हरियाणा राज्य के अंतर्गत जिला सोनीपत की तहसील खरखौदा में स्थित ग्राम पंचायत गोरड़ पिछले 4 से 5 वर्षों से लगातार गंभीर जलभराव की समस्या से ग्रस्त थी। स्थानीय ग्रामीणों और किसानों के अनुसार, प्रत्येक वर्ष वर्षा ऋतु के समय गांव के लगभग 35 से 45 किले (एकड़) कृषि योग्य क्षेत्र में अत्यधिक पानी जमा हो जाता था।
खेतों में 5 फीट तक पानी लंबे समय तक खड़ा रहने के कारण फसलें पूरी तरह से नष्ट हो जाती थीं। इसके परिणामस्वरूप स्थानीय किसानों को निरंतर भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा था। आसपास के भौगोलिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर हुई भूमि संरचना में बदलाव और प्राकृतिक जल निकासी के मार्ग अवरुद्ध हो जाने के कारण खेतों में जलभराव की यह समस्या प्रतिवर्ष और अधिक विकराल रूप धारण करती जा रही थी।
प्रशासनिक स्तर पर समाधान न होने के कारण स्थिति निरंतर चिंताजनक बनी हुई थी, जिससे किसानों का कृषि उत्पादन पूरी तरह से प्रभावित हो रहा था और उनके समक्ष आजीविका का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया था।
सतलोक आश्रम धनाना धाम में ग्राम पंचायत द्वारा सहायता हेतु प्रार्थना
इस दीर्घकालिक समस्या के स्थाई तकनीकी निवारण के लिए ग्राम पंचायत गोरड़ के प्रशासनिक प्रतिनिधि और पीड़ित किसान सामूहिक रूप से जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की शरण में सतलोक आश्रम धनाना धाम पहुंचे। ग्रामीणों ने वहां उपस्थित होकर खेतों में भरे पानी और फसलों की बर्बादी से उत्पन्न संकट के विवरण से अवगत कराया।
ग्राम पंचायत की ओर से इस समस्या के पूर्ण निवारण के लिए तकनीकी रूप से 1600 फीट लंबी पाइपलाइन और 10 एचपी (हॉर्स पावर) क्षमता की एक विद्युत मोटर की आवश्यकता संबंधी लिखित प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया।
ग्राम पंचायत गोरड़ से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में नरेंद्र नामक स्थानीय निवासी सहित गांव के अन्य वरिष्ठ और प्रभावित किसान शामिल थे, जिन्होंने फसलों के डूबने और उससे होने वाले नुकसान का वास्तविक ब्यौरा प्रस्तुत किया।
त्वरित सर्वे प्रक्रिया, तकनीकी निरीक्षण और रिपोर्ट की स्वीकृति
धनाना धाम में प्रार्थना पत्र प्राप्त होते ही जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने प्रभावित क्षेत्र का तुरंत तकनीकी सर्वे करवाने का लिखित आदेश जारी किया। इस आदेश के पालन में उसी दिन विशेष सर्वे टीम गांव गोरड़ पहुंची। अचानक और त्वरित गति से पहुंची सर्वे टीम को देखकर स्थानीय ग्रामीणों ने अत्यधिक आश्चर्य व्यक्त किया, क्योंकि उन्हें प्रशासनिक व्यवस्थाओं के अनुभवों के आधार पर इतनी शीघ्र कार्रवाई की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी।
सर्वे टीम ने गांव में पहुंचकर प्रभावित कृषि क्षेत्रों, जलभराव वाले विशिष्ट स्थलों तथा पानी की निकासी के लिए संभावित भूमिगत मार्गों का गहनता से भौतिक व तकनीकी निरीक्षण किया। निरीक्षण के पश्चात सर्वे टीम ने पाया कि ग्राम पंचायत द्वारा बताई गई 1600 फीट पाइपलाइन और 10 एचपी मोटर की मांग तकनीकी मापदंडों के अनुसार पूरी तरह से उपयुक्त है और इस बुनियादी ढांचे के निर्माण से समस्या का पूर्ण समाधान संभव है।
सर्वे टीम ने अपनी विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट तैयार कर तुरंत स्वीकृति हेतु जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के समक्ष प्रस्तुत की, जिसे उनके द्वारा तत्काल प्रभाव से मंजूर कर लिया गया।
राहत सामग्री की विस्तृत सूची और तकनीकी विशिष्टताएं
स्वीकृति प्राप्त होने के तुरंत बाद गांव गोरड़ के लिए सहायता सामग्री रवाना की गई। संत रामपाल जी महाराज ने किसान मजदूर बचाओ अभियान के तहत ग्राम पंचायत को निम्नलिखित राहत सामग्री सीधे उपलब्ध करवाई:
- मुख्य पाइपलाइन: 1600 फीट लंबी और 8 इंच व्यास (डायमीटर) वाली हैवी-ड्यूटी पाइपलाइन।
- स्थापना सामग्री व एक्सेसरीज: पाइपलाइन को भूमिगत जोड़ने और स्थापित करने के लिए आवश्यक फेविकोल, बैंड, चैन प्लेट, नट-बोल्ट तथा अन्य संबंधित तकनीकी उपकरण।
- विद्युत मोटर: 10 एचपी (हॉर्स पावर) क्षमता की एक उच्च शक्ति वाली पानी की मोटर।
सामग्री हस्तांतरण प्रक्रिया और आगामी तकनीकी नियम
सर्वे टीम के सदस्यों और सेवादारों ने स्पष्ट किया कि संत रामपाल जी महाराज ने मोटर के हस्तांतरण के संबंध में एक अनिवार्य तकनीकी प्रक्रिया निर्धारित की है। वर्तमान चरण में 1600 फीट लंबी 8 इंची पाइपलाइन और उससे जुड़ी संपूर्ण फिटिंग सामग्री ग्रामीणों को मौके पर हैंडओवर कर दी गई है।
नियम के अनुसार, ग्राम पंचायत को एक सप्ताह के भीतर इस संपूर्ण पाइपलाइन को खेतों से निकासी मार्ग तक भूमिगत (जमीन के नीचे) दबाने का कार्य पूर्ण करना होगा।
पाइपलाइन सफलतापूर्वक बिछाए जाने के बाद ग्राम पंचायत द्वारा सर्वे टीम को सूचित किया जाएगा। इसके पश्चात टीम पुनः आकर भौतिक सत्यापन करेगी कि पाइप सही तरीके से दबाए गए हैं या नहीं। सत्यापन रिपोर्ट सकारात्मक होने के तुरंत बाद 10 एचपी की मोटर भी ग्रामीणों को सौंप दी जाएगी। ग्राम प्रधान और नरेंद्र ने आश्वासन दिया कि आगामी वर्षा से पूर्व एक सप्ताह के भीतर वे पाइपलाइन दबाने का कार्य अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लेंगे।
राहत सामग्री एवं परियोजना विवरण
| विवरण मापदंड | स्वीकृत विवरण एवं सांख्यिकी |
| प्रभावित क्षेत्र | ग्राम पंचायत गोरड़, तहसील खरखौदा, जिला सोनीपत (हरियाणा) |
| जलभराव का क्षेत्रफल | 35 से 45 किले (एकड़) कृषि भूमि |
| समस्या की अवधि | पिछले 4 से 5 वर्ष से निरंतर |
| जलभराव की गहराई | खेतों में लगभग 5 फीट तक पानी का भराव |
| पाइपलाइन की कुल लंबाई | 1600 फीट |
| पाइप का तकनीकी आकार | 8 इंच व्यास (Diameter) |
| सम्बद्ध एक्सेसरीज | फेविकोल, बैंड, चैन प्लेट, नट और बोल्ट |
| विद्युत मोटर क्षमता | 10 हॉर्स पावर (10 HP) |
| प्रदानकर्ता अभियान | किसान मजदूर बचाओ अभियान |
| कार्य पूर्ण करने की समयसीमा | 1 सप्ताह (7 दिवस) |
ग्रामीण क्षेत्र में उत्साह, स्वागत समारोह और व्यक्तिगत अनुभव
सहायता सामग्री से भरा हुआ विशाल ट्रक जैसे ही गांव गोरड़ की सीमा में प्रविष्ट हुआ, संपूर्ण गांव में अत्यधिक उत्साह का वातावरण निर्मित हो गया। 36 बिरादरी के ग्रामीण और किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ स्वागत में एकत्रित हुए। ग्रामीणों ने फूल-मालाओं के साथ सेवादारों का स्वागत किया और गांव की गलियों में एक विशाल स्वागत काफिला निकाला गया। इस अवसर पर ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के स्वरूप को अत्यंत आदरपूर्वक अपने शीश पर धारण किया और सामूहिक रूप से मंगलाचरण का पाठ किया।
गांव के एक वयोवृद्ध निवासी ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपने 48 वर्ष के जीवन में ऐसी त्वरित और नि:स्वार्थ सामाजिक सहायता कभी नहीं देखी, जहां बिना किसी कागजी औपचारिकता या राजनीतिक चंदे के इतनी बड़ी राहत सीधे प्रदान की गई हो।
एक अन्य ग्रामीण ने अपना संस्मरण सुनाते हुए बताया कि वे पूर्व में गंभीर शारीरिक व्याधि (पेट की पथरी) से पीड़ित थे और संत रामपाल जी महाराज की शरण में जाने तथा नाम दीक्षा प्राप्त करने के बाद उन्हें बिना किसी जटिल चिकित्सा ऑपरेशन के पूर्ण स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हुआ था। इसी अटूट विश्वास के कारण समस्त ग्रामीणों ने इस अभियान को एक महान सामाजिक और आध्यात्मिक क्रांति की संज्ञा दी।
40 एकड़ कृषि भूमि का पुनरुद्धार और स्थाई आर्थिक सुधार
संत रामपाल जी महाराज ने किसान मजदूर बचाओ अभियान के माध्यम से खेतों में जमा बाढ़ के पानी को स्थाई रूप से निकालने की व्यवस्था सुनिश्चित की है। इस 1600 फीट लंबी भूमिगत पाइपलाइन और 10 एचपी मोटर के सुचारू संचालन से गांव के 40 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में फैले खेतों को जलभराव से पूर्ण रूप से मुक्ति मिल जाएगी।
खेतों से अत्यधिक पानी हट जाने के कारण भूमि की उर्वरा शक्ति और फसल उत्पादन क्षमता पुनः अपनी पूर्ण क्षमता के साथ बहाल हो सकेगी।
किसानों की फसलें सुरक्षित होने से उन्हें प्रतिवर्ष होने वाले लाखों रुपये के आर्थिक नुकसान से स्थाई रूप से संरक्षण प्राप्त होगा। जल निकासी की इस पुख्ता व्यवस्था से न केवल वर्तमान संकट का समाधान हुआ है, अपितु आगामी अनेक वर्षों के लिए क्षेत्र के किसानों, कृषि मजदूरों और उनके परिवारों को एक सुरक्षित आर्थिक आधार प्राप्त हुआ है, जिससे स्थानीय कृषि विपणन और मंडी व्यापार को पुनः नई गति प्राप्त होगी।



