Jallianwala Bagh Hatyakand: जलियांवाला बाग घटना: क्या था रॉलेक्ट एक्ट और क्यों किया था भारतीयों ने इस एक्ट का विरोध 

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Last Updated on 4 April 2026 IST: इतिहास के पन्नों पर ना जाने ऐसी कितनी घटनाएं छपी हुई हैं जिसे पूरी तरह जानना अब तक रहस्य बना हुआ है। आज से लगभग 107 वर्ष पहले एक ऐसी शर्मनाक घटना घटित हुई जो मानव समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण थी जिसे आज दुनिया जलियांवाला बाग हत्याकांड (Jallianwala Bagh Hatyakand) के नाम से जानती है। आइए जानते हैं इस जघन्य घटना के बारे में विस्तार से।

Table of Contents

Jallianwala Bagh Hatyakand (Hindi): मुख्य बिंदु

  • जलियांवाला बाग हत्याकांड की घटना को हुए 107 वर्ष हो चुके हैं 
  • 13 अप्रैल 1919 का यह काला दिन जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया था
  • ब्रिटिश सरकार भारत के किसी भी नागरिक को देशद्रोह के शक के आधार पर गिरफ्तार करना चाहती थी 
  • भारत के अमृतसर में भी इस सत्याग्रह आंदोलन के तहत राॅलेक्ट एक्ट का विरोध किया गया
  • 13 अप्रैल सन 1919 में जलियांवाला बाग में काफी संख्या में लोग इकट्ठे हुए
  • पंजाब राज्य के हालातों को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने राज्य के कई शहरों में मार्शल लॉ लगा दिया
  • 20000 लोगों पर लगभग 10 मिनट तक गोलियां बरसाता रहा जनरल डायर
  • 23 मार्च 1920 को जनरल डायर को दोषी करार देते हुए उसको सेवानिवृत्त किया गया
  • सन् 1940 में क्रांतिकारी उधम सिंह ने लंदन के कैक्सटन हॉल में माइकल ओ’ड्वायर को गोली मारकर हत्या कर दी।
  • माइकल ओ’ड्वायर (O’Dwyer) — पंजाब का पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर था (इसी को उधम सिंह ने मारा)

Jallianwala Bagh Hatyakand: क्या था रॉलेक्ट एक्ट और क्यों विरोध किया था भारतीयों ने इस एक्ट का

रॉलेक्ट एक्ट क्या था?

Rowlatt Act (1919) एक ऐसा कठोर कानून था जिसे ब्रिटिश सरकार ने भारत में बढ़ते राष्ट्रवादी आंदोलनों को दबाने के लिए लागू किया था। इसे Anarchical and Revolutionary Crimes Act, 1919 भी कहा जाता है।

इस कानून के तहत:

  • किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए गिरफ्तार किया जा सकता था
  • आरोपित व्यक्ति को वकील रखने का अधिकार नहीं मिलता था
  • मुकदमे गुप्त रूप से चलाए जाते थे
  • प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सख्त नियंत्रण लगाया गया

सरल शब्दों में, यह कानून ब्रिटिश शासन को यह शक्ति देता था कि वह किसी भी भारतीय को बिना ठोस सबूत के जेल में डाल सके।

रॉलेक्ट एक्ट केवल एक कानून नहीं था, बल्कि यह ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीति का प्रतीक बन गया। इसने भारतीयों को यह एहसास दिलाया कि अब स्वतंत्रता के लिए संगठित संघर्ष ही एकमात्र रास्ता है।

🔹 भारतीयों ने इसका विरोध क्यों किया?

रॉलेक्ट एक्ट का भारतभर में तीव्र विरोध हुआ, इसके मुख्य कारण थे:

1. नागरिक अधिकारों का हनन
यह कानून सीधे तौर पर लोगों की आज़ादी और न्याय के अधिकार के खिलाफ था।

2. अन्यायपूर्ण और दमनकारी नीति
भारतीयों को बिना सुनवाई के सजा देना ब्रिटिश शासन की दमनकारी सोच को दर्शाता था।

3. विश्वासघात की भावना
प्रथम विश्व युद्ध में भारत ने ब्रिटेन का साथ दिया था, बदले में सुधार की उम्मीद थी, लेकिन मिला यह कठोर कानून।

4. राष्ट्रव्यापी असंतोष और आंदोलन
Mahatma Gandhi ने इसके खिलाफ सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया, जिससे देशभर में विरोध तेज़ हो गया।

🔹 इसका परिणाम क्या हुआ?

  • पूरे भारत में हड़तालें और प्रदर्शन हुए
  • इसी विरोध के दौरान 1919 में हुआ Jallianwala Bagh massacre, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया
  • भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और भी अधिक उग्र और संगठित हो गया

सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत

सन 1919 में भारत के अमृतसर में भी इस सत्याग्रह आंदोलन के तहत राॅलेक्ट एक्ट का विरोध किया गया। जिसमें काफी भारतीयों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। 9 अप्रैल को सरकार ने पंजाब से ताल्लुक रखने वाले दो नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इन नेताओं के नाम डॉक्टर सैफुद्दीन किचलू तथा डॉक्टर सत्यपाल था। इन दोनों नेताओं को गिरफ्तार करने के बाद ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें अमृतसर के धर्मशाला में नजरबंद कर दिया था। 

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जलियांवाला बाग हत्याकांड (Jallianwala Bagh Massacre in Hindi) | 10 अप्रैल 1919 को डॉ. सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सत्यपाल की गिरफ्तारी के विरोध में बड़ी संख्या में लोग उनकी रिहाई की मांग लेकर अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर माइल्स इर्विंग से मिलने पहुँचे, लेकिन उन्होंने मिलने से इंकार कर दिया। इससे जनता में भारी आक्रोश फैल गया। गुस्साई भीड़ ने रेलवे स्टेशन, तार विभाग और अन्य सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया तथा आगजनी की। इस हिंसा में कुछ अंग्रेजों की भी मृत्यु हो गई, जिससे ब्रिटिश सरकार और अधिक कठोर हो गई।

Jallianwala Bagh Massacre (Hindi) | जब अमृतसर की जिम्मेदारी जनरल डायर को सौंपी गई

अमृतसर के बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन के साथ-साथ सैन्य नियंत्रण भी सख्त कर दिया गया। उस समय के डिप्टी कमिश्नर माइल्स इर्विंग के साथ स्थिति को संभालने के लिए ब्रिगेडियर जनरल आर.ई.एच. डायर को अमृतसर भेजा गया। 11 अप्रैल 1919 से ही जनरल डायर ने शहर में कानून-व्यवस्था को काबू करने के लिए कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए। उन्होंने सार्वजनिक सभाओं और भीड़ के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगा दिया। 13 अप्रैल के बाद पंजाब के कई क्षेत्रों में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया, जिसके तहत नागरिक स्वतंत्रताओं पर सख्त पाबंदियाँ लगा दी गईं। लोगों के इकट्ठा होने, सभाएँ करने और आवाजाही पर नियंत्रण रखा गया, ताकि किसी भी प्रकार के विरोध या क्रांतिकारी गतिविधियों को रोका जा सके।

आखिर जलियांवाला बाग की घटना की क्या है सच्चाई

जलियांवाला बाग हत्याकांड (Jallianwala Bagh Hatyakand) | 12 मार्च सन 1919 में अमृतसर के दो लोकप्रिय नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था। इन नेताओं के नाम चौधरी गुगामल और महाशय रतनचंद था। इन नेताओं की गिरफ्तारी से जनता काफी आक्रोशित हो गई जिसके चलते वहां के हालात और बिगड़ने लगे।

जलियांवाला बाग हत्याकांड वाली दीवार

13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन अमृतसर के Jallianwala Bagh massacre में हजारों लोग इकट्ठे हुए थे, जिनमें कुछ लोग शांतिपूर्ण सभा के लिए और कई अपने परिवार के साथ घूमने आए थे। उस समय सभा पर प्रतिबंध था, लेकिन इसकी जानकारी सभी को नहीं थी। इसी दौरान ब्रिगेडियर जनरल Reginald Edward Harry Dyer लगभग 50 सैनिकों के साथ वहाँ पहुँचा और बिना किसी चेतावनी के भीड़ पर अंधाधुंध गोलियाँ चलाने का आदेश दे दिया। करीब 10 मिनट तक चली इस फायरिंग में सैकड़ों लोग मारे गए और हज़ारों घायल हुए। लोग बचने के लिए इधर-उधर भागे, लेकिन संकरी निकासी और ऊँची दीवारों के कारण फँस गए, जबकि कई लोग कुएँ में कूद गए। यह घटना ब्रिटिश शासन की क्रूरता का प्रतीक बनी और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को और अधिक तीव्र कर गई।”

जलियांवाला बाग हत्याकांड कब, कैसे और कहां हुआ?

जलियांवाला बाग हत्याकांड कब हुआ?

Jallianwala Bagh Hatyakand: 13 अप्रैल सन 1919 – यह दिन भारतीय इतिहास में बहुत ही दर्दनाक और शर्मनाक घटना थी जिसमें हजारों लोग शहीद हो गए।

जलियांवाला बाग हत्याकांड कैसे हुआ?

13 अप्रैल सन 1919 में जलियांवाला बाग में काफी संख्या में लोग इकट्ठे हुए थे। उस दिन कर्फ्यू लगा था तथा उस दिन पंजाब प्रांत के मुख्य त्योहार बैसाखी का दिन भी था जिसके चलते काफी लोग स्वर्ण मंदिर घूमने के लिए भी आये थे। स्वर्ण मंदिर जलियांवाला बाग के निकट में ही स्थित है अतः लोगों का वहां पर आना स्वभाविक था। इस तरह उस बाग में करीब करीब 20000 लोग मौजूद थे। जिसमें से कुछ लोग अपने प्रिय नेता के लिए शांतिपूर्ण सभा कर रहे थे तथा कुछ लोग अपने परिवार, मित्रों, व बच्चों के साथ घूमने के लिए आए थे। जनरल डायर को भी गुप्त रूप से बाग में हो रही सभा की सूचना मिली थी। 

जलियांवाला बाग हत्याकांड कहां हुआ?

लगभग 4:00 बजे जनरल डायर अपने लगभग डेढ़ सौ के करीब सिपाही लेकर जलियांवाला बाग में पहुंचे। जनरल डायर को लगा कि यह सभा दंगे फैलाने व विरोध प्रदर्शन के लिए हो रही है। उसने आव देखा ना ताव बिना किसी चेतावनी दिए जलियांवाला बाग में उपस्थित सभी लोगों पर अंधाधुंध फायरिंग का आदेश दे दिया। जिसके चलते बच्चे, महिलाओं,व पुरुषों समेत हजारों की संख्या में लोग शहीद हो गए और हजारों घायल हो गए। लगभग 10 मिनट तक गोलियां बरसाता रहा जनरल डायर। वहीं दूसरी ओर गोली से बचने के लिए लोग इधर-उधर भागने लगे किंतु बाग की दीवार लगभग 10 फीट ऊंची होने के कारण नहीं भाग पाए तथा गोलियों से बचने के लिए वहीं पर मौजूद कुएं में बच्चे व महिलाएं कूदने लगे। देखते ही देखते जलियांवाला बाग की जमीन रक्त से लाल हो गयी।

Credit: BBC Hindi

Jallianwala Bagh Hatyakand: कौन है वास्तविक जिम्मेदार जलियांवाला बाग हत्याकांड का?

Jallianwala Bagh Hatyakand: जनरल डायर के नेतृत्व में इस घटना को अंजाम दिया गया था। जनरल डायर के इस घिनौने कार्य को विश्व के सभी लोग निंदनीय मानते हैं। लेकिन उस समय की ब्रिटिश सरकार के कुछ ऑफिसर डायर के इस निर्णय को सही मानते थे। यह एक सुनियोजित साजिश थी तथा जिन 50 सैनिकों को भेजा गया था उनमें अधिकांश गोरखा, बलूचा और पठान रेजिमेंट थे।

जलियांवाला बाग हत्याकांड कमेटी: (Hunter Committee) का गठन

जलियांवाला बाग को लेकर साल 1919 में एक कमीशन का गठन किया गया और इस कमीशन का अध्यक्ष विलियम हंटर को बनाया गया था। हंटर कमेटी का गठन जलियांवाला बाग सहित अन्य घटनाओं की जांच के लिए किया गया था। विलियम हंटर के अलावा इस कमेटी में अन्य सात लोग और भी थे जिनमें से कुछ भारतीय थे। हंटर कमेटी के सभी सदस्यो ने जलियांवाला बाग हत्याकांड के सभी पहलुओं को जांचा और यह पता लगाने की कोशिश की कि जनरल डायर ने जो जलियांवाला बाग हत्याकांड किया था वह सही था या गलत।

Read in English | The Jallianwala Bagh Hatyakand (Massacre) Ousted Barbarous Britain From India

19 नवंबर सन् 1919 में हंटर कमीशन द्वारा जनरल डायर की सभी अपीलो व दलीलों को ध्यान में रखकर उसके अपराधों की जांच पड़ताल शुरू हुई। 8 मार्च 1920 को कमीशन ने अपनी रिपोर्ट को सार्वजनिक किया। 23 मार्च 1920 को जनरल डायर को दोषी करार देते हुए उसको सेवानिवृत्त किया गया।

Jallianwala Bagh Hatyakand: जनरल डायर ने यह बयान दिया था कि यदि उसके पास तोप होती तो वह उसका भी इस्तेमाल करता। वह निहायती क्रूर व्यक्ति था। कई ब्रिटिश नेताओं ने इसकी आलोचना की थी लेकिन हाउस ऑफ लॉर्ड्स में जनरल डायर को सम्मानित किया गया। ब्रिटिश जनता ने उसके लिए फंड एकत्रित कर 26000 ब्रिटिश पाउंड का इनाम दिया। ऐसा कहा जाता है कि इस जघन्य नर-संहार के बाद जनरल डायर एक भी रात चैन से नहीं सो सका। उसका स्वास्थ्य लगातार दिन प्रतिदिन खराब होता गया। बाद में उसे लकवा मार गया जिससे वह मरते दम तक नहीं उबर पाया। 23 जुलाई, 1927 को ब्रिस्टल में जनरल डायर की मृत्यु हो गई।

Jallianwala Bagh Massacre Quotes in Hindi |(जलियांवाला बाग हत्याकांड उद्धरण)

  • अंग्रेजों के उत्पीड़न से ग्रसित, मैं वही अनुराग हूँ । शहीदों के रक्त से सिंचित, मैं जलियाँवाला बाग हूँ ।।
  • जलियांवाला बाग अमर बलिदानों की कहानी है, मर मिटेंगी कई कहानियां | मगर इतिहास में जलियाँवाला बाग दर्द की निशानी है||
  • वो भी एक ज़माना था, किसने किसको पहचाना था | हुई थी रक्त से मिट्टी लाल, तब देश ने अंग्रेजो को जाना था||
  • कण-कण फिर बोल उठेगा मैं किस आहुति का किस्सा हूँ ,जब उठेगा गुस्सा सीने में हवा भी बोल पड़ेगी मैं जलियावाला बाग का किस्सा हूँ||
  • यही से हुई थी अंग्रेजो की सल्तनत की अंत की शुरुआत। जलियांवाला बाग में हुआ था मानवता का सबसे बड़ा अपराध।।

इस हत्याकांड की घटना में कितने लोग शहीद हुए

जलियांवाला बाग हत्याकांड (Jallianwala Bagh Hatyakand): ब्रिटिश सरकार के मुताबिक इस हत्याकांड में केवल 379 लोग ही मारे गए थे जबकि वास्तविक रूप में यह गिनती ज्यादा मानी जाती है। जिसमें बच्चे, महिला व पुरुष शामिल थे। 1000 से ज्यादा लोग शहीद हुए तथा हजारों घायल हुए थे लगभग 100 लोग कुएं से बरामद हुए थे। जिसमें से 7 हफ्ते का एक मासूम बच्चा भी था। इस घटना के चलते रविंद्र नाथ टैगोर ने भी 1915 में दी गयी नाइटहुड की उपाधि वापस कर दी थी।

Jallianwala Bagh Hatyakand: जलियांवाला बाग की घटना औपनिवेशक बर्बरता का प्रतीक थी। इसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को और तेज़ कर दिया। आज भी जलियांवाला बाग में वे शहीदों पर चलाई गई गोलियों के निशान देखे जा सकते हैं जिन्हें उनकी याद में संरक्षित किया गया है। आज भी जलियांवाला बाग में वह कुंआ मौजूद है और उसे शहीदी कुंआ कहते हैं।

या तो माता भक्त जने, या दाता या शूर

कबीर साहेब जी ने वीरों को जन्म देने वाली माताओं को सराहते हुए कहा है – 

या तो माता भक्त जने, या दाता या शूर |

नहीं तो रह ले बाँझड़ी, क्यों व्यर्थ गंवावै नूर ||

अर्थात वे माताएं जो भक्त, वीर, दानवीर अथवा शूरवीर पैदा करती हैं वे परम आदरणीय हैं। यदि संतान इनमें से कोई गुण नहीं रखती, तो ऐसे जीवन का कोई विशेष महत्व नहीं रह जाता। इसलिए वे कहते हैं कि बिना गुणों वाली संतान पैदा करने से अच्छा है कि माँ बाँझ ही रहे, ताकि उसका “नूर” अर्थात जीवन की कीमती ऊर्जा और गरिमा व्यर्थ न जाए।

आदरणीय संत गरीबदास जी महाराज ने अपनी अमृतवाणी में श्री अमरग्रंथ साहेब में लिखा है – 

लख बर शूरा झूझही, लख बर सावंत देह |

लख बर यती जिहान में, तब सतगुरु शरणा लेह ||

अर्थात वह आत्मा जो अनेक जन्मों तक संघर्ष करती है, वीरों की भाँति अन्याय के खिलाफ खड़ी रहती है, न किसी से डरती है और न ही अन्याय को सहन करती है, बल्कि सत्य और धर्म के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देती है, ऐसी आत्मा अत्यंत दुर्लभ होती है। लाखों जन्मों के पुण्य कर्मों के बाद ही उसे श्रेष्ठ मानव शरीर प्राप्त होता है।

इसी प्रकार, जो आत्मा अनेक जन्मों तक संयमित जीवन जीती है, चाहे ब्रह्मचर्य का पालन करके या अपने दांपत्य जीवन में मर्यादित रहकर, वह भी महान पुण्य की भागी बनती है। ऐसी पुण्यात्माएँ ही अंततः तत्वदर्शी संत की शरण में आने के योग्य बनती हैं।

ऐसे दुर्लभ संयोग और संचित पुण्य के प्रभाव से ही आत्मा को परमात्मा की सच्ची भक्ति का मार्ग मिलता है। वर्तमान समय में Sant Rampal Ji Maharaj तत्वदर्शी संत के रूप में मानव समाज को सत्य भक्ति का ज्ञान प्रदान कर रहे हैं। आइए, उनके सान्निध्य में नामदीक्षा लेकर सच्ची भक्ति करें और अपने जीवन को सफल बनाएं।

FAQ About Jallianwala Bagh Hatyakand [Hindi]

जालियांवाला बाग हत्याकांड कब हुआ?

जलियांवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल 1919 में हुआ।

जलियांवाला बाग हत्याकांड कहां हुआ?

जलियांवाला बाग हत्याकांड जलियांवाला बाग, अमृतसर, पंजाब में हुआ।

जलियांवाला बाग हत्याकांड में गोली चलाने का आदेश कौन दिया था?

जलियांवाला बाग हत्याकांड में गोली चलाने का आदेश ब्रिगेडियर जनरल डायर ने दिया था। 

जलियांवाला बाग हत्याकांड के समय पंजाब का गवर्नर जनरल कौन था?

जलियांवाला बाग हत्याकांड के समय पंजाब का गवर्नर माइकल ओ डायर (Michael O Dyer) था।

अमृतसर के कसाई के नाम से कौन जाना जाता है?

जनरल डायर को अमृतसर के कसाई के नाम से जाना जाता है।

 रवींद्रनाथ टैगोर ने नाइटहुड की उपाधि क्यों लौटाई?

1919 में ही जलियांवाला बाग कांड से दुखी होकर रविंद्रनाथ टैगोर ने नाइटहुड की उपाधि लौटा दी थी।

जलियांवाला बाग हत्याकांड में कितने आदमी मरे थे?

ब्रिटिश सरकार के मुताबिक इस हत्याकांड में केवल 379 लोग ही मारे गए थे। जिसमें बच्चे, महिला व पुरुष शामिल थे। 1000 से ज्यादा लोग शहीद हुए तथा हजारों घायल हुए थे लगभग 100 लोग कुएं से बरामद हुए थे।

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