाख़िल हुआ, तो यह कोई प्रचार नहीं था। यह भरोसे की वापसी थी। किसान बताते हैं, “पहली-दूसरी मदद से कुछ राहत मिली, पर समस्या बड़ी थी।” इस तीसरी खेप ने स्थायी रास्ता खोला, अंडरग्राउंड पाइप, ताक़तवर मोटरें, ताकि अगली बारिश में भी पानी रुके नहीं। 77 साल के एक बुज़ुर्ग ने कांपती आवाज़ में कहा, “ज़िंदगी में बहुत देख लिया, पर ऐसा काम नहीं देखा।”

गांव ने संकल्प लिया है कि पाइप दबेंगे, मोटरें चलेंगी और समय पर बुवाई होगी। यहां सेवा का ज़िक्र सम्मान से होता है, इसलिए कि यह काम काग़ज़ों में नहीं, खेतों में दिख रहा है। पुर गांव की यह कहानी पाइपों की गिनती नहीं, उस भरोसे की है जो तीसरी बार भी टूटा नहीं—और उस उम्मीद की, जो कहती है: जब खेत बचेगा, तभी घर जलेगा; जब घर जलेगा, तभी गांव जिएगा।

1500 एकड़ जमीन महीनों तक जलमग्न, किसान बेबस

भिवानी जिले के पुर गांव में 1500 एकड़ से अधिक भूमि 5 से 6 फुट तक पानी में डूबी रही। धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी और सबसे बड़ा संकट यह था कि गेहूं की अगली बुआई भी संभव नहीं दिखाई दे रही थी। ग्रामीणों ने प्रशासन के सभी द्वार खटखटाए, डीसी, एसडीएम से लेकर स्थानीय प्रतिनिधियों तक लेकिन समाधान न मिल सका। आख़िरकार ग्राम पंचायत ने अपनी अंतिम उम्मीद लेकर संत रामपाल जी महाराज की शरण में जाने का निर्णय लिया।

ग्राम पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज को सौंपी प्रार्थना

जब प्रशासन से निराश हुए तो गांव के सरपंच, नंबरदार और ग्रामीणों के एक प्रतिनिधि मंडल ने बरवाला स्थित संत रामपाल जी महाराज के ट्रस्ट ऑफिस पहुंचकर एक प्रार्थना-पत्र सौंपा।

इस पत्र में गांव का पानी निकालने के लिए 15,000 फुट पाइप और दो 15 हॉर्स पावर की मोटरें उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। किसी को विश्वास नहीं था कि इतनी जल्दी कार्रवाई होगी। लेकिन कुछ ही दिनों में वह चमत्कार सामने था, जिसकी गांव वालों ने केवल कल्पना नहीं की थी।

कुछ ही दिनों में गाड़ियों का विशाल काफिला पहुंचा पुर गांव

अर्जी के तुरंत बाद एक बड़ा राहत काफिला पुर गांव पहुंचा। गाड़ियों में सिर्फ पाइप या मोटरें ही नहीं थीं, बल्कि किसानों के लिए एक नई उम्मीद थी।

गांव को संत रामपाल जी महाराज जी ने दिया:

  • 15,000 फुट 8 इंची पाइप
  • दो बड़ी 15 HP की मोटरें
  • स्टार्टर
  • केबल
  • फेविकॉल
  • नट-बोल्ट
  • तथा मोटरों को चलाने के लिए हर छोटा-बड़ा उपकरण

राहत सामग्री का यह पैकेज इतना संपूर्ण था कि ग्रामीणों को किसी अतिरिक्त व्यवस्था की आवश्यकता न पड़े और सबसे बड़ी बात यह स्थायी सेवा थी।

300 से अधिक गांवों में सेवा, लोक दिखावे से दूर ज़मीन पर काम

संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट सिद्धांत है, “सेवा दिखावे के लिए नहीं, जनहित के लिए होती है।” अब तक बाढ़ प्रभावित 300 से अधिक गांवों में राहत सेवाएं पहुंचाई जा चुकी हैं और यह मुहिम लगातार जारी है। संत रामपाल जी महराज जी का सेवादारों को  आदेश है कि जहां भी जनता को वास्तविक आवश्यकता है, वहां तत्काल सेवा पहुंचाई जाए।

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गांव में उमड़ी भीड़, सरपंच और ग्रामीणों ने जताया आभार

राहत सामग्री गांव में पहुंचते ही ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। गांव के सरपंच ने कहा: “हमने सरकार से लेकर हर जगह कोशिश की, लेकिन नतीजा नहीं निकला। महाराज जी ने तुरंत हमारी पूरी मांग पूरी करके गांव की जान बचा ली।” गांव के बुजुर्गों ने कहा कि यह राहत उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

गुरुजी की तरफ से सख्त लेकिन सार्थक निवेदन ‘पानी जरूर निकालें’

सेवा दल द्वारा एक महत्वपूर्ण निवेदन पत्र पढ़ा गया, जिसमें कहा गया कि राहत सामग्री या संसाधन की जो भी आवश्यकता हो वो ले सकते हैं लेकिन यदि राहत सामग्री के बावजूद गांव की फसल की बिजाई नहीं होती, या पानी निर्धारित समय पर नहीं निकलता, तो भविष्य में गांव को किसी भी आपदा में संत रामपाल जी महाराज की ओर से सहायता नहीं मिलेगी।

आपदा किसी भी समय आ सकती है ऐसे में सरकार जो कुछ कर सकती है करती है लेकिन वह पर्याप्त नहीं होता। ऐसे में धार्मिक संस्थाओं को आगे आना चाहिए इससे सरकार पर पड़ने वाला बोझ कम होगा। वाक़ई जहाँ धर्मगुरु एक एक करोड़ रुपये लेकर कथाएँ बांचते हैं वहीं संत रामपाल जी महाराज जी ने करोड़ों रुपए इतने गाँवों की मदद में लगा दिए हैं।

पत्र में यह भी कहा गया कि जो सामग्री दी गई है वह स्थाई उपयोग के लिए है। पाइपों को जमीन में दबा लें ताकि हर वर्ष पानी की निकासी होती रहे। इससे न केवल वर्तमान संकट का समाधान होगा, बल्कि भविष्य में भी बाढ़ से बचाव सुनिश्चित होगा।

“सरकार ने भी इतना नहीं किया जितना संत रामपाल जी महाराज ने किया”: ग्रामीण 

ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा, “डीसी आया, विधायक आया… सब सिर्फ आश्वासन देकर चले गए। समाधान सिर्फ एक जगह मिला महाराज जी के पास। आज हम अपने खेत बर्बाद होने से बचा पाए हैं तो यह सिर्फ संत रामपाल जी की वजह से।” कई किसानों ने कहा कि उनके लिए यह मदद जीवनदान है। संत रामपाल जी महाराज जी ने यह सेवा निस्वार्थ भाव से की है। ना तो उन्हें स्वयं राजनीति में आना है और ना ही उनके अनुयायी राजनीति में आते हैं।

स्थायी समाधान: पाइप जमीन में दबाकर वर्षभर जल निकासी

संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई सामग्री केवल संकट-समय की राहत नहीं है। ग्रामीणों को निर्देश दिया गया है कि:

  • पाइपों को स्थायी तौर पर जमीन में दबाया जाए
  • हर बरसात में तुरंत पानी निकासी शुरू कर दी जाए
  • यदि और पाइप व मोटर की आवश्यकता हो तो पुनः प्रार्थना करें

सरपंच ने भी आश्वस्त किया कि वे इस सेवा का पूरा लाभ उठाएंगे और गांव को फिर कभी जलभराव का सामना नहीं करने देंगे। सेवादारों ने बताया कि गांव को जो सामग्री मिली है, वह किसी भी सरकारी सहायता से कई गुना अधिक है। मोटर, पाइप और स्टार्टर इतना मजबूत संयोजन है कि चाहे कितनी भी बारिश हो जाए, पानी तुरंत निकाला जा सकेगा।

गांव में खुशी की लहर संत रामपाल जी को भेंट की गई पगड़ी

हरियाणा की परंपरा के अनुसार गांव की ओर से संत रामपाल जी महाराज को सम्मानपूर्वक पगड़ी भेंट की गई, जिसे किसी भी महापुरुष को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। ग्रामीणों ने कहा “आज हमें पता लग गया कि गुरुजी सिर्फ संत नहीं, भगवान हैं।” किसानों ने भावुक होकर कहा ‘जीवन में पहली बार इतनी तेज सेवा देखी’ गांव के युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और किसान परिवारों ने कहा- “हमारी उम्मीद टूट चुकी थी, पर गुरुजी ने एक ही बार में सब कर दिया।” एक ने कहा कि “एक बार मदद से भी जरूरत पूरी नहीं हो तो दूसरी बार भी सेवा देने का वादा किया गया।

संत रामपाल जी महाराज ने किसान और मजदूर दोनों की लाज रख ली।” एक किसान ने कहा, “जो दर्द किसान का समझे… वही भगवान होता है और आज हमें भगवान दिखाई दे रहे हैं।”

अंत में एक गांव बचा, अब आगे की फसल भी बचेगी

पुर गांव की यह कहानी केवल बाढ़ राहत की नहीं, बल्कि विश्वास, मानवता और सेवा की एक मिसाल है। जहां ग्रामीण लगभग सब कुछ खो चुके थे, वहीं एक संत रामपाल जी महाराज ने केवल राहत ही नहीं, बल्कि जीवन में स्थिरता लौटाने का मार्ग भी दिया। अब किसानों का विश्वास लौट आया है। उन्हें भरोसा है कि जल्द ही उनके खेतों में फिर से हरी-भरी फसल लहराएगी।

संत रामपाल जी महाराज बने किसानों के मसीहा 

संत रामपाल जी महाराज ने बिना यह देखे कि सामने खड़ा प्रार्थी उनका अनुयायी है अथवा नहीं, सबकी मदद की। उनसे प्रार्थना में जो माँगा गया वह सब ही नहीं बल्कि कहीं अधिक दिया। यह प्रमाणित करता है कि संत रामपाल जी महाराज किसी लालच से नहीं और ना किसी भेदभाव से बल्कि सभी को एक परमात्मा की संतान मानकर सेवा कर रहे हैं। वे ऐसे एकमात्र संत हैं इस पृथ्वी पर जिन्होंने वही आचरण अपनाया है जिसकी उन्होंने अपने सत्संग में शिक्षा दी है। 

संत रामपाल जी महराज ने जो करुणा प्रदान की है वह वास्तव में एक साधारण संत के वश की बात है ही नहीं। जिसने जो मांगा उससे बढ़कर प्रदान किया है संत रामपाल जी महाराज जी ने। वे परमात्मा कबीर साहेब के अवतार हैं जो कोढ़ी को काया, निर्धन को माया आर बाँझ को पुत्र देते हैं। अन्नपूर्णा मुहिम के तहत संत रामपाल जी महाराज अनेकों गरीब और हताश लोगों तक राशन, दवाईयां और घर बनाकर दे रहे हैं। 

ग़रीबी के चलते इलाज ना करवा पाने वाले को संत रामपाल जी महाराज जी ने चिकित्सा और मुफ्त जांचें उपलब्ध करवाई हैं। उन्होंने बच्चों का विद्यालयों में एडमिशन और उनकी किताबें, ड्रेस, फीस आदि की व्यवस्था की है। वे असाधारण संत हैं और सबके मसीहा हैं।

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