February 7, 2026

विपदा से विकास तक: संत रामपाल जी महाराज ने रची इस्माइलपुर की जल-निकासी की गौरवगाथा

Published on

spot_img

जींद ज़िले के नरवाना शहर के अंतर्गत आने वाला गांव इस्माइलपुर गाँव अत्यधिक वर्षा के कारण बार-बार आने वाली विनाशकारी बाढ़ से जूझ रहा था। गांव उस समय एक अत्यंत विषम परिस्थिति से गुजर रहा था, जहाँ किसानों की हालत बेहद दयनीय हो चुकी थी।

यह संकट कोई नया नहीं था, बल्कि पिछले कई वर्षों से हर साल ग्रामीणों के लिए एक स्थायी मुसीबत बनकर लौट आता था। ग्रामीणों ने समाधान के लिए सरकार के दरवाजे भी बार-बार खटखटाए, लेकिन बाढ़ से निजात दिलाने वाला कोई स्थायी और प्रभावी उपाय नहीं हो सका।

जब कहीं से स्थायी समाधान नहीं मिला, तब ग्रामीणों के लिए संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही अन्नपूर्णा मुहिम अंधकार में एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आई। इसके बाद गांव की ओर से संत रामपाल जी महाराज से सहायता की गुहार लगाई गई। संत रामपाल जी महाराज जी ने त्वरित और स्थायी राहत सामग्री की व्यवस्था कारवाई । 

आंखों के सामने उजड़ती फसलें: जमींदारों की असहनीय पीड़ा

पिछले 7 वर्षों से जींद ज़िले के नरवाना शहर का वर्षा जल इस्माइलपुर गांव में भर जाता था, जो हर बार बाढ़ का रूप ले लेता था। इसके कारण ग्रामीणों की फसलें लगातार नष्ट होती रहीं। गांव की स्थिति बताते हुए सरपंच सुरेश कुमार ने कहा, “हमारे गांव के अंदर बारिश और बाढ़ के पानी से सारी फसल खराब हो जाती है। हमारी दो फसलों में से हर साल एक फसल पूरी तरह नष्ट हो जाती है।”

हर साल फसलों की तबाही ने किसानों के भविष्य को अनिश्चितता के भंवर में धकेल दिया था। एक ग्रामीण ने जमींदारों की पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “हर साल एक फसल मर जाती है। हम पूरी मेहनत और दिल से फसल तैयार करते हैं, चाहे कोई एक किल्ले का जमींदार हो या बीस किल्ले का। अपनी आंखों के सामने फसल नष्ट होते देखना किसी के लिए भी असहनीय होता है।”

जब उम्मीदें दम तोड़ रही थीं, तब सहारे की एक अंतिम राह खुली

आज तक किसी भी सरकार ने इस्माइलपुर गांव की इस पीड़ा की वास्तविक सुध नहीं ली। गांव की जलमग्न जमीन, डूबती खेती और बिखरते जीवन को लेकर सरकार की ओर से कोई ठोस और स्थायी निर्णय नहीं लिया गया। समाधान के नाम पर केवल फाइलें तैयार होती रहीं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी रही। 

“हमारी सुधबुध लेने वाला कोई नहीं था”-ग्रामीणों के ये शब्द उनके निराशाजनक अनुभव को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। एक ग्रामीण ने अपना दुख साझा करते हुए कहा, “इस सरकार ने कभी भी इस तरह की कोई सहायता नहीं की। गांव ने सरकार के साथ मिलकर पूरा सहयोग मांगा, लेकिन सरकार ने कोई मदद नहीं की।”

Also Read: ​मात्र 2 घंटे में निराशा बदली उम्मीद में: सतगुरु रामपाल जी महाराज ने बचाया गांव बूढ़ा खेड़ा लाठर (जींद, हरियाणा)

जब गांववासियों को यह जानकारी मिली कि जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज बाढ़ प्रभावित गांवों में पाइप और मोटर उपलब्ध कराकर गांवों से बाढ़ का पानी निकलवाने का जीवनदायिनी कार्य कर रहे हैं, तब इस्माइलपुर गांव के सरपंच और कुछ ग्रामीण सतलोक आश्रम श्री धानाना धाम पहुंचे। वहाँ उन्होंने बाढ़ से बनी दयनीय स्थिति की जानकारी सेवादारों को देते हुए संत रामपाल जी महाराज के चरणों में सहायता की विनम्र गुहार लगाई। उन्हे खेतों से बाढ़ का पानी निकालने के लिए आवश्यक भारी भरकम उपकरणों और संसाधनों की जरूरत थी।  उनकी मांग में शामिल था:

  • 20,000 फुट 8 इंची पाइप
  • दो 20-हॉर्सपावर (HP) की मोटरें

त्वरित और निर्णायक पहल

संत रामपाल जी महाराज जी ने उनकी प्रार्थना को तुरंत स्वीकार कर लिया। संत रामपाल जी महाराज जी ने सेवादारों को आदेश दिया कि जल्द से जल्द इनकी मदद की जाए। संत जी के आदेश का पालन करते हुए उनके अनुयायियों ने बाढ़ राहत सामग्री से भरी पाइपों के साथ वाहनों की शृंखला का एक विशाल काफिला तैयार किया और तत्परता से गांव पहुँचकर ग्रामीणों की सहायता की।

गाँव को प्राप्त कुल सहायता इस प्रकार रही:

  •  कुल 20,000 फुट (8 इंची) पाइप
  •  20 HP की दो विशाल मोटर
  •  स्टार्टर, केबल, जोड़ और फिटिंग का पूरा सामान

सरपंच सुरेश कुमार जी ने राहत सामग्री के विषय में बताया की “जो मांगा था उससे बढ़कर मिला। गाँव तक सामग्री पहुँचाने के लिए वाहनों का पूरा शुल्क भी संत रामपाल जी ने वहन किया। अगर यह राहत सामग्री नहीं मिलती तो कल को बिजाइ नहीं होती और खाने को दाने के लाले पड़ जाते क्योंकि फसलें नष्ट हो चुकी थी।”

मुस्कान के पीछे की कहानी: गाँववासियों की जुबानी

बाढ़ राहत सामग्री और सेवादारों के निःस्वार्थ समर्पण को देखकर ग्रामीणों की आँखें भावनाओं से भर आईं।

ग्रामवासियों की प्रेरक अभिव्यक्तियाँ:

  • “7 साल की समस्या को संत रामपाल जी महाराज ने एक पल में दूर कर दिया। उन्होंने बिना मांगे करोड़ों का सामान भेजा।”
  • “हम सतगुरु रामपाल जी महाराज के सदा-सदा ऋणी रहेंगे। भारत एक कृषि प्रधान देश है। यह बहुत बड़ी मदद है। हर गाँव की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है और सभी ग्रामीण खेती पर निर्भर हैं। यह जनसेवा समाज सेवा का बहुत बड़ा कार्य है। किसान-मजदूर की हालत बहुत बदतर थी। अब आराम से पानी निकल जाएगा”
  • “हर किसी के लिए परमात्मा आए हुए हैं और वे सब पर उपकार कर रहे हैं। हम कोटि-कोटि नमन करते हैं ऐसे संत को।”
  • “यदि कोई एमपी, एमएलए या मुख्यमंत्री के पास जाता है, तो वह भी कोई व्यक्तिगत मांग रखते हैं और 60 बार सोचते हैं। संत रामपाल जी महाराज ने इसे मात्र एक मिनट में कर दिखाया।”
  • “रामपाल महाराज जी ने अत्यंत अच्छा कार्य किया है। इससे ऊपर करने वाला मुख्यमंत्री भी नहीं, प्रधानमंत्री भी नहीं है। हमारे पास शब्द नहीं हैं कि हम भगवान के प्रति अपना धन्यवाद व्यक्त कर सकें।”
  • “संत रामपाल जी महाराज ने एक कलम में पूरे गाँव की समस्या का समाधान कर दिया, जो सरकार भी न कर पाई। अब हम पूर्ण रूप से खुश हैं।”
  • “भाई, हम पहले केवल सुनते थे कि राम का जन्म हुआ है, लेकिन आज हमने आंखों देख लिया है। राम के जो कारनामे संत रामपाल जी महाराज जी करने लग रहे हैं वो पूरे प्रदेश के अंदर सामने आने लग रहे हैं।”

ग्रामीणों को राहत सामग्री उपहार रूप में प्राप्त हुई उसकी खुशी में एक चद्दर (शाल) संत रामपाल जी महाराज जी के चरणों में भेजने के लिए दिया था। संत रामपाल जी महाराज ने इस्माइलपुर को केवल बाढ़ के पानी से नहीं बचाया, बल्कि यहाँ के लोगों के भविष्य को भी सुरक्षित किया। यह उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण और बारीक सोच का प्रमाण था, जिसमें हर छोटी से छोटी ज़रूरत की भी पूर्ण चिंता रहती है।

गाँव इस्माइलपुर में दीर्घकालिक सुधार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व

संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा राहत सामग्री के साथ भेजे गए पत्र में स्पष्ट संदेश दिया गया था कि यदि उपकरणों की जरूरत और होगी तो ग्रामीण निसंकोच प्रार्थना करके प्राप्त कर सकते हैं परंतु पानी निर्धारित समय में निकलना चाहिए। उच्च-गुणवत्ता वाले उपकरण स्थायी उपहार थे, ताकि भविष्य में बाढ़ आने पर ग्रामीण स्वयं निपटने में सक्षम रहें।

  • गाँव की स्थिति को तीन चरणों में ड्रोन विडियो के माध्यम से रिकॉर्ड किया जाना निर्धारित था:
    1. प्रथम चरण: बाढ़ के दौरान गाँव इस्माइलपुर की उस समय की जलमग्न स्थिति का विस्तृत ड्रोन विडियो बनाया गया था।
    2. द्वितीय चरण: दूसरी रिकॉर्डिंग तब की गई जब खेतों से जल पूरी तरह निकाल दिया दिया जाएगा ।
    3. तृतीय चरण: तीसरी रिकॉर्डिंग तब होनी थी जब गाँव के खेत पुनः हरी-भरी फसलों से लहलहा उठेंगे ।
  • प्रेरणा हेतु प्रदर्शन: इन तीनों ऐतिहासिक दृश्यों (Videos) को सभी सतलोक आश्रमों में प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रदर्शित किया जाना था, ताकि अन्य समाज को भी सेवा का संदेश मिल सके।

मानवता के मसीहा: संकट में बने इस्माइलपुर का सहारा

इस्माइलपुर गाँव में राहत सामग्री केवल एक स्थानीय प्रयास नहीं थी, बल्कि संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा संचालित “अन्नपूर्णा मुहिम” का अभिन्न हिस्सा थी। इसका संकल्प स्पष्ट था:

“रोटी, कपड़ा, चिकित्सा, शिक्षा और मकान । 

हर जरूरतमंद को दे रहा कबीर भगवान ।।

संत रामपाल जी महाराज जी ने न केवल इस्माइलपुर, बल्कि पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और हरियाणा के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भी पूर्ण राहत और सम्मान प्रदान किया।

उनका स्पष्ट निर्देश था कि किसानों को प्राथमिक सहायता प्रदान की जाए और जलमग्न गाँवों से पानी को यथाशीघ्र निकाला जाए, जिससे जन-जीवन पुनः सामान्य हो सके।

सभी प्रयासों के संपूर्ण कवरेज SA NEWS CHANNEL द्वारा सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रलेखित और प्रकाशित किया जा रहा है। 

विभिन्न प्रभावित ग्रामों की गहन रिपोर्टिंग के लिए अवलोकन करें:बाढ़ राहत | SA News Channel

Latest articles

गुड़िया खेड़ा बाढ़ संकट की पृष्ठभूमि: वर्षों से जलमग्न खेती

हरियाणा के सिरसा जिले की नाथूसरी चौपट्टा तहसील के गांव गुड़िया खेड़ा की यह...

World Marriage Day 2026: Know About The Most Effective Way Of Getting Married

Last Updated on 6 February 2026 | World Marriage Day is observed every year...

Bharat Taxi App: Why This New Ride App Could Change Travel for Drivers and Passengers in India

Bharat Taxi App: India has seen many ride-hailing apps over the years, but Bharat...

खाबड़ा कला जलभराव संकट: 2013 से चली आ रही किसानों की पीड़ा को संत रामपाल जी महाराज ने मिटाया 

हरियाणा के फतेहाबाद जिले की भट्टू कला तहसील का गांव खाबड़ा कला बीते एक...
spot_img

More like this

गुड़िया खेड़ा बाढ़ संकट की पृष्ठभूमि: वर्षों से जलमग्न खेती

हरियाणा के सिरसा जिले की नाथूसरी चौपट्टा तहसील के गांव गुड़िया खेड़ा की यह...

World Marriage Day 2026: Know About The Most Effective Way Of Getting Married

Last Updated on 6 February 2026 | World Marriage Day is observed every year...

Bharat Taxi App: Why This New Ride App Could Change Travel for Drivers and Passengers in India

Bharat Taxi App: India has seen many ride-hailing apps over the years, but Bharat...