प्राकृतिक आपदाओं के समय जब प्रशासनिक तंत्र केवल टेंडर, सर्वे की फाइलों और ‘बजट नहीं है’ के खोखले आश्वासनों में उलझ कर रह जाता है, तब पीड़ित जनता की करुण पुकार केवल पूर्ण परमेश्वर तक ही पहुँचती है। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के गांव नंगला झीगा व मगोर्रा, राजस्थान के डीग जिले के गांव किरावता और हरियाणा के हिसार जिले के कौथ कला गांव में एक ऐसा ही भयावह मानवीय संकट खड़ा था, जहाँ सैकड़ों-हजारों बीघा उपजाऊ कृषि भूमि और ग्रामीणों के आशियाने गंदे पानी में समा चुके थे। इस असहनीय पीड़ा के अंधकार के बीच जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ आशा की एक अभूतपूर्व दिव्य किरण बनकर अवतरित हुई, जिसने इन सभी गांवों की तकदीर को खुशहाली में बदल दिया।
गांवों की वर्तमान स्थिति
इन चारों गांवों के जमीनी हालात प्रशासनिक उपेक्षा के कारण अत्यंत दयनीय और नारकीय बन चुके थे:
- नंगला झीगा (मथुरा, UP): पिछले 10 वर्षों से यहाँ की हजारों बीघा उपजाऊ जमीन जलमग्न थी। सड़कें घुटने-घुटने पानी में डूबी थीं, बीमारियां फैल रही थीं और बच्चों की पढ़ाई छूटकर मजदूरी में तब्दील हो चुकी थी।
- किरावता (डीग, राजस्थान): यहाँ का वनवास सबसे लंबा था। सन 1996 से यानी लगभग 30 वर्षों से गांव की 80% जमीन गुड़गांव कैनाल के सीपेज व बारिश के पानी से डूबी हुई थी, जिसके कारण अधिकांश गरीब किसान आजीविका के लिए पलायन कर शहरों में मजदूरी करने चले गए थे।
- कौथ कला (हांसी, हरियाणा): यहाँ फसलों के साथ-साथ गांव का ‘शिवराण पाना’ इलाका इतना गहरा था कि पूरे गांव का गंदा पानी गलियों और बेडरूम तक घुस चुका था।
- मगोर्रा (मथुरा, UP): पिछले 3-4 वर्षों से हजारों बीघा जमीन झील में तब्दील थी। घरों में तीन-तीन फीट गंदा पानी भरा हुआ था, जिससे त्रस्त होकर किसान आत्महत्या तक की बातें करने लगे थे।
ग्रामीणों की मार्मिक मांग
जब प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते किसानों के जूते घिस गए, तब गांवों की सरदारी व किसान यूनियन के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर बरवाला व भरतपुर स्थित ट्रस्ट कार्यालय में संत रामपाल जी महाराज के चरणों में लिखित प्रार्थना पत्र सौंपे। उनकी मांगें इस प्रकार थीं:
- नंगला झीगा: 1320 फीट 8 इंची ड्रेनेज पाइप, 15 HP की एक मोटर।
- किरावता: 2800 फीट 8 इंची पाइप, 20 HP व 10 HP की दो मोटरें, एक 4/4 का ट्रैक्टर कपलिंग सेट पंखा।
- कौथ कला: 3300 फीट 8 इंची पाइप और 10 HP की एक हैवी-ड्यूटी मोटर।
- मगोर्रा: 7300 फीट 8 इंची प्लास्टिक पाइप, एक 15 HP व एक 20 HP की शक्तिशाली मोटरें और 300 फीट कॉपर का तार।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सहायता
पूर्ण संत के दरबार में प्रार्थना पहुँचते ही मात्र 2 से 3 दिनों के भीतर राहत सामग्री से लदे विशाल ट्रकों का काफिला सीधे गांवों की चौपालों पर पहुँच गया। संत रामपाल जी महाराज ने एक दयालु पिता के दृष्टिकोण से संपूर्ण सामग्री पूरी तरह से निःशुल्क और स्थायी रूप से प्रदान की, ताकि भविष्य में भी गांव संकटमुक्त रहें। भिजवाई गई सामग्री में ये मुख्य बिंदु शामिल थे:
- मोटर: मुंह मांगी उच्च क्षमता वाली ब्रांडेड मोटरें (क्रॉम्पटन व किर्लोस्कर मेक)
- पाइप: मुंह मांगी हजारों फीट उच्च गुणवत्ता वाले 8 इंच के मजबूत ड्रेनेज पाइप
- सभी फिटिंग्स व सहायक उपकरण: स्टार्टर पैनल, कॉपर के मुख्य विद्युत तार, 20-20 फीट के फ्लेक्सिबल पाइप, सुंडिया निप्पल, फुटबॉल, एयर वाल्व, रबर गैस्केट, स्टील के नट-बोल्ट और पाइपों को चिपकाने के लिए फेविकोल (एसआर सॉल्यूशन)
संत रामपाल जी महाराज की दया से यह सभी सामग्री निःशुल्क सभी गांवों को प्रदान की गई थी।
ट्रैक्टरों के काफिले और ढोल-नगाड़ों द्वारा भव्य स्वागत
राहत सामग्री का आगमन इन गांवों के लिए किसी ऐतिहासिक उत्सव व दिवाली जैसा था।
- नंगला झीगा में लगभग 2,000 ग्रामीणों का हुजूम ढोल-नगाड़ों के साथ सड़कों पर उतर आया और संत जी के दिव्य स्वरूप पर पुष्प वर्षा की।
- किरावता गांव में भी बुजुर्गों और युवाओं ने ढोल की थाप पर नाचते हुए सेवादारों का स्वागत किया और आदरभाव से संत रामपाल जी महाराज के नाम की सम्मानित पगड़ी अनुयायियों को भेंट की।
- मगोर्रा गांव की पंचायत ने भी संत जी के इस अतुलनीय उपकार के सम्मान में श्रद्धापूर्वक पगड़ी पहनाकर विशेष अभिनंदन किया।
बिजली संकट में जनरेटर व डीजल की विशेष व्यवस्था
राजस्थान के किरावता गांव में जब संत रामपाल जी महाराज को पता चला कि क्षेत्र में बिजली की भारी किल्लत है और जल निकासी बाधित हो सकती है, तो उन्होंने अपनी परम करुणा का परिचय देते हुए मशीनों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए जनरेटर का पूरा किराया और उसमें लगने वाले डीजल का समस्त खर्च भी ट्रस्ट की ओर से वहन करने का सख्त आदेश दिया, जिससे पंचायत पर ₹1 का भी अतिरिक्त बोझ न पड़े।
ग्रामीणों की आवाज़
गांवों के नागरिकों का यह मानना था कि:
- नंगला झीगा से मास्टर साहब व ग्रामीण: “अत्यधिक वर्षा के कारण खेती में तमाम जलभराव हो गया था… हम बाबा रामपाल जी महाराज के ट्रस्ट से मिले और उन्होंने पाइप लाइन और मोटर की व्यवस्था की, उसी खुशी में हम स्वागत के लिए खड़े हैं” “कई वर्षों से समस्या थी और अब इसका समाधान होने वाला है”
- किरावता के सरपंच व जनप्रतिनिधि: “संत रामपाल जी महाराज ने पानी के लिए जो मुहिम छेड़ रखी है, यह बहुत अच्छी मुहिम है… 30-40 साल से पानी भरता है… इस विकट समस्या का हरण करने के लिए संत रामपाल जी एक भगवान रूप में उत्पन्न हुए हैं” “हमने सन 96 से धक्के खाए पर आंसू नहीं पोंछे, रामपाल जी ने किसानों के लिए भारी सुविधा कर दी”
- कौथ कला के किसान यूनियन अध्यक्ष: “हमने पंचायत से रिक्वेस्ट करी, वे बोले बजट नहीं है। फिर हमें गुरु जी नजर आए… गुरु जी ने एक ही अरदास पर 3300 फुट पाइप और 10 HP की मोटर दे दी, गुरु जी बढ़िया क्वालिटी के साथ कभी समझौता नहीं करते” “पहले अफवाहें सुनते थे, पर जब यहाँ एक हफ्ते में गरीब का मकान बनते देखा, तो हमारा भ्रम टूट गया”
- मगोर्रा के बाबूलाल व समाजसेवी दीपक चौधरी: “हम तो इन्हें ईश्वर ही मानते हैं, क्योंकि दुख-दर्द में ये शामिल हो रहे हैं… कथावाचक रमेश शास्त्री आए, 21 लाख ले गए पर समाज हित में एक रुपया खर्च नहीं किया, पर संत रामपाल जी बिना मांगे हमारे द्वार पर फ्री सेवा लेकर आए हैं” “ये तो भगवान का रूप हैं जो निस्वार्थ भाव से सेवा कर रहे हैं”
जवाबदेही और पारदर्शिता
संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ केवल उपकरण दान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूर्ण अनुशासन और अटूट पारदर्शिता पर आधारित है। राहत सामग्री सौंपने के साथ ही पंचायतों को सख्त निर्देश दिए गए कि पानी का सामूहिक रूप से सही उपयोग कर अगली फसल की समय पर बिजाई की जाए। इस पूरी प्रक्रिया की सत्यता जांचने के लिए तीन चरणों में ड्रोन वीडियोग्राफी का नियम बनाया गया है:
- पानी निकासी किए जाने से पहले की स्थिति
- जल निकासी पूर्ण हो जाने के बाद साफ हुए खेतों की स्थिति
- खेतों में नई फसल के पूर्ण रूप से लहराने के समय की स्थिति
इन सभी वीडियो को सतलोक आश्रमों के बड़े समागमों में प्रोजेक्टर पर दानदाताओं को दिखाया जाता है ताकि यह प्रमाणित हो सके कि सेवा का एक-एक पैसा सीधे पीड़ित मानवता के उत्थान में लग रहा है.
तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ही हैं एकमात्र पूर्ण संत व विश्व उद्धारक
आज के इस कलयुगी समाज में जहाँ अधिकांश कथावाचक और धार्मिक गुरु करोड़ों रुपए की कथा फीस लेकर अपनी तिजोरियां भरने में व्यस्त हैं, वहीं जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने 400 से अधिक गांवों को विनाशकारी बाढ़ से मुक्त कराकर यह सिद्ध कर दिया है कि वे ही इस धरा पर एकमात्र पूर्ण संत और कबीर परमेश्वर के सच्चे प्रतिनिधि हैं। स्वयं एक किसान परिवार से होने के कारण वे धरतीपुत्रों के वास्तविक आंतरिक दर्द को बखूबी समझते हैं। संत जी द्वारा प्रदान किया जा रहा सच्चा आध्यात्मिक ज्ञान और यह निस्वार्थ परोपकार कलयुग में सतयुग के आगमन का जीवंत शंखनाद है। संपूर्ण मानव समाज का कल्याण केवल उनकी शरण ग्रहण कर सत्य भक्ति मार्ग अपनाने से ही संभव है।



