February 19, 2026

Dhanteras Puja 2025 [Hindi]: इस धनतेरस पर करें आत्मविश्लेषण – परंपरा क्यों, और कैसे?

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Last Updated on 16 October 2025 IST | Dhanteras Puja in Hindi [2025]: धनतेरस की पूजा, दिवाली की शुरुआत है। यह कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष के तेरहवें दिन (त्रयोदसी) शुरू होता है। अंग्रेज़ी कैलेंडर के अनुसार, यह प्रतिवर्ष अक्टूबर-नवंबर माह में मनाया जाता है। इस साल, धनतेरस 18 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा, 20 अक्टूबर को नरक चतुर्दशी, 20 अक्टूबर को दीवाली/दीपावली, 22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा और 23 अक्टूबर को भाई दूज का त्योहार मनाया जाएगा। क्या आप जानते हैं? हिंदुओं के तैंतीस करोड़ देवी-देवता हैं, परंतु परमेश्वर केवल एक है। लक्ष्मी जी देवी दुर्गा का ही एक रूप है। लक्ष्मी जी जो विष्णु जी की अर्द्धांगिनी हैं की इस तरह की पूजा का विधान हमारे पवित्र पांचों वेदों और गीता जी में कहीं पर भी वर्णन नहीं है। सभी देवी-देवताओं की पूजा का आधार वेद और गीता होने चाहिए न कि लोकवेद।

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धनतेरस की पूजा भारत में बहुत आस्था के साथ की जाती है। आज के डिजिटल युग में धनतेरस मनाने की रूपरेखा बदल गई है। अब लोग ऑनलाइन ऐप्स से सोना, चांदी, इलेक्ट्रोनिक बर्तन आदि खरीदते हैं। धनतेसर के अवसर पर कई कंपनियां ऑफर भी देती हैं। इस डिजिटल दौर में लोग डिजिटल गोल्ड भी खरीदना पसंद करते हैं। इस विशेष अवसर पर लोग अपने परिवार को ई – गिफ्ट कार्ड्स, Paytm Cash भी भेजते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लोग धनतेरस से संबंधित फोटो, वीडियो आदि पोस्ट करते हैं। एक्स(ट्विटर), इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि प्लेटफॉर्म्स पर भी लोग #Dhanteras नामक टैग चलाते हैं। 

Dhanteras Puja in Hindi: कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्र-मंथन के समय भगवान धन्वन्तरि (विष्णु) अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार एक समय समुद्र मंथन के समय भगवान विष्णु धनवंतरी रूप में प्रकट हुए थे। धनवंतरी जी आयुर्वेद के जनक हैं। धनतेरस भगवान विष्णु के प्रकट होने का दिवस भी है। आप को बता दें भारत सरकार ने 28 अगस्त, 2016 में धनतेरस के दिन को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया।

धनतेरस (Dhanteras Puja) को लेकर लोगों की आम धारणा

आयुर्वेद में धन शब्द का अभिप्राय: स्वास्थ्य से है; किंतु लोगों ने इस धन शब्द का मतलब रुपए पैसों से मान लिया है। जबकि मनुष्य के लिए असली धन उसका स्वास्थ्य होता है। पहले के समय में लोग सोने, चांदी, तांबे, पीतल के गृह उपयोगी सामान खरीदते थे लेकिन बदलते दौर के साथ लोग धनतेरस पर सोने, चांदी, हीरे के आभूषण के अलावा वाहन, मोबाइल और अन्य मंहगे सामान खरीदने लगे हैं। धनतेरस के दिन से दीपावली के दिन तक लोग अपने आसपास और घरों में दीप प्रज्वलित करते हैं। लोगों की धारणा है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न हो जाती हैं, घर में धन की वृद्धि होती है।

लोकमान्यताओं पर आधारित है धनतेरस (Dhanteras Puja)

Dhanteras Puja in Hindi: लोकमान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर लोग धन की देवी लक्ष्मी जी एवं धन के कोषाध्यक्ष देव श्री कुबेर एवं धनवंतरी और यम की पूजा अर्चना करते हैैं। लोगों का ऐसा विश्वास है कि धनतेरस के दिन बर्तन, सामान, सोने-चांदी के आभूषण अवश्य खरीदना चाहिए जिसे वे शुभ मानते हैं तथा इसी अंधविश्वास के चलते लोग धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने को भी ज़रूरी समझते हैं और कहते हैं कि मां लक्ष्मी साफ़-सुथरे घर में ही प्रवेश करती हैं।

लक्ष्मी की पूजा करने के बावजूद भारतीय गरीब क्यों?

सतत् विकास समाधान नेटवर्क (SDSN) में स्वतंत्र विशेषज्ञों के एक समूह द्वारा राष्ट्रों की प्रगति रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है। वैश्विक सतत् विकास रिपोर्ट 2024 के अनुसार 163 देशों में भारत 109वें स्थान पर है। यह वर्ष 2021 में 120वें और वर्ष 2020 में 117वें स्थान पर था। भारत देश की बहुत सी आबादी संयुक्त राष्ट्र के मानकों के अनुसार गरीब है। ऐसे देश में जहां धनतेरस और दीपावली पर यह सोच कर खरीदारी, पूजा, साफ-सफाई, सजावट और उपहारों का लेन-देन किया जाता हो कि उनकी इस मनमानी क्रिया से एक देवी लक्ष्मी जी को और एक देवता कुबेर को प्रसन्न किया जाएगा। जो कि मूर्खता और अंधविश्वास को ही दर्शाता है। 

■ Read in English | Dhanteras Puja: Know on Dhanteras the Method of Accumulating True Wealth

जबकि देवी देवताओं की पूजा करने का तरीका मनमाना नहीं शास्त्र आधारित होना चाहिए। शास्त्र आधारित भक्ति करने के लिए सभी मनुष्यों को आध्यात्मिक ज्ञान ग्रहण करना होगा। आध्यात्मिक ज्ञान ग्रहण करने के लिए तत्त्वदर्शी संत की शरण में जाना होगा

हम सभी देवी देवताओं की इतनी भक्ति करते हैं फिर भी हम दुखी क्यों हैं?

Dhanteras Puja in Hindi: केवल परमपिता परमेश्वर कबीर साहेब जी की पूजा ही हमारे पापों को नष्ट कर सकती है। अन्यथा व्यक्ति पिछले जन्मों में किए गए पाप कर्मों का परिणाम ही भुगतता रहता है। जिस कारण भ्रमित रहता है। इसका सीधा सा कारण यह है कि सभी लोग ग़लत साधना (शास्त्रविरुद्ध भक्ति/ मनमानी भक्ति) कर रहे हैं, जिस कारण वो भगवान से मिलने वाले लाभ प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। जिससे उनके सभी प्रयास व्यर्थ हो जाते हैं। इसलिए भी वे किसी भी प्रकार की पूजा करने के बावजूद दुखी और गरीब ही रहते हैं।

Dhanteras Puja in Hindi | धनतेरस पर ईश्वर से यह मांगे

परमात्मा से हमें किसी विशेष दिन (धनतेरस/दीपावली आदि पर ) नहीं बल्कि सभी दिन यह प्रार्थना करनी चाहिए कि हे परमात्मा! मेरे परिवार की जो आवश्यकताएं हैं उन्हें आप ही पूरा करने में समर्थ हैं। आप के अलावा संसार में दूसरा कोई नहीं जो हमारा पेट भर सके।

साईं इतना दीजिए जामें कुटुंब समाय।

मैं भी भूखा न रहूं अतिथि न भूखो जाय।।

तीन देवताओं की भक्ति करने वालों को गीता जी में क्या कहा गया है?

Dhanteras Puja in Hindi: गीता अध्याय 7 श्लोक 15 में कहा है कि तीनों गुणों (रजगुण ब्रह्मा जी, सतगुण विष्णु जी तथा तमगुण शिव जी) रूपी मायाजाल द्वारा जिनका ज्ञान हरा जा चुका है अर्थात् जो साधक इन तीनों देवताओं से भिन्न प्रभु को नहीं जानते। इन्हीं से मिलने वाले नाममात्र लाभ से ही मोक्ष मानकर इन्हीं से चिपके रहते हैं, इन्हीं की पूजा करते रहते हैं। ऐसे व्यक्ति असुर स्वभाव को धारण किए हुए, मनुष्यों में नीच, दूषित कर्म करने वाले मूर्ख जन मुझ काल ब्रह्म को नहीं भजते। (गीता अध्याय 7 श्लोक 15)

तीनों देवताओं (ब्रह्मा जी रजगुण, विष्णु जी सतगुण तथा शिव जी तमगुण) की पूजा करने वाले राक्षस स्वभाव को धारण किए हुए मनुष्यों में नीच, दूषित कर्म करने वाले मूर्ख बताए है। भावार्थ है कि इनकी पूजा नहीं करनी चाहिए। गीता अध्याय 16 के श्लोक 23 और 24 में शास्त्र विरूद्ध पूजा के बारे में वस्तृत जानकारी है.

कारण

  1. श्री ब्रह्मा जी रजगुण की पूजा हिरण्यकश्यप ने की थी, अपने पुत्र प्रहलाद का शत्रु बन गया, राक्षस कहलाया, कुत्ते वाली मौत मरा। 
  2. श्री शिव जी तमगुण की पूजा रावण ने की थी, जगतजननी सीता को उठाया, पत्नी बनाने की कुचेष्टा की, राक्षस कहलाया, कुत्ते की मौत मरा। भस्मासुर ने भी तमगुण शिव जी की पूजा की थी, राक्षस कहलाया, बेमौत मारा गया।
  3. श्री विष्णु जी की पूजा करने वाले वैष्णव कहलाते हैं। एक समय हरिद्वार में एक कुम्भ का पर्व लगा। उस पर्व में स्नान करने के लिए सर्व संत (गिरी, पुरी, नाथ, नागा) पहुँच गए। नागा श्री शिव जी तमगुण के पुजारी होते हैं तथा वैष्णव श्री विष्णु सतगुण के पुजारी होते हैं। सभी हरिद्वार में हर की पैड़ी पर स्नान करने की तैयारी करने लगे जो संख्या में लगभग 20 हजार थे। कुछ देर बाद इतनी ही संख्या में वैष्णव साधु हर की पैड़ी पर पहुँच गए। वैष्णव साधुओं ने नागाओं से कहा कि हम श्रेष्ठ हैं, हम पहले स्नान करेंगे। इसी बात पर झगड़ा हो गया। तलवार, कटारी, छुरों से लड़ने लगे, लगभग 25 हजार दोनों पक्षों के साधु तीनों गुणों के उपासक कटकर मर गए।

इसलिए गीता अध्याय 7 श्लोक 12 से 15 में तीनों गुणों (रजगुण ब्रह्मा जी, सतगुण विष्णु जी तथा तमगुण शिव जी) के उपासकों को राक्षस स्वभाव को धारण किया हुआ, मनुष्यों में नीच दूषित कर्म करने वाला मूर्ख कहा है। इससे सिद्ध हुआ कि श्री ब्रह्मा रजगुण, श्री विष्णु सतगुण तथा श्री शिव तमगुण की भक्ति करने वाले मूर्ख, राक्षस, मनुष्यों में नीच तथा घटिया कर्म करने वाले मूर्ख व्यक्ति हैं अर्थात् इनकी पूजा करना श्रीमद् भगवत गीता में मना किया है, इनकी ईष्ट रूप में पूजा करना व्यर्थ है।

गीता अनुसार किस एक ईश्वर की भक्ति करना श्रेयस्कर है?

Dhanteras Puja in Hindi [Special]: गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि उस तत्वज्ञान को जिसे परमेश्वर अपने मुख कमल से बताता है, तू तत्वदर्शी संतों के पास जाकर समझ, उनको दण्डवत् प्रणाम करने से, नम्रतापूर्वक प्रश्न करने से वे परमात्म तत्व को भली-भाँति जानने वाले तत्वदर्शी महात्मा तुझे तत्वज्ञान का उपदेश करेंगे। अर्थात प्रत्येक मनुष्य को तत्त्वदर्शी संत को ढूंढ कर उनके द्वारा बताई गई भक्ति करनी चाहिए। जिनके बारे में गीता अध्याय 15 के श्लोक 1-4 में वर्णित किया गया है।

देवतागण मनुष्य को बिना परमात्मा की आज्ञा के कुछ नहीं दे सकते

गीता अध्याय 2 के श्लोक 17 में लिखा है जिसका भावार्थ है कि गीता ज्ञान दाता काल भगवान ने अर्जुन से कहा! हम सब (मैं और तू तथा सर्व प्राणी) जन्म-मरण में हैं। श्लोक 17 में कहा है कि वास्तव में अविनाशी तो उसी परमेश्वर (पूर्ण ब्रह्म) को ही जान जिससे यह सर्व ब्रह्मण्ड व्याप्त (व्यवस्थित) हैं। उस अविनाशी (सतपुरुष) का कोई नाश नहीं कर सकता। उसी की शक्ति प्रत्येक जीव में और कण-कण में विद्यमान है ठीक वैसे ही जैसे सूर्य दूर स्थान पर होते हुए भी उसका प्रकाश व उष्णता पृथ्वी में सब जगह पर प्रभाव बनाए हुए है। जैसे सौर ऊर्जा के संयन्त्र को शक्ति दूरस्थ सूर्य से प्राप्त होती है। उस संयन्त्र से जुड़े सर्व, पंखें व प्रकाश करने वाले बल्ब आदि कार्य करते रहते हैं। 

इसी प्रकार पूर्ण परमात्मा सत्यलोक (सटलोक) में दूर विराजमान होकर सर्व प्राणियों के आत्मा रूपी संयन्त्र को शक्ति प्रदान कर रहा है। उसी की शक्ति से सर्व प्राणी व भूगोल गति कर रहे हैं। जिन शास्त्रविरूद्ध साधकों को परमात्मा का लाभ प्राप्त नहीं हो रहा उनके अन्त:करण पर पाप कर्मों के बादल छाए होते हैं। सतगुरू शरण में आने के पश्चात् सत्य साधना (शास्त्र विधि अनुसार) करने से वे पाप कर्मों के बादल समाप्त हो जाते हैं। जिस कारण से पूर्ण संत की शरण में रह कर मर्यादावत् साधना करने से परमात्मा से मिलने वाली शक्ति प्रारम्भ हो जाती है। कबीर परमेश्वर के प्रिय शिष्य गरीबदास जी ने कहा है:-

जैसे सूरज के आगे बदरा ऐसे कर्म छया रे।

प्रेम की पवन करे चित मन्जन झल्के तेज नया रे।।

सरलार्थ: जैसे सूर्य के सामने बादल होते हैं ऐसे पाप कर्मों की छाया जीव व परमात्मा के मध्य हो जाती है। पूर्ण संत की शरण में शास्त्रविधि अनुसार साधना करने से, प्रभु की भक्ति रूपी मन्जन से प्रभु प्रेम रूपी हवा चलने से पाप कर्म रूपी बादल हट कर भक्त के अंतःकरण में नई चमक आती है और परमात्मा से मिलने वाला लाभ प्रारम्भ हो जाता है। यही प्रमाण गीता अध्याय 18 श्लोक 61 में है कि पूर्ण परमात्मा प्रत्येक प्राणी को उसके कर्मों के अनुसार यन्त्र (मशीन) की तरह भ्रमण करवाता है तथा जैसे पानी के भरे मटकों में सूर्य प्रत्येक में दिखाई देता है, ऐसे परमात्मा प्रत्येक जीव के हृदय में दिखाई देता है। गीता अध्याय 18 श्लोक 46 में भी यही प्रमाण है। लिखा है कि जिस परमेश्वर से सम्पूर्ण प्राणियों की उत्पत्ति हुई है और जिससे यह समस्त जगत व्याप्त है, उस परमेश्वर की अपने वास्तविक कर्मों द्वारा पूजा करके मानव (स्त्री-पुरूष) परम सिद्धि को प्राप्त हो जाता है।

जब रात के समय 40 वाॅट का बल्ब जलाया जाता है तो छोटे पंख वाले मक्खी-मच्छर व अन्य उड़ने वाले जंतु उसके आसपास ऐसे चिपकने लगते हैं जैसे वह उनके लिए सच्चा आनन्द देने वाला हो परंतु 100 वाॅट का बल्ब जलते ही वह 40 वाॅट का बल्ब छोड़ कर 100 वाॅट के बल्ब पर जा चिपकते हैं पूर्ण आनंद प्राप्त करने हेतु। ऐसे ही अज्ञानतावश अभी तक जिन देवी-देवताओं को आप सर्वेसर्वा समझ कर उनसे आस लगाए बैठे हो वे आपको कुछ नहीं दे सकते। जब आपको तत्त्वदर्शी संत से तत्वज्ञान प्राप्त हो जाएगा तो आप पूर्ण परमात्मा को समझ पाओगे और यह जान जाओगे कि सच्चा आनन्द देने वाला यानी सच्चिदानंद केवल पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब है जो मनुष्य की सभी इच्छाएं पूरी कर उसे मोक्ष प्रदान करता है। लोकवेद और पौराणिक कथाओं के आधार पर‌ कोई भी त्योहार मनाने से अच्छा है कि आप आज ही‌ से तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संग प्रवचन साधना चैनल पर शाम 7.30-8.30 बजे अवश्य सुनें

FAQs About Dhanteras Puja 2025 [Hindi]

प्रश्न : धनतेरस का पर्व क्यों मनाया जाता है  ?

उत्तर : पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय समुद्र मंथन के समय भगवान विष्णु धनवंतरी रूप में प्रकट हुए थे। यही कारण है कि धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है ।

प्रश्न : इस साल धनतेरस कब मनाई जाएगी ?

उत्तर : इस साल धनतेरस 18 अक्टूबर 2025 को मनाई जायेगी। 

प्रश्न : हर वर्ष धनतेरस कब मनाई जाती है ?

उत्तर : हर वर्ष धनतेरस कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष के तेरहवें दिन (त्रयोदसी) को मनाई जाती है ।

प्रश्न : धनतेरस के दिन लोग क्या करते है ?

 उत्तर : धनतेरस के दिन लोग आमतौर पर सोने, चांदी, हीरे के आभूषण के अलावा वाहन, मोबाइल और अन्य मंहगे सामान खरीदते है जो कि मनमाना आचरण है। हमे यह सब करने की बजाय, हर दिन की भांति इस दिन भी शास्त्रविधि अनुसार सतभक्ति करनी चाहिए। 

प्रश्न : डिजिटल युग में धनतेरस का बदलती रूपरेखा क्या है?

उत्तर : आज के डिजिटल युग में धनतेरस मनाने की रूपरेखा बदल गई है। अब लोग ऑनलाइन ऐप्स से सोना, चांदी, इलेक्ट्रोनिक बर्तन आदि खरीदते हैं। धनतेसर के अवसर पर कई कंपनियां ऑफर भी देती हैं। इस डिजिटल दौर में लोग डिजिटल गोल्ड भी खरीदना पसंद करते हैं। इस विशेष अवसर पर लोग अपने परिवार को ई – गिफ्ट कार्ड्स, Paytm Cash भी भेजते हैं।

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