हरियाणा के भिवानी जिले के तोशाम तहसील स्थित रिवासा गांव में महीनों तक चली भीषण बाढ़ के बाद अब कृषि गतिविधियां धीरे-धीरे पुनः शुरू हो रही हैं। लगभग 600–700 एकड़ कृषि भूमि 4–5 फीट तक भरे स्थिर पानी में डूबी रही, जिससे किसान पूरी तरह असहाय हो गए थे। प्रारंभिक स्तर पर सीमित सहायता मिलने के कारण स्थिति लगभग तीन महीने तक गंभीर बनी रही। हालांकि, अब मोटरों और पाइपलाइनों के माध्यम से बड़े स्तर पर जल निकासी होने से खेतों के एक बड़े हिस्से में फिर से बुवाई संभव हो सकी है, जिससे किसानों को राहत और नई उम्मीद मिली है।
गांववासियों ने अपनी समस्या को लेकर तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना की थी, क्योंकि उनके खेत जलभराव के कारण पूरी तरह अनुपयोगी हो चुके थे।
यह सहायता केवल बड़े उपकरणों तक सीमित नहीं थी। संत रामपाल जी महाराज के एक निर्देश पर उनके अनुयायियों ने व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक सभी सामग्री उपलब्ध कराई—जैसे स्टार्टर, केबल, एल्बो, सक्शन पाइप, रबर गैस्केट, फेविकोल जैसे चिपकने वाले पदार्थ, और छोटे-छोटे स्टील के नट-बोल्ट तक।
मुख्य बिंदु: रिवासा में बाढ़ से उबरना और खेती का पुन: आरंभ
- लगभग 600–700 एकड़ भूमि 4–5 फीट पानी में डूबी रही
- जलभराव की स्थिति लगभग तीन महीने तक बनी रही
- शुरुआत में केवल एक मोटर उपलब्ध कराई गई, जो अपर्याप्त थी
- किसानों ने संत रामपाल जी महाराज से सहायता की अपील की
- 315 एचपी मोटर और 8000 फीट पाइपलाइन से जल निकासी संभव हुई
- लगभग 400 एकड़ क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है, 100–200 एकड़ शेष
- शेष भूमि पर सब्जियां और चारा फसलें उगाई जाएंगी
- भविष्य के लिए स्थायी भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली स्थापित
- किसानों ने कृषि गतिविधियों में उल्लेखनीय सुधार की पुष्टि की
महीनों की बाढ़ से खेती पूरी तरह ठप
रिवासा गांव में संकट तब शुरू हुआ जब बाढ़ का पानी खेतों में भर गया और लगभग 600 से 700 एकड़ भूमि 4 से 5 फीट पानी में डूब गई। किसानों के अनुसार यह पानी तीन महीने तक खेतों में जमा रहा, जिससे खेती पूरी तरह रुक गई। साथ ही, गंदे पानी के कारण हानिकारक जीव-जंतु भी रिहायशी इलाकों तक पहुंचने लगे।
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सरपंच वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रशासन से कई बार सहायता मांगी गई, लेकिन शुरुआत में केवल एक मोटर ही उपलब्ध कराई गई, जो इतने बड़े क्षेत्र के लिए नाकाफी थी। किसानों ने इस स्थिति को “समुद्र में बूंद” जैसा बताया।
सहायता की अपील और त्वरित हस्तक्षेप
सीमित संसाधनों और बिगड़ती परिस्थितियों के बीच गांववासियों ने संत रामपाल जी महाराज से, उनके मुनींदर धर्मार्थ ट्रस्ट के माध्यम से सहायता के लिए निवेदन किया। लगभग दस दिनों के भीतर राहत कार्य शुरू कर दिए गए।

इस दौरान उच्च क्षमता वाले उपकरण लगाए गए, जिनमें शामिल हैं:
- 315 एचपी मोटर
- 8000 फीट लंबी 8 इंच पाइपलाइन
इनके माध्यम से दिन-रात लगातार जल निकासी की गई, जिससे खेतों का पानी धीरे-धीरे गांव से बाहर निकाला गया।
व्यापक सहयोग से बनी प्रभावी व्यवस्था
किसानों के अनुसार केवल मशीनें ही नहीं, बल्कि उनके संचालन के लिए आवश्यक सभी संसाधन भी उपलब्ध कराए गए। इनमें शामिल हैं:
- स्टार्टर और विद्युत केबल
- एल्बो और सक्शन पाइप
- रबर गैस्केट और चिपकने वाले पदार्थ
- स्टील के नट-बोल्ट
किसानों को बाजार से कोई अतिरिक्त सामग्री खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ी।
बड़े क्षेत्र में फिर से शुरू हुई खेती
जल निकासी के बाद कृषि गतिविधियां पुनः शुरू हो गई हैं। किसानों के अनुसार:
- लगभग 400 एकड़ में बुवाई पूरी हो चुकी है
- 100–200 एकड़ क्षेत्र अभी भी जलभराव या ट्रैक्टर पहुंच की कमी के कारण शेष है
कई खेतों में गेहूं की बुवाई हो चुकी है और अंकुरण भी दिखाई देने लगा है। शेष भूमि को फरवरी के दूसरे सप्ताह तक तैयार करने का लक्ष्य है।
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इन क्षेत्रों में आगे:
- सब्जियां
- हरा चारा और ज्वार जैसी फसलें उगाई जाएंगी
किसानों ने बताई मुश्किलें और राहत की कहानी
सतवीर सिंह, राजकुमार, जयवीर, रामकिशन और कृष्ण कुमार जैसे किसानों ने बताया कि पहले स्थिति अत्यंत गंभीर थी।
- खेतों में पानी का स्तर 5–6 फीट तक पहुंच गया था
- खेती पूरी तरह बंद हो चुकी थी
- पिछली फसल पहले ही नष्ट हो चुकी थी
किसानों के अनुसार, यदि समय पर सहायता नहीं मिलती तो अगली फसल भी नहीं हो पाती और उन्हें “दोहरे नुकसान” का सामना करना पड़ता।
हालांकि, जल निकासी के बाद:
- खेती फिर से शुरू हुई
- गेहूं की बुवाई हुई
- कुछ क्षेत्रों में 15–20 क्विंटल उत्पादन की संभावना जताई गई
भविष्य के लिए स्थायी समाधान तैयार
ऐसी स्थिति दोबारा न आए, इसके लिए गांव में लगभग 3 फीट गहराई में स्थायी भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली स्थापित की गई है।
इसके प्रमुख पहलू हैं:
- पाइपलाइन को दो पहाड़ियों के बीच बने बांध से जोड़ा गया
- यह बांध लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में फैला है
- इससे वन्यजीवों और सिंचाई दोनों के लिए पानी उपलब्ध रहेगा
- जल निकासी और सिंचाई दोनों कार्य संभव होंगे
किसानों ने बताया कि उपकरणों को सुरक्षित रखा गया है और भविष्य में आपात स्थिति के लिए व्यवस्था तैयार है। हालांकि, अभी भी लगभग 3000 फीट अतिरिक्त पाइपलाइन और एक मोटर की आवश्यकता बनी हुई है।
खेतों और गांव में दिखा स्पष्ट बदलाव
अब गांव में स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं:
- जहां पहले पानी भरा था, वहां अब खेती हो रही है
- कई खेतों में गेहूं की फसल दिखाई दे रही है
- ट्रैक्टर नियमित रूप से काम कर रहे हैं
किसानों के अनुसार लगभग 80% सुधार हो चुका है और कृषि गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
सामूहिक प्रयास और समय पर सहायता का परिणाम
रिवासा गांव की स्थिति यह दर्शाती है कि समय पर सहायता और सामूहिक प्रयास से बड़े कृषि संकट से भी उबरा जा सकता है। महीनों तक जलभराव झेलने के बाद अब किसान न केवल खेती कर पा रहे हैं, बल्कि आने वाली फसल की तैयारी भी कर रहे हैं।
स्थायी जल निकासी प्रणाली के साथ भविष्य में ऐसी समस्याओं से निपटने की क्षमता भी विकसित हुई है। रिवासा के किसानों ने नुकसान से उबरकर अब पुनर्निर्माण की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाया है।
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