संत रामपाल जी महाराज द्वारा हरियाणा के महम नगर पालिका क्षेत्र में बाढ़ पीड़ित किसानों को बड़ी राहत

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Haryana Flood: हरियाणा के रोहतक जिले के महम नगर पालिका क्षेत्र में आई बाढ़ ने स्थानीय किसानों की वर्षों की मेहनत पर पानी फेर दिया। लगातार हुई भारी वर्षा और जल निकासी की अपर्याप्त व्यवस्था के कारण लगभग 400 एकड़ से अधिक भूमि जलमग्न हो गई। खेतों में दो से ढाई फीट तक पानी भरा हुआ था, जिससे न केवल खड़ी फसलें नष्ट हो गईं बल्कि अगली बुवाई की संभावनाएं भी लगभग समाप्त हो गईं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, खेतों में कई दिनों तक पानी रुका रहा और पंपिंग की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं थी। महम और उसके आस-पास के गांवों में किसानों को फसलों के नुकसान से लेकर पशुधन के संकट तक का सामना करना पड़ा। सरकार और प्रशासन से मदद की उम्मीदें धुंधली पड़ चुकी थीं। ऐसे में लोग स्वयं के स्तर पर राहत के रास्ते खोजने लगे।

किसानों की संत रामपाल जी महाराज से अपील और आश्रम से मदद की गुहार

वार्ड नंबर एक के किसानों ने आपसी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया कि संत रामपाल जी महाराज के सतलोक आश्रम से सहायता की अपील करेंगे। 9 अक्टूबर को वार्ड के प्रतिनिधि और पूर्व पार्षद सुभाष जी के नेतृत्व में एक दल ने आश्रम पहुंचकर सहायता हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। किसानों की इस अर्जी में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि फसल बचाने और नई बुवाई के लिए उन्हें 22,000 फीट पाइप, चार मोटरें (प्रत्येक 10 हॉर्स पावर की) और संबंधित तार, स्टार्टर, फिटिंग्स की आवश्यकता है। आवेदन में यह भी बताया गया था कि जल निकासी के अभाव में किसानों की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है और समय पर सहायता ही उन्हें पुनः खड़ा कर सकती है।

तीन दिनों में पहुँची ट्रस्ट की मदद, मानव धर्म पालन का अद्भुत उदाहरण

संत रामपाल जी महाराज ने इस अपील को अत्यंत संवेदनशीलता से लिया तथा त्वरित कार्यवाही का आदेश दिया। केवल तीन दिनों के भीतर, 11 अक्टूबर को, राहत सामग्री के ट्रक महम वार्ड नंबर एक में पहुँचा।


इस सामग्री में शामिल थे –

  • चार मोटरें (10 हॉर्स पावर प्रत्येक)
  • 22,000 फीट हाई क्वालिटी पाइप (8 इंच व्यास)
  • स्टार्टर, केबल, फिक्स वाल, नट-बोल्ट और सभी आवश्यक उपकरण
  • मोटर संचालन के लिए विशेष सुरक्षा साधन

प्रत्येक वस्तु को सावधानीपूर्वक पैक कर भेजा गया ताकि परिवहन के दौरान कोई क्षति न हो। इस सहायता को देखकर किसान आश्चर्यचकित थे कि इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री इतनी शीघ्रता से उपलब्ध कराई जा सकती है।

महम के डूबे खेत और स्थानीय किसानों की प्रतिक्रियाएँ 

महम के जलमग्न खेतों की फसलें पूरी तरह सड़ चुकी थी। संत रामपाल जी महाराज जी के निर्देश पर उनके अनुयायी सामान लेकर स्वयं महम पहुँचे और अनेकों गाड़ियों में सामान भरकर महम पहुँचा और मंगलाचरण के पश्चात सेवादारों ने सेवा आरम्भ की। सभी किसानों में ना केवल धन्यवाद किया बल्कि संत रामपाल जी महाराज जी तथा उनके सेवादारों का सभी ने कोटि-कोटि धन्यवाद किया तथा बताया कि उनके लिए सरकार कुछ भी नहीं कर सकी लेकिन संत रामपाल जी महाराज जी ने उनकी प्रार्थना सुन ली और समस्या हल कर दी। 

वार्ड नंबर एक के किसानों ने इस सहायता को “मानवता की मिसाल” बताया। उन्होंने कहा कि जब सरकारी स्तर पर बार-बार आवेदन लिखने और मदद मांगने पर कोई ठोस मदद नहीं मिल पा रही थी, तब संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी भेदभाव के हर जरूरतमंद तक सहायता पहुंचाई। 

किसानों ने संत रामपाल जी महाराज जी को भगवान का रूप बताया। किसानों के अनुसार, ट्रस्ट के स्वयंसेवकों ने न केवल सामग्री दी बल्कि स्थल पर आकर तकनीकी मार्गदर्शन भी किया ताकि मोटरों और पाइपों की फिटिंग आदि सही ढंग से हो सके। स्थानीय प्रशासन ने भी इस पहल की सराहना की। अधिकारियों ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज जी के ट्रस्ट के माध्यम से मिला यह सहयोग महम क्षेत्र के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि इससे जल निकासी कार्य में तेजी आएगी और खेती की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जा सकेगी।

आश्रम की सामाजिक प्रतिबद्धता और जनसेवा की परंपरा

संत रामपाल जी महाराज के निर्देशन में अनुयायियों द्वारा चलाया जा रहा यह राहत कार्य किसी एक घटना तक सीमित नहीं है। आश्रम लंबे समय से “अन्नपूर्णा मुहिम”, “रक्तदान शिविर”, “शिक्षा सहायता” और “आपदा राहत” जैसी अनेक सामाजिक पहलों से जुड़ा हुआ है। संत रामपाल जी महाराज जी के अनुयायियों के अनुसार सेवा का यह भाव केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं बल्कि समाज में एकता, समानता और परस्पर सहयोग की भावना को मजबूत करने का माध्यम है। इस सिद्धांत के अनुसार, हर व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह दूसरे की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझे और उसकी सहायता के लिए तत्पर रहे क्योंकि सभी एक परमात्मा के बच्चे हैं। 

संत रामपाल जी महाराज जी ने किसी भी जाति, धर्म, आयु अथवा क्षेत्र के आधार पर भेदभाव नहीं किया। जिसने भी दिल से पुकारा उन्हें संत रामपाल जी महाराज जी ने भोजन, घर, सुविधा या अन्य मदद प्रदान की है।

 संत रामपाल जी महाराज का मानवधर्म 

संत रामपाल जी महाराज की शिक्षा के अनुसार जब कोई व्यक्ति दूसरों की सहायता करता है, तो वह वास्तव में ईश्वर की सेवा करता है। सभी लोग और पशु पक्षी तक एक परमेश्वर की संतानें हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में की गई यह मदद उनकी उसी विचारधारा का प्रत्यक्ष उदाहरण है। उन्होंने अपने अनुयायियों को यह निर्देश दिया है कि समाज के किसी भी वर्ग को कठिन परिस्थिति में अकेला न छोड़ा जाए। 

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इस दिशा में उनके अनुयायियों ने संत रामपाल जी महाराज जी के निर्देशन में कई बार राहत कार्य, भोजन वितरण, और मेडिकल कैम्प आयोजित कर मिसाल कायम की है। यहाँ तक कि किसानों को भी उन्होंने कहा है कि वे कितनी भी लागत के संसाधन बेहिचक माँग सकते हैं किंतु समय से खेतों से पानी को निकालकर गेहूँ की बुवाई करना आवश्यक है। 

संत रामपाल जी महाराज जी का महम को संदेश 

संत रामपाल जी महाराज जी ने महम के लिए संदेश भेजा जिसे सेवादार द्वारा पढ़कर सुनाया गया कि सभी सुविधाओं को प्रदान करने का उद्देश्य खेतों में भरा हुआ पानी निकालना है और गेहूँ की समय पर बिजाई करना है। यह कार्य छत्तीस बिरादरियों के हित में किया जाना है। यदि किसानों ने समय पर पानी नहीं निकाला और फसल की सही समय पर बुवाई करने में असफल रहे तो भविष्य में ट्रस्ट की और से कोई भी सहायता प्रदान नहीं की जाएगी। प्राकृतिक आपदायें अचानक आ जाती हैं और इनका अंदाज़ा लगाना मुश्किल होता है ऐसे में सरकार भी अपने स्तर पर जो कर सकती है वह करती है किंतु यह पर्याप्त नहीं होता ऐसे में सभी को आगे आकर मदद के लिए हाथ बढ़ाना चाहिए। 

कथा वाचक एक-एक कथा करने का लाखों- लाखों रुपए लेते हैं ऐसे में उन्हें आकर किसानों की मदद करनी चाहिए ताकि समाज का भला हो सके।

किसानों की मदद करने से बड़ा कोई पुण्य नहीं है जो संत रामपाल जी महाराज बखूबी कर रहे हैं। यह मोटरें और पाइप संत रामपाल जी महाराज ने हमेशा के लिए इस गांव को प्रदान की हैं तथा भविष्य में कभी इसी परिस्थति आने पर वे अपनी मदद स्वयं कर सकेंगे। 

इसके अतिरिक्त किसी भी वस्तु की आवश्यकता होती है तो वे संत रामपाल जी महाराज जी के चरणों में बेहिचक प्रार्थना लगा सकते हैं और उनकी मदद संत रामपाल आई महाराज आई द्वारा इसी तरह उपलब्ध करवाई जाएगी। जलमग्न खेतों का एक वीडियो बना लिया गया है तथा पानी निकालने के बाद दूसरा वीडियो बनाया जाएगा और बिजाई के बाद लहलहाती फसलों का तीसरा वीडियो बनाकर आश्रमों में संगत को दिखाया जाएगा ताकि उन्हें और भी दृढ़ विश्वास हो सके।

महम क्षेत्र में फिर जगी उम्मीद की किरण

बाढ़ के कारण निराश हो चुके किसानों में अब नई ऊर्जा और उम्मीद का संचार हुआ है। जल निकासी कार्य के आरंभ होते ही खेतों में कामकाज फिर से शुरू हो गया। किसान अब रबी सीजन की तैयारी में जुटे हैं। जिन खेतों में महीनों तक पानी भरा रहा, वे अब धीरे-धीरे सूखने लगे हैं और भूमि पुनः उपजाऊ बनने की दिशा में है। स्थानीय लोग मानते हैं कि यदि यह सहायता समय पर नहीं मिलती, तो न केवल इस वर्ष की फसल बल्कि आगामी सीजन भी खतरे में पड़ सकता था। अब स्थिति नियंत्रण में है और किसान आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वे गेहूँ की बिजाई सही ढंग से करने के लिए अग्रसर हो चुके हैं।

सच्ची सरकार और भगवान हैं संत रामपाल जी महाराज: महम वासी 

महम नगर पालिका वार्ड नंबर एक की यह घटना इस बात का सशक्त प्रमाण है कि जब स्वयं परमात्मा साथ हो तो किसी भी आपदा का सामना किया जा सकता है। संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई सहायता केवल भौतिक संसाधन नहीं बल्कि सेवा तथा करुणा का प्रतीक है। महम के किसान इस सहयोग के लिए न केवल संत रामपाल जी महाराज के ना केवल आभारी हैं बल्कि उनके अनुसार संत रामपाल जी महाराज जी ही सच्ची सरकार हैं और उनके लिए भगवान हैं। 

संत रामपाल जी महाराज जी ने किसान यानी अन्नदाता की मदद की है और यह दिखा दिया है संत रामपाल जी महाराज जी ही सच्चे संत हैं जिन्होंने अपना तन, मन, धन परमात्मा के बच्चों को समर्पित कर दिया। करोड़ों की मदद करना एक साधारण संत के वश की बात नहीं है संत रामपाल जी निश्चित रूप से परमात्मा का ही रूप हैं। संत रामपाल जी महाराज एकमात्र ऐसे संत हैं जो अपने सत्संग में दिए गए उपदेशों पर चलकर स्वयं एक उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। समूचे विश्व में उन्होंने सोती हुई करुणा, सेवा और निस्वार्थ मानवता के धर्म को जगाया है। 

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