डीग (भरतपुर), राजस्थान: यह कहानी राजस्थान के नवगठित डीग जिले की कुम्हेर (रार) तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव अजान की है। यह कहानी उस उपजाऊ जमीन की है जिसके सीने पर पिछले 3 सालों से पानी का भयानक बोझ था और जहां का अन्नदाता बेबसी के आंसू पी रहा था। लेकिन आज अजान गांव में हालात पूरी तरह बदल चुके हैं, और 3 साल बाद खेतों में गेहूं की फसल लहलहा रही है। यह सब मुमकिन हुआ है संत रामपाल जी महाराज द्वारा बिना किसी स्वार्थ के चलाई गई राहत मुहिम के कारण।
त्रासदी का मंजर: 3 साल से जलमग्न थे 1000 बीघा खेत
अजान गांव पिछले तीन वर्षों से एक भीषण प्राकृतिक और प्रशासनिक उपेक्षा की मार झेल रहा था:
- भयानक जलभराव: गांव के करीब 1000 से 1500 बीघा खेत पूरी तरह से झील में तब्दील हो चुके थे।
- 10 फीट तक पानी: गांव के निचले स्तरों और पोखरों के पास 6 से 10 फीट तक गहरा पानी जमा था। स्थिति इतनी भयावह थी कि गांव के मुख्य रास्ते बंद हो चुके थे, घरों की दीवारें ढह रही थीं और लोग अपने घरों की पीछे की दीवारें तोड़कर रास्ते बनाने को मजबूर थे।
- भुखमरी और कर्ज: लगातार दो सालों से खरीफ और रबी दोनों फसलें पूरी तरह से नष्ट हो रही थीं। किसानों की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय हो गई थी कि पिछले साल ग्रामीणों ने अनाज मांग-मांग कर अपना पेट पाला।
प्रशासन की विफलता और ग्रामीणों का पलायन का मन
सरपंच प्रतिनिधि गुड्डू और गांव के वासियों के अनुसार, उन्होंने सांसद, विधायक, जिला कलेक्टर और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट-काट कर अपने जूतों के तले घिस दिए। राजस्थान के वर्तमान मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र से सटा होने के बावजूद इस गांव की सुध लेने वाला कोई नहीं था। थक-हारकर कर्ज के बोझ तले दबे किसान गांव से पलायन करने और अपनी पुश्तैनी जमीन छोड़ने का मन बना चुके थे।
अर्जी के मात्र 48 घंटे में बरवाला आश्रम से आया ‘राहत का सैलाब’
जब ग्रामीणों को पड़ोसी गांवों में संत रामपाल जी महाराज द्वारा किए जा रहे परोपकारी कार्यों के बारे में पता चला, तो गांव की सरदारी ने एक आखिरी उम्मीद के साथ महाराज जी के दरबार में अर्जी लगाई।
संत रामपाल जी महाराज की संवेदनशीलता का आलम यह था कि अर्जी मिलने के मात्र 48 घंटों के भीतर बिना किसी प्रशासनिक देरी के अत्याधुनिक संसाधनों का एक विशाल काफिला गांव पहुंच गया:
- मशीनों का जत्था: 15 HP की एक मुख्य मोटर, 10 HP की दो अन्य हाई-पावर मोटरें और 4 ट्रैक्टर कपलिंग सेट भेजे गए।
- लंबी पाइपलाइन: 14,000 फीट लंबी 6-इंची पाइपलाइन और 10 फीट लंबी 8-इंची पाइप की विशाल खेप पहुंचाई गई।
- अकल्पनीय खर्च: गांव में बिजली की किल्लत को देखते हुए आश्रम द्वारा जनरेटर का पूरा किराया तथा जनरेटर व ट्रैक्टरों में लगने वाले हजारों लीटर डीजल का खर्च भी मुफ्त उठाया गया। साथ ही 100 किलो फेविकोल और नट-बोल्ट जैसी छोटी-बड़ी चीजें भी आश्रम से भेजी गईं ताकि पंचायत पर ₹1 का भी बोझ न पड़े।
परिणाम: 50% से अधिक जमीन पर बिजाई सफल, अन्नदाता को मिला संबल
संत रामपाल जी महाराज और ग्रामीणों ने दिन-रात मोटरों का संचालन कर पानी को गांव की सीमाओं से बाहर निकाल दिया है।
- कृषि में सुधार: गांव की 50% से अधिक जमीन (लगभग 500 से 600 बीघा) से पानी पूरी तरह निकालकर गेहूं की बुवाई कर दी गई है। आज वहां फसल हवा में झूम रही है।
- 1000 मन अनाज की उम्मीद: ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार खेतों से 1000 मन से ज्यादा गेहूं पैदा होगा, जिससे उनके खाने और पशुओं के चारे का संकट हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
- भूजल की चुनौती का सामना: बची हुई लगभग 40-50% जमीन पर भूजल का स्तर (Water Level) अत्यधिक ऊपर होने के कारण पानी बार-बार ऊपर आ जाता है, जिसे निकालने के लिए संत रामपाल जी महाराज जी के संसाधनों द्वारा वर्तमान में भी गांव के भीतर और रास्तों से लगातार जल निकासी की जा रही है।
ग्रामीणों ने जताया आभार: “संकट में संत रामपाल जी महाराज जी बने सहारा”
गांव के 71 वर्षीय बुजुर्ग गंभीर सिंह और अन्य युवाओं ने कहा:
“ब्रज भूमि संतों की भूमि है, लेकिन हमने अपने जीवन में ऐसा सच्चा परोपकारी संत नहीं देखा। जहां मुख्यमंत्री, सांसद और विधायक फेल हो गए, वहां संत रामपाल जी महाराज ने हमारे बच्चों के मुंह का निवाला छीनने से बचा लिया।



