नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां संत रामपाल जी पर उतरी खरी 8 सितंबर अवतरण दिवस

8 सितंबर, संत रामपाल जी का अवतरण दिवस – नास्त्रेदमस ने 466 वर्ष पहले ही कर दी थी भविष्यवाणी

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Last Updated on 28 August 2021, 3:38 PM IST: 8 सितंबर 2021 71 वां अवतरण दिवस: 8 सितंबर तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का अवतरण दिवस है। इस पुण्य अवसर पर हम आप को तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के बारे में नास्त्रेदमस व अन्य भविष्यवक्ताओं जैसे नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां, अमेरिका की विश्व विख्यात भविष्यवक्ता फ्लोरेंस, इंग्लैंड के ज्योतिषी ‘कीरो‘, हंगरी की महिला ज्योतिषी “बोरिस्का” की अचूक भविष्यवाणियों से अवगत करवाएंगे। पाठकगण यह भी जानेंगे कि वर्तमान में वे ही हैं एकमात्र विश्वविजेता संत जो बुराईयों को दूर कर सतज्ञान देकर, सतभक्ति कराकर पूर्ण मोक्ष प्रदान कर रहें हैं। 

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8 सितंबर तत्वदर्शी संत सतगुरु रामपाल जी महाराज का अवतरण दिवस

8 सितंबर एक ऐसे महान संत का अवतरण दिवस है जिन्होंने संसार में व्याप्त कुरीतियों जैसे दहेज, नशा, भ्रष्टाचार, व्याभिचार को समाप्त करते हुए सतज्ञान की सुगन्ध से पूरे मानव जगत को महकाया है। उन्होंने बताया है कि मनुष्य जीवन का लक्ष्य सतगुरु की छत्रछाया में परमात्मा का ध्यान-सुमरण गुणगान करके माया काल के जाल से मुक्त होकर अपनी उच्चतम संभावना को पाने का है। पूर्ण परमेश्वर कबीर साहेब को उद्घृत करते हुए सतगुरु बताते हैं कि शरीर तेरा नहीं है तू इसे त्यागकर जाएगा, फिर सम्पत्ति कैसे तेरी हुई? इसलिए जीवन के बचे हुए पलों में शुद्ध अंतःकरण से भक्ति कर ले –

कबीर, काया तेरी है नहीं, माया कहाँ से होय।

भक्ति कर दिल पाक से, जीवन है दिन दोय।।

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां: महान भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस ने संत रामपाल जी के अवतरण की भविष्यवाणी 4 शतक पहले की  

वर्तमान काल में तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का धरती पर अवतरण विश्व के महान भविष्यवक्ताओं की वाणियों में छिपे संदेश के साथ मिलना महज एक संयोग नहीं है अपितु विश्व को सतभक्ति मार्ग बताने के लिए साक्षात परमात्मा का कृत्य है। विश्व प्रख्यात भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी से स्पष्ट है कि ”जिस समय उस तत्वदृष्टा शायरन का आध्यात्मिक जन्म होगा, उस दिन अमावस्या की अंधेरी रात होगी। उस समय उस विश्व नेता की आयु 16 या 20 या 25 वर्ष नहीं होगी, वह तरुण नहीं होगा, बल्कि वह प्रौढ़ होगा और वह 50 और 60 वर्ष के बीच की उम्र में संसार में प्रसिद्ध होगा। सन् 2006 में वह संत अचानक प्रकाश में आएगा।’’

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां निकली बिल्कुल सटीक

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां: पाठकों को स्मरण रहे कि सतगुरु रामपाल जी महाराज के भौतिक शरीर का अवतरण 8 सितम्बर 1951 को हरियाणा प्रांत के जिला सोनीपत के गांव धनाना में एक किसान परिवार में हुआ था। अपनी पढ़ाई पूरी करने के उपरांत वे हरियाणा प्रांत में सिंचाई विभाग में कनिष्ठ अभियंता के पद पर 18 वर्ष तक कार्यरत रहे थे। सन् 1993 में स्वामी रामदेवानंद जी महाराज ने संत रामपाल जी महाराज को सत्संग करने की आज्ञा दी तथा सन् 1994 में नामदान करने की आज्ञा प्रदान की। भक्ति मार्ग में लीन होने के कारण उन्होंने कनिष्ठ अभियंता के पद से त्यागपत्र दे दिया जिसे हरियाणा सरकार द्वारा 16/5/2000 को पत्र क्रमांक 3492.3500, तिथि 16/5/2000 के तहत स्वीकृत कर लिया गया था। 

सतगुरु रामपाल जी ने किया सतज्ञान का प्रचार 

वर्ष 1994 से 1998 के बीच तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने घर-घर, गांव-गांव, नगर-नगर में जाकर सत्संग किया। थोड़े ही समय में बहुसंख्या में स्त्री और पुरुष उनके अनुयाई बनने लगे। सन् 1999 में हरियाणा राज्य के रोहतक जिले में स्थित गांव करौंथा में संत रामपाल जी ने सतलोक आश्रम करौंथा की स्थापना की। दूर-दूर से श्रद्धालु सत्संग सुनने आने लगे तथा तत्वज्ञान को समझकर बहुसंख्या में नाम दीक्षा लेकर शिष्य बनने लगे। संत रामपाल जी महराज समाज में फैले अन्य सभी पंथ प्रवर्तकों की पुस्तकों को वेदों, गीता, कुरान, बाइबल से मिलान करके सत्य ज्ञान सिद्ध करते थे। सन 2006 में इस क्रांतिकारी संत के विरुद्ध जंग छिड़ गई और सतज्ञान के विरुद्ध तर्कहीन कथा वाचकों / ज्ञानहीन बाबाओं ने हिंसा और अन्यायी राजनीतिकों, प्रशासकों, न्यायविधों का सहारा लिया और इस महान संत को संसार के कल्याण के लिए जेल तक जाना पड़ा।      

शास्त्र अनुकूल भक्ति प्रदान करते हैं सतगुरु रामपाल जी

सतगुरु रामपाल जी के अवतरण दिवस के अवसर पर जानते हैं कि सतगुरु किस प्रकार पवित्र वेदों, श्रीमद्भगवद्गीता, कुरान, बाइबल और सूक्ष्म वेद आधारित शास्त्र अनुकूल सतज्ञान देते हैं। जैसे पवित्र यजुर्वेद 8:13 में पूर्ण परमात्मा अपने भक्त के सर्व पाप क्षमा कर देता है, यजुर्वेद 5:1 में परमात्मा सशरीर है, श्रीमद्भगवद्गीता 17:23 में ॐ तत् सत् में तीन बार नाम दीक्षा, कुरान में बाखबर को ढूँढने की सलाह, बाइबल में छः दिनों में सृष्टि रचना इत्यादि शास्त्रों में छिपे गूढ़ रहस्यों को उजागर किया। 

एक दिव्य महापुरुष के विषय में विभिन्न भविष्यवक्ताओं की भविष्यवाणियाँ

मानवता के पूर्ण विकास का कार्य अनादि काल से भारत ही करता आया है। इसी पुण्यभूमि पर अवतारों का अवतरण अनादि काल से ही होता आ रहा है। इसी श्रृंखला में इस युग में भी धरती पर अवतार आ चुके हैं जिनके विषय में अनेक भविष्यवाणियां हो चुकी हैं।

आइए जानते हैं कि सुप्रसिद्ध भविष्यवक्ताओं ने उस अवतार के संबंध में क्या भविष्यवाणियाँ की हैं:-

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां

फ्रांस देश के सुप्रसिद्ध भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस ने कहा है

The Great Chyren will be chief of the world,

Loved feared and unchallenged even at the death,

His name and praise will reach beyond the skies and he will be content to be known only as Victor.

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां: भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस ने सन 1555 में अपनी भविष्यवाणी में कहा है कि सन 2006 में एक हिंदू नेता अचानक प्रकाश में आएगा। नास्त्रेदमस ने कहा है कि निःसंदेह विश्व में श्रेष्ठ तत्वज्ञाता ( ग्रेट शायरन) के विषय में मेरी भविष्यवाणी के शब्द को किसी नेता पर जोड़ कर तर्क-वितर्क करके देखेगें तो कोई भी खरा नहीं उतरेगा। मैं (नास्त्रेदमस) छाती ठोक कर कह रहा हूँ कि मेरे शायरन का कृतत्व और उसका गूढ़-गहरा ज्ञान (तत्वज्ञान) ही सभी की खाल उतारेगा, बस 2006 साल आने दो। इस विधान के एक-एक शब्द का खरा-खरा समर्थन शायरन ही देगा।

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नास्त्रेदमस ने अपनी भविष्यवाणी में कहा है कि 21 वीं सदी के प्रारंभ में दुनिया के क्षितिज पर ‘शायरन’ का उदय होगा। जो भी बदलाव होगा, वह मेरी (नास्त्रेदमस की) इच्छा से नहीं बल्कि शायरन की आज्ञा, इच्छा से नियति अर्थात विधान से सारा बदलाव होगा ही होगा। उसमें से नया बदलाव मतलब ये है कि हिंदुस्तान सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र होगा। कई सदियों से ना देखा, ऐसा हिंदुओं का सुख साम्राज्य दृष्टिगोचर होगा। उस देश में पैदा हुआ धार्मिक संत ही तत्वदृष्टा तथा जगत का तारणहार, जगत विजेता होगाएशिया खण्डों में रामायण, महाभारत आदि का ज्ञान जो हिंदुओं में प्रचलित है, उससे भी भिन्न आगे का ज्ञान उस तत्वदर्शी संत का होगा। वह सतपुरुष का अनुयाई होगा। वह एक अद्वितीय संत होगा।

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां : बहुत सारे संत नेता आएंगे और जाएंगे, सर्व परमात्मा के द्रोही तथा अभिमानी होंगे। मुझे (नास्त्रेदमस को) आंतरिक साक्षात्कार उस शायरन का हुआ है। मैं उसका स्वागत करता हुआ आश्चर्य चकित हो रहा हूँ, उदास भी हो रहा हूँ क्योंकि, उसका दुनिया को ज्ञान न होने से मेरा शायरन (तत्वदर्शी संत) उपेक्षा का पात्र बन रहा है। वह अधेड़ उम्र में तत्वज्ञान का ज्ञाता तथा ज्ञेय होकर त्रिखंड में कीर्तिमान होगा। मुझ (नास्त्रेदमस) को उसका नया उपाय साधना मंत्र ऐसा जालिम मालूम हो रहा है जैसे सर्प को वश करने वाला गारडू, मंत्र से महाविषैले सर्प को वश में कर लेता है। वह नया उपाय, नया कानून बनाने वाला तत्ववेता दुनिया के सामने उजागर होगा, उसी को मैं (नास्त्रेदमस) अचंभित होकर “ग्रेट शायरन” (Great Chyren) बता रहा हूँ

  • नास्त्रेदमस ने आगे कहा कि : उसके ज्ञान के दिव्य तेज के प्रभाव से उस द्वीपकल्प (भारतवर्ष) में आक्रमक तूफान, खलबली मचेगी अर्थात अज्ञानी संतों द्वारा विद्रोह किया जाएगा। (12 जुलाई 2006 में हुए करौंथा काण्ड की ओर संकेत है) उसको शांत करने का उपाय भी उसी को मालूम होगा।
  • तत्वज्ञान का सत्संग करके प्रथम अज्ञान निंद्रा में सोए हुए अपने धर्म बंधुओं (हिंदुओं) को जागृत करके अंधविश्वास के आधार पर साधना कर रहे श्रद्धालुओं को शास्त्रविधि रहित साधना का पर्दा  फाड़ कर अपने गूढ़ गहरे ज्ञान (तत्वज्ञान) का प्रकाश करेगा।
  • अपने सनातन धर्म का पालन करवाकर समृद्ध शांति का अधिकारी बनाएगा। तत्पश्चात् उसका तत्वज्ञान संपूर्ण विश्व में फैलेगा। उस (महान तत्वदर्शी संत) के ज्ञान की कोई भी बराबरी नहीं कर सकेगा।

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां: जगत को नया प्रकाश देने वाला सर्वश्रेष्ठ जगत विजेता धार्मिक विश्व नेता की अपनी परमार्थी उदासी के सिवा कोई अभिलाषा नहीं होगी अर्थात मानव उद्धार के लिए चिंता के अतिरिक्त उसका कुछ भी स्वार्थ नहीं होगा, ना अभिमान होगा। यह मेरी भविष्यवाणी के लिए गौरव की बात होगी कि वास्तव में वह तत्वदर्शी संत संसार में अवश्य प्रसिद्ध होगा। उसके द्वारा बताया गया ज्ञान सदियों तक छाया रहेगा। वह संत आधुनिक वैज्ञानिकों की आँखें चकाचौंध करेगा, ऐसे आध्यात्मिक चमत्कार करेगा कि वैज्ञानिक भी आश्चर्य में पड़ जाएंगे। उसका सर्वज्ञान शास्त्र प्रमाणित होगा। मैं (नास्त्रेदमस) कहता हूं कि बुद्धिवादी व्यक्ति उसकी उपेक्षा न करें, उसे छोटा ज्ञानदीप ना समझें, उस तत्ववेता महामानव (Chyren) को सिंहासनस्थ करके (आसन पर बैठाकर) उसको आराध्य देव मानकर पूजा करें। वह आदि पुरुष (सतपुरुष) का अनुयाई अर्थात तत्वदर्शी संत दुनिया का तारणहार होगा।

अमेरिका की विश्व विख्यात भविष्यवक्ता फ्लोरेंस की भविष्यवाणियां

अमेरिका की विश्व विख्यात भविष्यवक्ता फ्लोरेंस ने अपनी भविष्यवाणियों में कई बार भारत का जिक्र किया है। ‘द फाल ऑफ सेंसेशनल कल्चर’ नामक अपनी पुस्तक में उन्होंने लिखा है कि सन् 2000 आते-आते प्राकृतिक संतुलन भयावह रूप से बिगड़ेगा। लोगों में आक्रोश की प्रबल भावना होगी। दुराचार पराकाष्ठा पर होगा। पश्चिमी देशों के विलासितापूर्ण जीवन जीने वाले वालों में निराशा, बेचैनी और अशांति होगी। अतृप्त अभिलाषाएं और जोर पकड़ेंगी जिससे उनमें आपसी कटुता बढ़ेगी। चारों ओर हिंसा और बर्बरता का वातावरण होगा। ऐसा वातावरण होगा कि चारों ओर हाहाकार मच जाएगा।

लेकिन भारत से उठने वाली एक नई विचारधारा इस घातक वातावरण को समाप्त कर देगी। वह विचारधारा वैज्ञानिक दृष्टि से सामंजस्य और भाईचारे का महत्व समझाएगी। वह यह भी समझाएगी कि धर्म और विज्ञान में आपस में कोई विरोध नहीं है। आध्यात्मिकता की उच्चता और भौतिकता का खोखलापन सबके सामने उजागर करेगी। मध्यमवर्ग उस विचारधारा से बहुत अधिक प्रभावित होगा। यह वर्ग समाज के सभी वर्गों को अच्छे समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करेगा। यह विचारधारा पूरे विश्व में चमत्कारी परिवर्तन लाएगी।

मुझे यह एहसास हो रहा है कि उस विचारधारा को जन्म देने वाला वह महान संत भारत में जन्म ले चुका है। उस संत के ओजस्वी व्यक्तित्व का प्रभाव सब को चमत्कृत करेगा। उसकी विचारधारा आध्यात्म के कम होते जा रहे प्रभाव को फिर से नई स्फूर्ति देगी। चारों ओर आध्यात्मिक वातावरण होगा। फ्लोरेंस के अनुसार वह संत भारत में जन्म ले चुके हैं। वह इस संत से काफी प्रभावित थी। अपनी एक दूसरी पुस्तक ‘गोल्डन लाइट ऑफ न्यू एरा‘ में भी उन्होंने लिखा है:

“जब मैं ध्यान लगाती हूँ तो अक्सर एक संत को देखती हूँ जो गौर वर्ण का है, उसके सफेद बाल हैं, उसके मुख पर न दाढ़ी है, न मूंछ है। उस संत के ललाट पर गजब का तेज होता है। उनके ललाट पर आकाश से एक नक्षत्र के प्रकाश की किरणें निरंतर बरसती रहती हैं। मैं देखती हूं कि वह संत अपनी कल्याणकारी विचारधारा तथा अपने सत चरित्र प्रबल अनुयायियों की शक्ति से संपूर्ण विश्व में नए ज्ञान का प्रकाश फैला रहे हैं”।

■ वह संत अपनी शक्ति निरंतर बढ़ा रहे हैं। उनमें इतनी शक्ति है कि वह प्राकृतिक परिवर्तन भी कर सकते हैं। भविष्यवक्ता फ्लोरेंस बताती हैं कि मैं भविष्य के विषय में एक बहुत महत्वपूर्ण बात बता रही हूँ। 20 वीं शताब्दी के अंत में भारतवर्ष से प्रकाश निकलेगा। यह प्रकाश पूरी दुनिया को उन दैवीय शक्तियों के विषय में जानकारी देगा जो अब तक हम सभी के लिए रहस्यमय बनी हुई हैं।

एक दिव्य महापुरुष द्वारा यह प्रकाश पूरे विश्व में फैलेगा। वह सभी को सत मार्ग पर चलने की प्रेरणा देगा। समस्त दुनिया में एक नई सोच की ज्योति फैलेगी। जब मैं ध्यानावस्था में होती हूँ तो अक्सर यह दिव्य महापुरुष मुझे दिखाई देते हैं। फ्लोरेंस ने बार-बार इस संत या दिव्य महापुरुष का जिक्र किया है। साथ ही यह भी बताया है कि उत्तरी भारत वर्ष में एक पवित्र स्थान पर वह मौजूद हैं। उसका आध्यात्मिक ज्ञान सर्व को अचंभित करने वाला है।

एक महापुरुष के विषय में जय गुरुदेव पंथ के श्री तुलसी दास साहेब की भविष्यवाणी

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जय गुरुदेव उर्फ राधास्वामी पंथ मथुरा के परम सन्त की भविष्यवाणी कृपया पढ़ें पुस्तक “जयगुरु देव की अमर वाणी भाग-2 “ के पृष्ठ 50 तथा 59) धर्माचार्यों, राजनीतिज्ञों को नेक सलाह धर्म तब आएगा जब सब धर्म के लोग लड़ना छोड़ दें।

  • राष्ट्र की उन्नति तभी होगी जब राजनीतिक लोग लड़ना, आंदोलन, हड़ताल, तोड़फोड़, रिश्वत अथवा स्वार्थ एवं दल बदल छोड़ दें।
  • मांस, मछली, शराब, ताड़ी भी छोड़ दें। इसके पहले देश की खुशहाली की जो बात करता है, वह भविष्य के आने वाले संकट से बदहोश है।
  • वह यह नहीं जानता है कि देश की प्रजा दुराचारी, चरित्रहीन, लड़ने भिड़ने व कामचोर हड़ताली, आंदोलन, तोड़फोड़ करने वाली हो गई है।
  • मांस मछली अंडों का भक्षण करने लगी। शराब, ताड़ी व अन्य नशीली वस्तुओं के सेवन से प्रजा बदहोश में आकर पागल बनकर कुत्तों की भांति लड़ने लगी। वह देश की जनता अपनी गरीबी को कदापि नहीं मिटा सकती है।

शाकाहारी पत्रिका: 28 जुलाई 1971

औतारी (अवतारी) शक्तियों का जन्म हो गया है भारतवर्ष में अवतारी शक्तियों ने जन्म ले लिया है। अनेक स्थानों पर बच्चों के रूप में पल रहे हैं और समय आने पर प्रगट हो जाएंगी। माता-पिता अपना सुधार कर लें वरना यही बच्चे विनाश का कारण बन जाएंगे। इन बच्चों को गोश्त व अंडा दिया जाता है तो वे मुंह फेर लेते हैं और उधर देखते तक नहीं। मां-बाप इस बात का ध्यान रखें कि जो बच्चे इन चीजों को खाना नहीं चाहते, उन्हें जबरदस्ती ना खिलाए। वह अवतार जिसकी लोग प्रतीक्षा कर रहे हैं 20 वर्ष का हो चुका है यदि उसका पता बता दूं तो लोग पीछे पड़ जाएंगे। अभी ऊपर से आदेश बताने के लिए नहीं हो रहा है। मैं समय का इंतजार कर रहा हूँ और सभी महात्माओं ने समय का इन्तजार किया है। समय आते ही सबको सब कुछ मालूम हो जाएगा।

(शाकाहारी पत्रिका 7 सितंबर 1971)

परिवर्तन का कारण भारतवर्ष बनेगा भारतवर्ष को विश्व में परिवर्तन का कारण अब बनना होगा। त्रेता में विश्व युद्ध का कारण भारतवर्ष था और द्वापर में भी विश्वयुद्ध का कारण भारतवर्ष था और इस समय में भी भारतवर्ष को ही कारण बनाना होगा। मुस्लिम राष्ट्रों में भारी कलह होगी। सभी मुसलमान आपस में लड़कर समाप्त हो जाएंगे। अधिकांश छोटे-छोटे देश टूटकर बड़े राष्ट्रों में मिल जाएंगे। भारतवर्ष इन सबका अगुआ होगा।

■ चीन में समस्त वैज्ञानिक प्रगति चूर्ण करके चीन को नष्ट कर दिया जाएगा। चीन में बचे खुचे लोगों की सहायता भारत करेगा। इसी बीच तिब्बत भारत में मिल जाएगा। यदि सभी राष्ट्र आपस में मिलकर भारतवर्ष पर आक्रमण करें तो भी इसे कोई जीत नहीं सकता है।

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■ भारत में नए सिरे से संगठन होगा। यदि विश्व के सभी राष्ट्र जी जान से यह प्रयास करें कि सुरक्षा परिषद अमेरिका से हटकर भारतवर्ष में ना जाने पाये तो यह कदापि नहीं होगा। सुरक्षा परिषद भविष्य में भारत में चली आएगी। महापुरुष का जन्म भारतवर्ष के छोटे से गांव में हो चुका है और वह व्यक्ति मानव इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति बनेगा। उसे जनता का इतना बड़ा समर्थन प्राप्त होगा कि आज तक किसी को नहीं मिला है। वह महापुरुष नए सिरे से विधान को बनाएगा और वह विश्व के संपूर्ण देशों पर लागू होगा। उसका एक झंडा होगा। उसकी एक भाषा होगी।

शाकाहारी पत्रिका: 28 अगस्त 1971

आइये अब जानते हैं कि उस महापुरुष के बारे में जिसके विषय में विश्वप्रसिद्ध भविष्यवक्ताओं ने भविष्यवाणियां की हैं जितनी भी भविष्यवाणियां हुई हैं। पाठकों को ज्ञात है कि  सन्त रामपाल जी महाराज का जन्म 8 सितंबर, 1951 को हरियाणा में हुआ था । “जय गुरुदेव की अमर वाणी” भाग-2 संत तुलसी साहेब ने 7 सितंबर 1971 को सत्संग में कहा था कि “वह अवतार जिसकी लोग प्रतीक्षा कर रहे हैं, 20 वर्ष का हो चुका है। संत रामपाल जी महाराज 7 सितंबर 1971 को पूरे 20 वर्ष के हुए थे, 8 सितंबर 1971 उनका इक्कीसवां वर्ष प्रारंभ हुआ था। वह महापुरुष छोटे से गांव में जन्म ले चुका है। उपरोक्त विवरण से स्पष्ट हो गया है कि वह महापुरुष संत रामपाल जी महाराज ही हैं।

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां: नास्त्रेदमस के समर्थन में अन्य भविष्यवक्ताओं की भविष्यवाणियाँ

  1. इंग्लैंड के ज्योतिषी ‘कीरो‘ ने सन 1925 में लिखी पुस्तक में भविष्यवाणी की है, “बीसवीं सदी अर्थात सन 2000 ई. के उत्तरार्द्ध में (सन 1950 के पश्चात् उत्पन्न संत) ही विश्व में एक नई सभ्यता लाएगा जो संपूर्ण विश्व में फैल जाएगी। भारत का वह एक व्यक्ति सारे संसार में ज्ञानक्रांति ला देगा।”
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  1. भविष्यवक्ता “श्री वेजीलेटिन” के अनुसार, “20 वीं सदी के उत्तरार्द्ध में विश्व में आपसी प्रेम का अभाव, मानवता का ह्रास, माया संग्रह की दौड़, लूट व राजनेताओं का अन्यायी हो जाना, आदि बहुत से उत्पात देखने को मिलेगें। परन्तु भारत से उत्पन्न हुई शांति भ्रातृत्व भाव पर आधारित नई सभ्यता, संसार में, देश, प्रांत और जाति की सीमायें तोड़कर विश्वभर में अमन व चैन उत्पन्न करेगी।”
  1. अमेरिका की महिला भविष्यवक्ता “जीन डिक्सन” के अनुसार, “20 वीं सदी के अंत से पहले विश्व में घोर हाहाकार तथा मानवता का संहार होगा। वैचारिक युद्ध के बाद आध्यात्मिकता पर आधारित एक नई सभ्यता सम्भवतः भारत के ग्रामीण परिवार के व्यक्ति के नेतृत्व में जन्म लेगी और संसार से युद्ध को सदा-सदा के लिए विदा कर देगी।”
  1. अमेरिका के “श्री एण्डरसन” के अनुसार, “20 वीं सदी के अन्त से पहले या 21 वीं सदी के प्रथम दशक में विश्व में असभ्यता का नंगा तांडव होगा। इस बीच भारत के एक देहात का एक धार्मिक व्यक्ति, एक मानव, एक भाषा और एक झंडा की रूपरेखा का संविधान बनाकर संसार को सदाचार, उदारता, मानवीय सेवा व प्यार का सबक देगा। यह मसीहा सन 1999 तक विश्व में आगे आने वाले हजारों वर्षों के लिए धर्म व सुख-शांति भर देगा।
  1. हॉलैण्ड के भविष्यवक्ता “श्री गेरार्ड क्राइसे” के अनुसार, “20 वीं सदी के अन्त से पहले या 21वीं सदी के प्रथम दशक में भयंकर युद्ध के कारण कई देशों का अस्तित्व ही मिट जावेगा। परन्तु भारत का एक महापुरुष संपूर्ण विश्व को मानवता के एक सूत्र में बांध देगा। वह हिंसा, फूट-दुराचार, कपट आदि को संसार से सदा के लिए मिटा देगा।”
  1. अमेरिका के भविष्यवक्ता “श्री चार्ल्स क्लार्क” के अनुसार, “20 वीं सदी के अन्त से पहले एक देश विज्ञान की उन्नति में सब देशों को पछाड़ देगा परंतु भारत की प्रतिष्ठा विशेषकर इसके धर्म और दर्शन से होगी जिसे पूरा विश्व अपना लेगा। यह धार्मिक क्रांति 21वीं सदी के प्रथम दशक में संपूर्ण विश्व को प्रभावित करेगी और मानव को आध्यात्मिकता पर विवश कर देगी।”
  1. हंगरी की महिला ज्योतिषी “बोरिस्का” के अनुसार, “सन 2000 ई. से पहले-पहले  की परिस्थितियों, हत्या और लूटमार के बीच ही मानवीय सद्गुणों का विकास एक भारतीय फरिश्ते के द्वारा भौतिकवाद से सफल संघर्ष के फलस्वरूप होगा जो चिरस्थाई रहेगा, इस आध्यात्मिक व्यक्ति के बड़ी संख्या में छोटे छोटे लोग ही अनुयायी बनकर भौतिकवाद को आध्यात्मिकता में बदल देंगे।”
  1. फ्रांस के “डॉ. जुलर्वन” के अनुसार, “सन् 1990 के बाद यूरोपीय देश भारत की धार्मिक सभ्यता की ओर तेजी से झुकेंगे। सन् 2000 तक विश्व की आबादी 640 करोड़ के आस-पास होगी। भारत से उठी ज्ञान की धार्मिक क्रांति नास्तिकता का नाश करके आँधी, तूफान की तरह सम्पूर्ण विश्व को ढक लेगी। उस महान भारतीय आध्यात्मिक व्यक्ति के अनुयाई देखते-देखते एक संस्था के रूप में ‘आत्मशक्ति’ से सम्पूर्ण विश्व पर प्रभाव जमा लेंगे।”
  1. नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां: फ्रांस के “नास्त्रेदमस” के अनुसार विश्व भर में सैनिक क्रांतियों के बाद थोड़े से ही अच्छे लोग संसार को अच्छा बनाऐंगे। जिसका महान धर्मनिष्ठ विश्वविख्यात नेता 20वीं सदी के अन्त और 21वीं सदी की शुरुआत में किसी पूर्वी देश से जन्म लेकर भ्रातृवृत्ति व सौजन्यता द्वारा सारे विश्व को एकता के सूत्र में बांध देगा । (नास्त्रेदमस शतक 1, श्लोक 50 में प्रमाणित कर रहा है) तीन ओर से सागर से घिरे द्वीप में उस महान संत का जन्म होगा। उस समय तत्व ज्ञान के अभाव से अज्ञान अंधेरा होगा। नैतिकता का पतन होकर, हाहाकार मचा होगा। वह शायरन (धार्मिक नेता) गुरुवर अर्थात् गुरुजी को वर (श्रेष्ठ) मानकर अपनी साधना करेगा तथा करवाएगा। वह धार्मिक नेता (तत्वदर्शी सन्त) अपने धर्म को बल अर्थात् भक्ति की शक्ति से तथा तत्वज्ञान द्वारा सर्व राष्ट्रों को नतमस्तक करेगा। एशिया में उसे रोकना अर्थात् उसके प्रचार में बाधा करना पागलपन होगा। (सेंचुरी-1, कन्ना-50)
  1. इजरायल के “प्रो. हरार” के अनुसार: “भारत देश का एक दिव्य महापुरुष मानवतावादी विचारों से सन् 2000 ई. से पहले-पहले आध्यात्मिक क्रांति की जड़ें मजबूत कर लेगा व सारे विश्व को उनके विचार सुनने को बाध्य होना पड़ेगा। भारत के अधिकतर राज्यों में राष्ट्रपति शासन होगा पर बाद में नेतृत्व धर्मनिष्ठ वीर लोगों पर होगा जो एक धार्मिक संगठन के आश्रित होंगे।”
  1. नार्वे के श्री “आनन्दाचार्य” की भविष्यवाणी के अनुसार: सन् 1998 के बाद एक शक्तिशाली धार्मिक संस्था भारत में प्रकाश में आयेगी, जिसके स्वामी एक गृहस्थ व्यक्ति की आचार संहिता का पालन सम्पूर्ण विश्व करेगा। धीरे-धीरे भारत औद्योगिक, धार्मिक और आर्थिक दृष्टि से विश्व का नेतृत्व करेगा और उसका विज्ञान (आध्यात्मिक तत्वज्ञान) ही पूरे विश्व को मान्य होगा।” ‘विश्व विजेता संत’ (संत रामपाल जी महाराज की अध्यक्षता में हिंदुस्तान विश्वगुरु धर्मगुरु के रूप में प्रतिष्ठित होगा )

संत रामपाल जी के विषय में नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां

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नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां : फ्रांस देश के नास्त्रेदमस नामक प्रसिद्ध भविष्यवक्ता ने सन् (ई.स.) 1555 में एक हजार श्लोकों में भविष्य की सांकेतिक सत्य भविष्यवाणियां लिखी हैं। सौ सौ श्लोकों के दस शतक बनाए हैं जिनमें से अब तक सर्व सिद्ध हो चुकी है। हिंदुस्तान में सत्य हो चुकी भविष्यवाणियों में से :-

  • भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री बहुत प्रभावशाली व कुशल होगी (यह संकेत श्रीमती स्व. इन्दिरा गांधी की ओर है) तथा उनकी मृत्यु निकटतम रक्षक द्वारा होना लिखा था, जो सत्य हुई।
  • उसके पश्चात उन्हीं का पुत्र उनका उत्तराधिकारी होगा और वह बहुत कम समय तक राज्य करेगा तथा आकस्मिक मृत्यु को प्राप्त होगा, जो सत्य सिद्ध हुई। (पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी जी के विषय में।

संत रामपाल जी के बारे में नास्त्रेदमस द्वारा भविष्यवाणी विस्तार पूर्वक लिखी गई हैं

अपनी भविष्यवाणी के शतक पांच के अंत में तथा शतक छः के प्रारंभ में नास्त्रेदमस जी ने लिखा है कि आज अर्थात् (ई.स.) 1555 से ठीक 450 वर्ष पश्चात अर्थात् सन 2006 में एक हिन्दू सन्त (शायरन ) प्रकट होगा अर्थात सर्व जगत में उसकी चर्चा होगी। उस समय उस हिन्दू धार्मिक सन्त (शायरन) की आयु 50 व 60 वर्ष के बीच होगी। परमेश्वर ने नास्त्रेदमस को सन्त रामपाल जी महाराज के अधेड़ उम्र वाले शरीर का साक्षात्कार करवा कर चलचित्र की भांति सारी घटनाओं को दिखाया और समझाया।

■ नास्त्रेदमस जी ने 16 वीं सदी को प्रथम शतक कहा है: इस प्रकार पांचवां शतक 20 वीं सदी हुआ। नास्त्रेदमस जी ने कहा है कि वह धार्मिक गुरु नेता अर्थात् सन्त (CHYREN-शायरन ) पांचवें शतक के अंत के वर्ष में अर्थात सन् (ई.स.) 1999 में घर-घर सत्संग करना त्याग कर अर्थात् चौखटों को लांघ कर बाहर आएगा तथा अपने अनुयायियों को शास्त्रविधि अनुसार भक्तिमार्ग बताएगा। उस महान संत के बताए मार्ग से अनुयायियों को आध्यात्मिक और भौतिक लाभ होंगे। उस तत्वदृष्टा हिन्दू संत के द्वारा बताए शास्त्र प्रमाणित तत्वज्ञान को समझकर परमात्मा को चाहने वाले श्रद्धालु ऐसे अचंभित होंगे जैसे कोई गहरी नींद से जागा हो। उस तत्वदृष्टा हिंदू संत द्वारा सन् 1999 में चलाई अध्यात्मिक क्रांति ई.स. 2006 तक चलेगी। तब तक बहुसंख्या में परमात्मा चाहने वाले भक्त तत्व ज्ञान समझकर अनुयाई बनकर सुखी हो चुके होंगे। उसके पश्चात 2006 से स्वर्ण युग का प्रारंभ होगा।

71 वें अवतरण दिवस के उपलक्ष विशेष कार्यक्रम

जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के 71 वें अवतरण दिवस के उपलक्ष में 8 सितंबर 2021 को अवश्य देखिए हमारा विशेष कार्यक्रम साधना टीवी पर सुबह 11:00 बजे से 1:00 बजे तक।

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां: धरती पर अवतार-संत रामपाल जी महाराज

■महापुरुष के विषय में कबीर साहेब जी की वाणी:

कबीर, पांच सहस अरु पांच सौ, जब कलियुग बीत जाय।

महापुरुष फरमान तब, जग तारन को आय।।

हिन्दू तुर्क आदिक सबै, जेते जीव जहान।

सत्य नामकी साख गहि, पावै पद निर्बान।।

यथा सरितगण आपही, मिलैं सिन्धुमें धाय ।

सत्य सुकृत के मध्ये तिमि, सबही पंथ समाय।।

जबलगि पूरण होय नहीं, ठीकेको तिथि वार।

कपट चतुरी तबहिलों, स्वसमबेद निराधार।।

सबहिं नारि नर शुद्ध तब, जब टीका दिन अंत।

कपट चातुरी छोड़िके, शरण कबीर गहंत ।।

एक अनेक न ह्वै गयो, पुनि अनेक हो एक ।

हंस चलै सतलोक सब, सत्यनाम की टेक ।।

घर घर बोध विचार हो, दुर्मति दूर बहाय ।

कलयुग में इक है सोई, बरते सहज सुभाय ।।

कहा उग्र कह छुद्र हो, हर सबकी भवभीर।

सो समान समदृष्टि है, समरथ सत्य कबीर।।

पवित्र पुस्तक कबीर सागर के अध्याय स्वसमवेद अर्थात् सुक्ष्मवेद = बोधसागर के पृष्ठ 171 की वाणी है जिसमें परम पूज्य कबीर परमेश्वर जी ने कहा है “जिस समय कलयुग 5500 वर्ष बीत जाएगा, उस समय महापुरुष मेरी आज्ञा से विश्व उद्धार के लिए प्रकट होगा। वह महापुरुष “सतनाम” का भेदी होगा। वह अधिकारी होगा, उस सत्यनाम (सतनाम) को प्रदान करने का। विश्व के सर्व हिन्दू, मुसलमान व अन्य धर्मों में विभाजित मानव तथा अन्य प्राणी भी जो मानव जीवन प्राप्त करेंगे, वे सर्व सत्यनाम (सतनाम) की महिमा से परिचित होकर उस सच्चे नाम को उस महापुरुष (मेरे दास) से प्राप्त करके (पावैं में पद निर्बान) पूर्ण मोक्ष पद प्राप्त करेंगे। मेरे भेजे हुए उस संत के द्वारा चलाए (सत सुकृत) पवित्र वास्तविक मोक्ष मार्ग के पंथ में सर्व पंथ ऐसे विलीन हो जायेंगे जैसे ( सरितगण ) सर्व नदियाँ स्वतः ही समुद्र में मिलकर एक हो जाती हैं। केवल एक ही पंथ हो जाएगा।

जब तक वह निर्धारित समय नहीं आएगा तब तक तो मेरे द्वारा कहा गया यह स्वसम वेद निराधार लगेगा, परन्तु जब वह (ठीक का दिन) निर्धारित दिन (आवंत) आएगा, तब सर्व स्त्री-पुरुष कपट त्यागकर शुद्ध होकर कबीर (मुझ सर्वेश्वर कबीर जी) की शरण ग्रहण करेंगे। जो सर्व मानव समाज ( अनेकन ) अनेकों धर्मों में विभाजित हो चुका है, वह पुनः एक हो जाएगा। सर्व जीवात्माऐं भक्ति युक्त, विकार रहित होकर हंस बन जाएंगे अर्थात अविकारी तथा भक्त होकर सत्यलोक में चली जाऐंगी। उस समय घर-घर में परमेश्वर (कबीर परमेश्वर) का निर्मल ज्ञान चर्चा का विषय बनेगा।

सर्व मानव दुर्मति त्यागकर नेक नीति अपनाएंगे। इसी कलयुग में जो माया के लिए भाग-दौड़ मची है, वह शांत हो जाएगी। सर्व मानव शांत स्वभाव के बन जाएंगे। चाहे कोई उग्र (डाकू, चोर या अन्य कारण से समाज को दुखी करने वाला), चाहे कोई नीची जाति का हो, सर्व एक होकर रहेंगे। वह महापुरुष अर्थात तत्वदर्शी संत रूप में प्रकट सर्व के प्रति समान दृष्टि वाला ( समर्थ सत्य कबीर ) स्वयं सर्वशक्तिमान कबीर हैं ।

उपरोक्त भविष्यवाणियों के अनुसार ही आज विश्व में घटनाएँ घट रही हैं। युग परिवर्तन प्रकृति का अटल सिद्धांत है। वैदिक दर्शन के अनुसार चार युगों – सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलयुग की व्यवस्था है। जब पृथ्वी पर पापियों का एक छत्र साम्राज्य हो जाता है तब भगवान पृथ्वी पर मानव रूप में प्रकट होता है।

लेकिन कैसी विडम्बना है कि ऋषि- मुनियों, महापुरुषों व अवतारों के जीवन काल में उस समय की शासन व्यवस्था व जनता ने उनकी दिव्य बातों व आदर्शों पर ध्यान नहीं दिया और उनके अन्तर्ध्यान होने पर दोगुने उत्साह से उनकी पूजा शुरू कर पूजने लग गये। यह भी एक विडम्बना है कि हम जीवंत और समय रहते उनकी नहीं मानते अपितु उनका विरोध व अपमान ही करते रहे हैं। कुछ स्वार्थी तत्व जनता को भ्रमित करके परम सन्त को बदनाम करके बाधक बनते हैं। यह उक्ति हर युग में चरित्रार्थ होती आई है और आज भी हो रही है।

जो महापुरुष हजारों कष्टों को सहन कर अपनी तपस्या व सत्य पर अडिग रहता है, उनकी बात असत्य नहीं हो सकती। सत्य पर अडिग रहते हुए ईसा मसीह ने अपने शरीर में कीलों की भयंकर पीड़ा को झेला, सुकरात ने जहर का प्याला पिया, श्री राम तथा श्री कृष्ण जी को भी यातनाओं का शिकार होना पड़ा ।

■ ईसा मसीह ने कहा था कि:

“पृथ्वी और आकाश टल सकते हैं, सूर्य का अटल सिद्धांत है उदय-अस्त, वो भी निरस्त हो सकता है, लेकिन मेरी बातें कभी झूठी नहीं हो सकती है ।”

यदि आज के करोड़ों मानव उस परमतत्व के ज्ञाता संत को ढूंढकर, स्वीकार कर, उनके बताए अनुसार, अपनी जीवन शैली को बदल लेंगे तो पूरे विश्व में सद्भावना, आपसी भाई-चारा, दया तथा सद्भक्ति का वातावरण हो जाएगा। वर्तमान का मानव बुद्धिजीवी है इसलिए उस सन्त के विचारों को अवश्य स्वीकार करेगा।

वर्तमान में वह तत्वदर्शी संत केवल संत रामपाल जी महाराज ही हैं।

सतगुरु रामपाल जी के नेतृत्व में भारतवर्ष बनेगा विश्वगुरु

सतगुरु रामपाल जी महाराज द्वारा दिया सतज्ञान अद्वितीय है। सतगुरु के नेतृत्व में सतज्ञान के आधार पर भारतवर्ष पूरे विश्व में छा जाएगा। पूरे विश्व में सतज्ञान से भक्ति मार्ग चलेगा। पूरी धरती पर एक ही कानून होगा, कोई दुःखी नहीं रहेगा, विश्व में पूर्ण शांति होगी। विरोध करने वाले भी पश्चाताप कर तत्वज्ञान को स्वीकार करेंगे और समाज मानव धर्म का पालन करेगा। सतभक्ति मर्यादा पालन करके सब मनुष्य पूर्ण मोक्ष प्राप्त करके अपने मूल घर सतलोक जाकर अपने परमपिता कबीर साहब की छत्रछाया में सुखमय जीवन जीते हुए जन्म मृत्यु चक्र से बाहर रहेंगे ।

सतज्ञान को जानें और प्रसार करें 

अब आवश्यकता है सतगुरु रामपाल जी महाराज की शरण में आकर अपने आप को सतज्ञान बोध करने की और विभिन्न सूचना प्रौद्योगिकी संसाधनों की सहायता से संचित ज्ञान का प्रसार करने की। सतगुरु रामपाल जी महाराज का अनमोल ज्ञान “ज्ञान गंगा”, “जीने की राह” जैसी पवित्र पुस्तकों और “सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल” पर वीडियो संसाधनों का सदुपयोग करके आप न सिर्फ अपने मनुष्य जीवन के लक्ष्य की सार्थकता को सिद्ध करेंगे बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सतमार्ग खोल कर जाएंगे। यही आत्म संतुष्टि का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है जिसे प्राप्त करने के लिए मुमुक्षु अपनी दिनचर्या में अनेक निरर्थक प्रयास करते हैं।

तत्वदर्शी संत सतगुरु रामपाल जी महाराज से लें नाम दीक्षा

सभी से करबद्ध प्रार्थना है कि तत्वदर्शी संत सतगुरु रामपाल जी महाराज के अद्भुत ज्ञान को पहचानें और नाम दीक्षा लेकर अपने परिवार सहित अपना कल्याण करवाएं। कलियुग में स्वर्ण युग प्रारम्भ हो चुका है। विश्व के सभी महाद्वीपों में करोड़ों पुण्य आत्मांए तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में सतभक्ति कर सर्व विकार त्यागकर निर्मल जीवन जी रहे हैं। आप भी शीघ्र अतिशीघ्र आयें। अधिक जानकारी लिए देखिये साधना चैनल रोजाना शाम 7:30 बजे।


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