हरियाणा के फतेहाबाद जिले की भट्टू तहसील स्थित गदली गांव में महीनों तक गंभीर जलभराव की स्थिति रहने के बाद अब लंबे समय से पानी में डूबी कृषि भूमि के बड़े हिस्से में दोबारा खेती शुरू हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार यह संकट केवल मौसमी बाढ़ तक सीमित नहीं था, बल्कि सेम प्रभावित भूमि की स्थिति ने इसे और गंभीर बना दिया था, जिसके कारण करीब 600–700 एकड़ जमीन लंबे समय तक ठहरे हुए पानी में फंसी रही। किसानों का कहना है कि केवल तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने अपनी अन्नपूर्णा मुहिम के तहत बड़े स्तर पर सहायता प्रदान की।
ग्रामीणों ने बताया कि जब सरकारी प्रयास इस संकट का पूरी तरह समाधान नहीं कर सके, तब उन्होंने संत रामपाल जी महाराज की समिति से सहायता की प्रार्थना की। ग्रामीणों के अनुसार पहले 18 सोलर ट्यूबवेल उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन गांव की कृषि भूमि में फैले जलभराव की गंभीरता के सामने वे पर्याप्त साबित नहीं हुए।
गदली बाढ़ राहत अभियान: मुख्य बिंदु
- फतेहाबाद जिले की भट्टू तहसील का गदली गांव लंबे समय तक बाढ़ और सेम संबंधी जलभराव से प्रभावित रहा।
- करीब 600–700 एकड़ कृषि भूमि जलमग्न रही।
- ग्रामीणों के अनुसार सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए 18 सोलर ट्यूबवेल पर्याप्त नहीं थे।
- किसानों ने संत रामपाल जी महाराज से सहायता की अपील की।
- उनकी अन्नपूर्णा मुहिम के तहत 8 इंच की 13,200 फीट पाइपलाइन और 10 एचपी की तीन मोटरें उपलब्ध कराई गईं।
- खेतों से पानी निकाले जाने के बाद गेहूं और जौ की खेती फिर शुरू हुई।
- ग्रामीणों ने बताया कि घर, सड़कें और फसलें महीनों तक पानी में डूबी रहीं।
- किसानों के अनुसार कपास और धान सहित कई खरीफ फसलों का 100 प्रतिशत नुकसान हुआ।
- ग्रामीणों ने कहा कि स्थापना के लिए आवश्यक छोटे से छोटे सामान तक उपलब्ध कराए गए।
गदली गांव में महीनों तक रहा जलभराव और फसल नुकसान
गदली गांव के निवासियों ने बताया कि सेम प्रभावित परिस्थितियों के कारण उनका कृषि क्षेत्र कई वर्षों से संकट का सामना कर रहा था, जो बाढ़ का पानी जमा होने के बाद और गंभीर हो गया। ग्रामीणों के अनुसार लगभग 700 एकड़ भूमि लंबे समय तक ठहरे पानी में फंसी रही, जबकि कई खेतों में पानी का स्तर तीन से चार फीट तक पहुंच गया था।
किसानों ने बताया कि स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि इससे खेती के साथ-साथ सामान्य ग्रामीण जीवन भी प्रभावित हो गया। कई परिवारों ने कहा कि उन्हें अगली फसल की बुवाई की उम्मीद लगभग खत्म होती दिखाई दे रही थी, क्योंकि महीनों तक खेत पानी में डूबे रहे।
ग्रामीणों के अनुसार कपास और धान सहित कई खरीफ फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं। किसानों ने इसे “100 प्रतिशत नुकसान” बताते हुए कहा कि उन्हें लाखों रुपये की क्षति उठानी पड़ी।
गदली गांव में प्रभाव की स्थिति
| ग्रामीणों द्वारा साझा विवरण | स्थिति |
| प्रभावित कृषि भूमि | करीब 600–700 एकड़ |
| खेतों में पानी का स्तर | लगभग 2.5 से 4 फीट |
| जलभराव की अवधि | कई क्षेत्रों में लगभग 2–4 महीने |
| खराब हुई फसलें | कपास और धान |
| वर्तमान में बोई गई फसलें | गेहूं और जौ |
ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज से मांगी सहायता
ग्रामीणों ने बताया कि स्थानीय प्रयासों और उपलब्ध सरकारी संसाधनों से स्थिति पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी, जिसके बाद गांव के प्रतिनिधियों ने तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से सहायता की अपील की।
ग्रामीणों के अनुसार सहायता उनकी मांग के सात दिनों के भीतर पहुंच गई। इस सहायता में 8 इंच की 13,200 फीट पाइपलाइन और 10 एचपी क्षमता की तीन शक्तिशाली मोटरें शामिल थीं, जिनका उद्देश्य जलमग्न खेतों से पानी निकालना था।

यह सहयोग केवल बड़े उपकरणों तक सीमित नहीं रहा। जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज ने व्यवस्था को चालू करने के लिए आवश्यक हर सामग्री उपलब्ध कराई, जिसमें स्टार्टर, केबल, एल्बो, सक्शन पाइप, रबर गैस्केट, फेवीकोल जैसे चिपकाने वाले पदार्थ, यहां तक कि छोटे स्टील के नट-बोल्ट तक शामिल थे। ग्रामीणों के शब्दों में, “हमें व्यवस्था चालू करने के लिए बाजार से एक नट तक नहीं खरीदना पड़ा।”
किसानों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने बताया कि यह सामग्री भविष्य में उपयोग के लिए स्थायी रूप से गांव को उपलब्ध कराई गई।
सरपंच सुनीता गोदारा ने बताई जमीनी स्थिति
गदली गांव की सरपंच सुनीता गोदारा ने कहा कि गांव सेम प्रभावित क्षेत्र में आता है, जहां संकट के दौरान “100 प्रतिशत पानी” जमा हो गया था।
उन्होंने बताया कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा पाइपलाइन और मोटरें उपलब्ध कराए जाने के बाद जलस्तर में काफी नियंत्रण आया और रिपोर्ट तैयार होने तक लगभग 70 प्रतिशत बुवाई पूरी हो चुकी थी।
उनके अनुसार सेम प्रभावित परिस्थितियों के कारण कुछ क्षेत्रों में अभी भी जलभराव बना हुआ है, लेकिन ग्रामीण शेष पानी निकालने के प्रयास लगातार जारी रखे हुए हैं। उन्होंने कठिन समय में किसानों की सहायता करने के लिए संत रामपाल जी महाराज का आभार व्यक्त किया।
स्थानीय ग्रामीणों ने यह भी बताया कि फसल कटाई के बाद पाइपलाइन विस्तार का अतिरिक्त कार्य किए जाने की संभावना है, ताकि निकासी व्यवस्था को अंतिम निकास बिंदुओं तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाया जा सके।
किसानों ने कहा, जिन खेतों को खोया मान लिया था वहां फिर हुई खेती
कई किसानों ने बताया कि महीनों तक खेतों में पानी भरे रहने के कारण उन्होंने अगली फसल बोने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी।
सावराम नामक एक किसान ने बताया कि उनके परिवार की करीब 20–25 एकड़ भूमि लगभग तीन फीट पानी में महीनों तक डूबी रही। उनके अनुसार राहत अभियान के तहत उपलब्ध कराई गई मोटरों और पाइपलाइनों की सहायता से लगभग 10–15 दिनों में पानी निकाला गया।
उन्होंने कहा कि जिस भूमि पर दोबारा खेती संभव नहीं लग रही थी, वहां अब सफलतापूर्वक गेहूं की बुवाई कर दी गई है।
एक अन्य किसान विनय कुमार ने बताया कि उनके परिवार से जुड़ी लगभग 35–40 एकड़ भूमि दो से तीन फीट पानी में डूबी रही। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के घर भी लगभग दो से तीन महीने तक आंशिक रूप से पानी में डूबे रहे और ग्रामीणों को रोजाना जलभराव वाली सड़कों से होकर गुजरना पड़ता था।
उनके अनुसार बाढ़ के दौरान बच्चों को कंधों पर बैठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया जाता था, ताकि वे स्कूल वाहन तक पहुंच सकें। 42 वर्षीय विनय कुमार ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में पहले कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी थी।
किसानों ने बेहतर कृषि संभावनाओं की जानकारी दी
ग्रामीणों ने बताया कि खेतों से पानी निकाले जाने के बाद पहले जलमग्न रही बड़ी भूमि पर अब गेहूं और जौ की बुवाई फिर शुरू हो गई है।
निवासियों के अनुसार लगभग 200–300 एकड़ जलभराव वाली भूमि को दोबारा खेती योग्य बनाया जा चुका है, जिससे कृषि सुधार, पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता और खाद्यान्न उत्पादन को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं।
किसानों ने बार-बार कहा कि यदि जल निकासी का यह सहयोग नहीं मिलता, तो इस मौसम में बड़ी मात्रा में भूमि बंजर रह जाती। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि इस पहल ने उन किसान परिवारों में दोबारा विश्वास पैदा किया है, जो खरीफ फसलों में भारी नुकसान झेलने के बाद एक और खराब फसल चक्र की आशंका से परेशान थे।
गदली के ग्रामीणों ने इसे दीर्घकालिक राहत बताया
गदली गांव के ग्रामीणों ने कहा कि इस सहायता ने ऐसे समय में खेती दोबारा शुरू करने में मदद की, जब कई लोगों को लग रहा था कि भूमि एक और सीजन तक खेती योग्य नहीं बन पाएगी। ग्रामीणों ने बार-बार कहा कि यह सहयोग उस कठिन समय में मिला, जब खेत, घर और सड़कें लंबे समय तक बाढ़ और ठहरे पानी से प्रभावित थीं। कई ग्रामीणों ने इस पहल को एक बड़े राहत अभियान के रूप में बताया, जिसने बिजाई शुरू करने में मदद की।
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