रोहतक के नजदीक स्थित गांव सिंहपुरा खुर्द के किसानों के लिए पिछला कुछ समय किसी बड़ी आपदा से कम नहीं था। गांव की करीब 100 एकड़ जमीन पानी में डूब गई थी। हालांकि प्रशासन ने कुछ मदद की, लेकिन वे केवल ऊपरी पानी ही निकाल सके। असल समस्या उन 70 एकड़ खेतों की थी, जहाँ 3 से 4 फुट पानी महीनों से जमा था।
किसानों के सामने ‘दोहरी मार’ वाली स्थिति थी। एक तरफ पकी हुई धान की फसल पानी में गल रही थी, जिसे वे काट नहीं पा रहे थे। दूसरी तरफ, गेहूं की बिजाई का समय निकला जा रहा था। खेती पर निर्भर इन परिवारों के लिए यह केवल फसल का नुकसान नहीं, बल्कि कर्ज और बच्चों की पढ़ाई पर आने वाला संकट था।
जब सरकारी मदद कम पड़ी, तब मिली नई उम्मीद
ग्रामीणों के अनुसार, यह समस्या पिछले करीब 6 सालों से बनी हुई थी। सरकारी तंत्र की धीमी प्रक्रिया और “एस्टीमेट” के चक्करों के बीच किसानों की उम्मीदें दम तोड़ रही थीं। ऐसे समय में ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के पास अपनी व्यथा पहुँचाई।
जहाँ सरकारी सहायता पहुँचने में महीनों लग जाते हैं, वहाँ इस प्रार्थना पर तुरंत कार्रवाई हुई। कुछ ही दिनों के भीतर गांव में राहत सामग्री का काफिला पहुँच गया, जिसमें शामिल था:

- 10 हॉर्स पावर (HP) की शक्तिशाली मोटर का पूरा सेट।
- 4,500 फुट लंबी उच्च गुणवत्ता वाली पाइप लाइन।
- स्टार्टर, केबल और फिटिंग का सारा तकनीकी सामान।
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हरियाली ने ली जलभराव की जगह
मदद मिलने के दो महीने बाद आज सिंहपुरा खुर्द की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। उस शक्तिशाली मोटर ने दिन-रात काम करके खेतों से जमा हुआ पुराना पानी बाहर निकाल फेंका। कल जहाँ छाती तक पानी खड़ा था, आज वहां 100% जमीन पर गेहूं की बिजाई हो चुकी है।
गांव के किसान प्रमोद बताते हैं कि बाढ़ के कारण उन्हें लाखों का नुकसान हुआ था। वे कहते हैं, “अगर ये पाइप और मोटर नहीं मिलती, तो हम इस बार कुछ भी नहीं बो पाते और भारी कर्ज में डूब जाते।” आज लहलहाती फसल देखकर गांव के हर किसान के चेहरे पर राहत की मुस्कान है।
भविष्य के लिए स्थाई समाधान
सिंहपुरा खुर्द के ग्रामीणों ने केवल तात्कालिक राहत ही नहीं, बल्कि भविष्य का भी इंतजाम कर लिया है। गेहूं की कटाई के बाद, गांव वालों ने इन पाइपों को जमीन के नीचे स्थाई रूप से दबाने की योजना बनाई है। गांव के नंबरदार के अनुसार, अब उनके पास अपना खुद का ड्रेनेज सिस्टम है। अब भविष्य में कभी भी जलभराव होने पर वे तुरंत पानी निकाल सकेंगे।
किसानों के लिए संत रामपाल जी महाराज एक मसीहा बनकर उभरे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि इस सेवा ने न केवल उनकी जमीन बचाई, बल्कि उजड़ते हुए परिवारों को फिर से आबाद कर दिया है।



