January 7, 2026

उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने देहदान करने वाली संत रामपाल जी की शिष्याओं के परिजनों को किया सम्मानित

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जबलपुर, 15 अगस्त 2025: स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने एक अत्यंत प्रेरणादायक घटना के अंतर्गत, संत रामपाल जी महाराज की दो महिला शिष्याओं  कल्लू दासी और शांति दासी  के परिजनों को प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया। यह सम्मान उनके द्वारा किए गए देहदान जैसे पुण्य कार्य के लिए प्रदान किया गया।

अंतिम इच्छा थी देहदान करना

कल्लू दासी और शांति दासी ने अपनी जीवन यात्रा के अंतिम चरण में यह संकल्प लिया था कि उनका शरीर मृत्यु के पश्चात मेडिकल शिक्षा और मानव सेवा हेतु समर्पित किया जाए। उनकी इस अंतिम इच्छा को उनके परिजनों ने पूर्ण करते हुए, नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर में देहदान किया।

जिला प्रशासन ने लिया संज्ञान, उपमुख्यमंत्री ने सौंपा प्रशस्ति पत्र

इस प्रेरणादायक कार्य को जबलपुर जिला प्रशासन द्वारा सराहा गया और 15 अगस्त 2025 को एक विशेष समारोह में, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा परिजनों को आधिकारिक रूप से प्रशस्ति पत्र सौंपा गया। यह क्षण भावुकता से भरपूर था और समाज में देहदान जैसे महान कार्यों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को और सशक्त करता है।

संत रामपाल जी की शिक्षाओं का प्रभाव

यह उदाहरण संत रामपाल जी महाराज की उन शिक्षाओं का प्रतिफल है, जो मानव सेवा, निस्वार्थ भावना, और अहंकार रहित परोपकार को सर्वोपरि मानती हैं। उनके अनुयायी केवल आध्यात्मिक पथ पर ही नहीं चलते, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना में भी योगदान देते हैं।

Also Read: संत रामपाल जी महाराज के हज़ारों अनुयायियों ने लिया चिकित्सा शोध के लिए शरीर दान (देहदान) करने का संकल्प

समाज के लिए संदेश

उपमुख्यमंत्री देवड़ा ने इस अवसर पर कहा, “ऐसे कार्य समाज में नई चेतना भरते हैं। देहदान जैसे निर्णय साहस, सेवा भावना और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का परिचायक हैं। मैं इन महान आत्माओं और उनके परिजनों को नमन करता हूँ।”

प्रेरणा की जीवंत मिसाल

कल्लू दासी और शांति दासी का देहदान न केवल मेडिकल शिक्षा के लिए एक संसाधन बनेगा, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। यह घटना हमें यह सोचने पर प्रेरित करती है कि सच्ची सेवा मृत्यु के बाद भी जारी रह सकती है, बशर्ते हमारा उद्देश्य लोकहित हो।

सत्यज्ञान और सतभक्ति से प्रेरित सेवा का मार्ग

कल्लू दासी और शांति दासी का देहदान कोई साधारण निर्णय नहीं था। यह उस सत्यज्ञान और सतभक्ति का प्रतिफल था, जो उन्हें संत रामपाल जी महाराज से नामदीक्षा के माध्यम से प्राप्त हुआ था। संतजी की शिक्षाओं में बताया गया है कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल सांसारिक सुख नहीं, बल्कि परोपकार, मानवता और आत्मकल्याण है। सतभक्ति से जुड़कर दोनों शिष्याओं ने न केवल इस जीवन को सार्थक बनाया, बल्कि मृत्यु के पश्चात भी शरीर को समाज सेवा के लिए समर्पित कर मोक्षमार्ग का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया।

FAQs: संत रामपाल जी की शिष्याओं के परिजनों को किया सम्मानित

  1. कल्लू दासी और शांति दासी कौन थीं?

उत्तर: कल्लू दासी और शांति दासी संत रामपाल जी महाराज की शिष्याएं थीं, जिन्होंने अपने जीवन के अंत में देहदान करने का संकल्प लिया और यह पुण्य कार्य उनके परिजनों द्वारा पूरा किया गया।

  1. देहदान किस संस्थान को किया गया था?

उत्तर: इन दोनों शिष्याओं का देहदान नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर को किया गया, जहाँ उनका शरीर मेडिकल शिक्षा व शोध के लिए उपयोग किया जाएगा।

  1. उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने किस अवसर पर प्रशस्ति पत्र सौंपे?

उत्तर: 15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, एक सम्मान समारोह में मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने देहदान करने वाली शिष्याओं के परिजनों को प्रशस्ति पत्र सौंपा।

  1. देहदान को संत रामपाल जी महाराज की शिक्षाओं से कैसे जोड़ा जा सकता है?

उत्तर: संत रामपाल जी महाराज की शिक्षाएं निस्वार्थ सेवा, मानवता और परोपकार पर आधारित हैं। देहदान जैसे कार्य इन्हीं मूल्यों की सजीव अभिव्यक्ति हैं, जिससे समाज को जागरूकता और प्रेरणा मिलती है।

  1. देहदान क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: देहदान से मेडिकल छात्र शरीर की संरचना को समझते हैं, जिससे बेहतर डॉक्टर तैयार होते हैं। यह समाज के लिए एक अमूल्य योगदान होता है — जीवन के बाद भी सेवा का अवसर।

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