International Gita Jayanti Mahotsav श्रीमद्भगवद्गीता के अद्भुत रहस्य

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2021 (International Gita Jayanti Mahotsav) पर जाने गीता जी के अद्भुत रहस्य

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कुरुक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव (International Gita Jayanti Mahotsav) की प्रशासन ने तैयारियां ज़ोर-शोर के साथ शुरू कर दी हैं। इसके लिए कमेटियों का गठन कर दिया है और सबको जिम्मेदारी सौंप दी है। इस बार कोरोना से कुछ राहत मिलने के बाद आयोजन को रंगारंग मनाया जा रहा है। हालांकि कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए नई गाइडलाइनों की पालना की जाएगी। 2 से 19 दिसंबर तक अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2021 का आयोजन किया जाएगा। इसके अंतर्गत 9 से 14 दिसंबर तक मुख्य कार्यक्रम होंगे।

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अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2021 (International Gita Jayanti Mahotsav) मुख्य बिंदु

  • अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन 2 दिसंबर से 19 दिसंबर 2021 तक किया जा रहा है। इस महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम 9 दिसंबर से 14 दिसंबर तक चलेंगे। 
  • अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2021 पर 28 नवंबर को गीता मैराथन भी आयोजित की गई थी।
  • अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2021 के अंतर्गत पानीपत जिले के 50 स्कूलों के 2500 बच्चे एक साथ गीता श्लोकोच्चारण का पाठ करेंगे। 
  • 55000 स्कूली बच्चे गीता के 18 श्लोकों का  सामूहिक उच्चारण करेंगे। 
  • श्लोकों के शुद्ध उच्चारण के लिए प्रत्येक खंड से दो-दो संस्कृत अध्यापक व प्राध्यापक उनका अभ्यास करवाएंगे।
  • प्रतियोगिता में राजकीय व निजी स्कूलों के बच्चे भाग लेंगे
  • प्रतियोगिता में विजेता बच्चों को प्रणाम पत्र व नकद पुरस्कार मिलेगा। 
  • अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में 9 से 11 दिसंबर तक गीता सेमिनार चलेगा। सेमिनार महोत्सव के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगा।
  • कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के 100 विदेशी छात्र अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव सेमिनार में गीता पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे।
  • यूके, यूएसए, मंगोलिया, बुल्गारिया, अफगानिस्तान, मारीशस, अफ्रीका सहित करीब एक दर्जन देशों के विद्वानों को अंतर्राष्ट्रीय गीता सेमिनार 2021 के लिए निमंत्रण भेजा गया है।
  • लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला 11 दिसंबर को महोत्सव में मुख्यातिथि रहेंगे। 

श्रीमद्भगवद्गीता के विषय में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी

  • श्रीमद्भगवद्गीता आज से लगभग 5000 वर्ष पूर्व बोली गई थी । 
  • श्रीमद भगवत गीता की मूल भाषा संस्कृत है। 
  • श्रीमद भगवत गीता में 18 अध्याय है। गीता के 18 अध्याय में कुल 700 श्लोक हैं।
  • श्रीमद्भगवद्गीता वेदव्यास द्वारा लिखी गई। ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्मचारी चाल्र्स विलकिंस ने पहली बार 1785 में गीता का संस्कृत से अंग्रेजी में अनुवाद किया था।
  • श्रीमद्भागवत गीता का ज्ञान काल ब्रह्म ने श्रीकृष्ण के शरीर में प्रेतवश प्रवेश करके बोला था।
  • श्रीमद्भगवद्गीता किसी विशेष व्यक्ति पर आधारित नहीं है यह पूर्ण मोक्ष का मार्ग है।
  • गीता में वर्णित है पूजा और साधना की विधि जिसे केवल तत्वदर्शी संत ही समझा सकता है।
  • गीता,वेद, शास्त्र, उपनिष्द और अन्य धर्म ग्रंथ को समझा रहे हैं तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी

कुरुक्षेत्र में लड़ा गया था महाभारत यानी पारिवारिक युद्ध 

कुरुक्षेत्र में लड़ा गया महाभारत का युद्ध जो कि एक पारिवारिक विश्वयुद्ध था। इस युद्ध में संपूर्ण भारतवर्ष के राजाओं के अतिरिक्त बहुत से अन्य देशों के राजाओं ने भी भाग लिया और सब के सब वीरगति को प्राप्त हो गए। लाखों महिलाएं विधवा हो गईं। इस युद्ध के परिणामस्वरूप भारत से वैदिक धर्म, समाज, संस्कृति और सभ्यता का पतन हो गया। इस युद्ध के बाद से ही अखंड भारत बहुधर्मी और बहुसंस्कृति का देश बनकर खंड-खंड होता चला गया।

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव पर आयोजित की जा रही हैं क्विज़ प्रतियोगिताएं

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2021 (International Gita Jayanti Mahotsav) को लेकर ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता शुरू की गयी है। ऑनलाइन प्रतियोगिता 21 नवंबर से शुरु होकर 8 दिसंबर तक चलेंगी। इस वर्ष ऑनलाइन प्रतियोगिता को पवित्र ग्रंथ गीता और आज़ादी का अमृत महोत्सव के साथ जोड़ा जाएगा। इस प्रतियोगिता के आयोजन की कमान विज्ञान एवं सूचना केंद्र को सौंपी गई है।

International Gita Jayanti Mahotsav: ऑनलाइन प्रतियोगिताओं को लेकर हुई तैयारियां

जिला प्रशासन की ओर से ऑनलाइन प्रतियोगिता की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इस प्रतियोगिता को सफल बनाने व अधिक से अधिक लोगों को साथ जोड़ने के लिए उपायुक्त मुकुल कुमार ने एक कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में अतिरिक्त उपायुक्त अखिल पिलानी, एनआइसी अधिकारी विनोद सिंगला, जिला शिक्षा अधिकारी अरुण आश्री, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड सदस्य उपेंद्र सिंघल को शामिल किया गया है। इस कमेटी की ओर से पवित्र ग्रंथ गीता व आजादी के समय वीर सैनिकों की ओर से गीता के उपदेशों का मनन करने से संबंधित प्रश्नों को पूछा जाएगा। यह कमेटी रोजाना के लिए प्रश्न तैयार करेगी।

गीता महोत्सव क्विज़ प्रतियोगिता में कौन और कैसे ले सकेेगा हिस्सा?

गीता महोत्सव को लेकर स्कूलों में 6वीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए क्विज प्रतियोगिता रविवार से शुरू हुई। प्रतियोगिता 8 दिसंबर तक चलेंगी। इन प्रतियोगिताओं में विजेता विद्यार्थियों को नगद इनाम देकर पुरस्कृत और प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2021 पर क्यों कराई जा रही है क्विज़ प्रतियोगिता?

International Gita Jayanti Mahotsav Quize: यह प्रतियोगिता भगवद गीता के प्रति रुचि उत्पन्न करने व जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। इसमें स्वयं भी भाग लें और अन्य को भी प्रेरित करें। विद्यार्थियों के माता-पिता भी इस क्विज में भाग ले सकते हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रतियोगिता में भाग लेकर विद्यार्थी न केवल अपने ज्ञान में वृद्धि का अवसर पाएँगे बल्कि जीवन की बहुत सी समस्याओं के समाधान भी पाएंगे।

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2021 (International Gita Jayanti Mahotsav)  में कैसे करें प्रतियोगिता के लिए रजिस्ट्रेशन?

  • इस प्रतियोगिता के लिए  इंटरनेशनलगीतामहोत्सव व कुरुक्षेत्रडाटजीओवीडाटइन पर लिंक डाला गया है। 
  • पंजीकरण के समय जो ओटीपी आएगा वही आपका पासवर्ड रहेगा तथा आपका फोन नम्बर लॉगिन आईडी रहेगा।
  • पंजीकरण करते समय रैफरल, मोटीवेटर कान्ट्रेक्ट नम्बर में भरें।
  • प्रतिदिन 10 वैकल्पिक प्रश्न पूछे जाएंगे जिनका उत्तर विद्यार्थियों को देना होगा। 
  • प्रश्नोत्तरी में भाग लेकर नगद पुरस्कार और प्रमाण-पत्र भी विद्यार्थियों को दिए जाएंगे। 

प्रतियोगिता में क्या होंगे संबंधित प्रश्न?

18 दिनों तक चलने वाली प्रतियोगिता में पूछे जाने वाले सभी प्रश्न महाभारत, पवित्र ग्रंथ गीता व आज़ादी का अमृत महोत्सव से संबंधित होंगे। प्रतियोगिता के तहत 8 दिसंबर तक रोजाना 10 प्रश्न पूछे जाएंगे। क्विज प्रतियोगिता के लिए अधिक से अधिक लोगों को भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने वाले मोटिवेटरों को सम्मानित किया जाएगा। प्रतियोगिता के समापन पर 10 मोटिवेटरों को 1000-1000 रुपये का इनाम दिया जाएगा।

प्रशासन की ओर से सही जवाब देने वाले 5 विजेताओं को 500-500 रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। इस प्रतियोगिता के समापन पर 25 लोगों को पुरस्कार दिए जाएंगे। इन सभी विजेताओं को 1000-1000 रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। इतना ही नहीं टॉप 20 लोगों को इनसाइक्लोपीडिया ऑफ गीता आईजीएम 2021 के साथ साथ प्रशंसा पत्र भी दिया जाएगा।

क्या गीता ज्ञान श्रीकृष्ण ने दिया था?

श्री कृष्ण जी जो कि विष्णु भगवान का अवतार हैं, इन्हीं के अंदर प्रवेश करके काल भगवान ने श्रीमद भगवत गीता का ज्ञान अर्जुन को दिया थाwho-delivered-knowledge-bhagavad-gita-hindi

काल ब्रह्म कौन है?

गीता अध्याय 3 श्लोक 14-15 में बताया गया है कि काल ब्रह्म अविनाशी परमात्मा से उत्पन्न हुआ और कर्म ब्रह्म से उत्पन्न हुए और यही ब्रह्म यहां नकली ज्ञान फैलाकर हमे अपने वास्तविक घर जाने से रोकता है।

गीता ज्ञान दाता ने स्वयं को नाशवान बताया है 

गीता ज्ञान दाता ने गीता अध्याय 2 श्लोक 12, अध्याय 4 श्लोक 5, अध्याय 10 श्लोक 2 में अपने आप को नाशवान यानि जन्म-मरण के चक्र में सदा रहने वाला बताया है। गीता ज्ञान दाता ने स्वयं को परम अक्षर पुरुष से उत्पन्न बताया है।  गीता अध्याय 3 श्लोक 14 से 15 में स्पष्ट है कि ब्रह्म काल की उत्पत्ति परम अक्षर पुरूष से हुई है। वही परम अक्षर ब्रह्म ही यज्ञों में पूज्य है। (ये ब्रह्म काल ही गीता ज्ञान दाता है)।

गीता ज्ञान दाता ने अपनी भक्ति का मंत्र अध्याय 8 के श्लोक 13 में बताया है कि मुझ ब्रह्म की भक्ति का केवल एक ओम (ॐ) अक्षर है। इस नाम का जाप अंतिम श्वांस तक करने वाले को इससे मिलने वाली गति यानि ब्रह्मलोक प्राप्त होता है। गीता अध्याय 8 के श्लोक 16 में स्पष्ट किया है कि ब्रह्मलोक में गए साधक भी लौटकर संसार में जन्म लेते हैं। गीता अध्याय 18 के श्लोक 62 में गीता ज्ञान दाता ने अर्जुन को किसी और पूर्ण परमात्मा कि शरण में जाने को कहा है।

श्रीमद् भगवद् गीता के अनुसार कैसे होगी मोक्ष प्राप्ति?

श्रीमद् भगवद् गीता के ज्ञान दाता काल भगवान ने अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 तथा अध्याय 18 श्लोक 62 में कहा है कि अर्जुन सर्व भाव से उस परमेश्वर की शरण में जा। उसकी कृपा से ही तू परम शांति को तथा सतलोक (शाश्वतम् स्थानम्) को प्राप्त होगा। उस परमेश्वर के तत्व ज्ञान व भक्ति मार्ग को मैं (गीता ज्ञान दाता) नहीं जानता। उस तत्व ज्ञान को तत्वदर्शी संतों के पास जा कर उनको दण्डवत प्रणाम कर तथा विनम्र भाव से प्रश्न कर, तब वे तत्वदृष्टा संत आपको परमेश्वर का तत्व ज्ञान बताएंगे। फिर उनके बताए भक्ति मार्ग पर सर्व भाव से लग ।(प्रमाण गीता अध्याय 4 श्लोक 34)। 

तत्वदर्शी संत की पहचान क्या है?

गीता अध्याय 15 श्लोक 1 में कहा है कि यह संसार उल्टे लटके हुए वृक्ष की तरह है। जिसकी ऊपर को मूल तथा नीचे को शाखा है। जो इस संसार रूपी वृक्ष के विषय में जानता है वह तत्वदर्शी संत है। गीता अध्याय 15 श्लोक 2 से 4 में कहा है कि उस संसार रूपी वृक्ष की तीनों गुण (रजगुण-ब्रह्मा, सतगुण-विष्णु, तमगुण-शिव) रूपी शाखा है। जो (स्वर्ग लोक, पाताल लोक तथा पृथ्वी लोक) तीनों लोकों में ऊपर तथा नीचे फैली हैं। उस संसार रूपी उल्टे लटके हुए वृक्ष के विषय में अर्थात् सृष्टि रचना के बारे में मैं इस गीता जी के ज्ञान में नहीं बता पाऊंगा। यहां विचार काल में (गीता ज्ञान) जो ज्ञान आपको बता रहा हूँ यह पूर्ण ज्ञान नहीं है। उसके लिए गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में संकेत किया है जिसमें कहा है कि पूर्ण ज्ञान (तत्वज्ञान) के लिए तत्वदर्शी संत के पास जा, वही बताएंगे। मुझे पूर्ण ज्ञान नहीं है। 

तत्वदर्शी संत की प्राप्ति के पश्चात् किस परमेश्वर की खोज करनी चाहिए?

कबीर, अक्षर पुरुष एक पेड़ है, ज्योति निरंजन वाकी डार। तीनों देवा शाखा हैं, पात रूप संसार।। 

पवित्र गीता जी में भी तीन प्रभुओं(1. क्षर पुरुष अर्थात् ब्रह्म, 2. अक्षर पुरुष अर्थात् परब्रह्म तथा 3. परम अक्षर पुरुष अर्थात् पूर्णब्रह्म) के विषय में वर्णन है। प्रमाण गीता अध्याय 15 श्लोक 16 व17, अध्याय 8 श्लोक 1 का उत्तर श्लोक 3 में है वह परम अक्षर ब्रह्म है तथा तीन प्रभुओं का एक और प्रमाण गीता अध्याय 7 श्लोक 25 में गीता ज्ञान दाता काल(ब्रह्म) ने अपने विषय में कहा है कि मैं अव्यक्त हूँ। यह प्रथम अव्यक्त प्रभु हुआ। फिर गीता अध्याय 8 श्लोक 18 में कहा है कि यह संसार दिन के समय अव्यक्त(परब्रह्म) से उत्पन्न हुआ है। 

फिर रात्रि के समय उसी में लीन हो जाता है। यह दूसरा अव्यक्त हुआ। अध्याय 8 श्लोक 20 में कहा है कि उस अव्यक्त से भी दूसरा जो अव्यक्त(पूर्णब्रह्म) है वह परम दिव्य पुरुष सर्व प्राणियों के नष्ट होने पर भी नष्ट नहीं होता। यही प्रमाण गीता अध्याय 2 श्लोक 17 में भी है कि नाश रहित उस परमात्मा को जान जिसका नाश करने में कोई समर्थ नहीं है। अपने विषय में गीता ज्ञान दाता (ब्रह्म) प्रभु अध्याय 4 मंत्र 5 तथा अध्याय 2 श्लोक 12 में कहा है कि मैं तो जन्म-मृत्यु में अर्थात् नाशवान हूँ। वास्तव में वह परमात्मा कबीर साहेब है जो सबके पिता है। कबीर परमेश्वर व गीता ज्ञान से जुड़ी सत्य आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन Satlok Ashram YouTube channel पर सुनें। 

ट्विटर पर छाए हुए हैं संत रामपाल जी महाराज

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संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र तत्वदर्शी संत हैं। पिछले कुछ दिनों से ट्विटर व अन्य सोशल मीडिया पर #गीता_के_गूढ़_रहस्य और #गीतामहोत्सव_पर_गीतासार नाम के टैग्स पर यथार्थ गीता ज्ञान प्रसारित किया जा रहा है। आप सभी से विनम्र निवेदन है संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं।


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