पुस्तक प्रचार केस में तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के छह शिष्य बरी, झारखंड के पाकुड़ कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में सुनाया फैसला

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झारखंड के पाकुड़ में वर्ष 2022 के पुस्तक प्रचार से जुड़े मामले में अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी (ACJM) की अदालत ने तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के छह शिष्यों को बाइज्जत बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में असफल रहा और पेश किए गए साक्ष्य भी उनकी पुष्टि नहीं कर सके। जिरह के दौरान शिकायतकर्ता भी अपने आरोपों पर कायम नहीं रह सका, जिसके बाद अदालत ने छहों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

पुस्तक प्रचार केस: मुख्य बातें (Key Takeaways)

  • पाकुड़ की ACJM अदालत ने वर्ष 2022 के पुस्तक प्रचार मामले में छह आरोपियों को बरी किया।
  • मामला हिरणपुर थाना कांड संख्या 46/2022 से संबंधित था।
  • आरोपियों पर IPC की धारा 295A और 298/34 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
  • अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में असफल रहा।
  • शिकायतकर्ता राकेश गोराई जिरह के दौरान पुस्तकों के नाम और उनकी सामग्री नहीं बता सके।
  • कई गवाहों ने अभियोजन के पक्ष का समर्थन नहीं किया।
  • अदालत ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए उनके जमानतदारों को भी दायित्व से मुक्त कर दिया।

पाकुड़ कोर्ट ने सुनाया फैसला

झारखंड के पाकुड़ स्थित अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी (ACJM) विशाल माझी की अदालत ने वर्ष 2022 के पुस्तक प्रचार से जुड़े मामले में संत रामपाल जी महाराज के छह शिष्यों को बाइज्जत बरी कर दिया। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साक्ष्यों के आधार पर साबित नहीं कर सका।

अदालत का निर्णय 30 जून 2026 को सुनाया गया। यह मामला हिरणपुर थाना कांड संख्या 46/2022 से संबंधित था, जिसमें IPC की धारा 295A तथा 298/34 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

कोर्ट के आधिकारिक निर्णय (Judgment PDF) की प्रति देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

क्या था पूरा मामला?

मामला वर्ष 2022 का है। अभियोजन के अनुसार, हिरणपुर थाना क्षेत्र में समाज सुधारक एवं तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित आध्यात्मिक पुस्तकों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा था।

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शिकायतकर्ता राकेश गोराई की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि पुस्तकों में सनातन धर्म के देवी-देवताओं के संबंध में आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया है। इसी आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

मामले से जुड़े आरोपी

अदालत ने जिन छह आरोपियों को बरी किया, उनके नाम इस प्रकार हैं—

क्रमांकनाम
1संतोष कुमार राय
2मिठु भगत
3मिथिलेश कुमार
4डबलु पंडित
5अर्जुन उरांव
6विजय उरांव

कोर्ट में क्या सामने आया?

सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत गवाहों के बयान दर्ज किए।

अदालती रिकॉर्ड के अनुसार—

  • कई गवाह अभियोजन के पक्ष का समर्थन नहीं कर सके।
  • शिकायतकर्ता राकेश गोराई ने जिरह के दौरान कहा कि उन्हें पुस्तकों के नाम याद नहीं हैं।
  • उन्होंने यह भी कहा कि वे पुस्तकों की सामग्री के बारे में नहीं बता सकते।
  • शिकायतकर्ता ने यह भी स्वीकार किया कि लिखित शिकायत उन्होंने स्वयं नहीं लिखी थी, बल्कि मोहन लाल भगत द्वारा लिखे गए आवेदन पर केवल हस्ताक्षर किए थे।

अदालती रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि जब्ती सूची के गवाह ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने पुलिस के निर्देश पर खाली कागज पर हस्ताक्षर किए थे।

अदालत ने किन आधारों पर दिया निर्णय?

अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी विशाल माझी ने मामले के रिकॉर्ड, गवाहों के बयान तथा उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हुआ।

निर्णय में कहा गया कि—

  • शिकायतकर्ता अपने आरोपों के समर्थन में पर्याप्त जानकारी प्रस्तुत नहीं कर सके।
  • कई गवाह अभियोजन के पक्ष में नहीं रहे।
  • आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे।

इन परिस्थितियों में अदालत ने आरोपियों को दोषमुक्त माना।

अदालत का अंतिम आदेश

अदालत ने संतोष कुमार राय, मिठु भगत, मिथिलेश कुमार, डबलु पंडित, अर्जुन उरांव तथा विजय उरांव को IPC की धारा 295A एवं 298/34 के तहत लगाए गए आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया।

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साथ ही आदेश दिया कि चूंकि सभी आरोपी जमानत पर हैं, इसलिए उनके जमानतदारों को भी उनके संबंधित जमानत बंधपत्रों के दायित्व से मुक्त किया जाए।

न्यायिक रिकॉर्ड में दर्ज प्रमुख तिथियां

विवरणतिथि
घटना08 अप्रैल 2022
FIR08 अप्रैल 2022
चार्जशीट30 अप्रैल 2022
आरोप तय20 जुलाई 2022
निर्णय सुरक्षित16 जून 2026
फैसला30 जून 2026

मामले का न्यायिक परिणाम

पाकुड़ की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर यह निर्णय दिया कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध नहीं कर पाया। इसके बाद अदालत ने सभी छह आरोपियों को बाइज्जत बरी करते हुए उनके विरुद्ध चल रहे मुकदमे का समापन कर दिया तथा जमानतदारों को भी दायित्वों से मुक्त करने का आदेश जारी किया।

संत रामपाल जी महाराज के पक्ष में आया ये फैसला एक बार फिर से संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान की सम्पूर्ण सत्यता को साबित करता है। एक के बाद एक सभी केसों में लगातार बाइज्जत बरी होने के क्रम ने संत रामपाल जी महाराज के जगतगुरु और विश्वगुरु होने की बात को पूर्ण रूप से सिद्ध कर दिया है। आप भी उनका ज्ञान सुने और अपना जीवन सार्थक बनाए 

अधिक जानकारी के लिए Visit करें Sant  Rampal Ji Maharaj YouTube Channel

FAQs on पुस्तक प्रचार केस

1. पुस्तक प्रचार केस किस वर्ष का था?

यह मामला वर्ष 2022 का था और हिरणपुर थाना कांड संख्या 46/2022 से संबंधित था।

2. अदालत ने कब फैसला सुनाया?

अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी, पाकुड़ ने 30 जून 2026 को फैसला सुनाया।

3. आरोप किन धाराओं के तहत लगाए गए थे?

मामला IPC की धारा 295A तथा 298/34 के तहत दर्ज किया गया था।

4. अदालत ने आरोपियों को क्यों बरी किया?

अदालत के अनुसार अभियोजन पक्ष आरोपों को पर्याप्त साक्ष्यों से साबित नहीं कर सका।

5. इस मामले में कितने आरोपियों को बरी किया गया?

अदालत ने संत रामपाल जी महाराज के छह शिष्यों को बाइज्जत बरी किया।

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