PM Modi Visit Kedarnath: केदारनाथ यात्रा में मोदी जी ने किया अधूरे गुरु आदि शंकराचार्य की मूर्ति का लोकार्पण

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PM Modi Visit Kedarnath 2021: आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 नवंबर 2021 शुक्रवार के दिन सुबह 7:55 पर पहुंचे केदारनाथ धाम। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी जी की केदारनाथ धाम की यह पांचवीं यात्रा है। उन्होंने यहाँ बाबा केदारनाथ की पूजा – अर्चना के साथ जलाभिषेक किया। 250 करोड़ रुपये की केदारपुरी पुनर्निर्माण परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जिसमें आदि गुरु शंकराचार्य की समाधि से संबंधित परियोजना भी शामिल है। भाषण के दौरान PM मोदी ने अयोध्या में बन रहे श्रीराम के भव्य मंदिर पर भी चर्चा की।

PM Modi Visit Kedarnath 2021: मुख्य बिंदु

  • 05 नवंबर 2021 शुक्रवार के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे केदारनाथ धाम
  • देहरादून एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने किया मोदी का स्वागत
  • केदारनाथ यात्रा के दौरान ही मोदी ने आदि शंकराचार्य की प्रतिमा और समाधि का किया अनावरण
  • साल 2013 में आई आपदा में शंकराचार्य की समाधि हो गई थी क्षतिग्रस्त 
  • प्रधानमंत्री केदारपुरी पुनर्निर्माण के दूसरे चरण की परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी
  • भाषण के दौरान मोदी जी ने दिवाली, गोवर्धन पूजा, छठ पूजा और आगे आने वाले त्योहारों के लिए लोगों को शुभकामनाएं देते हुए अपना संबोधन पूरा किया
  • सदभक्ति व सतज्ञान के अभाव के कारण मनुष्य समझ नहीं पाता है मोक्ष का मार्ग क्या है ?

PM Modi Visit Kedarnath: प्रधानमंत्री ने केदारपुरी पुनर्निर्माण परियोजनाओं को प्रारंभ किया

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी की केदारनाथ धाम की यह पांचवीं यात्रा है। केदारनाथ पहुंचकर उन्होंने भगवान शिव की पूजा-अर्चना के साथ जलाभिषेक किया। पीएम ने विकास कार्यों की समीक्षा भी की। प्रधानमंत्री ने केदारनाथ मंदिर के दर्शन करने के अलावा 400 करोड़ रुपये की केदारपुरी पुनर्निर्माण परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जिसमें आदि गुरु शंकराचार्य की समाधि से संबंधित परियोजना भी शामिल है। प्रधानमंत्री केदारपुरी पुनर्निर्माण के दूसरे चरण की परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी गई ।

PM Modi Visit Kedarnath 2021: PM मोदी ने आदिशंकराचार्य की प्रतिमा का किया अनावरण

इसके बाद केदारनाथ में मोदी ने आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा का अनावरण भी किया। प्रतिमा के सामने प्रधानमंत्री मोदी ने ध्यान भी लगाया। केदारनाथ में आदि गुरु शंकराचार्य की इस प्रतिमा का निर्माण 2019 में शुरू हुआ था। यह प्रतिमा 13 फुट ऊंची और 35 टन वजनी है। आपको ज्ञात होगा कि साल 2013 में आई आपदा में शंकराचार्य की समाधि क्षतिग्रस्त हो गई थी ।

PM Modi Visit Kedarnath 2021: प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के महत्वपूर्ण अंश 

  • हमारे उपनिषदों में, आदि शंकराचार्य जी की रचनाओं में कई जगह नेति-नेति कहकर एक भाव विश्व का विस्तार दिया गया है। रामचरित मानस को भी हम देखें तो इसमें में अलग तरीके से ये भाव दोहराया गया है। 
  • बरसों पहले जो नुकसान यहां हुआ था, वो अकल्पनीय था। जो लोग यहां आते थे, वो सोचते थे कि क्या ये हमारा केदार धाम फिर से उठ खड़ा होगा? लेकिन मेरे भीतर की आवाज कह रही थी कि ये पहले से अधिक आन-बान-शान के साथ खड़ा होगा।
  • मैं दिल्ली में अपने दफ्तर से लगातार केदारनाथ में विकास कार्यों का जायजा लेता रहता था। ड्रोन फुटेज के जरिए मैंने विकास कार्यों की समीक्षा की।
  • एक समय था जब आध्यात्म को, धर्म को केवल रूढ़ियों से जोड़कर देखा जाने लगा था। लेकिन, आदि शंकराचार्य ने समाज को इस सत्य से परिचित कराने का काम किया।
  • चारधाम सड़क परियोजना का काम तेजी से चल रहा है। भविष्य में यहां केदारनाथ जी तक श्रद्धालु केवल कार के जरिए आ सकें, इससे जुड़ी प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। 
  • यहां पास में ही पवित्र हेमकुंड साहिब जी भी हैं। हेमकुंड साहिब जी के दर्शन आसान हों, इसके लिए वहां भी रोप-वे बनाने की तैयारी है। 
  • काशी का कायाकल्प हो रहा है तो वहीं मथुरा-वृंदावन में भी विकास कार्यों पर जोर है।
  • दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे बनने से यात्रियों के लिए सफर और सुगम हो जाएगा। 
  • आने वाले वर्षों में उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था बदलने वाली है। उत्तराखंड में पलायन रोकने की योजना पर काम हो रहा है। अब पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी पहाड़ वालों के काम आएगी। यह दशक नौजवानों का है ।

सदभक्ति व सतज्ञान के अभाव के कारण भटकता है प्राणी

मनुष्यों को सतज्ञान न होने से वह अपनी मनमर्जी से कुछ भी भक्ति-साधना करते रहे हैं। तीर्थ-यात्रा, हवन-यज्ञ आदि को मोक्ष का साधन मानते हैं। जबकि इनसे न तो भगवान मिलते है और न ही मोक्ष होता है। जबतक हम सदभक्ति के मार्ग पर नहीं चलेंगे, हम पशु-पक्षियों की तरह ही भटकते रहेंगे। इसके लिए प्रथम हमें पूर्ण गुरु की शरण प्राप्त करनी होगी, उसके बाद उनके बताए भक्ति-मार्ग पर चलकर शास्त्रानुसार भक्ति करनी पड़ेगी, फिर हम परमात्मा व मोक्ष दोनों को प्राप्त कर सकते हैं। मोक्ष का मतलब किसी देवलोक में जाना नहीं है। यदि हमारा जन्म और मरण दोनों समाप्त हो जाते है तब मोक्ष माना जाता है। जब हम सत्यधाम सतलोक को प्राप्त कर लेते है तब मोक्ष प्राप्त होता है। यह सब कैसे संभव है आइए जानते है ।

गंगा घाटे घर करे,पीवे निर्मल नीर ।

मुक्ति नहीं हरि नाम बिन,कहे साहेब कबीर ।।

शास्त्रविरुद्ध साधनाओं से नहीं होगी मुक्ति

पवित्र श्रीमद्भगवत गीता जी के अनुसार शास्त्रविरुद्ध साधनाओं से नहीं होगी मुक्ति, इस बात को जानने के लिए कुछ प्रमाण है जो आप स्वयं देख सकते हैं। आइए संक्षेप में उन्हें जानते हैं :-

  • पूर्ण परमात्मा से प्राणी पूर्ण मुक्त (जन्म -मरण रहित) हो सकता है जो सतलोक में रहता है तथा प्रत्येक प्राणी के ह्रदय में भी और हर जीवात्मा के साथ ऐसे रहता है जैसे वायु रहती है गंध के साथ। भगवान ने अर्जुन को अपनी पूजा भी त्याग कर उस एक परमात्मा की शरण में जाने की सलाह दी है और कहा है कि मेरा पूज्य देव भी वही पूर्ण परमात्मा है ! (अध्याय 18 के श्लोक 62, 66 तथा अध्याय 8 के श्लोक 8, 9, 10, 20, 21, 22 में प्रमाण है)
  • ब्रह्म लोक से लेकर ब्रह्मा, विष्णु, शिव आदि के लोक और ये स्वयं भी जन्म मरण व प्रलय में हैं।  इसलिए ये अविनाशी नहीं हैं। जिसके फलस्वरूप इनके उपासक (भक्त) भी जन्म मरण में ही हैं।  (अध्याय 8 के श्लोक 16 व अध्याय 9 के श्लोक 7 में प्रमाण है)
  • देवी देवताओं, तीनों गुण (रजोगुण ब्रह्मा, सतोगुण विष्णु और तमोगुण शिवजी) की पूजा करना तथा भूत पूजा, पितर पूजा (श्राद्ध निकालना) मूर्खों की पूजा-साधना है। इन्हें करने वालो को घोर नरक में डाला जाएगा।  (अध्याय 7 के श्लोक 12 से 15 तथा 20 से 23 व अध्याय 9 के श्लोक 25 में प्रमाण है)

पूर्ण परमात्मा कौन है?

ऋग्वेद मंडल 9 सुक्त 86 मंत्र 17, 18, 19 और 20 में प्रमाण है कि वह एक परमात्मा सबका मालिक एक कबीर साहेब जी हैं। जिन्होंने हम सबकी रचना की है। पवित्र सामवेद संख्या 359 अध्याय 4 खंड 25 श्लोक 8 में प्रमाण है कि जो (कविर्देव) कबीर साहिब तत्वज्ञान लेकर संसार में आता है वह सर्वशक्तिमान सर्व सुखदाता और सर्व के पूजा करने योग्य हैं।

संत रामपाल जी महाराज ही एक मात्र तत्वदर्शी संत है

गीता अध्याय 17 के श्लोक 23 में लिखे “ओम तत् सत” मंत्र का सही भेद जो समझा दें वहीं वास्तव में सच्चा अध्यात्मिक गुरु है। वर्तमान में सच्चे अध्यात्मिक गुरु केवल जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज हैं, जिनका अनमोल ज्ञान, वेद और शास्त्रों से मेल खाता है तथा जिनको पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति हुई। जो वेद और शास्त्रों के अनुसार यथार्थ भक्ति मार्ग बता रहे हैं और जिनकी बताई भक्ति शास्त्र अनुकूल और मोक्षदायिनी भी है। परमेश्वर पूर्ण ब्रह्म कबीर साहेब हैं जो तत्वदर्शी संत की भूमिका में संत रामपाल जी रूप में धरती पर अवतरित हैं। जो ब्रह्मा, विष्णु, शिव, काल और दुर्गा के पिता और हम सब के जनक हैं। यह समय व्यर्थ गंवाने का नहीं शीघ्रातिशीघ्र सही निर्णय लेने का, परंपरागत और लोकवेद आधारित भक्ति को त्याग कर संत रामपाल जी महाराज की शरण में जाने का है। 

पूर्ण तत्वदर्शी सन्त रामपाल जी महाराज से मंत्र नामदीक्षा लें 

आपको सदभक्ति से ही सर्व सुख व पूर्ण मोक्ष प्राप्त हो सकता है अन्यथा मानव जीवन पशु तुल्य ही जानें। तो सत्य को जाने और पहचान कर पूर्ण तत्वदर्शी सन्त रामपाल जी महाराज से मंत्र नामदीक्षा लेकर अपना जीवन कल्याण करवाएं। अधिक जानकारी हेतु सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल पर सत्संग श्रवण करें। तत्वदर्शी सन्त रामपाल जी महाराज द्वारा रचित पवित्र पुस्तक “जीने की राह” पढ़ें और शाम 7:30 से साधना चैनल पर मंगल प्रवचन सुने ।

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