अवसाद से कैसे बाहर निकलें : अवसाद और चिंता से बचने का इलाज

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मानसिक स्वास्थ्य पर आजकल ज्यादा ज़ोर दिया जा रहा है। क्योंकि हम सभी जानते है कि मानसिक स्वास्थ्य का हमारे सम्पूर्ण जीवन पर प्रभाव होता है। अवसाद एक  मानसिक बीमारी है, जिसने आज विश्व भर के लाखों लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। यह हमारी दैनिक गतिविधियो जैसे नींद, भूख, और कार्यक्षमता के साथ-साथ हमारे व्यवहार और सहनशीलता को भी प्रभावित करता है।  इंटरनेट की उपलब्धता और उपयोग से इस गंभीर समस्या पर बात करना अब संभव हो गया है। आइए जानते हैं कि इस बीमारी का मुख्य कारण क्या है और इस समस्या से बाहर निकलने के क्या उपाय हैं।

अवसाद और चिंता ऐसी मानसिक समस्याएं है, जो एक व्यक्ति के जीवन के स्तर को बहुत प्रभावित करती है। हालाकि दोनों के लक्षण, एक दूसरे से बिल्कुल अलग- अलग है, पर यह दोनों समस्याएं ज्यादातर लोगों में साथ ही पाई जाती है। अवसाद से पीड़ित लोगों को निरंतर उदासी, खुशी देने वाले कार्य में भी अरुचि महसूस करना, थकान, भूख और नींद में बदलाव, निराशा और किसी भी एक चीज में ध्यान न लगा पाना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह लक्षण लोगों के सामान्य जीवन में भी असर डालते है, जिससे उन्हें काम करने में समस्या का सामना करना पड़ता है। उनके सम्बंधों में भी इसका कुप्रभाव दिखता है। वह गतिविधियां जो पहले उन्हें उत्साहित करती थी, अवसाद से पीड़ित व्यक्ति, उन सभी में भी अपनी दिलचस्पी खो देता हैं। वहीं इसके शारीरिक प्रभाव भी हैं। अत्यधिक तनाव, घबराहट, निरंतर क्रोधित रहना, बढ़ी हुई हृदय गति, मांसपेशियों में तनाव, नींद की समस्या आदि कुछ अवसाद के शारीरिक लक्षण है। दोनों ही स्थितियों में लोगों को एकाग्रता और आराम करने में परेशानी होती है, जिसके कारण उनकी बैचेनी और उत्तेजना बढ़ जाती है। 

इस समस्या से जूझ रहे सभी लोगों को अब परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि संत रामपाल जी महाराज जी के ज्ञान से अब इस समस्या का हल संभव है। इस आध्यात्मिक समाधान में तत्वज्ञान के साथ साथ कबीर परमेश्वर जी का आशीर्वाद भी है जो कि उनके साधक के हर तरह के कष्ट को हरता है।  

हमारे जीवन में ऐसे कई पल होते है, जिनमें हम बेचैनी का अनुभव करते है। यह कोई विशेष बात नहीं हैं। अपितु विशेष बात यह है कि हम उस तनाव भरी स्थिति, घबराहट वाली स्थिति में कैसा अनुभव करते है। चिंता हमारे मानसिक स्वास्थ्य और शरीर दोनों को प्रभावित करती है। जिसकी वजह से हम अत्यंत तनाव, अनुचित आशंकाओं और डर का अनुभव करते है जिसका प्रभाव हमारे दिन प्रतिदिन के अस्तित्व और रिश्तों पर भी पड़ता है। लंबे समय तक लगातार बेचैनी, हमारी स्वभाव संबंधी समस्याओं जैसे कि उदासी को बढ़ा सकती है और साथ ही हमारी मानसिक क्षमताओं पर भी बुरा असर डाल सकती है, जिससे हमारी एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता पर भी प्रभाव होता है। 

शारीरिक तौर पर, बेचैनी हमारे शरीर की “लड़ो या भागो”  प्रतिक्रिया को चालू कर देती है। जिससे हमारे शरीर में तनाव में निकालने वाले केमिकल जैसे एड्रिनैलिन और कोर्टिसोल का स्तर बढ़ता है। इस प्रतिक्रिया के बार बार होने से शारीरिक समस्याओं जैसे हृदय रोग, पाचन समस्या, उच्च रक्तचाप और बिगड़ती हुई प्रतिरक्षा प्रणाली का जन्म शरीर में होता है जिससे बनी बेचैनी हमारी नींद, जो हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए काफी महत्वपूर्ण है, पर बुरा असर डालती है। बेचैनी के दिमाग और शरीर पर प्रभाव यह दर्शाते है कि इस समस्या का नियंत्रण और उपचार करना हमारे सामान्य जीवन और स्वास्थ्य के लिए कितना आवश्यक है। 

किंतु राहत की बात यह है कि संत रामपाल जी महाराज जी के पास अवसाद और चिंता जैसी समस्या से निकलने का अचूक इलाज है। अधिक जानने के लिए आगे पढ़ें। 

1. अवसाद एक मानसिक बीमारी है। 

2. दुनिया भर में लगभग 5% वयस्क इस बीमारी का शिकार है। 

3. पुरुषों की तुलना में यह बीमारी महिलाओं में ज्यादा पाई जाती है।    

4. अवसाद से आत्महत्या का रिस्क भी बढ़ जाता है।

5. अलग अलग स्तर के अवसाद जैसे कि कम, मध्यम और गंभीर अवसाद के लिए अनेक तरह के चिकित्सकीय उपचार और परामर्श उपलब्ध हैं। 

  • स्तर 1: सामान्य उदासी – इस लेवल में आमतौर पर होने वाली उदासी होती है जैसे किसी घटना या माहौल की वजह से होने वाली उदासी या मूड खराब होना। यह आमतौर पर अस्थाई होता है और दैनिक गतिविधियों पर इसका कोई प्रभाव नहीं होता। 
  • स्तर 2: हल्का अवसाद (मनस्ताप) – इस लेवल पर भी उदासी और खराब मूड का एहसास होता है जो कि दो साल या उससे अधिक वर्षों तक रहता है। यह दैनिक गतिविधियों को कुछ हद तक प्रभावित कर सकता है। 
  • स्तर 3: मध्यम अवसाद – इसके लक्षण काफी प्रभावशाली और ध्यान देने योग्य होते है, जिससे लोग अपने दैनिक कार्य करने में भी कठिनाई महसूस करते है, साथ ही वह उन कार्यों को भी नहीं कर पाते , जो उन्हें पहले काफी उत्साहित करते थे।  
  • स्तर 4: गंभीर अवसाद (प्रमुख अवसाद) – 
  • इसके लक्षण काफी गंभीर होते हैं, जो हमारे जीवन की  गतिविधियों को प्रभावित करते है जैसे भूख, नींद और एकाग्रता इत्यादि। 
  • स्तर 5: नैदानिक अवसाद (प्रमुख अवसादग्रस्तता विकार) – यह अंतिम और सबसे गंभीर स्तर होता है, जिसमें हमेशा उदासी, निराशा और नाकाबिलियत का एहसास होता हैं । इस स्तर में, पीड़ित को प्रोफेशनल इलाज की जरूरत होती है और इस स्तर में पीड़ित आत्महत्या के विचार से ग्रसित हो सकता है। 

हालांकि ऐसा माना जाता है कि अवसाद के विभिन्न स्तर होते है, पर इस बात का कोई वैज्ञानिक समर्थन नहीं है। साल 2021 के शोध के अनुसार, लोग अवसाद को विभिन्न स्तरों में बढ़ता हुआ देखते है। यह संभवतः  प्रसिद्ध कुबलर-रॉस मॉडल में एक चरण के रूप में अवसाद को शामिल करने पर आधारित है।

मनोचिकित्सक एलिजाबेथ कुबलर-रॉस के द्वारा बनाए गए सिद्धांत के अनुसार जब कोई व्यक्ति अपने करीबी को खो देता है, तब वह भावनाओं के पांच स्तरों से गुजरता है:

  • इनकार 
  • गुस्सा
  • मोलभाव 
  • उदासी
  • स्वीकृति

भावनाओं का यही अनुक्रम हो यह अनिवार्य नहीं किंतु इन स्तरों से व्यक्ति कई बार गुजरता है। अवसाद स्तरों में विभाजित नहीं होता, बल्कि इसके कई प्रकार होते है। हर प्रकार की अपनी सीमा और लक्षण होते है। हर एक प्रकार की अपनी श्रृंखला होती है, जो विभिन्न स्तरों पर व्यक्ति के जीवनकाल, उसकी परिस्थितियों, जीवन के समयकाल को प्रभावित करती है। इसलिए हम कह सकते हैं कि अवसाद में होने वाली उदासी लगातार न होकर किसी व्यक्ति के जीवन में अलग अलग तरीकों और समय पर दिखाई देती है।

अवसाद एक मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति है जो व्यक्ति के दैनिक गतिविधियों के प्रति सोचने, महसूस करने और उनसे निपटने की क्षमता को प्रभावित करती है। अवसाद के कई प्रकार है, हर प्रकार की अपनी विशेषताएं है। 

  1. प्रमुख अवसादग्रस्तता विकार (Major depressive disorder): इस प्रकार में निरंतर अरुचि और उदास मन के कारण दैनिक गतिविधियों में हस्तक्षेप पैदा होता है। यह स्थिति कम से कम दो हफ्तों तक होती है। 
  1. मौसमी भावात्मक विकार (Seasonal affective disorder): अवसाद, जो मुख्य तौर पर पतझड़ और शुरुआती सर्दी के दौरान उत्पन्न होता है और वसंत और गर्मियों तक रहता है। यह मौसम बदल जाने के साथ ठीक भी हो जाता है।
  1. लगातार अवसादग्रस्तता विकार (Persistent depressive disorder) : इसमें अवसाद के वह लक्षण शामिल होते है, जो कि प्रमुख अवसादग्रस्तता विकार जितने गंभीर नहीं होते है, पर यह लंबे समय यानी कम से कम दो साल तक बने रहते है।   
  1. मनोविकृति के साथ अवसाद (Depression with psychosis): अवसाद के साथ मनोविकृति के लक्षण जैसे भ्रम और मतिभ्रम।    
  1. प्रसव संबंधित अवसाद (Perinatal depression) : यह अवसाद का वह प्रकार है, जो प्रसव के दौरान या उसके बाद होता है। 

अवसाद से पीड़ित लोग इन कुछ लक्षणों का अनुभव करते है। 

  • मूड खराब होना 
  • गतिविधियों में अरुचि या खुशी का अभाव 
  • वजन या भूख में बदलाव 
  • असीमित नींद (अतिनिद्रा) या नींद की कमी (अनिद्रा)
  • गतिविधि में परिवर्तन (अत्यधिक गतिविधि या आक्रोश)
  • थकान या ऊर्जा में कमी 
  • अपराध बोध या नाकाबिलियत
  • एकाग्रता या निर्णय लेने की क्षमता में कमी 
  • आत्महत्या के विचार, योजना या प्रयास

अवसाद का मुख्य कारण क्या है, इसका पता अभी तक कोई भी नहीं लगा पाया है पर कई अनेक कारण है जो इसको बढ़ावा देते है।  

  • मस्तिष्क का रसायन शास्त्र (Brain Chemistry): हमारे मस्तिष्क में सेरिटोनिन और डोपामीन नामक न्यूरोट्रांसमीटर के असंतलुन से अवसाद उत्पन्न हो सकता हैं। 
  • अनुवांशिकी (Genetics): माता पिता का अवसादग्रस्त होना आपके अवसाद से ग्रस्त होने के रिस्क को बढ़ा सकता है, पर अवसाद पारिवारिक इतिहास के बगैर भी होना संभव है। 
  • जीवन की तनावपूर्ण घटनाएँ : तनावयुक्त जीवनघटना जैसे किसी प्रियतम की मृत्यु, तलाक या लंबे समय तक तनाव में रहने के कारण भी अवसाद जैसी समस्या हो सकती है। 
  • मेडिकल कारण: पुरानी बीमारी जैसे कि डायबिटीज या फिर स्थाई दर्द से भी अवसाद का रिस्क बढ़ सकता है। कई बार यह हमेशा के लिए शारीरिक अक्षमता से भी हो जाता है।
  • दवाईयों या नशे का उपयोग: कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट से भी अवसाद जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। कई नशीले पदार्थ जैसे शराब, आदि के सेवन से अवसाद बढ़ और पैदा हो सकता है।  

हालांकि वैज्ञानिक तौर पर अवसाद का कोई सफल इलाज नहीं है क्योंकि यह एक मनोदशा संबंधी समस्या है। किंतु अधितकर जगहों पर दवा और मनोचिकित्सा से इसमें फायदा मिला है। अवसाद के लक्षणों को कम करने के लिए, आप अपने प्राथमिक चिकित्सक या मनोचकित्सक की मदद ले सकते है। साथ ही कई लोग अवसाद से निजात पाने के लिए मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक या किसी मानसिक विशेषज्ञ की मदद भी लेते है। 

■ Read in English: Managing Depression: Guide to Get Rid of Depression & Anxiety

वे लोग जो गंभीर अवसाद से पीड़ित है उन्हे इन लक्षणों के कम होने तक अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ सकता है या साधारण रूप से अस्पताल में (ओपीडी) परामर्श लेना पढ़ सकता है। हो सकता है कि लगातार काउंसलिंग के लिए जाना पड़े। ऐसे मामले में मनोविशेषज्ञों या डॉक्टरों की सलाह और उनके बताए सुझाव पर विचार करना जरूरी होता है।

मन हवा की तरह चंचल है। इस प्रसिद्ध कहावत में मन की अस्थिरता के विषय में कहा जा रहा है। भावनाओं में बदलाव अक्सर हमारे मन की चंचलता का ही परिणाम है। कई बार मन की चंचलता हमे विचारों और भावनाओं के विशाल बवंडर में डुबा देती है। पर सचेत होकर और आत्म-संयम से, हम अपने मन की चंचलता पर जीत हासिल कर सकते है और हमारे जीवन में संतुलन पैदा कर सकते हैं। हमारे लिए परमात्मा का सहारा लिए बिना, इस बीमारी से लड़ना बहुत ही मुश्किल है। पर पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी की शरण में आने से इसका हल सहज ही संभव है। परमात्मा कबीर साहेब जी के कृपापात्र सच्चे सतगुरु अपने ज्ञान में बताते है कि: 

कबीर, चिंता तो हरि नाम की, और न चितवै दास |

जो कछु चितवे नाम बिनु, सोइ काल की फाँस ||

मूर्ख मनवा काल की चिंता क्यों सताती है |

सतगुरु अपना साथी है सतगुरु अपना साथी है ||

इसका मतलब है कि मनुष्य जन्म की प्राप्ति के पश्चात,  व्यर्थ की चिंता नहीं करनी चाहिए। सच्चे सतगुरु की शरण ग्रहण करनी चाहिए और उनके द्वारा बताई गई सतभक्ति करनी चाहिए और फिर कल्याण के लिए ही प्रयत्न करना चाहिए। वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज जी ही सच्चे सतगुरु अर्थात गीता अध्याय 15 के श्लोक 1 से 4 में वर्णित तत्वदर्शी संत है, जो अद्वितीय तत्वज्ञान और सतभक्ति से अपने शिष्यों को आर्थिक, शारीरिक और मानसिक लाभ प्रदान कर रहे है। 

अवसाद और चिंता का मुख्य कारण मानव समाज में बढ़ता हुआ दिखावा और सामाजिक बुराई जैसे नशा, दहेज इत्यादि है। लोग वास्तविकता के साथ जीवन जीना भूल चुके है और सिर्फ और सिर्फ दिखावें पर ज्यादा ध्यान दे रहें है। हमें अपना जीवन किस प्रकार से जीना चाहिए, क्या हमारे जीवन की प्राथमिकताएं होनी चाहिए, इसकी सम्पूर्ण जानकारी के लिए अवश्य पढ़िए पुस्तक जीने की राह। 

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