​मात्र 2 घंटे में निराशा बदली उम्मीद में: सतगुरु रामपाल जी महाराज ने बचाया गांव बूढ़ा खेड़ा लाठर (जींद, हरियाणा)

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हरियाणा के जींद जिले के गाँव बूढ़ा खेड़ा लाठर की कहानी उस रफ़्तार की कहानी है जिसने सरकारी फाइलों की सुस्ती को शर्मिंदा कर दिया। यह कहानी उस दया की है जो बिना मांगे और बिना देर किए बरसती है। भारी बारिश और जलभराव के कारण इस गाँव के खेत झील बन चुके थे। जहाँ कभी लहलहाती फसलें होती थीं, वहां अब सिर्फ पानी और मायूसी थी। किसान और मज़दूर हताश थे। उनकी फसलें तबाह हो चुकी थीं और आने वाली बिजाई की कोई उम्मीद नहीं बची थी। उन्होंने प्रशासन के हर दरवाजे़ पर दस्तक दी, लेकिन कोरे आश्वासनों के सिवा कुछ नहीं मिला।

​आखिरी उम्मीद: सतगुरु रामपाल जी महाराज की शरण

​जब चारों ओर से रास्ते बंद हो गए, तो ग्रामीणों ने सतगुरु रामपाल जी महाराज के बारे में सुना। उन्हें पता चला कि बरवाला आश्रम से पूरे हरियाणा में बाढ़ प्रभावितों की मदद की जा रही है। एक आखिरी उम्मीद के साथ, गाँव के सरपंच और मौजीज (समझदार) लोगों ने एक प्रार्थना पत्र तैयार किया। उन्होंने अपनी समस्या बताई और पानी निकालने के लिए एक 15 एचपी की मोटर और 7,500 फीट पाइप की मांग की। मन में शायद यह डर था कि पता नहीं कब सुनवाई होगी, क्योंकि दुनिया का दस्तूर ही ‘इंतज़ार’ बन चुका है।

​चमत्कार: 2 घंटे में अर्जी पास

​लेकिन सतगुरु के दरबार में ‘देर’ है ही नहीं, वहां सिर्फ ‘दया’ है। जैसे ही यह प्रार्थना पत्र सतगुरु रामपाल जी महाराज की सेवा समिति के पास पहुंचा, वकीलों के माध्यम से इसे महाराज जी तक पहुंचाया गया और जो हुआ, उसने सबको चौंका दिया। मात्र 2 घंटे के भीतर, जी हाँ, सिर्फ 2 घंटे में वह अर्जी मंजूर हो गई। आदेश स्पष्ट था, “गाँव वालों को तुरंत सामान दिया जाए। किसान दुखी है, उसे इंतज़ार नहीं करवाया जा सकता।”

​यह तत्परता यह सिद्ध करती है कि संत रामपाल जी महाराज के लिए मानवता की सेवा ही सर्वोपरि है। सरकारी सिस्टम जहाँ महीनों लगा देता है, वहां एक संत का आदेश पलों में खुशियां ले आता है।

​गाँव में उत्सव जैसा माहौल

​जैसे ही पाइपों और मोटरों से लदे ट्रक गाँव की सीमा पर पहुंचे, पूरा बूढ़ा खेड़ा लाठर खुशी से झूम उठा। यह नज़ारा किसी राहत सामग्री के पहुंचने का नहीं, बल्कि किसी बड़े उत्सव का था। ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ ग्रामीणों ने सेवादारों/भक्तों का स्वागत किया।

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एक ग्रामीण ने तो यहाँ तक कहा, “आज हमारे गाँव में साक्षात् भगवान आए हैं। जिन्होंने हमें डूबने से बचाया, वे ही हमारे असली मात-पिता हैं।”

​शून्य खर्च और पूरी पारदर्शिता

​सतगुरु रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई यह मदद पूरी तरह से निःशुल्क थी।

  • ​7,500 फीट (लगभग 2.5 किलोमीटर) लंबी 8 इंच की पाइपलाइन।
  • ​15 हॉर्स पावर की विशाल मोटर।
  • ​पूरा सेट: स्टार्टर, तार, बैंड, नट-बोल्ट और यहाँ तक कि पाइप चिपकाने के लिए फेविकोल भी।

​सरपंच जी ने बताया, “हमारा 5 पैसा भी खर्च नहीं हुआ। हम तो बस अर्जी लेकर गए थे, और गुरुजी ने हमारी झोली भर दी। ऐसा तो सगा भाई भी नहीं करता, जैसा रामपाल जी महाराज ने किया है।”

​मदद के साथ-साथ अनुशासन का भी पूरा ध्यान रखा गया। गाँव का ड्रोन सर्वे करवाया गया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पानी कहाँ भरा है और उसे कैसे निकाला जाएगा। सेवादारों ने स्पष्ट संदेश दिया, “यह जनता का पैसा है, इसका सदुपयोग होना चाहिए। पानी निकलना चाहिए और अगली फसल की बिजाई होनी चाहिए। अगर ऐसा हुआ, तो हम समझेंगे कि हमारी सेवा सफल हुई।”

​ग्रामीणों की जुबानी: “हरि हरियाणा में आ गए”

​जुलाना बाड़ा के प्रधान बसाऊ लाठर ने अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा, “जो काम सरकारें नहीं कर सकीं, वो संत रामपाल जी महाराज ने कर दिखाया। वे किसानों के मसीहा हैं। अगर कभी उन्हें हमारी ज़रूरत पड़ी, तो पूरा खाप और पूरा बाड़ा उनके साथ खड़ा मिलेगा।”

​एक बुजुर्ग ने भावुक होकर कहा, “हमने बहुत संत देखे, बहुत नेता देखे। लेकिन ऐसा दानी नहीं देखा जो बिना स्वार्थ के सब कुछ लुटा दे। आज हमें यकीन हो गया है कि भगवान कहीं ऊपर नहीं, बल्कि संत रामपाल जी के रूप में हमारे बीच हैं।”

​अन्नपूर्णा मुहिम: सेवा का महायज्ञ

​यह राहत कार्य संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ का हिस्सा है। इस मुहिम का उद्देश्य है “कोई भूखा न सोए, कोई लाचार न रहे”। जहाँ अन्य धर्मगुरु और कथावाचक लाखों रुपए लेकर अपनी तिजोरियां भरते हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज संगत से आया एक-एक पैसा वापस समाज की सेवा में लगा देते हैं।

“कलयुग में सतयुग”​

​बूढ़ा खेड़ा लाठर की यह घटना केवल एक समाचार नहीं है, यह एक प्रमाण है। प्रमाण इस बात का कि कलयुग में भी सतयुग जैसा व्यवहार संभव है। प्रमाण इस बात का कि जब नीयत साफ हो, तो संसाधन कम नहीं पड़ते। आज गाँव से पानी निकल रहा है, ज़मीन सूख रही है और किसान गेहूं की बिजाई की तैयारी कर रहे हैं। लहलहाती हुई अगली फसल का हर दाना संत रामपाल जी महाराज की दया की गवाही देगा। गाँव वालों ने एक सुर में कहा, “हम उसे कभी नहीं भूलेंगे जिसने हमारे बुरे वक्त में हमारा हाथ थाम लिया।”

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