हरियाणा राज्य के हिसार जिले में स्थित मात्रश्याम गांव कुछ समय पूर्व एक खौफनाक त्रासदी से गुजर रहा था। बाढ़ के भीषण प्रकोप ने पूरे गांव की तस्वीर बदलकर रख दी थी। हालात इतने दर्दनाक थे कि गांव की एससी (SC) कॉलोनी के लगभग 150 घर पूरी तरह से जलमग्न हो गए थे और वहां रहने वाले परिवारों को अगस्त-सितंबर के महीने में अपना घर छोड़कर पलायन करने के लिए विवश होना पड़ा था।
ग्रामीण अपने ही गांव में शरणार्थियों की तरह जीवन व्यतीत करने को मजबूर हो गए थे। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल आवासीय क्षेत्रों को अपनी चपेट में लिया, बल्कि गांव का मुख्य स्कूल भी 6 फुट गहरे पानी में डूब गया था, जिससे बच्चों की शिक्षा पूरी तरह से बाधित हो गई थी। इसके अतिरिक्त, गांव की लगभग 1500 एकड़ अत्यंत उपजाऊ कृषि भूमि पानी के भराव के कारण एक विशाल सफेद समंदर में तब्दील हो गई थी।
मुख्य अंश:
- हरियाणा के हिसार जिले के मात्रश्याम गांव में बाढ़ के कारण 1500 एकड़ उपजाऊ जमीन और 150 घर पूरी तरह से जलमग्न हो गए थे।
- गांव के स्कूल में 6 फुट तक बाढ़ का पानी भर गया था, जिससे ग्रामीण जीवन और शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी।
- सरकारी प्रशासन द्वारा कोई ठोस मदद न मिलने पर मात्रश्याम पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज से सहायता की गुहार लगाई।
- संत रामपाल जी महाराज ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पहले चरण में 3 मोटरें और 8000 फुट पाइप गांव में भिजवाए।
- द्वितीय चरण की मदद में 4 अतिरिक्त 15 हॉर्स पावर की विशाल मोटरें प्रदान की गईं ताकि खेतों का पानी निकालकर गेहूं की बिजाई सुनिश्चित की जा सके।
- संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई इस असीमित सहायता से गांव वाले अपने घरों में लौट सके और उन्होंने अपने घरों में ही रोशनी से जगमगाती दिवाली मनाई।
प्रशासन की घोर विफलता और किसानों में पनपती गहरी हताशा
लगातार जलभराव के कारण गांव के किसानों की हताशा चरम पर पहुंच गई थी। 1500 एकड़ भूमि के जलमग्न होने से किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो चुकी थी। प्रशासन की ओर से कोई भी तकनीकी या आर्थिक सहायता न मिलने के कारण एक बड़े जमींदार किसान ने तो अपनी नष्ट होती फसल को देखकर आत्महत्या तक करने का विचार कर लिया था।
सरकारी मशीनरी गांव से पानी निकालने में पूर्ण रूप से अक्षम सिद्ध हो रही थी और किसान इस बात को लेकर चिंतित थे कि अगली फसल की बिजाई का समय भी हाथ से निकलता जा रहा है। सरकार और स्थानीय प्रशासन के कोरे आश्वासनों और उदासीन रवैये ने ग्रामीणों को पूरी तरह से बेसहारा छोड़ दिया था।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रथम चरण में प्रदान की गई जीवनदायिनी सहायता
ग्रामीणों की मार्मिक प्रार्थना को स्वीकार करते हुए संत रामपाल जी महाराज ने बिना एक क्षण का विलंब किए मात्रश्याम गांव में राहत सामग्री भिजवाई। प्रथम चरण में गांव को तीन विशाल मोटरें और 8000 फुट पाइप के साथ-साथ आवश्यक उपकरण जैसे नट-बोल्ट और स्टार्टर प्रदान किए गए। इस अत्यंत शक्तिशाली मशीनरी की मदद से गांव की डूबी हुई एससी कॉलोनी और स्कूल से तेजी से पानी निकाला गया। कुछ ही समय में स्कूल का पानी 6 फुट से घटकर मात्र 1 फुट रह गया।
संत रामपाल जी महाराज की इस ऐतिहासिक कृपा के कारण विस्थापित हो चुके 150 परिवार वापस अपने आशियानों में लौट सके और उन्होंने अपने घरों को रोशन कर दिवाली का पावन पर्व मनाया। स्कूल और घरों की इमारतों को भी भारी नुकसान से बचा लिया गया।
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कृषि भूमि को बचाने हेतु द्वितीय चरण में भेजी गई अतिरिक्त विशाल मोटरें
आवासीय बस्ती के सुरक्षित होने के पश्चात भी 1500 एकड़ खेतों में पानी का ठहराव एक गंभीर चुनौती बना हुआ था। जब पंचायत और सरपंच ने यह महसूस किया कि इतने विशाल क्षेत्र से पानी निकालने के लिए अधिक क्षमता की आवश्यकता है, तो उन्होंने पुनः संत रामपाल जी महाराज के समक्ष प्रार्थना की।
उनकी इस पुकार पर संत रामपाल जी महाराज ने अपनी असीम दया का परिचय देते हुए तत्काल 15 हॉर्स पावर की 4 अतिरिक्त विशाल मोटरें गांव के लिए भिजवा दीं। अब मात्रश्याम गांव के पास कुल 7 विशाल मोटरें और हजारों फुट पाइपों का एक अत्यंत मजबूत सुरक्षा कवच उपलब्ध हो गया है, जिससे संपूर्ण कृषि भूमि को खेती के योग्य बनाया जा रहा है।
राहत सामग्री को गांव की स्थायी और अचल संपत्ति घोषित करना
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई यह सहायता कोई ऋण या अस्थायी मदद नहीं है, बल्कि इसे स्पष्ट रूप से मात्रश्याम गांव की स्थायी और अचल संपत्ति घोषित किया गया है। ग्रामीणों को यह दिशा-निर्देश दिया गया है कि वे इन पाइपों को अपनी जमीन में सुरक्षित रूप से दबा लें ताकि भविष्य में कभी भी अत्यधिक वर्षा या बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने पर वे तुरंत इनका उपयोग कर सकें। यह एक ऐसा अमूल्य और स्थायी उपहार है जिसे संत रामपाल जी महाराज ने मात्रश्याम गांव को भेंट किया है, ताकि वे हमेशा सुरक्षित रह सकें।
संत रामपाल जी महाराज का कड़ा दिशा-निर्देश और गेहूं की बिजाई का लक्ष्य
संत रामपाल जी महाराज का यह स्पष्ट आदेश है कि प्रदान की गई इन मोटरों और पाइपों का पूरी निष्ठा से उपयोग किया जाए और गांव के खेतों से हर हाल में पानी निकाला जाए। उनका मुख्य उद्देश्य यह है कि जमीन को जल्द से जल्द सुखाकर अगली गेहूं की फसल की बिजाई सुनिश्चित की जा सके।
पंचायत को यह सख्त संदेश भी दिया गया है कि यदि इस उपकरण का उपयोग कर समय पर पानी नहीं निकाला गया और खेतों में बिजाई नहीं हुई, तो भविष्य में कोई अन्य सहायता प्रदान नहीं की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया की ड्रोन कैमरों के माध्यम से वीडियोग्राफी भी की जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि खेतों में फसल लहलहा रही है।
ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा व्यक्त की गई भावुक कृतज्ञता
मात्रश्याम गांव के निवासी और पंचायत प्रतिनिधि संत रामपाल जी महाराज की इस असीम कृपा से अत्यधिक भावुक हो गए। सरपंच और अन्य वयोवृद्ध ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जितना उपकार संत रामपाल जी महाराज ने उनके गांव पर किया है, उतना तो कोई सगा बाप भी अपने बच्चों के लिए नहीं करता। ग्रामीणों ने महाराज जी को साक्षात भगवान का रूप माना है, जिन्होंने उनके उजड़ते हुए घरों और बर्बाद होते खेतों को नया जीवन दिया है। संपूर्ण गांव ने संकल्प लिया है कि वे महाराज जी के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता अर्पित करेंगे।
निस्वार्थ परमार्थ सेवा और अन्य संस्थाओं के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण
आज के समय में जहां कई कथावाचक मात्र धन बटोरने के लिए कार्य करते हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज ने यह सिद्ध कर दिया है कि सच्ची मानवता और परोपकार क्या होता है। संत रामपाल जी महाराज निस्वार्थ भाव से समाज कल्याण में संलग्न हैं और एक किसान परिवार से होने के कारण किसानों की पीड़ा को गहराई से समझते हैं। वे मानते हैं कि किसान का घर आबाद रहेगा तभी मजदूर का चूल्हा भी जलेगा। संत रामपाल जी महाराज द्वारा किया जा रहा यह परमार्थ कार्य पूरे विश्व के लिए एक बहुत बड़ा अनुकरणीय उदाहरण है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र और संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई राहत सामग्री का विवरण

| विवरण | आंकड़े / जानकारी |
| राज्य / जिला | हरियाणा / हिसार |
| प्रभावित गांव का नाम | मात्रश्याम |
| जलमग्न घरों की संख्या | 150 परिवार (एससी कॉलोनी) |
| जलमग्न कृषि भूमि | लगभग 1500 एकड़ |
| स्कूल में जलभराव की स्थिति | 6 फुट (जिसमें से 5 फुट निकाला गया) |
| प्रथम चरण में प्राप्त सहायता | 3 मोटरें (15 HP) और 8000 फुट पाइप |
| द्वितीय चरण में प्राप्त सहायता | 4 विशाल मोटरें (15 HP) व संबंधित उपकरण |
| कुल प्राप्त राहत सामग्री | 7 विशाल मोटरें (15 HP), 8000 फुट पाइप, नट-बोल्ट, स्टार्टर |
युगदृष्टा संत रामपाल जी महाराज: मानवता के सच्चे मसीहा और रक्षक
उपर्युक्त वृत्तांत इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि संत रामपाल जी महाराज का संपूर्ण जीवन मानवता की निस्वार्थ सेवा को समर्पित है। जब सम्पूर्ण प्रशासनिक ढांचा चरमरा गया और मात्रश्याम के ग्रामीणों के जीवन में घोर अंधकार छा गया, तब संत रामपाल जी महाराज ने आगे आकर न केवल 150 परिवारों के उजड़ते हुए आशियानों को बचाया, बल्कि 1500 एकड़ बंजर होती कृषि भूमि में फिर से जीवन का संचार कर दिया।
उन्होंने बिना किसी दिखावे या लालच के, अपनी अपार शक्ति और करुणा से एक पूरे गांव को जल समाधि लेने से बचा लिया। संत रामपाल जी महाराज की यह अद्वितीय दानवीरता और समाज कल्याण की भावना युगों-युगों तक स्वर्ण अक्षरों में याद रखी जाएगी। उनका यह कार्य स्पष्ट करता है कि वे कलयुग में मानवता के रक्षक हैं, जिनकी कृपा दृष्टि मात्र से असंभव प्रतीत होने वाले संकट भी दूर हो जाते हैं। उनकी महिमा और उनका निस्वार्थ प्रेम संपूर्ण मानव जाति के लिए एक महान आशीर्वाद है।



