रोहतक के निगाना गांव की कहानी: बाढ़, बीमारी और उम्मीद की एक नई सुबह

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हरियाणा के रोहतक जिले का छोटा-सा गांव निगाना कुछ महीनों पहले तक ऐसी त्रासदी से गुजर रहा था, जिसने गांव के लोगों को लगभग निराशा के अंधेरे में धकेल दिया था। खेतों में पानी भरा हुआ था, घरों की दीवारें कमजोर हो रही थीं और लोगों की आंखों में भविष्य को लेकर डर साफ दिखाई दे रहा था।

गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि ऐसा मंजर उन्होंने लगभग 30 साल पहले देखा था। साल 1995 के बाद पहली बार 2025 में निगाना गांव ने इतनी भयंकर बाढ़ का सामना किया। खेत तालाब बन चुके थे, गन्ने और बाजरे की खड़ी फसलें सड़ रही थीं और किसानों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था।

लेकिन इस कहानी का एक दूसरा पहलू भी है — उम्मीद, सहयोग और परमात्मा की दया का। जब गांव के लोग हर तरफ से निराश हो चुके थे, तब एक ऐसी मदद आई जिसने पूरे गांव की तस्वीर ही बदल दी।

बाढ़ की तबाही: खेत बने तालाब, फसलें हुई बर्बाद

जब लगातार बारिश और जलभराव ने निगाना गांव को घेरा, तो खेतों में तीन से चार फुट तक पानी भर गया था। लगभग 400 से 500 एकड़ जमीन पानी में डूबी हुई थी। जहां कभी हरे-भरे खेत नजर आते थे, वहां सिर्फ पानी ही पानी दिखाई देता था। गन्ने और बाजरे की फसलें धीरे-धीरे सड़ने लगीं। कई किसानों ने बताया कि उनकी महीनों की मेहनत कुछ ही दिनों में बर्बाद होती दिखाई दे रही थी। किसान अंकित बताते हैं: “हमारे खेतों में इतना पानी भर गया था कि हमें समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या होगा। अगर पानी नहीं निकलता तो गेहूं की बिजाई बिल्कुल नहीं हो पाती और गन्ने की फसल भी खराब हो जाती।” सिर्फ खेत ही नहीं, गांव के घरों में भी पानी घुसने लगा था। कई कमरों में एक-एक फुट तक पानी भर गया था। दीवारें कमजोर होने लगीं और फर्श धंसने लगे।

गांव के लोग रात-रात भर जागकर पानी निकालने की कोशिश करते थे। लेकिन हालात इतने गंभीर थे कि उनकी कोशिशें नाकाफी साबित हो रही थीं।

बीमारी का खतरा: डेंगू ने बढ़ाई चिंता

बाढ़ की समस्या के साथ-साथ गांव में एक और बड़ा खतरा पैदा हो गया — बीमारी का। खड़े पानी की वजह से मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ गई और देखते ही देखते गांव में डेंगू के मामले बढ़ने लगे। गांव में 500 से ज्यादा डेंगू के केस सामने आ चुके थे। यह स्थिति गांव के लोगों के लिए दोहरी मार जैसी थी। एक तरफ फसलें बर्बाद हो रही थीं और दूसरी तरफ बीमारी का डर हर घर तक पहुंच चुका था। किसानों का कहना था कि उन्हें रात में नींद नहीं आती थी। उन्हें डर था कि अगर पानी नहीं निकला तो फसलें भी खत्म हो जाएंगी और बीमारी भी फैलती जाएगी।

सरकार से उम्मीद, लेकिन निराशा हाथ लगी

मुसीबत के समय गांव के लोगों ने प्रशासन और सरकार से भी मदद की उम्मीद की। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिले। कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।

गांव के लोगों के अनुसार, समय बीतता जा रहा था और पानी लगातार बढ़ता जा रहा था। किसानों को लगने लगा था कि शायद इस साल उनकी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगी।

मदद की किरण: संत रामपाल जी महाराज की पहल

जब गांव के लोगों को कहीं से समाधान नजर नहीं आया, तब उन्होंने आध्यात्मिक गुरु संत रामपाल जी महाराज से सहायता की गुहार लगाई। ग्रामीणों के अनुसार, उनकी पुकार पर बहुत जल्दी प्रतिक्रिया मिली। संत रामपाल जी महाराज की ओर से गांव की समस्या को समझते हुए तुरंत राहत कार्य शुरू कराया गया। गांव में तीन बड़ी 15 हॉर्स पावर की मोटरें भेजी गईं और लगभग 13,000 फुट लंबी 8-इंच की पाइपलाइन उपलब्ध करवाई गई।

इसके साथ ही मोटर चलाने के लिए जरूरी हर सामान — तार, फिटिंग और अन्य उपकरण भी भेजे गए ताकि पानी निकालने का काम बिना रुके लगातार चलता रहे। यह सिर्फ राहत सामग्री नहीं थी, बल्कि पूरे गांव को बाढ़ और बीमारी से बचाने की पहल थी।

दिन-रात चला पानी निकालने का अभियान

मोटर और पाइपलाइन लगने के बाद गांव में बड़े स्तर पर पानी निकालने का काम शुरू हुआ। ग्रामीण बताते हैं कि मशीनें दिन-रात लगातार चलती रहीं। खेतों और गलियों से पानी को बाहर निकालकर गांव की सीमा से दूर भेजा गया। कुछ ही दिनों में स्थिति बदलने लगी। धीरे-धीरे खेतों से पानी उतरने लगा और किसानों को उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी। करीब दो महीने के भीतर गांव की लगभग 80 से 85 प्रतिशत जमीन पूरी तरह सूख चुकी थी।

खेतों में फिर लौटी हरियाली

जब पानी पूरी तरह उतर गया, तो किसानों ने तुरंत गेहूं की बिजाई शुरू कर दी। आज वही खेत, जो कुछ समय पहले पानी में डूबे हुए थे, वहां गेहूं की हरी-भरी फसल नजर आने लगी है। सबसे बड़ी राहत यह रही कि गन्ने की वह फसल भी बच गई, जिसे किसान लगभग खो चुके थे। कई किसानों ने बताया कि अगर समय पर पानी नहीं निकाला जाता तो गन्ने की पूरी फसल नष्ट हो जाती। अब वही गन्ना मिलों तक पहुंचाया जा रहा है।

किसानों की जुबानी: “आज गांव फिर से जीवित हो गया”

गांव के किसानों का कहना है कि यह मदद उनके लिए जीवनदान जैसी साबित हुई।

किसान रामचंद्र बताते हैं: “अगर यह मदद नहीं मिलती तो हम गेहूं की बिजाई नहीं कर पाते। गन्ना भी खराब हो जाता और करोड़ों का नुकसान होता।” एक अन्य किसान ब्रह्मानंद कहते हैं: “हमने भगवान को कभी देखा नहीं था, लेकिन आज हमें ऐसा लगा कि किसी ने हमारी पुकार सच में सुन ली।”

कई किसानों ने बताया कि पहले उन्हें लगता था कि इस साल खेत खाली रह जाएंगे, लेकिन अब वे अपनी फसल को बढ़ते हुए देख रहे हैं।

मजदूरों और गांव के गरीबों को भी मिला सहारा

इस राहत कार्य का फायदा सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहा। गांव के मजदूरों को भी काम मिलने लगा। खेतों में फिर से खेती शुरू होने से मजदूरी के अवसर बढ़ गए। जिन परिवारों के घरों में पानी घुस गया था, वे भी धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौटने लगे। गांव के बुजुर्ग कहते हैं कि बाढ़ के समय पूरे गांव का जनजीवन ठहर गया था, लेकिन अब गांव फिर से जीवंत हो गया है।

भविष्य की तैयारी: पाइपलाइन को सुरक्षित रखा गया

गांव के लोगों ने दूरदर्शिता दिखाते हुए इस पाइपलाइन व्यवस्था को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने का फैसला किया है।

ग्रामीणों ने तय किया है कि फसल कटाई के बाद पाइपों को जमीन के अंदर सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि भविष्य में अगर कभी ऐसी स्थिति आए तो पानी निकालने में आसानी हो सके। इस कदम से गांव भविष्य की आपदाओं के लिए भी तैयार हो रहा है। निगाना गांव की यह कहानी सिर्फ बाढ़ से राहत की कहानी नहीं है, बल्कि यह सेवा और सहयोग की मिसाल भी है। ग्रामीणों का मानना है कि जब उन्हें कहीं से उम्मीद नहीं दिखाई दे रही थी, तब संत रामपाल जी महाराज की पहल ने उन्हें नया साहस दिया।

गांव की माताएं और बुजुर्ग कहते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार ऐसी सेवा देखी है, जहां बिना किसी स्वार्थ के करोड़ों रुपये का सामान गांव तक पहुंचाया गया।

संत रामपाल जी महाराज की कृपा से बदली निगाना की तस्वीर

निगाना गांव की यह कहानी केवल एक प्राकृतिक आपदा से उबरने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस असाधारण सहायता और करुणा का उदाहरण भी है जिसने पूरे गांव को नई जिंदगी दी। ग्रामीणों का मानना है कि यह बदलाव केवल संत रामपाल जी महाराज की कृपा और पहल से ही संभव हो पाया। जिस समय गांव के लोग चारों ओर से निराश हो चुके थे और उन्हें कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था, उस समय संत रामपाल जी महाराज ने आगे बढ़कर वह सहायता पहुंचाई जिसने गांव को बाढ़ और बीमारी की दोहरी मार से बचा लिया।

ग्रामीणों के अनुसार, इतनी बड़ी और त्वरित मदद देने का सामर्थ्य किसी और में नहीं था। वे उन्हें एक असाधारण और शक्तियुक्त संत मानते हैं, जिनके आशीर्वाद से किसानों, मजदूरों और पूरे गांव को राहत मिली। गांव के लोग यह भी कहते हैं कि संत रामपाल जी महाराज ऐसे विरले संत हैं जो समाज से दान लेने के बजाय स्वयं जरूरतमंदों को दान देकर उनकी मदद करते हैं। यही कारण है कि आज निगाना गांव का हर परिवार उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए मानता है कि उनकी सेवा और आशीर्वाद ने ही इस गांव को फिर से खुशहाली की राह पर ला खड़ा किया है।

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