पलायन से वापसी तक: संत रामपाल जी महाराज ने दाँदू, डीग को दिया नया जीवन

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राजस्थान के नवगठित डीग जिले की ग्राम पंचायत दाँदू जिसके अंतर्गत दाँदू, खान और समन गाँव आते हैं, पिछले 3-4 वर्षों से एक ऐसी मूक त्रासदी झेल रही थी, जिसने पूरे क्षेत्र की रीढ़ तोड़ दी थी। 2000 बीघा से अधिक उपजाऊ कृषि भूमि 2 से 3 फीट गहरे जमे हुए पानी में पूरी तरह डूबी हुई थी। जो खेत कभी सोना उगलते थे, वे दलदल बन चुके थे। किसान मौसम-दर-मौसम अपनी फसलें डूबते देखते और हाथ मलते रह जाते। पूर्वजों की जमीन छोड़कर शहरों की फैक्ट्रियों में 10,000 रुपये की नौकरी के लिए पलायन करना उनकी मजबूरी बन चुकी थी।

प्रशासन और सरकार के दरवाजों पर अनगिनत बार दस्तक देने के बाद भी न कोई सुनवाई हुई, न कोई समाधान। सरकार ने 14 गाँवों के लिए मात्र ₹14 लाख आवंटित किए जो उपहास के समान था।

अंतिम उम्मीद: सही दरवाजे पर दस्तक

जब हर तरफ से रास्ते बंद हो गए, तब ग्राम पंचायत के सरपंच और सदस्यों ने पड़ोसी गाँवों में संत रामपाल जी महाराज द्वारा किए जा रहे राहत कार्य को देखा और आखिरी उम्मीद के साथ उनके ट्रस्ट को प्रार्थना पत्र भेजा, प्रतिक्रिया अकल्पनीय थी।

48 घंटे जिन्होंने दाँदू का नक्शा बदल दिया

अर्जी पहुँचने के महज 48 घंटों के भीतर, रात के अंधेरे में संत रामपाल जी महाराज का एक विशाल राहत काफिला ग्राम पंचायत दाँदू के द्वार पर पहुँच गया। उन्होंने जो भेजा वह ग्रामीणों की कल्पना से कहीं बढ़कर था:

8 हैवी-ड्यूटी 10 एचपी मोटरें (किर्लोस्कर कंपनी की), 6250 फीट उच्च गुणवत्ता वाली पाइपलाइन (600 फीट 6 इंची पाइप सहित), 3 ट्रैक्टर कपलिंग सेट, 750 फीट थ्री-फेज इलेक्ट्रिकल केबल, और सभी आवश्यक फिटिंग सामग्री। चूँकि जलभराव वाले क्षेत्रों में बिजली नहीं थी, इसलिए संत रामपाल जी महाराज ने जनरेटर का किराया और डीजल का पूरा खर्च भी स्वयं वहन किया। यह सब स्थायी उपहार था — न उधार, न किराये पर।

राहत सामग्री के साथ संत रामपाल जी महाराज ने एक विशेष निवेदन पत्र भी भेजा, जिसमें उन्होंने निर्देश दिया कि इस सामग्री का उपयोग पारदर्शी रूप से हो और तीन चरणों में ड्रोन वीडियो के जरिए दस्तावेजीकरण किया जाए, जलभराव की वर्तमान स्थिति, पानी निकलने के बाद, और जब खेतों में फसल लहलहाए।

वे हमारे लिए साक्षात भगवान बनकर आए

राहत काफिले के पहुँचने पर पूरे गाँव में दीवाली जैसा उत्सव था। ग्रामीणों ने फूल-मालाओं, पगड़ी और शॉल से उनके स्वरूप का सम्मान किया।

बुजुर्गों और सरपंच ने एक स्वर में कहा: “जो काम सरकारें सालों में नहीं कर सकीं, वह संत रामपाल जी महाराज ने 48 घंटे में कर दिखाया। वे हमारे लिए संत नहीं, साक्षात भगवान बनकर आए। उन्होंने हमारे डूबते जीवन को बचाया।”

जो किसान शहरों की ओर पलायन की तैयारी कर रहे थे, उनके मन में वापसी की उम्मीद जाग उठी है। 10-12 दिनों में पानी निकलने की संभावना के साथ, किसान अब गेहूँ की बिजाई की तैयारी में जुट गए हैं।

मानवता की जीवंत मिसाल: अन्नपूर्णा मुहिम

दाँदू गाँव को मिली यह सहायता कोई अकेली घटना नहीं है। यह संत रामपाल जी महाराज की “अन्नपूर्णा मुहिम” का हिस्सा है — एक ऐसा निरंतर मानवीय अभियान जो अब तक 300 से अधिक गाँवों तक पहुँच चुका है।

यह मुहिम एक पवित्र संकल्प के साथ शुरू हुई थी:

“रोटी, कपड़ा, चिकित्सा, शिक्षा और मकान, हर जरूरतमंद को दे रहा कबीर भगवान।”

सच्ची भक्ति और सेवा साथ-साथ चलते हैं। आज संत रामपाल जी महाराज उसी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

दाँदू में एक नया सवेरा

बाढ़ के पानी ने दाँदू के किसानों के सपने डुबो दिए थे। सरकार ने मुँह फेर लिया था, नेता वादे करके चले गए थे। लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने एक डूबते गाँव को देखा और 48 घंटे में , रात के अंधेरे में, बिना किसी शर्त के जीवनरेखा भेज दी। आज दाँदू एक नई सुबह के दहलीज पर खड़ा है। पानी उतर रहा है, ट्रैक्टर खेतों में लौट रहे हैं, और जो लोग जा रहे थे, वे वापस आ रहे हैं।

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