हरियाणा के झज्जर जिले के बहादुरगढ़ तहसील में स्थित गाँव डाबोदा कलाँ (Daboda Kalan) पिछले एक दशक (8 से 10 वर्ष) से एक ऐसी त्रासदी को झेल रहा था, जिसके सामने प्रशासन असफल सिद्ध हुआ था। गाँव की लगभग 300 से 400 एकड़ सबसे उपजाऊ भूमि स्थायी रूप से बाढ़ के पानी में डूबी हुई थी। यह केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं थी, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का वह गहरा घाव था जिसने गाँव के किसानों को आर्थिक रूप से कमजोर बना दिया था। घरों की दीवारों में आई दरारें और बर्बाद होती फसलें गाँव वालों की नियति बन चुकी थीं।
इस अंधकारमय स्थिति के बीच, जब सारी सरकारी उम्मीदें दम तोड़ चुकी थीं, तब संत रामपाल जी महाराज एक मसीहा बनकर सामने आए। गाँव की पंचायत द्वारा बरवाला स्थित सतलोक आश्रम के कार्यालय में अर्जी लगाने के मात्र 24 घंटे से भी कम समय के भीतर, गाँव में पाइपों और मोटरों से भरी गाड़ियों का तांता लग गया। यह संत रामपाल जी महाराज की ‘त्वरित कार्रवाई’ का वह उदाहरण है, जिसने झज्जर के इतिहास में सेवा की एक नई इबारत लिख दी है।
प्रशासनिक विफलता के बाद ग्रामीणों की अंतिम आस: संत रामपाल जी महाराज के चरणों में लगाई गई अर्जी
गाँव डाबोदा कलाँ के सरपंच प्रदीप दलाल और गाँव के प्रबुद्ध नागरिकों ने बताया कि जलभराव की समस्या इतनी विकराल थी कि गाँव के सबसे उपजाऊ हिस्से में 24 घंटे पानी भरा रहता था। ग्रामीण अपनी पीड़ा लेकर स्थानीय विधायकों, सांसदों और मंत्रियों तक गए, लेकिन किसी ने भी धरातल पर कार्य नहीं किया। स्थिति इतनी दयनीय थी कि सीलन की वजह से घर गिरने की कगार पर पहुँच गए थे।
जब हर ओर से निराशा हाथ लगी, तब पंचायत के 15-20 प्रतिनिधि बरवाला स्थित सतलोक आश्रम पहुँचे और संत रामपाल जी महाराज के चरणों में अपनी पीड़ा रखी। महाराज जी ने इस मानवीय संकट को तत्काल समझा और ग्रामीणों को विश्वास दिलाया कि उनकी समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। अविश्वसनीय रूप से, अर्जी देने के मात्र 24 घंटों के भीतर राहत सामग्री का विशाल काफिला गाँव की सीमा पर पहुँच गया, जिससे पूरे गाँव में उत्सव का माहौल बन गया।
राहत सामग्री का विशाल काफिला: लाखों की मशीनी सहायता गाँव को समर्पित
जैसे ही संत रामपाल जी महाराज का आदेश हुआ, राहत सामग्री से लदे दर्जनों वाहनों का काफिला गाँव पहुँचा। ग्रामीणों ने महाराज जी के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए ट्रैक्टरों और गाड़ियों के साथ गाँव की सीमा पर उनका स्वागत किया। यह सहायता केवल कागजी नहीं, बल्कि पूर्णतः क्रियात्मक और स्थायी थी।
राहत सामग्री का विस्तृत विवरण
- भारी विद्युत मोटरें 15 HP क्षमता की उच्च गुणवत्ता वाली मोटर 03 नग
- मुख्य पाइपलाइन 8 इंच व्यास की हेवी-ड्यूटी पाइप 6000 फीट
- विद्युत स्टार्टर मोटरों हेतु आधुनिक ऑटोमैटिक कंट्रोल पैनल 03 नग
- 4 पावर केबल हेवी लोड सहने वाली उच्च गुणवत्ता की विद्युत केबल पूर्ण आवश्यकतानुसार
- 5 सहायक उपकरण सेंडिया, हैंडी, निप्पल, क्लैम्प, नट-बोल्ट आदि पूर्ण किट
- कनेक्टिंग मटेरियल पाइप जोड़ने हेतु फैब्रिकेशन एवं अन्य फिटिंग सामग्री पर्याप्त मात्रा
ग्रामीणों ने बताया कि महाराज जी ने एक छोटी सी ‘कील’ और ‘नट’ से लेकर लाखों की मोटर तक सब कुछ उपलब्ध कराया, ताकि ग्रामीणों को आर्थिक रूप से कोई भार न सहना पड़े।
संत रामपाल जी महाराज का “विशेष निवेदन पत्र” – स्थायी समाधान और पारदर्शिता की मिसाल
सामग्री के साथ संत रामपाल जी महाराज की ओर से एक विशेष निवेदन-पत्र पढ़कर सुनाया गया, जो समाज सेवा की नई परिभाषा लिखता है। महाराज जी का यह पत्र केवल सहायता नहीं, बल्कि एक उत्तरदायित्व का बोध था:
पूर्ण निकासी का आदेश: महाराज जी ने सख्त निर्देश दिए कि सामग्री चाहे कितनी भी बढ़ानी पड़े, लेकिन गाँव से पानी हर हाल में निकलना चाहिए।
फसल बिजाई अनिवार्य: यदि सहायता मिलने के बाद भी अगली फसल की बिजाई नहीं हुई, तो इसे ग्रामीणों की लापरवाही माना जाएगा और भविष्य में ट्रस्ट कोई मदद नहीं करेगा।
ड्रोन द्वारा पारदर्शिता: महाराज जी ने आदेश दिया कि गाँव के तीन वीडियो बनाए जाएँ-जलभराव का, निकासी का और लहराती फसल का। यह इसलिए ताकि दानदाताओं को विश्वास हो कि उनके दान का सदुपयोग लाखों लोगों को जीवनदान देने में हो रहा है।
स्थायी समाधान: महाराज जी ने ग्रामीणों को पाइपों को जमीन में दबाने की सलाह दी, ताकि भविष्य में कभी भी बारिश होने पर गाँव वाले स्वयं पानी निकाल सकें और यह सामग्री उनके लिए “अनमोल वरदान” सिद्ध हो।
पूर्व सैनिकों और ग्रामीणों की प्रतिक्रिया: “आर्मी जैसा क्विक एक्शन देखा”
गाँव के पूर्व सैनिक सुखबीर जी ने भावुक होकर कहा, “मैंने अपनी पूरी सेवा के दौरान ऐसा क्विक एक्शन या तो आर्मी में देखा था या आज संत रामपाल जी महाराज की टीम में देख रहा हूँ।” शिक्षित किसान सोनू, जिनके पास गाँव में सबसे अधिक जमीन है, ने बताया कि वे पिछले 10-14 वर्षों से अपनी 8 एकड़ जमीन जलभराव के कारण नहीं बो पा रहे थे। उन्होंने कहा कि मंत्रियों से केवल आश्वासन मिले, लेकिन महाराज जी ने “दिवाली का गिफ्ट” देकर गाँव का जीवन बचा लिया।
गाँव के पूर्व प्रधान गिरधारी लाल और धर्मेंद्र ने कहा कि यह 24 घंटे का चमत्कार गाँव की किस्मत बदलने वाला है। ग्रामीणों ने स्वीकार किया कि जहाँ सरकारें और विभाग महीनों फाइलें घुमाते हैं, वहाँ महाराज जी ने आशीर्वाद देकर घंटों में कार्य सिद्ध कर दिया।
गाँव का सर्वोच्च सम्मान: पगड़ी भेंट कर ग्रामीणों ने माना साक्षात् भगवान का स्वरूप
राहत सामग्री मिलने की खुशी में पूरे गाँववासियों ने सामूहिक रूप से संत रामपाल जी महाराज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। पंचायत और सरपंच प्रदीप दलाल ने महाराज जी के सम्मान में एक ‘पगड़ी’ भेंट की। सेवादारों ने बताया कि हरियाणवी संस्कृति में पगड़ी भेंट करने का अर्थ अपना ‘शीश’ गुरु के चरणों में समर्पित करना होता है।
ग्रामीणों ने कहा कि वे अब महाराज जी के बताए वचनों पर चलेंगे और गाँव के पानी को बाहर निकालकर फसलें लहराएंगे। गाँव में लड्डू बाँटे गए और किसानों ने महाराज जी को “किसानों का सच्चा मसीहा” और “भगवान” का दर्जा दिया।
संत रामपाल जी महाराज: मानवता के सच्चे उद्धारक और संकटमोचन
गाँव डाबोदा कलाँ की यह घटना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि संत रामपाल जी महाराज के हृदय में मानवता के लिए कितनी गहरी संवेदना है। जहाँ अन्य संस्थाएं और कथावाचक केवल प्रवचनों तक सीमित रहते हैं, वहीं महाराज जी ने धरातल पर उतरकर किसानों के आंसुओं को पोंछा है। उनकी दूरदर्शिता ने न केवल वर्तमान बाढ़ को समाप्त किया बल्कि गाँव को एक ऐसा आधार प्रदान किया कि वे भविष्य में भी अपनी समस्या का स्वयं समाधान कर सकें।
महाराज जी की यह निस्वार्थ सेवा सिद्ध करती है कि वे 36 बिरादरी के जान-माल के रक्षक हैं। उनकी “अन्नपूर्णा मुहिम” केवल अन्न खिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्न उत्पन्न करवाने की सामर्थ्य देने तक विस्तृत है।
संत रामपाल जी महाराज के क्रांतिकारी आध्यात्मिक विचारों को जानने के लिए प्रतिदिन शाम 7:30 बजे साधना टीवी पर सत्संग देखें। इस ऐतिहासिक सेवा कार्य को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ।



