हरियाणा के हिसार जिले की मंडी आदमपुर तहसील का गांव कालीरावण, पिछले कई महीनों से एक ऐसी बेबसी झेल रहा था जिसने 15,000 की आबादी वाले इस विशाल गांव को पूरी तरह लाचार कर दिया था। गांव के उपजाऊ खेत एक विशाल और गंदी झील में बदल चुके थे। लेकिन जब प्रशासन ने साथ छोड़ दिया, हर तरफ से निराशा हाथ लगी, तब तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज इन किसानों के लिए साक्षात भगवान बनकर आए। संत जी ने गांव वालों की डूबती हुई दुनिया को फिर से आबाद कर दिया।
राहत सामग्री से जुड़े मुख्य बिंदु
- संत रामपाल जी महाराज जी ने गांव को इस प्रलय से निकालने के लिए संसाधनों का लगा दिया ढेर।
- गांव वालों को मुफ्त दी गई 14,000 फुट लंबा 8 इंची पाइप।
- पानी निकालने के लिए 10 हॉर्स पावर (HP) की तीन विशाल मोटरें दी गई।
- मोटर चलाने के लिए स्टार्टर, लंबी केबल और सुंडिया।
- पाइप जोड़ने और सेट करने के लिए हर छोटा बड़ा नट-बोल्ट और आवश्यक सामान प्रदान किया गया।
प्रशासन ने फेर ली थी आंखें, 5000 एकड़ जमीन थी जलमग्न
कालीरावण गांव की स्थिति बेहद डरावनी थी। गांव के लगभग 5000 एकड़ उपजाऊ खेत 3 से 4 फुट गहरे बाढ़ के पानी में डूबे हुए थे। किसानों की पिछली फसलें जैसे नरमा, बाजरा और ग्वार पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थीं और खेतों में सिर्फ सड़े हुए अवशेष बचे थे। गांव के तीन हिस्से पूरी तरह जलमग्न थे और करीब 9000 लोग सीधे तौर पर इस बर्बादी की मार झेल रहे थे।
गांव के सरपंच रवि सिवाच और जिला परिषद सदस्य ने बताया कि उन्होंने डीसी और प्रशासन के दफ्तरों के चक्कर काट कर अपने जूते घिसवा लिए थे। लेकिन प्रशासन की तरफ से उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला, धरातल पर मदद के नाम पर एक मोटर तक नहीं दी गई। किसानों को डर था कि अगर जल्दी पानी नहीं निकला, तो गेहूं और सरसों की अगली बिजाई नहीं हो पाएगी। अगर फसल नहीं उगती, तो बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना असंभव हो जाता।
सिर्फ एक हफ्ते में पहुंचा 14,000 फुट पाइप का विशाल काफिला
ऐसे मुश्किल वक्त में जब गांव वालों ने सोशल मीडिया पर संत रामपाल जी महाराज द्वारा अन्य गांवों में की जा रही मदद के वीडियो देखे, तो उन्होंने एक आखिरी उम्मीद के साथ बरवाला आश्रम में जाकर अर्जी लगाई। गांव वालों ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज के यहां रफ्तार का मतलब ही अलग है। अर्जी लगाते ही सिर्फ एक हफ्ते के भीतर राहत का एक विशाल काफिला गांव के दरवाजे पर खड़ा था।
सेवादारों ने स्पष्ट कर दिया था कि गांव वालों को बाहर से एक रुपये का सामान भी नहीं खरीदना पड़ेगा। किसानों ने हैरानी जताते हुए कहा कि जहां सरकार एक मोटर नहीं दे पाई, वहां महाराज जी ने ट्रकों के ट्रक भर कर पाइप और मोटरें भेज दी हैं।
खेतों में लौटी खुशहाली, गेहूं की फसल ने ली अंगड़ाई
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई उन शक्तिशाली मशीनों ने दिन रात काम करके 15 से 20 दिनों के भीतर उस अथाह पानी को गांव की सीमाओं से बाहर खदेड़ दिया। आज कालीरावण गांव का मंजर पूरी तरह बदल चुका है।
जहां कल तक 4 फुट गहरा सड़ा हुआ पानी था, आज वहां जमीन सूख चुकी है और लगभग 80 से 100 प्रतिशत खेतों में गेहूं की बिजाई हो चुकी है। जिस जमीन को किसान बंजर मान चुके थे, आज वहां फसल लहलहा रही है।
इंसानियत की सच्ची मिसाल और किसानों का कोटि कोटि धन्यवाद
गांव के किसानों और सरपंच रवि सिवाच ने भावुक होकर संत रामपाल जी महाराज का कोटि कोटि धन्यवाद किया। उनका मानना है कि जहां व्यवस्था ने उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया था, वहां एक संत ने पिता की तरह हाथ थाम कर गांव की लाज बचा ली। किसानों ने स्पष्ट कहा कि आज उनके खेतों में जो फसल उग रही है, वह सिर्फ और सिर्फ संत रामपाल जी महाराज की दया का नतीजा है।
संत जी के द्वारा की जा रही यह निस्वार्थ सेवा हरियाणा के सैकड़ों गांवों के लिए संजीवनी बूटी साबित हो रही है। यह समझ में आता है कि असली सेवा वही है जो बिना किसी स्वार्थ के, मुसीबत के वक्त पर काम आए।
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