हरियाणा के हांसी जिले के बाढ़ प्रभावित खरखड़ा/ खरखरा गांव में ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के अंतर्गत तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित राहत अभियान के तहत मोटर और पाइपलाइन लेकर पहुंचे वाहनों के प्रवेश के दौरान भारी भीड़ उमड़ी। ग्रामीणों, पंचायत सदस्यों और किसानों ने बताया कि महीनों से खेतों में पानी भरा रहने से पिछली फसलें नष्ट हो गई थीं और अगली बुआई पर भी संकट मंडरा रहा था।
मौके पर आठ इंच व्यास की 8,800 फुट पाइपलाइन, दो 15 एचपी मोटर, स्टार्टर, वायरिंग तथा नट-बोल्ट उपलब्ध कराए गए। ट्रकों के साथ ट्रैक्टरों और मोटरसाइकिलों का काफिला चला, जबकि ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों, मालाओं और सार्वजनिक सभाओं के साथ स्वागत किया।
ग्रामीणों ने बताया कि जलनिकासी के लिए तत्काल सहायता मांगने हेतु खरखड़ा से प्रतिनिधिमंडल संत रामपाल जी महाराज जी की मुनिंदर धर्मार्थ ट्रस्ट के पास पहले लिखित प्रार्थना-पत्र लेकर गया था।
प्रमुख बिंदु: हांसी के खरखड़ा में बाढ़ राहत
- हांसी जिले का खरखड़ा गांव कृषि भूमि में बाढ़ से प्रभावित था।
- तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत सहायता प्रदान की।
- राहत सामग्री में आठ इंच की 8,800 फुट पाइपलाइन और दो 15 एचपी मोटर शामिल थीं।
- ट्रक और ट्रैक्टर लेकर पहुंचे काफिले का सार्वजनिक जमावड़े के बीच स्वागत किया गया।
- ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने स्वीकृति पत्रों पर हस्ताक्षर किए और स्मृति-चिह्न भेंट किया।
- भविष्य की सहायता और उपकरणों के उपयोग की शर्तें सार्वजनिक रूप से पढ़कर सुनाई गईं।
सार्वजनिक सभा के साथ राहत काफिले का स्वागत
निवासियों ने बताया कि खरखड़ा के कृषि क्षेत्रों में बाढ़ का पानी भर जाने से बुआई रुक गई थी और खड़ी फसलें भी नष्ट हो गई थीं। जब राहत वाहन गांव की सीमा पर पहुंचे तो ढोल-नगाड़ों के बीच मोटरसाइकिलें और ट्रैक्टर आगे बढ़े। युवा और बुजुर्ग ग्रामीण अस्थायी द्वार पर एकत्र हुए और ट्रकों को बस्तियों तक ले गए।
काफिले के साथ आए सेवादारों ने कहा कि आगे नुकसान रोकने और किसानों को फिर से खेती शुरू करने में मदद के लिए यह सामग्री भेजी गई है। मोटर और पाइपलाइन से लदे ट्रक-ट्रैक्टर गांव की गलियों में कतारबद्ध खड़े रहे और ग्रामीणों ने मालाओं से स्वागत किया।
सभा में वक्ताओं ने बताया कि इसी तरह की राहत कार्रवाइयां सैकड़ों बाढ़ प्रभावित गांवों में की जा चुकी हैं और खरखड़ा भी उसी निरंतर अभियान का हिस्सा है।
तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का करुणामय निर्देश
तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के पावन निर्देशों के अनुसार, जिन गांवों को सहायता मिली है, वहां मोटर और पाइपलाइन जैसी राहत सामग्री का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी किसान का खेत जलमग्न न रहे और समय पर अगली फसल बोई जा सके। उनके आदेश में यह भी कहा गया है कि आवश्यकता पड़ने पर और सामग्री मांगी जा सकती है, लेकिन किसी भी स्थिति में पानी जमा नहीं रहना चाहिए।
संत जी ने ग्रामीणों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह सहायता परमात्मा कबीर जी की कृपा से स्थायी समाधान बने। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि यदि संसाधनों का सही उपयोग नहीं हुआ और जलनिकासी नहीं की गई तो भविष्य में सहायता रोकी जा सकती है। इस संदेश के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज ने बताया कि सच्ची भक्ति का अर्थ समय पर सेवा, अनुशासन और मानवता के प्रति उत्तरदायित्व है।
उपकरणों का विवरण और शर्तों की सार्वजनिक घोषणा
सेवादारों ने बताया कि राहत पैकेज में शामिल थे:-
- आठ इंच की 8,800 फुट पाइपलाइन
- दो 15 एचपी मोटर
- स्टार्टर, विद्युत वायरिंग और फास्टनिंग सामग्री

उन्होंने कहा कि इनसे जलभराव वाले खेतों की स्थायी निकासी की जाएगी। भक्तों ने यह भी पढ़कर सुनाया कि जलनिकासी से पहले ड्रोन रिकॉर्डिंग की गई है और बाद में दो और रिकॉर्डिंग होंगी, एक पानी निकलने के बाद और दूसरी फसल उगने पर। ये वीडियो धार्मिक समागमों और सतलोक आश्रमों में दिखाए जाएंगे, ताकि दान की गई राशि के उपयोग की जानकारी दी जा सके।
ग्राम पंचायत के समक्ष लिखित अपील भी पढ़ी गई, जिसके बाद गांव के प्रतिनिधियों ने उपकरण प्राप्त होने और निर्धारित शर्तों का पालन करने की सहमति दर्शाते हुए हस्ताक्षर किए।
किसानों ने नुकसान और तात्कालिकता बताई
स्थानीय निवासियों ने मौके पर रिकॉर्ड किए गए साक्षात्कारों में भारी कृषि हानि का उल्लेख किया।
एक ग्रामीण ने कहा कि 250 से 300 एकड़ भूमि महीनों से जलमग्न थी, जिससे खेती संभव नहीं हो सकी। दूसरे ने बताया कि पिछली फसलें पहले ही नष्ट हो चुकी थीं और मोटर व पाइपलाइन के बिना गेहूं की बुआई असंभव थी।
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ग्रामीणों के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में पानी तीन से पांच फुट तक भर गया था। अन्य लोगों ने बताया कि उनके हिस्से में 100 एकड़ से अधिक भूमि प्रभावित हुई, जबकि आसपास के इलाकों में हज़ारों एकड़ में नुकसान हुआ।
कई किसानों ने कहा कि उन्होंने स्वयं पत्र देकर संत रामपाल जी महाराज जी से तत्काल सहायता मांगी थी और कुछ ही दिनों में सामग्री खरखरा पहुंचा दी गई।
पंचायत ने स्मृति-चिह्न भेंट किया, पत्रों पर हस्ताक्षर
सभा के दौरान ग्राम पंचायत के सदस्यों ने आगंतुक दल को स्मृति-चिह्न सौंपा। इनमें तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज, कबीर साहेब जी और संत गरीब दास जी महाराज की तस्वीरें थीं तथा शिलालेखों में खरखड़ा में बाढ़ राहत के लिए पाइपलाइन और मोटर दिए जाने का उल्लेख था।
शिलालेख में यह भी दर्ज था कि सहायता तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई और पूरे गांव की ओर से आभार व्यक्त किया गया। इसमें सरपंच सुमन देवी और स्थानीय प्रतिनिधियों के नाम भी शामिल थे।
सार्वजनिक प्रतिक्रियाएं और गांव की प्रतिक्रिया
सभा को संबोधित करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि महीनों की परेशानी के बाद काफिले के आगमन से राहत महसूस हुई। कई वक्ताओं ने गांववासियों से मिलकर मोटर चलाने और पाइपलाइन बिछाने का आह्वान किया, ताकि सभी जलभराव वाले खेत साफ किए जा सकें।
साक्षात्कारों में दोहराया गया कि पहले फसलें चौपट हो चुकी थीं, स्कूल और औषधालय भी प्रभावित हुए थे और पशुओं के लिए चारे की कमी हो गई थी। उन्होंने कहा कि समय पर जलनिकासी से ही कृषि गतिविधियां फिर शुरू हो सकेंगी।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि मोटरसाइकिलों और ट्रैक्टरों की रैली निकालकर काफिले का स्वागत किया गया, जिसे सहायता के प्रति आभार का प्रतीक बताया गया।
सहायता के उपयोग की निगरानी और आगे की योजना
वक्ताओं ने कहा कि अनुवर्ती दौरों और दस्तावेजीकरण के माध्यम से यह आंकलन किया जाएगा कि उपकरणों का सही उपयोग हो रहा है या नहीं और क्या बुआई से पहले खेत सूख पाए। उन्होंने दोहराया कि आवश्यकता होने पर अतिरिक्त सामग्री मांगी जा सकती है, लेकिन तभी जब जलनिकासी का कार्य सही ढंग से आगे बढ़े।
घोषणाओं में जवाबदेही पर ज़ोर देते हुए कहा गया कि भविष्य की सहायता इस बात पर निर्भर करेगी कि मौजूदा उपकरणों का उपयोग किस प्रकार किया जाता है।
राहत सामग्री पहुंचने के बाद समुदाय की प्रतिक्रिया
ग्रामीणों ने कहा कि मोटर और पाइपलाइन के आने से खेती फिर शुरू करने का भरोसा लौटा है। किसानों ने दोहराया कि गेहूं की बुआई महीनों से रुकी हुई थी और यह नई व्यवस्था पहले हुए नुकसान से उबरने का अवसर देगी। सभा का समापन ग्रामीणों के सार्वजनिक धन्यवाद के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि औपचारिक और लिखित अनुरोधों के बाद यह सहायता खरखड़ा तक पहुंची है। ग्रामीणों के अनुसार, यह कहानी केवल पाइपलाइन और मोटर पहुंचने की नहीं, बल्कि लंबे समय तक चली बाढ़ के बाद समन्वित सार्वजनिक प्रयास की भी है।
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