National Constitution Day Video | भारतीय संविधान और भगवान के संविधान में क्या है अंतर? | SA News

Published on

spot_img

National Constitution Day Video | संविधान किसी देश का वह वैधानिक दस्तावेज होता है जो उस देश की जनता के विश्वास व उसकी आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करता है। साथ ही, नियमों, कानूनों के समुच्चय को भी संविधान कहते हैं जोकि प्रत्येक नागरिक पर लागू होता है। भारतीय संविधान, देश की सर्वोच्च विधि है। भारतीय संविधान का निर्माण जनता द्वारा चुने गए सदस्यों यानि संविधान सभा द्वारा 2 साल 11 माह 18 दिन के पश्चात् अर्थात 26 नवम्बर 1949 के दिन पूर्णरूप से बनकर तैयार हुआ। जोकि 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था। लेकिन क्या भगवान के संविधान को आप जानते हैं? भारतीय संविधान और भगवान के संविधान में क्या अंतर है? जिस तरह देश के संविधान का उल्लंघन करने से हम दंड के भागी होते हैं तो क्या भगवान के संविधान की दंड संहिता क्या कहती है? जानने के लिए देखिये वीडियो…..

#NationalConstitutionDay #ConstitutionDay #Constitution #GodConstitution #India #HindiNews #HindiNewsVideo #SANews #LatestNews

Latest articles

गाँव किरा की अंधेरे से उजाले के सफर की एक अनोखी कहानी 

हरियाणा के नूह जिले के किरा गाँव की कहानी है एक ऐसे चमत्कार की,...

बहलबा गाँव की दर्दभरी कहानी: बाढ़ की तबाही से उम्मीद की हरियाली तक

हरियाणा के रोहतक जिले का ऐतिहासिक गाँव बहलबा, जो दो पंचायतों—बहलबा और बहलबा बजान—में...

रोहतक का सैमाण गांव: जहां बाढ़ के अंधेरे के बाद उम्मीद की हरियाली लौटी

हरियाणा के रोहतक जिले की महम तहसील में स्थित सैमाण गांव… कुछ महीने पहले...

मथुरा के लठाकुरी गांव में दो साल की जल-त्रासदी का अंत: जब संत रामपाल जी महाराज ने भेजा सेवा का काफिला

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की पावन भूमि—जहां गोवर्धन और बरसाना जैसे आध्यात्मिक स्थल...
spot_img

More like this

गाँव किरा की अंधेरे से उजाले के सफर की एक अनोखी कहानी 

हरियाणा के नूह जिले के किरा गाँव की कहानी है एक ऐसे चमत्कार की,...

बहलबा गाँव की दर्दभरी कहानी: बाढ़ की तबाही से उम्मीद की हरियाली तक

हरियाणा के रोहतक जिले का ऐतिहासिक गाँव बहलबा, जो दो पंचायतों—बहलबा और बहलबा बजान—में...

रोहतक का सैमाण गांव: जहां बाढ़ के अंधेरे के बाद उम्मीद की हरियाली लौटी

हरियाणा के रोहतक जिले की महम तहसील में स्थित सैमाण गांव… कुछ महीने पहले...