हिसार के ढाड़ गांव में संत रामपाल जी महाराज के कारण किसानों की तकदीर बदली

Published on

spot_img

हरियाणा के हिसार जिले का ढाड़ गांव आज एक ऐसी कहानी का गवाह बना है जिसने मानवीय सेवा और आध्यात्मिक संकल्प की नई परिभाषा लिखी है। करीब दो महीने पहले जिस गांव की 1500 एकड़ उपजाऊ भूमि पांच से छह फीट पानी में डूबकर समुद्र का रूप ले चुकी थी, वहां आज गेहूं की फसल की हरियाली और ट्रैक्टरों की गूंज खुशहाली का संदेश दे रही है। यह सब संभव हुआ है जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज के अथक प्रयासों और उनकी अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से, जिसने उस वक्त किसानों का हाथ थामा जब प्रशासन और सरकार ने उनकी सुध लेने से इनकार कर दिया था।

प्रकृति का कहर और प्रशासनिक बेरुखी के बीच संघर्ष

सितंबर माह की शुरुआत में हरियाणा के कई इलाकों में मूसलाधार बारिश ने तबाही मचाई थी। ढाड़ गांव के लिए 3 और 9 सितंबर की तारीखें किसी काले सपने से कम नहीं थीं। आसमान से बरसी आफत ने पूरे गांव के खेतों को जलमग्न कर दिया। देखते ही देखते किसानों की साल भर की मेहनत यानी उनकी फसलें पानी की भेंट चढ़ गईं।

खेतों में खड़ा 5–6 फीट पानी न केवल वर्तमान फसल की बर्बादी का कारण बना, बल्कि आगामी रबी सीजन की बिजाई पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे थे। ग्रामीणों और पंचायत ने स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन सरकारी तंत्र की कछुआ चाल और संसाधनों के अभाव ने किसानों को आत्महत्या की कगार पर खड़ा कर दिया था। किसानों के पास न तो पानी निकालने के संसाधन थे और न ही सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन मिला।

संत रामपाल जी महाराज ने पंचायत की पुकार पर तुरंत लिया निर्णय

जब चारों ओर अंधेरा था, तब ढाड़ गांव की पंचायत ने बरवाला स्थित दफ़्तर में संत रामपाल जी महाराज से सहायता की गुहार लगाने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें गुराना और बेदाड़ गांव में संत रामपाल जी महाराज द्वारा की गई मदद के बारे में जानकारी मिली थी। इसी उम्मीद के साथ पंचायत के प्रतिनिधि बरवाला पहुंचे।

संत रामपाल जी महाराज ने गांव की विषम परिस्थितियों और किसानों के दर्द को समझते हुए बिना किसी देरी के राहत सामग्री भेजने का आदेश दिया। संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से तुरंत चार शक्तिशाली मोटरें और भारी मात्रा में पाइप गांव भेजे। यह मदद केवल एक भौतिक सहायता नहीं थी, बल्कि उन हजारों किसानों के लिए एक मसीहा का सहारा थी जो अपनी जमीन को बंजर होते देख रहे थे।

अन्नपूर्णा मुहिम: संसाधनों का विशाल संजाल और तकनीकी दक्षता

संत रामपाल जी महाराज ने गांव की मांग और जरूरत के अनुसार राहत कार्य को दो चरणों में विस्तार दिया। पहले चरण में भेजी गई चार मोटरों और 500 फीट पाइपों ने पानी की निकासी शुरू की। जैसे-जैसे पानी उतरने लगा, मिट्टी की बनावट के कारण कुछ निचले इलाकों में पानी जमा रह गया।

इस समस्या को देखते हुए संत रामपाल जी महाराज ने दूसरे चरण में दो और शक्तिशाली मोटरें भेजीं, जिनमें एक पनडुब्बी और एक अन्य सबमर्सिबल मोटर शामिल थी। इसके साथ 6500 फीट आठ इंची पाइप गांव पहुंचाए गए। कुल मिलाकर 7000 फीट से अधिक पाइपों के जाल ने गांव के खेतों से पानी की एक-एक बूंद को बाहर निकाल दिया।

संत रामपाल जी महाराज ने स्वयं इस बात पर जोर दिया कि संसाधन चाहे जितने लगें, लेकिन किसानों के खेतों में गेहूं की बिजाई समय पर होनी चाहिए ताकि कोई परिवार भूखा न सोए।

यह भी पढ़ें: जब बिरधाना (झज्जर) बना ‘नरक’, तब संत रामपाल जी महाराज ने भेजी ‘संजीवनी’ | “अन्नपूर्णा मुहिम”

बर्बादी के मंजर से लहलहाती फसलों तक का सफर

आज ढाड़ गांव के खेतों की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। जहां डेढ़ महीने पहले केवल पानी ही पानी नजर आता था, वहां आज गेहूं के नन्हे पौधे जमीन फाड़कर बाहर निकल आए हैं। गांव की 1500 एकड़ प्रभावित जमीन में से शत-प्रतिशत रकबे पर बिजाई पूरी हो चुकी है।

यह एक चमत्कारिक परिवर्तन है जो केवल 45 से 50 दिनों के भीतर संत रामपाल जी महाराज द्वारा संपन्न हुआ। किसान अब उन्हीं पाइपों और मोटरों का उपयोग गेहूं की पहली सिंचाई के लिए कर रहे हैं, जो कभी उनके खेतों को सुखाने के लिए भेजी गई थीं। ट्रैक्टरों के साथ खेतों में काम कर रहे युवाओं और बुजुर्गों के चेहरों पर जो संतोष है, वह संत रामपाल जी महाराज के सेवा कार्यों की सफलता का प्रमाण है।

अन्नपूर्णा मुहिम का मानवीय चेहरा: एक विधवा को मिला नया घर

संत रामपाल जी महाराज का सेवा भाव केवल खेतों तक सीमित नहीं रहा। बाढ़ के दौरान ढाड़ गांव में एक अत्यंत गरीब परिवार का घर गिर गया था। परिवार की मुखिया एक विधवा महिला थी, जिसका पति पहले ही गुजर चुका था। सिर छुपाने की जगह न होने के कारण वह महिला और उसका परिवार दाने-दाने को मोहताज और बेघर हो गया था।

इस सूचना के मिलते ही संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत उस महिला के लिए पक्का मकान बनाने का आदेश दिया। आज वह महिला एक सुरक्षित छत के नीचे है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां सरकार फोटो खिंचवाकर चली गई, वहां संत रामपाल जी महाराज ने धरातल पर घर बनाकर और फसलें बचाकर वास्तविक धर्म का पालन किया है।

ग्रामीणों और पंचायत की कृतज्ञता: “हमारे लिए भगवान बन कर आए”

गांव के सरपंच और बुजुर्गों ने भावुक होकर बताया कि प्रशासन ने उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया था। सरपंच ने स्वीकार किया कि यदि संत रामपाल जी महाराज की ओर से समय पर मोटर और पाइप नहीं मिलते, तो अगले दो साल तक भी खेतों से पानी नहीं निकलता और गांव का किसान कर्ज के दलदल में धंस जाता।

गांव के बस स्टैंड पर बैठे बुजुर्गों का कहना है कि संत रामपाल जी महाराज ने सरकार से भी तेज गति से काम करके दिखाया है। उन्होंने कहा कि उनके जीवनकाल में उन्होंने ऐसी बाढ़ पहले कभी नहीं देखी थी और न ही ऐसी निस्वार्थ सेवा देखी है। ग्रामीणों के अनुसार संत रामपाल जी महाराज ने न केवल उनकी फसल बचाई, बल्कि पूरे गांव के मान-सम्मान और खुशहाली की रक्षा की है।

सेवा और आध्यात्मिकता का संगम

संत रामपाल जी महाराज द्वारा ढाड़ गांव में किए गए ये कार्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि एक सच्चा आध्यात्मिक गुरु वही है जो समाज की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझे। अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज ने न केवल हिसार, बल्कि हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के सैकड़ों बाढ़ प्रभावित गांवों में इसी तरह की सहायता पहुंचाई है।

ढाड़ गांव के किसान अब पूरी तरह आश्वस्त हैं और संत रामपाल जी महाराज के इस उपकार के लिए सदैव ऋणी रहने की बात कहते हैं। यह सेवा अभियान न केवल प्राकृतिक आपदाओं से लड़ने की शक्ति देता है, बल्कि समाज में भाईचारे और मानवता के प्रति अटूट विश्वास भी पैदा करता है।

Latest articles

संत रामपाल जी महाराज ने किसान मज़दूर बचाओ अभियान चरण 2 के तहत झज्जर के गांव सिलानी में बाढ़ राहत सामग्री पहुंचाई

हरियाणा राज्य के झज्जर जिले के अंतर्गत आने वाले गांव सिलानी (जिसे सिलानी जालिम...

Muharram 2026: Can Celebrating Muharram Really Free Us From Our Sins?

Last Updated on 23 June 2026 IST | Muharram 2026: Muharram is one of...

मुहर्रम (Muharram 2026) पर जाने अल्लाह से रूबरू होने की सही विधि क्या है?

Last Updated on 20 June 2026 IST | माह-ए-मोहर्रम, (Muharram Date 2026 India in...
spot_img

More like this

संत रामपाल जी महाराज ने किसान मज़दूर बचाओ अभियान चरण 2 के तहत झज्जर के गांव सिलानी में बाढ़ राहत सामग्री पहुंचाई

हरियाणा राज्य के झज्जर जिले के अंतर्गत आने वाले गांव सिलानी (जिसे सिलानी जालिम...

Muharram 2026: Can Celebrating Muharram Really Free Us From Our Sins?

Last Updated on 23 June 2026 IST | Muharram 2026: Muharram is one of...