हरियाणा के हिसार जिले का खोखा गांव कुछ समय पहले भीषण बाढ़ और जलभराव की समस्या से जूझ रहा था। लगातार हुई बारिश के कारण गांव के खेतों, रास्तों और कई इलाकों में पानी भर गया था। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि गांव की लगभग 700 एकड़ कृषि भूमि पानी में डूब गई। कई जगहों पर पानी की गहराई चार से पांच फीट तक पहुंच गई थी, जिससे खेती पूरी तरह ठप हो गई थी।
खेतों में खड़ी फसलें नष्ट हो गईं और किसानों के सामने अगली फसल बोने का संकट खड़ा हो गया। कई घरों और गांव के स्कूल में भी पानी घुस गया, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने लगी। गांव का सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया और लोग लंबे समय तक इस प्राकृतिक आपदा से जूझते रहे।
ऐसे कठिन समय में गांव के किसानों और ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह थी कि यदि जल्द पानी नहीं निकला, तो आने वाले समय में खेती करना भी संभव नहीं रहेगा। इसी संकट के समय संत रामपाल जी महाराज ने किसानों की मदद की और गांव के लिए राहत का रास्ता खोला।
बाढ़ से जूझता रहा पूरा गांव
लगातार कई दिनों तक हुई भारी बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया और वह लंबे समय तक निकल नहीं पाया। ग्रामीणों के अनुसार कई महीनों तक गांव का जनजीवन प्रभावित रहा। खेतों के अलावा गांव के रास्तों में भी पानी भर गया था, जिससे आवागमन मुश्किल हो गया।
पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए कई परिवारों को उन्हें दूसरे स्थानों पर भेजना पड़ा। किसानों के लिए यह समय बेहद कठिन था क्योंकि खेती ही उनकी आय का मुख्य साधन है। फसल नष्ट होने के कारण आर्थिक संकट भी बढ़ने लगा।
ग्रामीणों ने की संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना
जब गांव वालों को कहीं से प्रभावी सहायता नहीं मिली, तो गांव की पंचायत और कई किसान संत रामपाल जी महाराज के पास अपनी समस्या लेकर पहुंचे।
ग्रामीणों ने बताया कि खेतों में इतना पानी भर गया है कि खेती करना असंभव हो गया है। यदि जल्द ही पानी नहीं निकला तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा और पूरे गांव की आजीविका प्रभावित हो जाएगी।
ग्रामीणों की यह प्रार्थना सुनकर संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत किसानों की मदद करने का निर्णय लिया और तुरंत आवश्यक संसाधन गांव तक पहुंचाने की व्यवस्था की।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई सहायता
अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत खोखा गांव के किसानों की मदद के लिए जरूरी संसाधन गांव तक भेजे गए, ताकि खेतों से पानी निकाला जा सके और किसान फिर से खेती शुरू कर सकें।
यह सहायता दो चरणों में गांव तक पहुंचाई गई। गांव को दी गई मुख्य सहायता इस प्रकार थी:
| क्रमांक | सहायता सामग्री | विवरण |
| 1 | पाइपलाइन | लगभग 28100 फीट 8 इंच की पाइपलाइन |
| 2 | मोटरें | कुल 5 शक्तिशाली मोटरें |
| 3 | 15 हॉर्सपावर मोटर | 4 मोटर (15 एचपी) |
| 4 | 10 हॉर्सपावर मोटर | 1 मोटर (10 एचपी) |
| 5 | स्टार्टर व केबल | मोटरों को चलाने के लिए आवश्यक उपकरण |
| 6 | असेंबली सामग्री | पाइपलाइन लगाने के लिए नट-बोल्ट और अन्य उपकरण |
इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य यही था कि गांव में जमा पानी को जल्दी से जल्दी खेतों से बाहर निकाला जा सके।
लगातार चलती रहीं मोटरें, खेतों से निकला पानी
जब पाइपलाइन और मोटरें गांव में पहुंचीं, तो किसानों और सेवादारों ने मिलकर पानी निकालने का काम शुरू किया। यह कार्य आसान नहीं था क्योंकि खेतों में कई फीट तक पानी जमा था।
कई दिनों तक लगातार मोटरें चलती रहीं। धीरे-धीरे खेतों में जमा पानी बाहर निकलने लगा। जहां पहले चार से पांच फीट तक पानी भरा था, वहां समय के साथ जमीन सूखने लगी।
लगभग एक से डेढ़ महीने की लगातार मेहनत के बाद अधिकांश खेतों से पानी निकाल दिया गया। इससे किसानों को राहत मिली और खेती दोबारा शुरू करने का अवसर मिला।
किसानों और ग्रामीणों की प्रतिक्रिया
गांव के कई किसानों ने बताया कि बाढ़ के समय उनकी स्थिति बेहद कठिन हो गई थी। कुछ घरों में पानी घुस गया था और कई परिवारों को अस्थायी रूप से अन्य जगहों पर रहना पड़ा।
एक किसान ने बताया कि उनके खेतों में चार से पांच फीट पानी भरा हुआ था और उन्हें लगा कि अब खेती करना संभव नहीं रहेगा। लेकिन संत रामपाल जी महाराज द्वारा अन्नपूर्णा मुहिम के तहत भेजी गई मोटर और पाइपलाइन की मदद से खेतों से पानी निकल गया और अब वे फिर से खेती कर पा रहे हैं।
गांव की बुजुर्ग महिला शकुंतला ने बताया कि उस समय गांव में बहुत परेशानी थी और कोई समाधान नहीं मिल रहा था। उन्होंने कहा कि संत रामपाल जी महाराज की सहायता से गांव की स्थिति बदल गई और लोगों को राहत मिली।
गांव में फिर लौटी हरियाली
आज खोखा गांव की स्थिति पहले से काफी बेहतर हो चुकी है। जहां कुछ समय पहले तक खेतों में पानी भरा हुआ था, वहीं अब कई खेतों में गेहूं और सरसों की बुवाई हो चुकी है और फसलें उगने लगी हैं।
गांव का स्कूल भी अब सामान्य रूप से चल रहा है और बच्चे फिर से पढ़ाई कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर मिली इस सहायता ने न केवल खेतों को बचाया बल्कि पूरे गांव में नई उम्मीद को भी जगा दिया।
अन्नपूर्णा मुहिम से बदली गांव की तस्वीर
खोखा गांव की यह कहानी केवल जलनिकासी की नहीं है, बल्कि उस उम्मीद की कहानी है जो कठिन समय में भी जीवित रही। संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत किसानों की मदद करके यह दिखाया कि समय पर किया गया सहयोग पूरे गांव का भविष्य बदल सकता है।
आज खोखा गांव के किसान फिर से अपने खेतों में काम कर रहे हैं और आने वाली फसल के लिए आशावान हैं। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि सही समय पर मिली सहायता किसी भी संकट को अवसर में बदल सकती है।



