हरियाणा के भिवानी जिले की भवानी खेड़ा तहसील का एक छोटा-सा गांव है सुई। कागजों में इसे “आदर्श गांव” कहा जाता है, लेकिन कुछ महीने पहले यहां के हालात इतने खराब हो चुके थे कि किसानों की आंखों में सिर्फ निराशा दिखाई देती थी। लगभग 400 से 500 एकड़ उपजाऊ जमीनपानी में डूबी हुई थी। खेतों में धान की पूरी फसल बर्बाद हो चुकी थी और अगली फसल की उम्मीद भी खत्म होती जा रही थी।
गांव के किसान बताते हैं कि 1 अगस्त से शुरू हुई इस आपदा ने पूरे इलाके की तस्वीर बदल दी थी। खेतों में तीन से चार फुट तक पानी भरा हुआ था। रास्ते बंद हो गए थे, गांव का स्कूल, खेल मैदान और स्वास्थ्य केंद्र तक प्रभावित हो चुके थे।
किसान सरकार और प्रशासन के दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते थक चुके थे, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। हर दिन बढ़ते पानी के साथ किसानों का मन भी डूबता जा रहा था। तभी इस संकट की घड़ी में गांव वालों ने आखिरी उम्मीद के रूप में संत रामपाल जी महाराज के दरबार में अपनी अर्जी लगाई।
और यहीं से शुरू हुई एक ऐसी कहानी, जिसने गांव के किसानों की जिंदगी में फिर से उम्मीद जगा दी।
संकट में डूबा गांव: जब खेत बने तालाब

गांव सुई के किसानों के लिए खेती ही जीवन का आधार है। लेकिन जब खेतों में पानी भर गया तो उनकी सारी मेहनत पर पानी फिर गया। गांव के किसान बताते हैं कि कई खेतों में घुटनों से लेकर कमर तक पानी भरा हुआ था। कच्चे रास्ते भी डूब चुके थे। खेतों तक पहुंचना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो गया था।
किसान कुलदीप बताते हैं कि जिस रास्ते पर आज लोग आराम से चल रहे हैं, वहां कुछ समय पहले घुटनों तक पानी था। उनके शब्दों में— “यहां पूरा रास्ता पानी से भर गया था। खेतों में भी पानी था। लेकिन संत रामपाल जी महाराज की मदद से पानी निकल गया और अब खेत बुवाई के लिए तैयार हो गए हैं।”
कई किसानों के सामने सबसे बड़ा डर यह था कि अगर पानी जल्दी नहीं निकला तो सिर्फ धान की फसल ही नहीं, बल्कि अगली गेहूं की फसल भी बर्बाद हो जाएगी। कर्ज में डूबे किसान आत्महत्या तक के बारे में सोचने लगे थे। यह सिर्फ खेती का नुकसान नहीं था, बल्कि पूरे गांव की आर्थिक और सामाजिक स्थिति खतरे में पड़ चुकी थी।
पंचायत की पुकार और संत रामपाल जी महाराज की त्वरित सहायता
जब सरकारी तंत्र से कोई उम्मीद नहीं बची, तब गांव की पंचायत ने मिलकर संत रामपाल जी महाराज के पास मदद की अर्जी भेजी। गांव के सरपंच रवि बताते हैं कि उन्होंने करीब 10 दिन पहले संत रामपाल जी महाराज के दरबार में प्रार्थना की थी। उनकी उम्मीद थी कि शायद कोई रास्ता निकल आए। लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि इतनी जल्दी मदद मिल जाएगी। संत रामपाल जी महाराज ने गांव की पुकार सुनते ही तुरंत सहायता भेजने का आदेश दिया।
कुछ ही दिनों के भीतर गांव में राहत सामग्री पहुंच गई, जिसमें शामिल थे:

- लगभग 11,000 फुट लंबी 8 इंच की पाइपलाइन
- 15 हॉर्सपावर की दो शक्तिशाली मोटरें
- लगभग 500 फुट बिजली की केबल
- पाइपलाइन लगाने के लिए सभी जरूरी उपकरण और एक्सेसरीज
यह सहायता इतनी जल्दी पहुंची कि गांव वालों को विश्वास ही नहीं हुआ।
सरपंच रवि भावुक होकर कहते हैं— “सरकारी दफ्तरों में तो फाइलें ही घूमती रहती हैं, लेकिन यहां हमारी अर्जी के दस दिन के अंदर पूरा सामान गांव पहुंच गया।”
गांव में बदला नजारा: जहां पानी था, वहां अब खेती
आज अगर गांव सुई के खेतों में जाया जाए तो वहां बिल्कुल अलग तस्वीर दिखाई देती है। जहां पहले पानी भरा हुआ था, वहां अब किसान अपने ट्रैक्टर लेकर जुताई और बुवाई कर रहे हैं।
किसान विजय कुमार बताते हैं कि उनकी 30 एकड़ जमीन पानी में डूबी हुई थी। लेकिन अब आधे खेतों में बुवाई हो चुकी है और बाकी में जल्द ही शुरू हो जाएगी।वह कहते हैं—
“अब पानी निकल गया है। हम लगभग 40 प्रतिशत खेतों में बुवाई कर चुके हैं। अगले कुछ दिनों में बाकी खेतों में भी काम शुरू हो जाएगा।”
एक अन्य किसान बताते हैं कि उनके खेतों में करीब ढाई फुट पानी था। लेकिन पाइपलाइन और मोटरों की मदद से धीरे-धीरे पानी निकल गया। आज वे खुशी-खुशी कहते हैं— “आज देख लो, बिजाई हो रही है। रामपाल जी ने पाइप दिया और हमारी मौज कर दी। ऐसा काम तो भगवान ही करा सकता है।”
मजदूरों को भी मिला रोजगार
इस राहत कार्य का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहा।

गांव में जब पानी निकला और खेती का काम शुरू हुआ, तो वहां मजदूरों को भी रोजगार मिलने लगा। गांव की महिलाएं बताती हैं कि पहले खेतों में पानी होने की वजह से काम बंद हो गया था। लेकिन अब जब फसल की कटाई और बुवाई शुरू हुई है तो उन्हें फिर से मजदूरी मिलने लगी है। एक महिला मजदूर कहती हैं— “रामपाल जी ने पाइप भेजे, तभी पानी निकला। अब हमें भी काम मिल रहा है। इससे हमारे घर का गुजारा चल रहा है।”
इस तरह संत रामपाल जी महाराज की मदद से न सिर्फ किसानों की खेती बची, बल्कि मजदूरों की रोजी-रोटी भी सुरक्षित हुई।
किसानों की जुबानी: “हमारे लिए तो भगवान हैं”
गांव सुई के कई किसानों ने भावुक होकर अपनी बात रखी। एक किसान कहते हैं—
“हम सरकार के पास भी गए, अधिकारियों के पास भी गए, लेकिन कहीं समाधान नहीं मिला। जब संत रामपाल जी महाराज के पास गए तो उन्होंने हमारी पुकार सुन ली। हमारे लिए तो वही भगवान हैं।” एक अन्य किसान ने कहा—
“कोई भी व्यक्ति अकेले इतना खर्च नहीं कर सकता। गांव मिलकर भी इतना बड़ा काम नहीं कर सकता था। लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने कुछ ही दिनों में यह कर दिखाया।”
किसानों का कहना है कि अगर समय पर यह सहायता नहीं मिलती तो गांव की हजारों एकड़ जमीन बंजर हो सकती थी।
संत रामपाल जी महाराज: सेवा और करुणा की मिसाल
गांव वालों का कहना है कि संत रामपाल जी महाराज सिर्फ आध्यात्मिक मार्गदर्शन ही नहीं देते, बल्कि समाज की वास्तविक समस्याओं को भी समझते हैं। किसानों की मदद के लिए उन्होंने जिस तेजी से कदम उठाया, वह उनके दया, करुणा और सेवा भाव को दर्शाता है। गांव के लोग मानते हैं कि संत रामपाल जी महाराज ने सिर्फ पाइप और मोटरें नहीं भेजीं, बल्कि उन्होंने किसानों की उम्मीद और भविष्य को बचाया है।
कई किसानों का कहना है कि आज जो खेतों में फिर से हरियाली लौटने की उम्मीद दिख रही है, वह संत रामपाल जी महाराज की कृपा और सेवा भावना की वजह से संभव हो पाया है।
सामाजिक प्रभाव: एक मदद जिसने पूरे गांव को बदल दिया
इस घटना का प्रभाव सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहा।
- गांव में फिर से आर्थिक गतिविधियां शुरू हो गईं
- मजदूरों को रोजगार मिला
- किसानों का मनोबल बढ़ा
- गांव में सामूहिकता और विश्वास मजबूत हुआ
लोग कहते हैं कि जब कोई संकट आता है तो असली मदद वही होती है जो समय पर मिले। संत रामपाल जी महाराज की यह सहायता गांव के लोगों के लिए सिर्फ राहत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत बन गई।
उम्मीद की लौ फिर जली
गांव सुई की यह कहानी सिर्फ बाढ़ में डूबे खेतों की कहानी नहीं है। यह कहानी है टूटती उम्मीदों के बीच फिर से जगी आशा की। जब प्रशासनिक मदद नहीं मिली और किसान निराश हो गए थे, तब संत रामपाल जी महाराज ने आगे बढ़कर सहायता का हाथ बढ़ाया। संत रामपाल जी महाराज शत प्रतिशत एक असाधारण संत हैं जिनके आशीर्वाद से ये राहत कार्य लगातार चल रहे हैं।
आज गांव के खेतों में फिर से हल चल रहे हैं, ट्रैक्टर दौड़ रहे हैं और किसान मुस्कुराते हुए अपनी अगली फसल की तैयारी कर रहे हैं। गांव वालों के शब्दों में—
“अगर उस समय संत रामपाल जी महाराज मदद नहीं करते, तो शायद हमारे खेत और भविष्य दोनों खत्म हो जाते।” यह घटना दिखाती है कि जब सेवा भावना और करुणा के साथ कोई आगे बढ़ता है, तो वह सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि पूरे समाज की दिशा बदल सकता है।
और शायद यही वजह है कि गांव सुई के लोग आज कहते हैं, “संत रामपाल जी महाराज ने हमारे खेत ही नहीं, हमारी उम्मीद और जीवन भी बचा ली।ऐसा काम केवल भगवान कर सकता है और वे हमारे लिए भगवान से कम नहीं हैं।”



