Lunar Eclipse 2021: वर्ष 2021 में 4 ग्रहण पड़ने हैं, जिसमें दो सूर्यग्रहण और दो चंद्रग्रहण पड़ेंगे। वर्ष का पहला चंद्रग्रहण 26 मई 2021 वैशाख पूर्णिमा को होगा। सतभक्ति से करें जीवन के हर ग्रहण को खत्म। 

Lunar Eclipse 2021:  मुख्य बिंदु

  • वर्ष 2021 में 4 ग्रहण पड़ने हैं, दो सूर्यग्रहण और दो चंद्रग्रहण
  • पहला चंद्रग्रहण 26 मई को
  • क्या होता है चंद्र ग्रहण
  • चंद्र ग्रहण से जुड़ी वर्जनाएँ और सतभक्ति का प्रभाव
  • सतभक्ति से सभी आपदाएं होती हैं  समाप्त  

Lunar Eclipse 2021: वर्ष 2021 में कितने ग्रहण होंगे?

वर्ष 2021 अर्थात संवत 2078 में कुल मिलाकर चार ग्रहण लगेंगे। इस वर्ष 2 सूर्यग्रहण और 2 चंद्रग्रहण होंगे। इसमें से एक भी ग्रहण भारत के पूरे भू भाग पर दिखाई नहीं देंगे।

वर्ष 2021 के चंद्रग्रहण कब कब होंगे?

वर्ष 2021 का पहला और तीसरा ग्रहण चंद्रग्रहण होगा। ये चंद्रग्रहण  26 मई और  19 नवंबर को होंगे । 

Lunar Eclipse 2021:  कब होगा 2021 का पहला चंद्रग्रहण?

वर्ष 2021 का पहला चंद्रग्रहण होगा 26 मई को। इसे भारत के सभी हिस्सों में नहीं देखा जा सकेगा। चंद्र  ग्रहण भारत के पूर्वी राज्यों अरुणाचल, मिजोरम, नागालैंड, पूर्वी उड़ीसा, मणिपुर, त्रिपुरा, असम और मेघालय में देखा जा सकेगा। भारत के अलावा यह जापान, बांग्लादेश, सिंगापुर, बर्मा, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस, उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका, प्रशांत व हिन्द महासागर में देखा जा सकेगा। ग्रहण का समय 26 मई दोपहर 2:18 मिनट से शुरू होकर 7:19 मिनट तक रहेगा।

Lunar Eclipse 2021: कब होगा वर्ष का दूसरा चंद्रग्रहण?

वर्ष 2021 का दूसरा चंद्रग्रहण नवंबर माह में 19 तारीख दिन शुक्रवार को होगा। यह चंद्रग्रहण दिन के 11:34 से सायं 17:33 तक रहेगा। यह ग्रहण भारत के सम्पूर्ण भूभाग में नहीं होगा। यह चंद्रग्रहण भारत के पूर्वोत्तर भाग में  समाप्त होने के समय में  दिखेगा। 

Eclipse 2021: 2021 के सूर्यग्रहण 

वर्ष 2021 का दूसरा ग्रहण सूर्य ग्रहण होगा जो कि 10 जून 2021 बृहस्पतिवार के दिन दोपहर बाद 1:43 से शाम 06:41 बजे तक रहेगा। लेकिन यह सूर्य ग्रहण भारत के किसी भी भाग से नहीं दिखाई देगा। 

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इस वर्ष का आखिरी और चौथा ग्रहण सूर्य ग्रहण 04 दिसम्बर 2021 को शनिवार के दिन भारतीय समय के अनुसार दिन के 10:59 से 03:07 तक लगेगा। यह सूर्य ग्रहण दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण हिन्द महासागर आदि क्षेत्रों में प्रखरता से दिखेगा। यह ग्रहण भारत के किसी भाग में नहीं देखा जा सकेगा। 

Lunar Eclipse 2021: क्या है चंद्रग्रहण

सर्व विदित है कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमते हुए सूर्य के चक्कर लगाती है और चंद्रमा पृथ्वी के। अपनी परीधि में घूर्णन करते हुए जब ये तीनों ग्रह एक सीधी रेखा में आ जाते हैं एवं पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ने लगती है तब ग्रहण होता है। सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की ऐसी स्थिति को चंद्र  ग्रहण कहा जाता है।

चंद्रग्रहण से जुड़ी वर्जनाएँ और सतभक्ति

चंद्रग्रहण से बहुत सी वर्जनाएँ जुड़ी हुई हैं जैसे कई कार्यों पर रोक लगना, सूतक मानना, बाहर न आना जाना आदि। ये सभी मान्यताएँ केवल मान्यताएँ ही हैं और ग्रहण एक खगोलीय घटना है। वास्तविक जीवन में व्यक्ति अपने कर्मफल भोगता और उसके ही कारण उसके जीवन में सुख, दुख, बीमारियाँ आतीं हैं। चूँकि ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना है, इसे ज्योतिष भिन्न भिन्न राशियों और उन पर प्रभाव से भी जोड़कर देखते हैं। सतभक्ति सभी प्रकार के ग्रहण चाहे वो जीवन में हों या भाग्य में, से बचाती है। पूर्ण परमेश्वर सच्चे साधक की रक्षा स्वयं करता है। पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब हैं इस बात की शास्त्र गवाही देते हैं। इस लोक में सबकुछ फना अर्थात नाशवान है। राजा, गांव, शहर, जीव-जंतु, वन, दरिया सब नाशवान है। शिवजी का कैलाश पर्वत तक नाशवान है। यह सब कृत्रिम संसार सब झूठ है। अतः तत्वदर्शी संत से नामदीक्षा लेकर श्वांसों का स्मरण करके  अविनाशी परमेश्वर की भक्ति करें।

गरीब, दृष्टि पड़े सो फना है, धर अम्बर कैलाश।

कृत्रिम बाजी झूठ है, सुरति समोवो श्वास ||

क्या है सतभक्ति?

सतभक्ति मंदिर जाना, उपवास करना और शास्त्रों का अध्ययन करना कतई नहीं है। सतभक्ति है गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में कहे अनुसार पूर्ण तत्वदर्शी संत की शरण खोजना और उससे अध्याय 17 श्लोक 23 में दिए तीन मन्त्रों को प्राप्त कर उनका जाप करना है। सतभक्ति केवल पूर्ण तत्वदर्शी संत ही समझा सकता है। वही शास्त्रानुकूल भक्ति बताते हैं और मोक्ष प्राप्त करवाते हैं। याद रखें कि सतभक्ति से केवल मोक्ष प्राप्ति नहीं होगी बल्कि इस लोक के सभी सुख और इन ग्रहण, सूतक, देवी-देवताओं से होने वाले कष्टों से भी राहत मिलती है। राहु-केतु हो या अकाल मृत्यु, पूर्ण तत्वदर्शी संत की शरण में रहने वाला इनकी चपेट में कभी नहीं आता। तत्वदर्शी संत पूरे विश्व में एक समय में एक ही होता है। 

जगतगुरु रामपाल जी से नामदीक्षा लेकर असाध्य कष्टों का निवारण करवाएं

वर्तमान में एकमात्र तत्वदर्शी संत जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज हैं उनसे नाम दीक्षा लेकर अपने हर तरह के असाध्य कष्टों का निवारण करवाएं एवं भक्ति करके मोक्ष का रास्ता चुनें। यह समय विनाशकारी समय है और बिना तत्वदर्शी संत की शरण के जीवन, बिना पानी के कुएं की भाँति है। इस समय तत्वदर्शी संत की शरण में रहकर मर्यादा में भक्ति करने वाले ही बच सकेंगे। अधिक जानकारी के लिए देखें सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल