हरियाणा के जिला हिसार के प्रेमनगर गांव की यह गाथा केवल खेतों में जलभराव की नहीं, बल्कि उन उजड़ते आशियानों और सिसकती उम्मीदों की है, जो महीनों से बाढ़ के पानी में डूबे हुए थे। प्रेमनगर में प्रकृति का प्रकोप इस कदर टूटा कि गांव के घर-घर में पानी घुस गया और लोग अपने ही गांव में शरणार्थी बनने को मजबूर हो गए। जब सरकारी तंत्र और प्रशासन की ओर से कोई ठोस सहायता नहीं मिली, तब संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ एक दैवीय वरदान बनकर सामने आई।
यह लेख उस अद्भुत परिवर्तन की कहानी है, जिसने निराशा के अंधेरे को विश्वास की रोशनी में बदल दिया और यह सिद्ध किया कि एक पूर्ण संत की दया से ही मानवता सुरक्षित है।
गांव की भयावह स्थिति
प्रेमनगर गांव में बाढ़ का मंजर किसी खौफनाक सपने से कम नहीं था। पिछले 3 महीनों से गांव में पानी का स्तर इतना बढ़ गया था कि वह खेतों की सीमा लांघकर लोगों के बेडरूम तक पहुंच चुका था। जलभराव के कारण मकानों की नींव कमजोर हो गई, फर्श धंसने लगे और दीवारों में गहरी दरारें आ गईं। गांव के ही एक डॉक्टर साहब की पीड़ा सुन हर किसी का दिल दहल गया, जो पिछले 3 महीने से अपना घर खाली करके दूसरे के घर में रहने को मजबूर थे। न केवल इंसानों के लिए रहने का संकट था, बल्कि पशुओं के लिए चारे की कमी और स्कूलों-डिस्पेंसरियों में पानी भरे होने से बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य सेवाएं भी पूरी तरह ठप हो चुकी थीं।
ग्रामीणों की मार्मिक मांग
जब हर तरफ से निराशा हाथ लगी और प्रशासनिक आश्वासन खोखले साबित हुए, तब प्रेमनगर की ग्राम पंचायत ने अपनी अंतिम उम्मीद के साथ जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के चरणों में प्रार्थना लगाई। पंचायत ने अपने आधिकारिक लेटरहेड पर निम्नलिखित सामग्री की मांग रखी:
- 15 HP की एक शक्तिशाली मोटर
- 12,000 फुट लंबी 8-इंची ड्रेनेज पाइपलाइन
- सहायक विद्युत उपकरण और फिटिंग्स
ग्रामीणों का मानना था कि यदि अब कोई चमत्कार नहीं हुआ, तो न केवल उनकी वर्तमान फसल, बल्कि उनके घर और भविष्य भी इस पानी में समा जाएंगे।
संत रामपाल जी महाराज की असीम दया से मिली राहत

प्रेमनगर वासियों की पुकार सुनते ही संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी देरी के राहत सामग्री भेजने का आदेश दिया। मात्र 10 दिनों के भीतर राहत का एक विशाल काफिला गांव पहुंचा। यह सहायता पूर्णतः निःशुल्क और स्थायी रूप से प्रदान की गई, ताकि गांव भविष्य में भी ऐसी आपदाओं का सामना कर सके। संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई सामग्री इस प्रकार है:
- 15 HP की हैवी ड्यूटी मोटर: पानी की त्वरित निकासी के लिए।
- 12,000 फुट उच्च गुणवत्ता के पाइप: खेतों और घरों से पानी को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने हेतु।
- संपूर्ण सेट: इसमें स्टार्टर, केबल, नट-बोल्ट और सभी फिटिंग्स शामिल थीं, ताकि ग्रामीणों को एक कील तक बाहर से न खरीदनी पड़े।
संत रामपाल जी महाराज ने एक पिता की तरह गांव के दर्द को समझा और यह सुनिश्चित किया कि संसाधनों की कमी के कारण किसी का घर न उजड़े।
ग्रामीणों की आवाज़
राहत सामग्री पहुंचने पर प्रेमनगर के ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों के चेहरे पर जो सुकून था, उसे शब्दों में बयां करना कठिन है। ग्रामीणों के कुछ मुख्य कथन निम्नलिखित हैं:
- “मैं पिछले 3 महीने से अपना घर खाली करके दूसरे के घर बैठा हूं।” — गांव के डॉक्टर
- “महाराज जी की दया से 12,000 फीट पाइप लाइन मिल गई और एक मोटर मिल गई… मैं इनका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।” — ग्रामीण प्रतिनिधि
- “ऐसी सेवा आज तक पहले कभी नहीं देखी… ऐसी सेवा परमात्मा ही कर सकता है समाज के लिए।” —सेवादार/ग्रामीण
- “इतना तो सगा बाप भी नहीं करता यह इंसान नहीं भगवान का रूप है।” — ग्रामीण
- “संत रामपाल जी महाराज भगवान के रूप में आए हैं। इनके लिए शब्द नहीं है कोई बोलने के लिए।” — बुजुर्ग ग्रामीण
- “भगवान से ऊपर होकर इतना धर्म का काम जो करने लग रहे हैं, बहुत तहे दिल से धन्यवाद है।” — डॉक्टर साहब
यह भी पढ़े: बाढ़ से तबाह बिठमड़ा गांव में फिर आई हरियाली: निराशा से खुशहाली तक का सफर
जवाबदेही और पारदर्शिता
संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम केवल दान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अनुशासन और पारदर्शिता का अनूठा संगम है। सामग्री वितरण के साथ ही पंचायत को एक निर्देश पत्र भी दिया गया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि:
- सामूहिक सहयोग: सभी ग्रामीण मिलकर पानी निकालेंगे ताकि अगली फसल की बिजाई समय पर हो सके।
- ड्रोन रिकॉर्डिंग: पारदर्शिता के लिए तीन चरणों में वीडियो बनाई जाएगी—राहत से पहले, पानी निकलने के बाद और फसल लहराने के समय। ये वीडियो सतलोक आश्रम के समागमों में दिखाए जाएंगे ताकि दानदाताओं को विश्वास रहे कि उनका पैसा सही जगह लग रहा है।
- चेतावनी: यदि संसाधनों का सही उपयोग नहीं हुआ और फसल नहीं बोई गई, तो भविष्य में ट्रस्ट कोई सहायता नहीं देगा।
यह कठोर अनुशासन यह सुनिश्चित करता है कि सहायता का लाभ हर जरूरतमंद तक पहुंचे और गांव आत्मनिर्भर बने।
कलयुग के रक्षक – संत रामपाल जी महाराज
आज के समय में जब बड़े-बड़े धर्मगुरु और संस्थाएं केवल उपदेशों तक सीमित हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज धरातल पर उतरकर मानवता की सेवा कर रहे हैं। प्रेमनगर की यह घटना प्रमाणित करती है कि वे केवल एक आध्यात्मिक गुरु नहीं, बल्कि कलयुग में एकमात्र तत्वदर्शी संत, किसान मसीहा और विश्व उद्धारक हैं। उन्होंने जाति-पाती और मजहब से ऊपर उठकर 36 बिरादरी की मदद की है।
अन्नपूर्णा मुहिम के तहत अब तक 400 से अधिक गांवों को राहत दी जा चुकी है, जो यह दर्शाता है कि संत रामपाल जी महाराज ही पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब के एकमात्र प्रतिनिधि हैं। उनके मार्गदर्शन में चल रहा यह सेवा कार्य समाज के लिए प्रेरणा है कि वास्तविक भक्ति वही है जो परोपकार और मानवता की सेवा से जुड़ी हो।



