जलभराव से प्रभावित रायपुर (हिसार), नंगला इंदु (डीग), मघोर्रा (मथुरा) और हलई सरौत (डीग) गांवों में किसानों की उम्मीद बने संत रामपाल जी महाराज: अन्नपूर्णा मुहिम से लौटी खेती, हरियाली और नया विश्वास

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प्राकृतिक आपदाएं केवल फसलों को ही नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि किसानों के सपनों, उनके परिवारों की आजीविका और भविष्य पर भी गहरा प्रभाव डालती हैं। हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई गांव पिछले कुछ वर्षों में भीषण जलभराव की समस्या से जूझते रहे। कहीं खेतों में एक महीने तक तीन से पांच फुट पानी भरा रहा, तो कहीं पांच-पांच वर्षों तक हजारों बीघा उपजाऊ भूमि पानी में डूबी रही। धान, नरमा और अन्य फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं। गेहूं की बुवाई संकट में पड़ गई और हजारों किसान परिवार आर्थिक तंगी का सामना करने लगे।

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि कई किसानों ने खेती छोड़ने तक का मन बना लिया। कुछ गांवों में लोग प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के पास बार-बार पहुंचे, लेकिन उन्हें स्थायी समाधान नहीं मिल पाया। समय तेजी से निकल रहा था और किसानों की उम्मीदें टूटने लगी थीं।

ऐसे कठिन समय में संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में संचालित अन्नपूर्णा मुहिम किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई। जरूरत के अनुसार मोटरें, पाइपलाइन, ट्रैक्टर कपलिंग सेट और अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए गए, जिससे हजारों बीघा भूमि से पानी निकालने का कार्य शुरू हुआ। समय पर मिली इस सहायता ने न केवल खेतों को दोबारा खेती योग्य बनाया, बल्कि हजारों किसान परिवारों को आर्थिक संकट से उबरने का अवसर भी दिया।

Table of Contents

जब जलभराव ने किसानों की जिंदगी को संकट में डाल दिया

इन गांवों में जलभराव केवल कुछ खेतों तक सीमित नहीं था। कहीं एक महीने तक पानी भरा रहा, तो कहीं पांच से सात वर्षों तक खेत झील में बदल गए। हजारों एकड़ और हजारों बीघा भूमि पर खेती पूरी तरह बंद हो गई।

लगातार जलभराव के कारण किसानों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा—

  • धान, नरमा और अन्य खरीफ फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं।
  • गेहूं की समय पर बुवाई का संकट खड़ा हो गया।
  • पशुओं के लिए चारे की भारी कमी हो गई।
  • कई गांवों में खेतों और रास्तों तक पहुंचना मुश्किल हो गया।
  • कुछ स्थानों पर पानी घरों तक पहुंच गया।
  • बच्चों की पढ़ाई और परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई।
  • कई किसानों को खेती छोड़कर मजदूरी या पलायन तक की चिंता सताने लगी।

किसानों का कहना था कि यदि समय रहते जल निकासी नहीं होती, तो केवल एक फसल ही नहीं बल्कि आने वाले कई वर्षों की खेती भी प्रभावित हो सकती थी।

जब गांव वालों ने संत रामपाल जी महाराज से लगाई उम्मीद

लगातार प्रयासों के बावजूद जब प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित समाधान नहीं मिला, तब कई गांवों की पंचायतों और किसानों ने संत रामपाल जी महाराज के चरणों में अपनी समस्या रखने का निर्णय लिया।

ग्रामीणों ने अपनी-अपनी परिस्थितियों के अनुसार जलभराव, फसलों के नुकसान और आर्थिक संकट की जानकारी दी तथा खेतों से पानी निकालने के लिए सहायता का अनुरोध किया। किसानों के अनुसार उन्हें उम्मीद तो थी, लेकिन इतनी जल्दी सहायता उपलब्ध होगी, इसका विश्वास नहीं था।

प्रार्थना स्वीकार होने के बाद गांवों की आवश्यकता के अनुसार राहत सामग्री तैयार की गई और कुछ ही दिनों में विभिन्न गांवों तक पहुंचा दी गई। यही वह मोड़ था, जहां से किसानों की डूबती उम्मीदों ने फिर से नई दिशा पकड़नी शुरू की।

रायपुर (हिसार, हरियाणा): जहां 22,000 फुट पाइपलाइन बनी किसानों के भविष्य की सुरक्षा

हरियाणा के हिसार जिले का रायपुर गांव लगभग एक महीने तक भीषण जलभराव की समस्या से जूझता रहा। खेतों में तीन से चार फुट तक पानी भरा हुआ था, जबकि कई स्थानों पर इसकी गहराई पांच फुट तक पहुंच गई थी। धान की पूरी फसल बर्बाद हो चुकी थी और किसानों को सबसे अधिक चिंता इस बात की थी कि यदि समय रहते पानी नहीं निकला तो गेहूं की बुवाई भी नहीं हो पाएगी।

स्थिति उन किसानों के लिए और अधिक गंभीर थी जिन्होंने जमीन ठेके पर लेकर खेती की थी। उनके सामने केवल फसल का नुकसान नहीं, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य का संकट खड़ा हो गया था।

दो चरणों में उपलब्ध कराई गई सहायता

रायपुर गांव की वास्तविक आवश्यकता को देखते हुए संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत दो चरणों में व्यापक सहायता उपलब्ध कराई।

प्रथम चरण में उपलब्ध कराए गए संसाधन

  • 15,000 फुट लंबी 8 इंच की पाइपलाइन
  • 20 HP की पांच शक्तिशाली मोटरें

जब पंचायत ने बताया कि जलभराव अपेक्षा से अधिक है, तब तुरंत दूसरे चरण में अतिरिक्त सहायता भेजी गई।

द्वितीय चरण में उपलब्ध कराए गए संसाधन

  • 7,000 फुट अतिरिक्त 8 इंच पाइपलाइन

इसके साथ किसानों को निम्न सामग्री भी उपलब्ध कराई गई—

  • स्टार्टर
  • बिजली के केबल
  • पाइप जोड़ने का सॉल्यूशन
  • नट-बोल्ट
  • अन्य सभी आवश्यक उपकरण

ग्रामीणों ने बताया कि पूरी व्यवस्था इतनी सुव्यवस्थित थी कि उन्हें अतिरिक्त सामग्री खरीदने के लिए बाजार नहीं जाना पड़ा।

खेतों में फिर लौटी हरियाली

उपलब्ध कराए गए संसाधनों की सहायता से किसानों ने सामूहिक रूप से जल निकासी का कार्य शुरू किया। धीरे-धीरे खेतों से पानी बाहर निकला और जिन खेतों में कुछ समय पहले केवल पानी दिखाई देता था, वहां गेहूं की बुवाई शुरू हो गई।

कुछ ही समय बाद खेतों में हरियाली लौट आई और गांव के किसानों का आत्मविश्वास भी वापस आने लगा।

भविष्य के लिए बनाया स्थायी समाधान

रायपुर गांव की सबसे विशेष बात यह रही कि पंचायत ने केवल तत्काल राहत पर ही ध्यान नहीं दिया। गांव के लोगों ने निर्णय लिया कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा उपलब्ध कराई गई 22,000 फुट पाइपलाइन को स्थायी रूप से जमीन के नीचे बिछाया जाएगा ताकि भविष्य में जलभराव होने पर तुरंत पानी निकाला जा सके।

इसके लिए गांव में पांच अंडरग्राउंड पाइपलाइन विकसित करने की योजना बनाई गई, जिनके माध्यम से पानी सीधे नहर और ड्रेन तक पहुंचाया जा सकेगा। इस योजना का उद्देश्य आने वाले वर्षों में जलभराव से किसानों को स्थायी सुरक्षा प्रदान करना है।

किसानों ने साझा किए अपने अनुभव

किसानों ने बताया कि यदि समय पर सहायता नहीं मिलती, तो धान के साथ-साथ गेहूं की फसल भी पूरी तरह समाप्त हो जाती। ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें इतनी बड़ी मात्रा में सहायता मिलने की उम्मीद नहीं थी। आज उनके खेतों में गेहूं की फसल लहरा रही है, पशुओं के लिए चारा उपलब्ध है और गांव में फिर से खेती सामान्य रूप से शुरू हो चुकी है।

नंगला इंदु (डीग, राजस्थान): पांच वर्षों से जलमग्न भूमि पर फिर जगी खेती की उम्मीद

राजस्थान के डीग जिले का नंगला इंदु गांव वर्षों से जलभराव की समस्या झेल रहा था। लगभग ढाई से तीन हजार बीघा उपजाऊ भूमि लगातार पांच वर्षों तक पानी में डूबी रही। खेतों में खेती करना तो दूर, एक दाना तक पैदा नहीं हो पा रहा था।

खेती पूरी तरह बंद होने के कारण गांव के अनेक परिवार आर्थिक संकट में आ गए। कई किसानों को मजबूरी में पलायन तक करना पड़ा। जिन खेतों से कभी पूरे परिवार का पालन-पोषण होता था, वही खेत गंदी झील में बदल चुके थे।

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से कई बार सहायता मांगी, लेकिन वर्षों तक कोई स्थायी समाधान नहीं मिल पाया।

गांव की आवश्यकता के अनुसार अलग व्यवस्था

जब पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज से सहायता की प्रार्थना की, तब गांव की परिस्थितियों का अध्ययन किया गया। यहां बिजली की उपलब्धता नहीं थी। इसलिए मोटरें भेजने के बजाय गांव की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार अलग व्यवस्था की गई।

उपलब्ध कराई गई सहायता

  • 4 शक्तिशाली ट्रैक्टर कपलिंग सेट
  • 10,150 फुट लंबी 6 इंच पाइपलाइन
  • फ्लैक्सिबल पाइप
  • निप्पल
  • फुटवाल
  • अन्य आवश्यक फिटिंग सामग्री

सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि ट्रैक्टर कपलिंग सेट चलाने के लिए डीजल की व्यवस्था भी संत रामपाल जी महाराज की ओर से कराई गई, जिससे पंचायत पर कोई अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं पड़ा।

किसानों में लौटी उम्मीद

ग्रामीणों का कहना था कि यदि वर्षों से पानी में डूबी लगभग ढाई से तीन हजार बीघा भूमि दोबारा खेती योग्य बन जाती है, तो पूरे गांव की आर्थिक स्थिति बदल सकती है। गांव के प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्षों बाद पहली बार उन्हें विश्वास हुआ कि उनकी समस्या का समाधान संभव है।

एडवोकेट छोटू सिंह सहित कई ग्रामीणों ने कहा कि यह सहायता केवल राहत सामग्री नहीं, बल्कि किसानों के जीवन को नई दिशा देने वाला प्रयास है। पंचायत ने भी बताया कि गांव की आवश्यकता के अनुसार जितनी सामग्री मांगी गई थी, उतनी ही उपलब्ध कराई गई। आज नंगला इंदु के लोग पूरे विश्वास के साथ जल निकासी कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं ताकि वर्षों से बंजर पड़ी भूमि पर एक बार फिर खेती शुरू हो सके।

मघोर्रा (मथुरा, उत्तर प्रदेश): जहां वर्षों के जलभराव के बाद खेतों में फिर लौटी हरियाली

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की गोवर्धन तहसील का मघोर्रा गांव, जो अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाता है, पिछले दो से तीन वर्षों से भीषण जलभराव की समस्या का सामना कर रहा था। हजारों बीघा उपजाऊ भूमि पानी में डूब चुकी थी। हालात इतने गंभीर हो गए थे कि गंदा पानी खेतों से निकलकर कई घरों तक पहुंच गया। खेती पूरी तरह प्रभावित हो गई और किसानों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया।

लगातार जलभराव का असर केवल कृषि तक सीमित नहीं रहा। कई परिवार बच्चों की पढ़ाई, विवाह और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में भी कठिनाई महसूस करने लगे। किसानों का मनोबल टूटने लगा था और उन्हें लगने लगा था कि शायद उनकी जमीन दोबारा खेती के योग्य नहीं बन पाएगी।

गांव की आवश्यकता के अनुसार उपलब्ध कराई गई सहायता

ग्रामीणों की प्रार्थना स्वीकार होने के बाद गांव का सर्वे किया गया और आवश्यकता के अनुसार राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई।

मघोर्रा गांव में उपलब्ध कराई गई सहायता—

  • 7,300 फुट लंबी 8 इंच की पाइपलाइन
  • 20 HP की 1 मोटर
  • 15 HP की 1 मोटर
  • लगभग 300 फुट बिजली की तार
  • स्टार्टर
  • सुंडिया
  • स्टील नट-बोल्ट
  • अन्य आवश्यक उपकरण

संपूर्ण सामग्री एक साथ उपलब्ध कराई गई ताकि किसानों को जल निकासी कार्य के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।

लगभग दो महीने तक चला जल निकासी अभियान

सहायता मिलने के बाद गांव के किसानों ने सामूहिक रूप से जल निकासी का कार्य शुरू किया। लगभग दो महीने तक लगातार प्रयास किए गए, जिसके बाद खेतों और आसपास के क्षेत्रों से पानी काफी हद तक बाहर निकाला जा सका।

जहां पहले खेतों और मकानों के आसपास कई फुट तक पानी भरा था, वहीं अब अधिकांश भूमि दोबारा खेती योग्य बन चुकी थी। ग्रामीणों ने बताया कि अधिकांश प्रभावित क्षेत्रों में गेहूं की बुवाई सफलतापूर्वक पूरी हो गई। केवल कुछ नीची भूमि पर पानी देर से निकलने के कारण इस बार खेती नहीं हो सकी।

भविष्य के लिए बनाई गई योजना

गांव की पंचायत ने निर्णय लिया कि जिन क्षेत्रों में इस बार पूरी तरह पानी नहीं निकल पाया, वहां फसल कटाई के बाद स्थायी पाइपलाइन बिछाई जाएगी ताकि भविष्य में जलभराव की स्थिति उत्पन्न होने पर तुरंत पानी निकाला जा सके।

ग्रामीणों का विश्वास है कि यह योजना लागू होने के बाद आने वाले वर्षों में किसानों को बार-बार ऐसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

हलई सरौत (डीग, राजस्थान): वर्षों से बंजर पड़ी 4500 बीघा भूमि के लिए बनी नई उम्मीद

राजस्थान के डीग जिले का हलई सरौत गांव पिछले पांच से सात वर्षों से लगातार जलभराव की समस्या झेल रहा था। लगभग 4500 बीघा उपजाऊ भूमि पानी में डूबी हुई थी। वर्षों तक न खरीफ की फसल हो सकी और न ही रबी की। खेतों के साथ-साथ रास्ते भी बंद हो गए थे और कई घरों के आसपास पानी भर जाने से लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो गया था।

खेती बंद होने से किसानों की आय लगभग समाप्त हो गई। पशुओं के लिए चारा खरीदना पड़ रहा था और अनेक परिवार आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे थे।

दो चरणों में पहुंचाई गई सहायता

गांव की आवश्यकता को देखते हुए संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत दो चरणों में सहायता उपलब्ध कराई।

प्रथम चरण

  • 5,300 फुट 8 इंच पाइपलाइन
  • 10 HP की 2 मोटरें
  • 1 ट्रैक्टर कपलिंग सेट

द्वितीय चरण

  • 6,500 फुट अतिरिक्त पाइपलाइन
  • 10 HP की 2 अतिरिक्त मोटरें
  • 1 अतिरिक्त ट्रैक्टर कपलिंग सेट

कुल मिलाकर गांव को उपलब्ध कराया गया—

  • 11,800 फुट 8 इंच पाइपलाइन
  • 10 HP की 4 मोटरें
  • 2 ट्रैक्टर कपलिंग सेट

इसके अतिरिक्त—

  • स्टार्टर
  • फ्लैक्सिबल पाइप
  • बिजली की तार
  • निप्पल
  • स्टील नट-बोल्ट
  • अन्य आवश्यक उपकरण

सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि मोटरों को चलाने के लिए डीजल तथा जनरेटर किराये की व्यवस्था भी संत रामपाल जी महाराज की ओर से कराई गई, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।

गांव में दिखा उत्साह

राहत सामग्री गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उसका स्वागत किया। गांव के बुजुर्ग, महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पंचायत ने भरोसा दिलाया कि उपलब्ध कराई गई सामग्री का पूरा सदुपयोग किया जाएगा और जल्द से जल्द खेतों से पानी निकालकर खेती दोबारा शुरू की जाएगी।

ग्रामीणों ने बताया कि यदि वर्षों से जलमग्न भूमि खेती योग्य बन जाती है, तो गांव की आर्थिक स्थिति में बड़ा परिवर्तन आएगा।

चारों गांवों में उपलब्ध कराई गई सहायता एक नजर में

गांवप्रभावित क्षेत्रजलभराव अवधिप्रमुख सहायता
रायपुर (हिसार)कई खेतों में 3–5 फुट पानीलगभग 1 महीना22,000 फुट पाइपलाइन (दो चरणों में), 20 HP की 5 मोटरें, स्टार्टर, केबल, सॉल्यूशन, नट-बोल्ट
नंगला इंदु (डीग)2,500–3,000 बीघालगभग 5 वर्ष10,150 फुट 6 इंच पाइप, 4 ट्रैक्टर कपलिंग सेट, फ्लैक्सिबल पाइप, डीजल व्यवस्था
मघोर्रा (मथुरा)हजारों बीघा2–3 वर्ष7,300 फुट पाइपलाइन, 20 HP व 15 HP मोटर, 300 फुट बिजली तार, स्टार्टर व फिटिंग
हलई सरौत (डीग)लगभग 4,500 बीघा5–7 वर्ष11,800 फुट पाइपलाइन, 4×10 HP मोटरें, 2 ट्रैक्टर कपलिंग सेट, डीजल व जनरेटर व्यवस्था

समय पर मिली सहायता से लौटी किसानों की उम्मीद

चारों गांवों की परिस्थितियां अलग-अलग थीं, लेकिन किसानों की समस्याएं लगभग समान थीं। कहीं एक महीने तक जलभराव रहा, तो कहीं पांच से सात वर्षों तक खेत पानी में डूबे रहे। फसलें नष्ट हुईं, आर्थिक संकट बढ़ा और भविष्य को लेकर चिंता गहराती गई।

संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में अन्नपूर्णा मुहिम के तहत उपलब्ध कराए गए संसाधनों ने इन गांवों में जल निकासी का कार्य तेज किया। जहां आवश्यक था वहां मोटरें उपलब्ध कराई गईं, जहां बिजली नहीं थी वहां ट्रैक्टर कपलिंग सेट भेजे गए, और प्रत्येक गांव की जरूरत के अनुसार पाइपलाइन एवं अन्य उपकरण उपलब्ध कराए गए।

परिणामस्वरूप अनेक स्थानों पर समय रहते गेहूं की बुवाई संभव हो सकी, खेत दोबारा खेती योग्य बनने लगे और किसानों का आत्मविश्वास लौट आया। कुछ गांवों ने भविष्य में जलभराव से बचने के लिए स्थायी पाइपलाइन व्यवस्था विकसित करने का भी निर्णय लिया।

संत रामपाल जी महाराज के अन्य मानवता सेवा कार्य

संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में केवल किसानों की सहायता ही नहीं, बल्कि अनेक सामाजिक और मानवता आधारित सेवाएं भी निरंतर संचालित की जा रही हैं। इनमें प्रमुख हैं—

  • प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य
  • जरूरतमंद परिवारों को राशन सहायता
  • रक्तदान शिविर
  • निःशुल्क दहेजरहित विवाह
  • गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों की सहायता
  • पर्यावरण संरक्षण अभियान
  • नशामुक्ति जागरूकता अभियान
  • जरूरतमंद किसानों को समयानुसार सहायता

इन सेवाओं का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों तक समय पर सहयोग पहुंचाकर उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।

गांवों में लौटी हरियाली और भविष्य की नई उम्मीद

रायपुर, नंगला इंदु, मघोर्रा और हलई सरौत की कहानियां केवल जलभराव से राहत तक सीमित नहीं हैं। ये उन किसान परिवारों के संघर्ष, धैर्य और सामूहिक प्रयास की कहानियां हैं, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद नहीं छोड़ी।

आज इन गांवों में जहां कभी पानी और निराशा का माहौल था, वहां फिर से खेती की तैयारियां दिखाई दे रही हैं। कई स्थानों पर गेहूं की बुवाई हो चुकी है, किसानों के चेहरे पर आत्मविश्वास लौट आया है और गांव भविष्य के प्रति पहले से अधिक आशावान दिखाई दे रहे हैं।

समय पर उपलब्ध कराई गई सहायता ने केवल तत्काल राहत ही नहीं दी, बल्कि कई गांवों में स्थायी समाधान की दिशा भी तैयार की। यही कारण है कि यह पहल केवल जल निकासी तक सीमित न रहकर किसानों की आजीविका, उनकी जमीन और उनके भविष्य को सुरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास बनकर सामने आई।

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