हिंदी दिवस 2023 (Hindi Diwas): जानें राजभाषा हिंदी क्यों नहीं बन पाई राष्ट्र भाषा?

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हिंदी दिवस 2023 (Hindi Diwas in Hindi): प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को भारत मे हिंदी दिवस मनाया जाता है। हिंदी दिवस से हिंदी पखवाड़े का आयोजन होता है। पखवाड़ा का अर्थ है एक पक्ष अर्थात 15 दिन जोकि 28 सितंबर तक मनाया जाता है। विद्यालयों एवं संस्थानों में इन दिनों में हिंदी भाषा पर रचनात्मक लेखन एवं प्रतियोगिताएं करवाई जाती हैं। हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए इस पखवाड़े का आयोजन किया जाता है। इस लेख में जानेंगे इस विषय में अन्य जानकारी।

हिंदी दिवस के इतिहास की कहानी (Hindi Diwas History in Hindi)

हिंदी दिवस 14 सितंबर को मनाने का यह कारण है कि वर्ष 1918 में गांधी जी ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का प्रस्ताव रखा था। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा मे यह निर्णय हुआ कि हिंदी ही देश की राजभाषा होगी। इसका कारण यह था कि देश के ज्यादातर प्रदेश हिंदी भाषी थे। डॉक्टर राजेन्द्र सिन्हा ने हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए लंबा संघर्ष किया था। 14 सितंबर 1949 को उनका जन्मदिन होता है। राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा, महाराष्ट्र के अनुरोध पर 14 सितंबर को प्रतिवर्ष हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 14 सितंबर 1953 को पहला हिंदी दिवस मनाने की घोषणा की।

हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्य

हिंदी दिवस 2023 (Hindi Diwas in Hindi): हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्य हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना है। हिंदी दिवस के अवसर पर सभी सरकारी कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दिया जाता है। वर्ष भर में हिंदी के लिए किए गए कार्यों एवं योगदान के लिए लोगों को सम्मानित किया जाता है। संस्थानों एवं विद्यालयों में 7 दिवस तक अलग अलग तरह के कार्यक्रमों एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।

हिंदी दिवस के अवसर पर दो पुरस्कार दिये जाते हैं- राष्ट्रभाषा गौरव पुरस्कार एवं राष्ट्रभाषा कीर्ति पुरस्कार। राष्ट्रभाषा गौरव पुरस्कार किसी व्यक्ति विशेष को दिया जाता है जबकि राष्ट्रभाषा कीर्ति पुरस्कार किसी विभाग, संस्थान या समिति को दिया जाता है।

गुजरात में द्वितीय अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन

हिंदी दिवस 2023 (Hindi Diwas in Hindi) | दिनांक 14 सितंबर एवं 15 सितंबर को गुजरात के सूरत में दूसरा अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन आयोजित हो रहा है। इस सम्मेलन में कई अधिकारी, कमर्चारी एवं हिंदी प्रेमी सम्मिलित होंगे। इसका आयोजन राजभाषा का संघ के सरकारी कामकाज में बढ़ावा देना तथा प्रेरणा एवं प्रोत्साहन के रूप में किया जा रहा है।

हिंदी दिवस 2023 की थीम (Hindi Diwas Theme  in Hindi)

हिंदी दिवस 2023: राजभाषा हिंदी के प्रचार प्रसार एवं प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए 14 सितंबर हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। प्रति वर्ष इसकी एक थीम चुनी जाती है जिसके अंतर्गत अनेक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इस वर्ष 2023 की हिंदी दिवस की थीम “हिंदी को जनमत की भाषा बनाना, बगैर उनकी मातृमाभा की महत्व को भूले” है। इसका उद्देश्य केवल हिंदी को बढ़ावा देना बिल्कुल नहीं है बल्कि इसे ऐसी भाषा बनाना है जिससे सभी लोग इसके माध्यम से अपनी बात कह सकें। 

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हिंदी दिवस 2023: संविधान में हिंदी 

हिंदी भाषा का संविधान में अलग स्थान है। भारत के संविधान के भाग 17 के अनुच्छेद 343 से अनुच्छेद 351 तक राजभाषा हिंदी से सम्बंधित प्रावधान दिए हुए हैं। संविधान के अनुच्छेद 343 में संघ की भाषा के सम्बंध में प्रावधान है। इसके खंड (1) के अनुसार देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली हिंदी संघ की राजभाषा होगीं। अनुच्छेद 346 के अनुसार संघ से राज्यों के मध्य, राज्यों से संघ के मध्य, राज्यों के आपसी पत्रादि की भाषा राजभाषा हिंदी होने का प्रावधान है। जानकारी के लिए बता दें कि अनुच्छेद 351 के अनुसार संघ के ये कर्त्तव्य बताए गए हैं कि वह हिंदी भाषा के प्रसार को बढ़ाकर उसका विकास करे एवं उसकी समृद्धि सुनिश्चित करे।

भाषा का जीवन में स्थान

भाषा का कार्य है अपनी बात को दूसरे तक पहुंचाना। इसके साथ ही भाषा का कार्य खत्म हो जाता है। किसी भाषा विशेष को लेकर सजग होना अच्छी बात है किंतु इसके लिए रूढ़ होना गलत है। आज जो स्थिति अंग्रेजी भाषा की है वही स्थिति पूर्व में संस्कृत की रही है। अधिक संस्कृत बोलने वाले को विद्वान मान लिया जाता था, चाहे वह निरर्थक बात ही क्यों न कहे।

इसी कारण से मध्यकाल में आदरणीय कबीर साहेब के ज्ञान को साधारण जनता नहीं समझ पाई क्योंकि उसकी नज़र में मात्र श्लोकों को संस्कृत में रट कर बोलने वाले ढोंगी पंडित ही विद्वान थे। जबकि कबीर साहेब जी ने दोहों को  जनभाषा में अपना तत्वज्ञान समझाया था। कबीर साहेब का ज्ञान सत्य होने पर भी जनता उसे उस समय स्वीकार नहीं सकी एवं संस्कृत में मात्र रटे रटाये श्लोक आदि बोलने वाले पण्डितों को विद्वान मान बैठी।

वर्तमान में त्रुटि सुधार का मौका

वर्तमान में सन्त रामपाल जी महाराज कबीर परमात्मा के नुमाइंदे हैं। अब त्रुटि सुधार का उत्तम अवसर है। सन्त रामपाल जी महाराज ने फिर कबीर साहेब वाला तत्वज्ञान संस्कृत में रचित धर्मग्रंथों से प्रमाणित करके दिखाया है। अब समय रहते तत्वज्ञान की परख करने वाले यह समझ जाएंगे कि भाषा का महत्व बस इतना है कि यह अपनी बात कहने का माध्यम बनती है। अधिक जानकारी के लिए देखें सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल अथवा डाउनलोड करें सन्त रामपाल जी महाराज एप्प एवं पाएं ज्ञानचर्चा, धर्म ग्रन्थ, तत्वज्ञान आदि।

FAQ हिंदी दिवस 2023 (Hindi Diwas in Hindi)

हिंदी दिवस कब मनाया जाता है?

हिंदी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है।

विश्व हिंदी दिवस कब मनाया जाता है?

विश्व हिंदी दिवस प्रति वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है।

हिंदी दिवस एवं विश्व हिंदी दिवस में क्या अंतर है?

हिंदी दिवस पर राष्ट्र में राजभाषा हिंदी का प्रचार एवं प्रसार किया जाता है जबकि विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर विश्व भर में हिंदी साहित्य के महत्व को दर्शाया जाता है।

हिंदी दिवस कैसे मनाया जाता है?

हिंदी दिवस एक सप्ताह तक विभिन्न सम्मेलनों, गोष्ठियों, प्रतियोगिताओं के माध्यम से हिंदी के प्रचार एवं प्रोत्साहन के रूप में मनाया जाता है।

हिंदी दिवस कब से मनाया जा रहा है?

हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 से मनाया जा रहा है।

हिंदी पखवाड़ा कब से कब तक मनाया जाता है?

हिंदी पखवाड़ा 14 सितंबर से 28 सितंबर तक मनाया जाता है।

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