आठ सितंबर,1951 कलयुग का वह सुनहरा दिन है जब एक महान परोपकारी संत पूर्णपरमात्मा की कृपा से पृथ्वी पर जन्म ले चुका है।

“वो तारणहार धरती पर प्रकट हो चुका है यदि उसका अभी पता बता दूं तो सब उसके पीछे हो लेंगे। अभी वह महापुरुष बीस वर्ष का हो चुका है। परंतु अभी उसके बारे में ऊपर से बताने का आदेश नहीं हो रहा है। (यह वक्तव्य जयगुरुदेव पंथ के गुरू तुलसीदास जी ने 7 सितंबर, 1971 को कहा था और अपनी पुस्तक शाकाहारी पत्रिका, मथुरा से प्रकाशित में लिपिबद्ध भी किया)। इस समय परमात्मा ने इनकी दिव्य दृष्टि खोल दी थी।

बिचली/मध्य पीढ़ी – गोल्डन एरा

सन् 1947 से पहले कलियुग की प्रथम पीढ़ी चल रही थी तथा 1947 में आज़ादी मिलने के बाद से बिचली पीढ़ी प्रारम्भ हुई है। इसे आप भक्ति युग भी कह सकते हैं क्योंकि यह मनुष्यों के लिए गोल्डन टाइम चल रहा है जो आगे एक हजार वर्ष तक और चलेगा। इस प्रकार कई हज़ार वर्षों तक कलियुग का समय वर्तमान से भी अच्छा चलेगा।

कौन है वो महान परोपकारी संत जिसकी युगों से प्रतीक्षा हो रही थी?

8 सितम्बर 1951 को गांव धनाना, जिला सोनीपत, हरियाणा के एक किसान परिवार में संत रामपाल जी का जन्म हुआ। पढ़ाई पूरी करके हरियाणा प्रांत में सिंचाई विभाग में जूनियर इंजिनियर की पोस्ट पर 18 वर्ष कार्यरत भी रहे। नौकरी के दौरान उनकी भेंट 107 वर्षीय कबीरपंथी संत स्वामी रामदेवानंद जी महाराज जी से हुई। सन् 1988 में परम संत रामदेवानंद जी से नामदीक्षा प्राप्त की तथा पूर्ण रूप से सक्रिय होकर स्वामी रामदेवानंद जी द्वारा बताए भक्ति मार्ग से साधना की तथा परमात्मा का साक्षात्कार किया। सन् 2006 से वह शायरन सर्व के समक्ष प्रकट हो चुका है, वह है ”संत रामपाल जी महाराज जी“ हैं।

आइए जानते हैं इस भक्ति युग में लोग किसके द्वारा दी भक्ति करेंगे और क्यों?

8 सितंबर, 1951 में संत रामपाल जी महाराज जी को परमेश्वर कबीर जी ने पृथ्वी पर भेजा। संत रामपाल जी का जन्म बिचली पीढ़ी के आरंभ में हुआ था। यह वह महान संत हैं जिनके द्वारा बताई भक्ति से ही लोगों के हर प्रकार के शारीरिक, मानसिक, दैहिक और आत्मिक रोग और कष्ट दूर हो रहे हैं और होंगे। जो पूर्णतया शास्त्र आधारित भक्ति करवाते हैं। जबकि अन्य नकली धर्म गुरु लोकवेद आधारित भक्ति करवा कर सर्व मनुष्य समाज को नरक की तरफ धकेल रहे हैं। अब समाज स्वयं तत्वज्ञान शिक्षित होगा और निर्णय करेगा की सर्वहित सतभक्ति करने से ही होगा।

संत जी ने गुरू परंपरा का निर्वाह करते हुए गुरू की आज्ञा का पालन किया।

संत रामपाल जी को नाम दीक्षा 17 फरवरी 1988 को फाल्गुन महीने की अमावस्या को रात्रि में प्राप्त हुई। उस समय संत रामपाल जी महाराज की आयु 37 वर्ष थी। सन् 1993 में स्वामी रामदेवानंद जी महाराज ने संत रामपाल जी को सत्संग करने तथा सन् 1994 में नामदान करने की आज्ञा प्रदान की। भक्ति मार्ग में लीन होने के कारण जे.ई. की पोस्ट से त्यागपत्र दे दिया ।

घर घर परमात्मा के ज्ञान का सत्संग प्रचार प्रारंभ किया

सन् 1994 से 1998 तक संत रामपाल जी महाराज ने घर-घर, गांव-गांव, नगर-नगर में जाकर सत्संग किया। उनके बहु संख्या में अनुयाई ज्ञान आधार पर होने लगे साथ-साथ ज्ञानहीन संतों का विरोध भी बढ़ता गया। सन् 1999 में गांव करौंथा, जिला रोहतक (हरियाणा) में सतलोक आश्रम करौंथा की स्थापना की तथा 1 जून 1999 से 7 जून 1999 तक परमेश्वर कबीर जी के प्रकट दिवस पर सात दिवसीय विशाल सत्संग का आयोजन करके आश्रम का प्रारम्भ किया तथा महीने की प्रत्येक पूर्णिमा को तीन दिवसीय सत्संग प्रारम्भ किया। दूर-दूर से श्रद्धालु सत्संग सुनने आने लगे तथा तत्वज्ञान को समझकर बहुसंख्या में अनुयाई बनने लगे। यह कारण भी था जब अन्य नकली धर्म गुरु संत जी से ईर्ष्या रखने लगे क्योंकि उन के पास परमात्म ज्ञान भी नहीं है।

परमात्मा स्वयं धरती पर आए हैं।

पवित्र यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 1 में लिखा है कि परमात्मा सशरीर है। अग्ने तनुः असि। विष्णवै त्वां सोमस्य तनुर् असि।। इस मंत्र में दो बार गवाही दी है कि परमेश्वर सशरीर है। परमात्मा जब अपने भक्तों को तत्वज्ञान समझाने के लिए कुछ समय अतिथि रूप में इस संसार में आता है तो अपने वास्तविक तेजोमय शरीर पर हल्के तेजपुंज का शरीर ओढ़ कर आता है। वैसा ही रूप संत रामपाल जी रूप में परमेश्वर कबीर जी ने धारण किया हुआ है।

भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस द्वारा ग्रेट शायरन की पहचान

नास्त्रेदमस फ्रांस के प्रसिद्ध भविष्यवक्ता थे।
फ्रैंच भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस ने सन् (इ.स.) 1555 में एक हजार श्लोकों में भविष्य की सांकेतिक सत्य भविष्यवाणियां लिखी हैं। जिन्हें झुठलाया नहीं जा सकता और उनकी विश्वसनीयता को भी नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। नास्त्रेदमस ने अपनी भविष्यवाणी के शतक पांच के अंत में तथा शतक छः के प्रारम्भ में लिखा है कि आज अर्थात् इ.स. (सन्) 1555 से ठीक 450 वर्ष पश्चात् अर्थात् सन् 2006 में एक हिन्दू संत (शायरन) प्रकट होगा अर्थात् सर्व जगत में उसकी चर्चा होगी।
उस समय उस हिन्दू धार्मिक संत (शायरन) की आयु 50 व 60 वर्ष के बीच होगी।
परमेश्वर ने नास्त्रेदमस को संत रामपाल जी महाराज के अधेड़ उम्र वाले शरीर का साक्षात्कार करवा कर चलचित्र की भांति सारी घटनाओं को दिखाया और समझाया।
नास्त्रेदमस जी ने 16 वीं सदी को प्रथम शतक कहा है इस प्रकार पांचवां शतक 20 वीं सदी हुआ।नास्त्रेदमस जी ने कहा है कि वह धार्मिक हिन्दू नेता अर्थात् संत (CHYREN शायरन) पांचवें शतक के अंत के वर्ष में अर्थात् सन् (ई.सं.) 1999 में घर-घर सत्संग करना त्याग कर अर्थात् चौखटों को लांघ कर बाहर आयेगा तथा अपने अनुयाइयों को शास्त्रविधि अनुसार भक्तिमार्ग बताएगा।
उस महान संत के बताए मार्ग से अनुयाइयों को अद्वितीय आध्यात्मिक और भौतिक लाभ होगा। उस तत्वदृष्टा हिन्दू संत के द्वारा बताए शास्त्र प्रमाणित तत्वज्ञान को समझ कर परमात्मा चाहने वाले श्रद्धालु ऐसे अचंभित होगें जैसे कोई गहरी नींद से जागा हो। *उस तत्वदृष्टा हिन्दू संत द्वारा सन् 1999 में चलाई आध्यात्मिक क्रांति 2006 तक चलेगी। तब तक बहु संख्या में परमात्मा चाहने वाले भक्त तत्व ज्ञान समझ कर अनुयायी बन कर सुखी हो चुके होंगे। *2006 से स्वर्ण युग का प्रारम्भ होगा। यह वह समय होगा जब नकली धर्म गुरु उसका विरोध करेंगे और उस पर देशद्रोह का झूठा केस भी बनाया जाएगा।

मैं उस ग्रेट शायरन के बारे में बता रहा हूं। उसके ज्ञान के प्रभाव से उस द्वीपकल्प (भारतवर्ष) में आक्रामक तूफान, खलबली मचेगी अर्थात् अज्ञानी संतों द्वारा विद्रोह किया जाएगा। उसको शांत करने का उपाय भी उसी को मालूम होगा।

कलयुग के इस मध्य चरण के विषय में कई अन्य महान भविष्यवक्ताओं ने भी भविष्यवाणियां लिखी हैं जिनमें से एक अमेरिका की विश्व विख्यात भविष्यवक्ता फ्लोरेंस ने अपनी भविष्यवाणियों में कई बार भारत का जिक्र किया है।
‘द फाल ऑफ सेंशेशनल कल्चर’ नाम की अपनी पुस्तक में उन्होंने लिखा है कि, सन् 2000 आते-आते प्राकृतिक संतुलन भयावह रूप से बिगड़ेगा। लोगों में आक्रोश की प्रबल भावना होगी। दुराचार पराकाष्ठा पर होगा।
मुझे अपनी छठी अतींद्रिय शक्ति से यह एहसास हो रहा है कि इस विचारधारा को जन्म देने वाला वह महान संत भारत में जन्म ले चुका है। उस संत के ओजस्वी व्यक्तित्व का प्रभाव सब को चमत्कृत करेगा।
उसकी विचारधारा अध्यात्म के कम होते जा रहे प्रभाव को फिर से नई स्फूर्ति देगी। चारों ओर आध्यात्मिक वातावरण होगा। संत की विचारधारा से प्रभावित लोग विश्व के कल्याण के लिए पश्चिम की ओर चलेंगे। धीरे-धीरे एशिया, यूरोप और अमेरिका पर पूरी तरह छा जाएगें।
उस महान संत की विचारधारा से बौद्धिक क्रांति होगी। बुद्धिजीवियों की मान्यताएं बदलेंगी। उनमें ईश्वर के प्रति श्रद्धा और विश्वास की कोंपले फूटेंगी।

फ्लोरेंस के अनुसार वह संत भारत में जन्म ले चुकें हैं।

वह इस संत से काफी प्रभावित थी। अपनी एक दूसरी पुस्तक ‘गोल्डन लाइट ऑफ न्यू एरा’ में भी उन्होंने लिखा है। ‘‘जब मैं ध्यान लगाती हूँ तो अक्सर एक संत को देखती हूँ। जो गौर वर्ण का है। सफेद बाल हैं। उसके मुख पर न दाढ़ी है, न मूछ है।
उस संत के ललाट पर गजब का तेज होता है। उनके ललाट पर आकाश से एक नक्षत्र के प्रकाश की किरणें निरंतर बरसती रहती हैं।
मैं देखती हूँ कि वह संत अपनी कल्याणकारी विचारधारा तथा अपने सत चरित्र प्रबल अनुयायियों की शक्ति से सम्पूर्ण विश्व में नए ज्ञान का प्रकाश फैला रहे हैं। वह संत अपनी शक्ति निरंतर बढ़ा रहे हैं। उनमें इतनी शक्ति है कि वह प्राकृतिक परिवर्तन भी कर सकते हैं।

संत रामपाल जी का उद्देश्य

मानव समाज को शास्त्र आधारित भक्ति करवा कर, परमात्मा से, उसके ज्ञान से अवगत कराना है। मनुष्य को सतभक्ति देकर जन्म मरण से पीछा छुड़ाना है और अपने निजधाम सतलोक लेकर जाना है। संत रामपाल जी के आज लगभग एक करोड़ अनुयायी हैं परन्तु अब पूरा विश्व उनके द्वारा बताई कबीर साहेब की भक्ति करेगा और इसमें अब कोई संदेह नहीं रहा है क्योंकि संत जी द्वारा दिखाया भक्ति मार्ग अब घर घर पहुंच रहा है। घर घर कबीर साहेब जी का ज्ञान चर्चा का विषय बन चुका है। लाखों लोग विकार मुक्त, रोग मुक्त जीवन जी रहे हैं जो स्वयं में आए सकारात्मक बदलाव को अपने सभी भाई बहनों तक पहुंचा रहे हैं की यह लाभ उन्हें संत रामपाल जी द्वारा प्रदत्त भक्ति से मिल रहे हैं।
परमेश्वर कबीर जी अपने बच्चों के उद्धार के लिए शीघ्र ही समाज को तत्वज्ञान द्वारा वास्तविकता से परिचित करवाएंगे, फिर पूरा विश्व संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान का लोहा मानेगा।

अन्य नकली गुरू निरंतर संत जी का विरोध करते रहे हैं।

संत जी के सतज्ञान से घबराए नकली गुरूओं को अपने अज्ञान की दुकानें बंद होती दिखाई देने लगीं तो उन्होंने संत जी पर झूठे आक्षेप लगा कर भोली जनता को गुमराह किया।
संत रामपाल जी महाराज सन् 2003 से अखबारों व
टी वी चैनलों के माध्यम से सत्य ज्ञान का प्रचार कर अन्य धर्म गुरुओं से कह रहे हैं कि आपका ज्ञान शास्त्र विरुद्ध है व आप दोषी बन रहे हैं। यदि मैं गलत कह रहा हूँ तो इसका जवाब दो आज तक किसी भी संत ने जवाब देने की हिम्मत नहीं की।

वो दिन अब नज़दीक है जब संत रामपाल जी महाराज की अध्यक्षता में भारतवर्ष पूरे विश्व पर राज करेगा। पूरे विश्व में एक ही भक्ति मार्ग चलेगा। पूरे विश्व में शांति होगी। जो विरोध करेंगे अंत में वे भी पश्चाताप करेंगे तथा तत्वज्ञान को स्वीकार करेंगे और सर्व मानव समाज सतभक्ति करेगा और पूर्ण मोक्ष प्राप्त करके सतलोक चलेंगे।