30 साल के जलभराव से मुक्त हुआ किरावता गांव: संत रामपाल जी महाराज बने ग्रामीणों के भाग्य विधाता

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डीग, राजस्थान – राजस्थान के डीग जिले की कामां तहसील का किरावता गांव आज एक ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बना है। यह कहानी किसी साधारण गांव की नहीं, बल्कि पिछले 30 वर्षों से एक दर्दनाक त्रासदी और ‘बनवास’ झेल रहे ग्रामीणों की है, जिन्हें आखिरकार एक नया जीवन मिला है।

त्रासदी और बेबसी का वो 30 साल का सफर

किरावता गांव के हालात पिछले तीन दशकों से किसी भयानक आपदा से कम नहीं थे। सन 1996 से गांव की लगभग 80% कृषि भूमि पूरी तरह जलमग्न (पानी में डूबी) थी। स्थानीय किसान बताते हैं कि पिछले 30 सालों से खेतों में फसलों की बिजाई तक नहीं हो पाई थी।

हालात इस कदर बदतर हो चुके थे कि अपनी खुद की उपजाऊ जमीन होने के बावजूद छोटे किसान दाने-दाने को मोहताज हो गए थे। अपने परिवारों का पेट पालने के लिए ग्रामीण अपने घर-बार छोड़कर शहरों में, होटलों और फैक्ट्रियों में बंधुआ मजदूरी करने के लिए पलायन करने को मजबूर थे।

“हम प्रशासनिक अधिकारियों, एसडीएम और कलेक्टर के दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते बूढ़े हो गए, लेकिन सरकारी तंत्र से हमें कागजी फाइलों के सिवा कुछ हासिल नहीं हुआ।” – गांव के सरपंच और ग्रामीण

आखिरी उम्मीद: संत रामपाल जी महाराज के दरबार में अर्जी

जब सरकारी व्यवस्था ने किरावता गांव की किस्मत को पूरी तरह पानी के हवाले कर दिया, तब निराश होकर गांव की पंचायत ने एक आखिरी उम्मीद के साथ संत रामपाल जी महाराज के दरबार में गुहार लगाने का फैसला किया। ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के भरतपुर स्थित कार्यालय में अपनी प्रार्थना सौंपी और अपनी आपबीती बताई।

संत रामपाल जी महाराज ने इस प्रार्थना को तुरंत स्वीकार कर लिया। उन्होंने बिना किसी देरी के मात्र तीन दिनों के भीतर राहत का एक विशाल काफिला किरावता गांव की गलियों में भेज दिया, जिसे देखकर ग्रामीण हैरान रह गए।

अभूतपूर्व सहायता और पूरी तरह मुफ्त समाधान

गांव को इस 30 साल पुराने गंभीर संकट से स्थाई रूप से निकालने के लिए संत रामपाल जी महाराज ने सीधे तौर पर मोर्चा संभाला और निम्नलिखित भारी मशीनरी व उपकरण गांव भिजवाए:

  • मजबूत पाइपलाइन: 2800 फुट लंबी और 8 इंच मोटी भारी पाइप।
  • विशाल मोटरें: पानी खींचने के लिए दो बड़ी मोटरें (एक 20 HP और एक 10 HP)।
  • अतिरिक्त उपकरण: एक शक्तिशाली ट्रैक्टर कपलिंग सेट पंखा।

संत रामपाल जी महाराज की असली करुणा तब दिखाई दी जब उन्हें पता चला कि गांव में बिजली की भारी किल्लत है। उन्होंने तुरंत आदेश दिया कि इन भारी मशीनों को चलाने के लिए जनरेटर का किराया और ट्रैक्टर व जनरेटर में लगने वाले डीजल का सारा खर्च भी आश्रम ही वहन करेगा। 

उन्होंने स्टार्टर से लेकर हर छोटा-बड़ा नट-बोल्ट तक साथ पहुंचाया ताकि ग्राम पंचायत को अपनी जेब से ₹1 भी खर्च न करना पड़े।

चमत्कारिक प्रभाव: 2 महीने में बदली जमीनी हकीकत

आज इस ऐतिहासिक मदद के करीब 2 महीने बाद किरावता गांव की जमीनी हकीकत किसी खूबसूरत सपने जैसी बदल चुकी है। संत रामपाल जी महाराज के इस ठोस और योजनाबद्ध प्रयास से गांव का 100% पानी बाहर निकाला जा चुका है।

किसानों ने अब हजारों बीघा जमीन पर गेहूं और सरसों की बिजाई का काम सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है। जो खेत कभी पानी में डूबे रहते थे, आज वहां फसलें लहलहा रही हैं। महिलाएं खुशी के गीत गाते हुए खेतों में काम कर रही हैं। ग्रामीणों ने इन पाइपों को भविष्य की सुरक्षा के लिए एक अनमोल धरोहर की तरह संभाल कर रख लिया है।

“हमारे लिए तो वही भगवान हैं” — ग्रामीणों की जुबानी

हमारी टीम ने जब गांव के खेतों का जायजा लिया, तो वहां काम कर रहे लोगों के चेहरों पर एक अलग ही सुकून और खुशी दिखाई दी।

पूरे गांव के बुजुर्ग और युवा आज संत रामपाल जी महाराज का जयकारा लगाकर उनका सत्कार कर रहे हैं। ग्रामीणों का उत्साह साफ बता रहा है कि जो लोग रोजी-रोटी के लिए पलायन कर गए थे, वे अब वापस अपने गांव लौट रहे हैं।

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