रोहतक जिले का मदीना गांव कोई साधारण गांव नहीं है। लगभग 20,000 की आबादी वाला यह क्षेत्र पिछले 30 वर्षों से जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रहा था। यहां की उपजाऊ भूमि, जो कभी किसानों के लिए जीवन का आधार थी, धीरे-धीरे बदबूदार काले पानी और काई से ढककर बंजर होती जा रही थी।
किसान अपनी पुश्तैनी जमीन को अपनी आंखों के सामने बर्बाद होते देख रहे थे। वर्षों तक लगातार जलभराव के कारण खेती लगभग असंभव हो चुकी थी। खेतों में 2.5 से 5 फीट तक पानी भरा रहता था और हालात इतने खराब हो चुके थे कि लोगों की उम्मीदें भी टूटने लगी थीं।
इसी कठिन समय में संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन और उनके आदेशानुसार की गई सेवा गांव के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई। यह केवल जल निकासी का कार्य नहीं था, बल्कि एक ऐसे गांव को दोबारा जीवन देने का प्रयास था, जो दशकों से संघर्ष कर रहा था।
जब व्यवस्था ने छोड़ा साथ, तब मिला स्थायी समाधान
मदीना गांव की समस्या अत्यंत गंभीर थी। लगभग 1000 एकड़ से अधिक भूमि जलभराव की चपेट में थी। किसानों की फसलें लगातार खराब हो रही थीं और जमीन की उत्पादकता भी प्रभावित हो चुकी थी।
गांव को इससे पहले भी संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार सहायता प्रदान की गई थी, जिसके अंतर्गत 9000 फुट पाइप और दो मोटरें उपलब्ध कराई गई थीं। लेकिन जलभराव की स्थिति इतनी व्यापक थी कि अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता महसूस हुई।
गांव के सरपंच ने दोबारा प्रार्थना की। ग्रामीणों को लगा कि शायद लंबी प्रक्रिया या जांच के बाद सहायता मिलेगी, लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने उनकी स्थिति को समझते हुए तुरंत राहत का दूसरा काफिला भेजने का आदेश दिया।
इस बार गांव के लिए 7000 फुट अतिरिक्त पाइप और 15 HP की दो और शक्तिशाली मोटरें भेजी गईं। इसके बाद गांव में कुल 16,000 फुट पाइपलाइन और चार बड़ी मोटरें दिन-रात कार्य करने लगीं।
राहत सामग्री का विस्तृत विवरण
संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन और उनके आदेशानुसार मदीना गांव को निम्नलिखित सहायता प्रदान की गई:
| क्रम संख्या | सामग्री | विवरण |
| 1 | कुल पाइप लाइन | 16,000 फुट |
| 2 | शक्तिशाली मोटरें | 4 मोटरें (प्रत्येक 15 HP) |
| 3 | फिटिंग सामग्री | नट-बोल्ट और संपूर्ण फिटिंग सामग्री |
| 4 | प्रभावित क्षेत्रफल | 1000 एकड़ से अधिक जलमग्न भूमि |
यह सहायता केवल अस्थायी राहत के लिए नहीं थी, बल्कि जल निकासी की एक व्यवस्थित और प्रभावी व्यवस्था तैयार करने के उद्देश्य से दी गई थी।
“मरने की कगार पर था किसान” — ग्रामीणों की जुबानी
गणेश मंदिर के आसपास का क्षेत्र कभी सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में गिना जाता था। वहां वर्षों तक 5 फुट गहरा सड़ा हुआ पानी जमा रहता था। आज वही क्षेत्र ट्रैक्टरों की आवाज से गूंज रहा है।
गांव के निवासी राजेश और पुजारी राम रतन पंडित बताते हैं कि स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी कि किसानों के पास खाने के लिए अनाज तक नहीं बचा था। पशुओं के लिए चारा खत्म हो चुका था और कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा था।
ग्रामीणों के अनुसार, संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार भेजी गई मशीनों और पाइपलाइन ने कुछ ही हफ्तों में वह कार्य कर दिखाया, जिसकी उम्मीद वर्षों से नहीं थी।
कुछ ही समय में बदली गांव की तस्वीर
सरपंच जग राजा शर्मा भावुक होकर बताते हैं कि जो कार्य वर्षों तक नहीं हो पाया, वह संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में कुछ ही समय में संभव हो गया।
आज गांव की लगभग 100% जमीन से पानी निकल चुका है और 90% से अधिक खेतों में गेहूं की बिजाई सफलतापूर्वक हो चुकी है। जहां पहले समुद्र जैसा दृश्य दिखाई देता था, वहां अब खेतों में हरियाली लौटने लगी है।
यह परिवर्तन केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव के लोगों के जीवन में भी नई ऊर्जा और आत्मविश्वास लेकर आया है।
केवल मदीना ही नहीं, कई राज्यों में चल रही सेवा
ग्रामीणों का कहना है कि संत रामपाल जी महाराज केवल मदीना गांव ही नहीं, बल्कि हरियाणा, पंजाब और राजस्थान सहित कई क्षेत्रों में बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता कर रहे हैं।
संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन और उनके आदेशानुसार चल रही यह सेवा निस्वार्थ भाव से मानवता के हित में कार्य कर रही है। उनके सेवादारों का स्पष्ट उद्देश्य था:
“सामान चाहे कितना भी लगे, लेकिन गांव का पानी निकलना चाहिए।”
इसी सेवा भावना के कारण महम चौबीसी के ऐतिहासिक चबूतरे पर संत रामपाल जी महाराज को “मानवता रक्षक” सम्मान से भी सम्मानित किया गया।
मानवता की सच्ची मिसाल
मदीना गांव की यह कहानी केवल बाढ़ राहत की कहानी नहीं है। यह उस सेवा भावना का उदाहरण है, जहां किसी जरूरतमंद का दर्द देखकर तुरंत सहायता पहुंचाई गई।
संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन और उनके आदेशानुसार की गई इस सहायता ने किसानों को केवल आर्थिक राहत नहीं दी, बल्कि उन्हें यह विश्वास भी दिलाया कि कठिन समय में मानवता अभी भी जीवित है।
आज मदीना गांव का हर घर, हर किसान और हर बुजुर्ग उस सहायता के लिए कृतज्ञ है, जिसने 30 वर्षों से जलभराव की मार झेल रहे गांव को नई जिंदगी दी।
जहां कभी बदबू, गंदगी और निराशा थी, वहां आज खेतों में फिर से हरियाली लौट रही है। यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि जब सेवा निस्वार्थ भाव से की जाती है, तो वह केवल समस्याएं हल नहीं करती, बल्कि पूरे समाज के भविष्य को बदल देती है।



