राजस्थान के डीग जिले की कामां तहसील के अंतर्गत आने वाला ग्राम पथवारी पिछले दो से तीन दशकों से एक भीषण प्राकृतिक और प्रशासनिक त्रासदी का दंश झेल रहा था। यहाँ के खेतों पर पिछले 25-30 वर्षों से अंधेरा छाया हुआ था, क्योंकि गाँव की लगभग 800 से 900 बीघा उपजाऊ भूमि जलमग्न थी। यह केवल एक गाँव की कहानी नहीं थी, बल्कि इस पूरे क्षेत्र के लगभग 15 से 16 गाँव इसी तरह की बाढ़ जैसी स्थिति से ग्रस्त थे। हालात इतने भयावह हो चुके थे कि यहाँ के युवाओं ने खेती से पूरी तरह उम्मीद छोड़ दी थी और वे अपनी पुश्तैनी ज़मीन को बंजर छोड़कर शहरों की फैक्ट्रियों में मात्र 10,000 रुपये की नौकरी करने के लिए मजबूर हो गए थे।
ग्रामीणों का कहना है कि दशकों के दौरान अनेक सरकारें आईं और गईं, राजनीतिक वादे हुए, लेकिन धरातल पर उनकी समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकला। बिजली की अनुपलब्धता ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया था, जिससे खेतों में भरे करोड़ों लीटर पानी को निकालना एक असंभव कार्य प्रतीत हो रहा था। किसान दाने-दाने को मोहताज थे और पशुओं के लिए चारे का संकट गहराता जा रहा था।
उम्मीद की नई किरण: संत रामपाल जी महाराज का हस्तक्षेप
जब पथवारी के ग्रामीणों ने पड़ोसी गाँव ऐंचवाड़ा में संत रामपाल जी महाराज द्वारा की गई अभूतपूर्व मदद को देखा, तो उनके मन में भी आशा की एक क्षीण किरण जागी। गाँव के सरपंच मान सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने संत रामपाल जी महाराज के चरणों में अपनी व्यथा रखते हुए एक प्रार्थना पत्र प्रेषित किया। इस प्रार्थना का असर इतना त्वरित और प्रभावी था कि मात्र तीन दिनों के भीतर पथवारी गाँव की सीमाओं पर राहत सामग्री का एक विशाल काफिला पहुँच गया।
संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से इस गाँव की सुध ली और वह सहायता प्रदान की जो दशकों में कोई निर्वाचित सरकार नहीं कर सकी थी। इस मदद की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यापकता और निस्वार्थ भावना थी। संत रामपाल जी महाराज ने न केवल समस्या को समझा, बल्कि उसके पूर्ण निवारण के लिए आवश्यक संसाधनों की तुरंत व्यवस्था की। गाँव में जैसे ही यह काफिला पहुँचा, पूरे क्षेत्र में हर्ष की लहर दौड़ गई और ग्रामीणों को लगा कि अब उनके दुखों का अंत निकट है।
सहायता सामग्री का विवरण: आधुनिक तकनीक और संसाधन
संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत पथवारी गाँव के लिए जो सामग्री भेजी, वह किसी चमत्कार से कम नहीं थी। इस राहत खेप में 20 एचपी (HP) की चार शक्तिशाली मोटरें, चार अत्याधुनिक स्टार्टर और उनके संचालन के लिए आवश्यक लंबी बिजली की तारें शामिल थीं। इसके अतिरिक्त, पानी की निकासी के लिए 260 फुट लंबे और 6 इंच चौड़े फ्लेक्सिबल पाइप (जिन्हें स्थानीय भाषा में सुंडिया कहा जाता है) उपलब्ध कराए गए। गाँव में बिजली की भारी कमी को देखते हुए संत रामपाल जी महाराज ने चार बड़े जनरेटरों की भी व्यवस्था की।
सबसे महत्वपूर्ण और हृदयस्पर्शी तथ्य यह है कि इन जनरेटरों का दैनिक किराया और उनमें लगने वाले भारी मात्रा में डीजल का संपूर्ण खर्च भी संत रामपाल जी महाराज ने स्वयं वहन करने की घोषणा की। यह एक ऐसी संपूर्ण और सर्वांगीण सेवा थी जिसने ग्रामीणों को निशब्द कर दिया। सामग्री की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया गया था; सभी उपकरण प्रतिष्ठित कंपनियों के और पूरी तरह से नए थे, ताकि बिना किसी बाधा के जल निकासी का कार्य संपन्न हो सके।
अन्नपूर्णा मुहिम: केवल सहायता नहीं, एक साक्षात जीवनदान
संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित यह अन्नपूर्णा मुहिम केवल एक राहत कार्य नहीं है, बल्कि यह डूबते हुए किसानों के लिए एक संजीवनी बनकर उभरी है। इस मुहिम का उद्देश्य समाज के उस वर्ग की सेवा करना है जो प्राकृतिक आपदाओं के कारण बेबस हो चुका है। संत रामपाल जी महाराज ने स्पष्ट किया है कि उन्हें न तो कोई चुनाव लड़ना है और न ही किसी राजनीतिक लाभ की आकांक्षा है; उनका एकमात्र लक्ष्य मानवता की सेवा और परोपकार है।
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ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि जहाँ सरकारें केवल कागजों पर योजनाएं बनाती रहीं, वहीं संत रामपाल जी महाराज ने धरातल पर साक्षात भगवान की भूमिका निभाई है। उन्होंने न केवल मशीनें दीं, बल्कि किसानों को, उनके आत्मसम्मान और उनकी आजीविका को वापस पाने का हौसला भी दिया। यह मुहिम हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात और दिल्ली जैसे राज्यों में तेज़ी से फैल रही है, जहाँ अब तक 300 से अधिक गाँवों को संत रामपाल जी महाराज ने इसी तरह की आपदाओं से राहत प्रदान की है।
सामूहिक पुरुषार्थ और उत्तरदायित्व का दिव्य संदेश
सामग्री सौंपने के साथ-साथ संत रामपाल जी महाराज के ट्रस्ट की ओर से ग्राम पंचायत को एक विशेष पत्र भी दिया गया, जिसमें उत्तरदायित्व और अनुशासन का कड़ा संदेश निहित था। संत रामपाल जी महाराज ने आदेश दिया कि दी गई सामग्री का सदुपयोग करते हुए सभी ग्रामीणों को एकजुट होकर दिन-रात काम करना होगा ताकि अगली रबी (गेहूँ) की फसल की बुवाई समय पर की जा सके।

ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि वे इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी ड्रोन कैमरों के माध्यम से करेंगे। पहले जलमग्न खेतों की वीडियो बनाई गई है, फिर जल निकासी के दौरान की वीडियो बनाई जाएगी, और अंत में जब खेतों में फसल लहलहाएगी, तब तीसरी वीडियो बनाई जाएगी। इन वीडियो को संत रामपाल जी महाराज के समागमों में दिखाया जाएगा ताकि दानकर्ताओं को यह विश्वास रहे कि उनके दान का उपयोग मानवता के कल्याण में पूरी पारदर्शिता के साथ हो रहा है। संत रामपाल जी महाराज ने चेतावनी भी दी कि यदि ग्रामीणों ने आलस्य किया और पानी नहीं निकाला, तो भविष्य में कोई और मदद नहीं दी जाएगी, क्योंकि यह सहायता केवल उन्हीं के लिए है जो स्वयं पुरुषार्थ करने को तत्पर हैं।
पलायन पर अंकुश और कृषि पुनरुद्धार की दिशा में कदम
पथवारी क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से पलायन की समस्या विकराल रूप ले चुकी थी। खेती न होने के कारण परिवार के परिवार गाँव छोड़कर जा रहे थे। स्कूलों में पानी भरा होने के कारण बच्चों की शिक्षा बाधित थी और पशुओं के लिए चारे की कमी से दूध का उत्पादन गिर गया था। संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से इस पलायन को रोकने का ऐतिहासिक कार्य किया है।
उन्होंने ग्रामीणों को यह उपहार सदैव के लिए दे दिया है; यानी ये मोटरें और पाइप अब गाँव की स्थाई संपत्ति होंगे। संत रामपाल जी महाराज ने सलाह दी है कि इन पाइपों को खेतों के नीचे स्थाई रूप से दबा दिया जाए ताकि भविष्य में कभी भी अधिक वर्षा होने पर पानी को तुरंत बाहर निकाला जा सके। इस दूरगामी सोच ने किसानों को भविष्य की चिंताओं से मुक्त कर दिया है। अब किसान अपनी भूमि पर वापस लौटने की तैयारी कर रहे हैं और गाँव के बाजारों में फिर से रौनक लौटने की उम्मीद जगी है।
ग्रामीणों की कृतज्ञता: “हमारे लिए तो यही नारायण हैं”
गाँव के बुजुर्गों और युवाओं की आँखों में आँसू थे जब वे संत रामपाल जी महाराज के प्रति अपना आभार व्यक्त कर रहे थे। 80 और 90 वर्ष की आयु के बुजुर्गों ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में ऐसी निस्वार्थ सेवा और ऐसा दयालु संत नहीं देखा। ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि संत रामपाल जी महाराज ने साक्षात नारायण बनकर नर की सेवा की है।
सरपंच और ग्राम पंचायत के सदस्यों ने स्वीकार किया कि संत रामपाल जी महाराज की कार्यशैली किसी भी सरकारी तंत्र से कहीं अधिक तीव्र और विश्वसनीय है। एक ग्रामीण ने भावुक होकर कहा कि जो काम पीढ़ियों से अटका हुआ था, उसे संत रामपाल जी महाराज ने मात्र एक सप्ताह के भीतर सुलझा दिया। आज पूरा पथवारी गाँव और आसपास के 15 गाँवों की जनता संत रामपाल जी महाराज को अपना रक्षक और मसीहा मान रही है। इस मुहिम ने न केवल पानी निकाला है, बल्कि लोगों के दिलों से बेबसी का अंधेरा मिटाकर भक्ति और सेवा की नई ज्योति जलाई है। संत रामपाल जी महाराज की यह अन्नपूर्णा मुहिम आज पूरे देश के लिए मानवता और सेवा का एक अनुपम उदाहरण पेश कर रही है।



