जब हार गया सरकारी तंत्र, तब संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ ने बदला खैरपुर का भाग्य

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राजस्थान के डीग जिले के अंतर्गत आने वाली कासोट ग्राम पंचायत (जिसमें खैरपुर, नहार का बास, बड़ावास, हलई, सरोद और मिर्गावास जैसे गांव शामिल हैं) के लिए पिछला 15 से 20 साल का समय किसी अभिशाप से कम नहीं था। यहाँ के अन्नदाताओं की लगभग 500 से 900 बीघा उपजाऊ भूमि बाढ़ और जलभराव के पानी में पूरी तरह डूबकर एक स्थाई झील बन चुकी थी। हर चुनाव में नेताओं ने वादे तो बहुत किए, लेकिन धरातल पर किसानों को सिर्फ निराशा हाथ लगी। अपनी ही जमीन होने के बावजूद किसान दाने-दाने को तरस रहे थे, मकानों में दरारें आ रही थीं और युवाओं का भविष्य अंधकार में डूब रहा था। जब प्रशासन ने इस समस्या को पूरी तरह ‘असंभव’ मानकर अपने हाथ खड़े कर दिए, तब ग्राम पंचायत ने एक अंतिम उम्मीद के साथ संत रामपाल जी महाराज के चरणों में अर्जी लगाई।

​72 घंटों में पहुँचा संसाधनों का महा-जखीरा

संत रामपाल जी महाराज के दरबार से इस विकट संकट का समाधान मात्र 72 घंटों के भीतर शुरू कर दिया गया। बिना किसी प्रशासनिक देरी के, संत जी ने गाँव में राहत सामग्री का एक विशाल काफिला उतार दिया। इस ऐतिहासिक परोपकार के कार्य में लगभग 10 किलोमीटर (31,660 फुट) लंबी 8-इंची पाइपलाइन गाँव भेजी गई। इसके साथ ही, पानी को तेजी से खींचने के लिए 11 भारी-भरकम 10 HP की मोटरें, एक विशाल 20 HP की मोटर और बिजली संकट से निपटने के लिए 7 शक्तिशाली ट्रैक्टर कपलिंग सेट (पंखा) तैनात किए गए। सबसे बड़ी बात यह रही कि किसानों की दयनीय आर्थिक स्थिति को देखते हुए, इन मशीनों को चलाने के लिए भारी जनरेटरों का किराया और डीजल का संपूर्ण खर्च संत रामपाल जी महाराज द्वारा पूरी तरह निःशुल्क (मुफ़्त) वहन किया गया।

​लहलहाई फसलें और कर्ज से मुक्ति की नई आस

इस युगांतकारी प्रयास का असर धरातल पर साक्षात चमत्कार की तरह दिखाई दे रहा है। खेतों का पानी पूरी तरह खदेड़कर मुख्य नहरों में डाल दिया गया, जिससे लगभग 700 बीघा डूबी हुई भूमि दोबारा जीवित हो उठी है। वर्तमान में खैरपुर के खेतों में सरसों और गेहूं की फसलें पूरी तरह लहलहा रही हैं। वर्तमान सरपंच और गाँव के बुजुर्ग बलवीर सिंह जैसे ग्रामीणों के अनुसार, इस बार खेतों से 1 से 1.5 करोड़ रुपये की बंपर पैदावार होने का अनुमान है, जिससे किसानों के सिर पर चढ़ा सालों पुराना कर्ज उतर सकेगा। गाँव के लोगों ने ढोल-नगाड़ों और फूलों की बारिश के साथ इस मानवीय सेवा का स्वागत किया और कृतज्ञता स्वरूप संत जी को पगड़ी भेंट की। मुसीबत के समय बिना किसी स्वार्थ के आगे आकर संत रामपाल जी महाराज ने उजड़ते हुए खैरपुर गाँव को एक नया जीवनदान दिया है।

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