February 11, 2026

हरियाणा के फतेहाबाद से एक ज़मीनी कहानी: बाढ़, बेबसी और फिर उम्मीद

Published on

spot_img

हरियाणा के फतेहाबाद जिले की तहसील फतेहाबाद में बसा गांव रामसरा। खेतों से घिरा, मेहनतकश किसानों का गांव, जहां खेती सिर्फ़ पेशा नहीं बल्कि जीवन है। लेकिन जब कुदरत रूठती है, तो यही जीवन सबसे पहले टूटता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। लगातार बारिश और बाढ़ ने रामसरा को चारों तरफ़ से घेर लिया। खेतों में पानी भर गया, सेम की समस्या ने फसलों की जड़ें सड़ा दीं। गेहूं की बुवाई रुक गई, पशुओं के लिए चारा खत्म होने लगा, स्कूलों और गलियों तक पानी आ गया। गांव के बुज़ुर्ग कहते हैं “इतना पानी हमने अपनी उम्र में पहली बार देखा।”

यही वह पृष्ठभूमि है, जहां से रामसरा की यह कहानी शुरू होती है एक ऐसी कहानी, जो सिर्फ़ बाढ़ की तबाही की नहीं, बल्कि टूटे भरोसे से फिर खड़ी हुई उम्मीद की है।

जब गांव में बाढ़ ने सबकुछ रोक दिया, आत्महत्या का आंकड़ा बढ़ रहा था 

रामसरा में बाढ़ का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहा। पानी निकासी की व्यवस्था न होने से खेतों में हफ्तों तक पानी जमा रहा। किसान लाचार थे।आत्महत्या का आंकड़ा बढ़ रहा था। कई घरों में चिंता थी कि अगर इस बार भी फसल नहीं बोई गई, तो साल कैसे कटेगा। बुज़ुर्गों की आंखों में बेबसी थी, महिलाओं के मन में घर-गृहस्थी का डर और युवाओं के सामने रोज़गार का सवाल। पंचायत के चक्कर लगे, प्रशासन को ज्ञापन दिए गए, लेकिन ज़मीनी राहत नहीं दिखी। एक किसान ने कहा, “सरकार के पास गए तो सिर्फ़ आश्वासन मिला। पानी तो खेत में ही खड़ा रहा।”

प्रशासनिक कोशिशें और पंचायत की भूमिका

यह कहना गलत होगा कि प्रशासन ने कुछ नहीं किया। अपने स्तर पर नालों की सफ़ाई और निरीक्षण हुए, लेकिन पानी की मात्रा और भूगोल ऐसा था कि स्थायी समाधान के बिना राहत संभव नहीं थी। पंचायत ने भी बैठकें कीं, गांव वालों से सलाह ली। तभी गांव के कुछ लोगों ने सुझाव दिया, “संत रामपाल जी महाराज के दरबार में अर्जी लगाते हैं।” यह बात पंचायत तक पहुंची। सरपंच मोनू और पंचायत के सदस्यों ने गांव की पीड़ा को एक पत्र में समेटा।

दरबार में अर्जी और तीन दिन में जवाब

ग्राम पंचायत रामसरा की ओर से एक छोटी-सी अपील वकीलों के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज के दरबार में पहुंचाई गई। गांव की हालत, खेतों में भरा पानी, बुवाई का संकट सब कुछ साफ़ शब्दों में लिखा गया। गांव वालों को उम्मीद कम थी, लेकिन भरोसा था।

और वही हुआ, जो रामसरा के लिए चमत्कार से कम नहीं था। महज़ तीन दिन के भीतर आदेश आया—गांव को पानी निकासी के लिए पूरा सामान उपलब्ध कराया जाए। चार 15 HP की विशाल मोटरें, 5000 फुट 8 इंची पाइप, स्टार्टर, नट-बोल्ट, फेविकोल पूरा इंतज़ाम।

जश्न की तरह गांव में दाख़िल हुआ राहत का काफिला

जिस दिन यह राहत गांव पहुंची, रामसरा का नज़ारा ही बदल गया। गांव के बाहर से ही डीजे पर भजन बजने लगे। युवा, बुज़ुर्ग, महिलाएं, सब काफिले के साथ पैदल चले। यह कोई राजनीतिक रैली नहीं थी, न किसी नेता का स्वागत। यह उन किसानों की खुशी थी, जिन्हें लगा कि उनकी सुनी गई है। ट्रकों में भरे पाइप, मोटरें, और आगे-आगे चलता गांव, एक अलग ही दृश्य था।

एक बुज़ुर्ग बोले, “80 साल की उम्र हो गई, पहली बार देखा है कि कोई संत खेतों का पानी निकालने का इंतज़ाम करके आया है।”

किसानों, महिलाओं और युवाओं की जुबानी

किसानों ने वही कहा, जो उनके दिल में था,

“हम लाचार हो गए थे। फसल बर्बाद, पानी भरा। आज संत रामपाल जी महाराज ने आंसू पोंछ दिए।” महिलाओं ने राहत की सांस ली,“अब गेहूं बो पाएंगे, पशुओं के लिए चारा होगा।”

सरपंच मोनू ने साफ़ शब्दों में कहा,

“छोटी-सी अपील पर इतना बड़ा इंतज़ाम चार मोटरें और हजारों फुट पाइप ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। पूरे गांव की तरफ़ से कोटि-कोटि नमन।”

रामसरा गांव में संत रामपाल जी महाराज की ओर से जब मोटर और पाइप पहुंचे, तो किसानों, महिलाओं और युवाओं की भावनाएं एक ही स्वर में सामने आईं।

यह भी पढ़ें: जब पातन (हिसार) में उजड़ गए 250 घर, तब संत रामपाल जी महाराज बने तारणहार

किसानों ने कहा कि खेतों में पानी भरा रहने से फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी, सेम की समस्या ने हालात और बिगाड़ दिए थे और 50–60 साल में पहली बार उन्होंने ऐसा देखा कि कोई संत सीधे खेत का पानी निकालने का इंतज़ाम करके आया हो। गांव की महिलाओं ने राहत की सांस ली क्योंकि फसल नष्ट होने से घर की रसोई, पशुओं का चारा, बच्चों की पढ़ाई और पूरे परिवार की दिनचर्या पर असर पड़ा था, जबकि गांव में पानी भरने से स्कूल और डिस्पेंसरी तक बंद हो गई थीं।

युवाओं ने कहा कि सरकार से सिर्फ़ आश्वासन मिले थे, लेकिन यहां बिना देरी के चार मोटर और 5000 फुट पाइप पहुंच गए, जिससे अब गांव में पानी निकालना आसान होगा और अगली फसल की उम्मीद जगी है। बुज़ुर्गों ने भावुक होकर बताया कि 80 साल की उम्र में भी वे सांस की तकलीफ के बावजूद ट्रकों को देखने आ गए, क्योंकि ऐसा दृश्य उन्होंने जीवन में पहली बार देखा था।

राहत का तकनीकी और व्यावहारिक समाधान

यह राहत सिर्फ़ तात्कालिक सहारा नहीं, बल्कि गांव की वर्षों पुरानी जलभराव समस्या का व्यावहारिक और टिकाऊ समाधान है। संत रामपाल जी महाराज की ओर से दी गई 

  • 15 HP की चार शक्तिशाली मोटरें,
  • 5000 फुट लंबी 8 इंची पाइपलाइन, 

साथ में स्टार्टर, नट-बोल्ट और अन्य आवश्यक सामग्री मिलकर एक ऐसी व्यवस्था बनाती हैं, जो आने वाले वर्षों तक काम करेगी। पाइपों को ज़मीन के भीतर स्थायी रूप से बिछाया जाएगा, ताकि बरसात के दौरान जैसे ही खेतों और गांव में पानी बढ़े, मोटरें तुरंत चालू की जा सकें और पानी बिना रुके बाहर निकाला जा सके। इसका सीधा मतलब यह है कि अब हर बारिश के बाद गांव को घबराने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी पानी जमा होने से पहले ही बाहर निकल जाएगा।

इसी तैयारी और स्थायित्व की वजह से गांव वाले इस मदद को सिर्फ़ राहत नहीं, बल्कि अपने लिए एक स्थायी सुरक्षा कवच और सचमुच का “वरदान” मान रहे हैं। 80 साल के बुज़ुर्ग भी मोटरों के ट्रक देखकर आ गए। सांस की तकलीफ वाले लोग भी खुशी से निकल पड़े।

गांव में पढ़कर सुनाया गया पत्र: जिम्मेदारी और जवाबदेही

गांव में पढ़कर सुनाया गया पत्र इस पूरी राहत का सबसे अहम और जिम्मेदारी भरा पक्ष था। यह सिर्फ़ एक औपचारिक काग़ज़ नहीं, बल्कि संत रामपाल जी महाराज की ओर से गांव को दिया गया एक स्पष्ट संदेश और भरोसे का अनुबंध था। पत्र में साफ़ शब्दों में कहा गया कि जो मोटर, पाइप और अन्य सामग्री गांव को दी गई है, उसका उद्देश्य सिर्फ़ यही है कि निर्धारित समय के भीतर गांव और खेतों से पानी पूरी तरह निकाला जाए और अगली फसल की बिजाई सुनिश्चित हो। 

इसमें यह भी स्पष्ट किया गया कि अगर इस राहत के बावजूद पानी नहीं निकाला गया और फसल नहीं बोई गई, तो आगे से उस गांव को किसी भी आपदा में सहायता नहीं दी जाएगी, क्योंकि तब लापरवाही गांव की मानी जाएगी। पत्र में पारदर्शिता पर ज़ोर देते हुए बताया गया कि राहत से पहले गांव की ड्रोन वीडियो बनाई गई है, पानी निकलने के बाद दोबारा वीडियो बनेगी और फिर फसल लहलहाने की भी रिकॉर्डिंग की जाएगी, ताकि हर समागम और सतलोक आश्रम में यह दिखाया जा सके कि दान का एक-एक पैसा सही जगह और सही उद्देश्य में लगा है। 

पत्र में यह भी कहा गया कि अगर आवश्यकता हो तो गांव आगे भी संत रामपाल जी महाराज से और सामान की प्रार्थना कर सकता है, लेकिन पानी निकलना हर हाल में ज़रूरी है। अंत में ग्राम पंचायत और गांव वालों ने इस पत्र पर हस्ताक्षर करके यह वचन दिया कि दी गई सामग्री का सही उपयोग होगा, उसका रखरखाव किया जाएगा और गांव की सामूहिक जिम्मेदारी निभाई जाएगी। यही वजह है कि यह पत्र गांव के लिए सिर्फ़ शर्त नहीं, बल्कि जवाबदेही, भरोसे और सामूहिक कर्तव्य का दस्तावेज़ बन गया।

संत रामपाल जी महाराज कबीर परमेश्वर का अवतार 

गांव में कई लोग यह मानते हैं कि संत रामपाल जी महाराज परमेश्वर कबीर का अवतार हैं। यह विश्वास उनकी सेवा, उनके आदेशों और उनके कार्यों से उपजा है। यह मान्यता किसी पर थोपी नहीं जाती यह  लोगों के अनुभव और आस्था से जन्मी है।

पाइप और मोटरों से आगे की कहानी

रामसरा की यह कहानी सिर्फ़ 5000 फुट पाइप और चार मोटरों की नहीं है। यह उस भरोसे की कहानी है, जो टूट चुका था और फिर जुड़ा। यह उस उम्मीद की कहानी है, जो बाढ़ के पानी में डूब गई थी और फिर ऊपर आई। यह कहानी बताती है कि जब सेवा निस्वार्थ हो, तो वह गांवों की किस्मत बदल सकती है।

लोगों का कहना है कि आज के समय में जहां अधिकतर धार्मिक चेहरे प्रवचन और चढ़ावे तक सीमित हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज ज़मीन पर उतरकर भूखे को रोटी, किसान को फसल बचाने का साधन, बीमार को इलाज और बेसहारा को सहारा दे रहे हैं। बाढ़ के समय हजारों-हजार फुट पाइप, बड़ी-बड़ी मोटरें, वह भी बिना किसी स्वार्थ या दिखावे के, केवल एक आदेश पर गांवों तक पहुंच जाना लोगों की नजर में यह साधारण इंसान का काम नहीं है।

गांव के बुज़ुर्ग और किसान कहते हैं कि कबीर साहेब ने जिस समाज सुधार और मानव कल्याण की बात की थी, वही काम आज संत रामपाल जी महाराज करते दिखाई देते हैं।

Latest articles

EPFO Plans UPI-Based PF Withdrawals via New Mobile App, Portal Window

The Employees’ Provident Fund Organisation is gearing up to introduce a new withdrawal facility...

​जब पातन (हिसार) में उजड़ गए 250 घर, तब संत रामपाल जी महाराज बने तारणहार

हरियाणा के हिसार जिले का पातन गाँव एक ऐसी त्रासदी का गवाह बना जिसने...

हिसार के ढाड़ गांव में संत रामपाल जी महाराज के कारण किसानों की तकदीर बदली

हरियाणा के हिसार जिले का ढाड़ गांव आज एक ऐसी कहानी का गवाह बना...

जब बिरधाना (झज्जर) बना ‘नरक’, तब संत रामपाल जी महाराज ने भेजी ‘संजीवनी’ | “अन्नपूर्णा मुहिम”

​हरियाणा के झज्जर जिले का गाँव बिरधाना एक ऐसी त्रासदी झेल रहा था जिसे...
spot_img

More like this

EPFO Plans UPI-Based PF Withdrawals via New Mobile App, Portal Window

The Employees’ Provident Fund Organisation is gearing up to introduce a new withdrawal facility...

​जब पातन (हिसार) में उजड़ गए 250 घर, तब संत रामपाल जी महाराज बने तारणहार

हरियाणा के हिसार जिले का पातन गाँव एक ऐसी त्रासदी का गवाह बना जिसने...

हिसार के ढाड़ गांव में संत रामपाल जी महाराज के कारण किसानों की तकदीर बदली

हरियाणा के हिसार जिले का ढाड़ गांव आज एक ऐसी कहानी का गवाह बना...