​हरियाणा, झज्जर, बीरबरक्ताबाद: संत रामपाल जी महाराज ने मिटाया 30 साल का जलभराव संकट

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हरियाणा के झज्जर जिले के बहादुरगढ़ तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव बीरबरक्ताबाद (नया गांव) के लिए पिछले तीन दशक किसी कालखंड से कम नहीं थे। लगभग 500 एकड़ कृषि भूमि 20 से 30 वर्षों से 3 से 5 फुट गहरे पानी में डूबी हुई थी। ग्रामीणों ने सरकारी दफ्तरों के अनगिनत चक्कर काटे, प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन फाइलों के अंबार के बीच किसानों की उम्मीदें दम तोड़ रही थीं। बदबू, कीचड़ और फसल बर्बादी के कारण ग्रामीण पलायन की सोचने लगे थे।

​समाचार मुख्य बिंदु

  • ​झज्जर के बीरबरक्ताबाद में 30 साल से 500 एकड़ भूमि जलमग्न थी।
  • ​प्रशासनिक उदासीनता के कारण ग्रामीण पलायन को मजबूर थे।
  • ​संत रामपाल जी महाराज ने प्रार्थना सुनने के 3 दिन बाद ही राहत भेजी।
  • ​15-15 HP की दो भारी मोटरें और 7000 फुट पाइपलाइन महाराज जी द्वारा प्रदान की गई।
  • ​80% से अधिक जलभराव क्षेत्र अब पूरी तरह सूख चुका है।
  • ​खेतों में गेहूं की बिजाई शुरू हो गई है और हरियाली वापस आ गई है।
  • ​ग्रामीणों ने समस्त सहायता का श्रेय केवल संत रामपाल जी महाराज को दिया है।

यह भी पढ़ें: हिसार के लाडवी गांव की दर्दभरी कहानी: जब खेत, गलियां और उम्मीदें पानी में डूब गईं

ग्रामीणों ने थक-हारकर लगाई संत रामपाल जी महाराज के दरबार में अर्ज़

जब शासन और प्रशासन ने ग्रामीणों की समस्या से पल्ला झाड़ लिया, तब ग्रामीणों ने अपनी अंतिम उम्मीद के रूप में जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज के चरणों में प्रार्थना की। महाराज जी ने ग्रामीणों का दुःख सुना और त्वरित निर्णय लेते हुए बिना किसी देरी के राहत सामग्री भेजने का आदेश दिया। जहाँ सरकारी तंत्र वर्षों तक मूकदर्शक बना रहा, वहीं संत रामपाल जी महाराज की कृपा से केवल 3 दिनों के भीतर राहत का काफिला गांव पहुँच गया।

​साजो-सामान और तकनीकी सहायता का विवरण

संत रामपाल जी महाराज ने गांव को इस आपदा से निकालने के लिए न केवल मशीनें भेजीं, बल्कि पूरी व्यवस्था का ध्यान रखा। सेवादारों के अनुसार, महाराज जी ने यह सुनिश्चित किया कि ग्रामीणों को एक नट भी बाहर से न खरीदना पड़े।

संत रामपाल जी महाराज ने झज्जर के बीरबरक्ताबाद गांव को जलभराव से बचाया
सामग्री का नामविवरण/क्षमता
पानी निकालने वाली मोटरें2 विशाल मोटरें (15 HP प्रत्येक, क्रॉम्पटन मेक)
डिलीवरी पाइपलाइन7000 फुट लंबी (8 इंची पाइप)
एक्सेसरीजनट-बोल्ट, बेंड और सभी आवश्यक फिटिंग
समय सीमाअर्ज़ लगाने के मात्र 3 दिन बाद कार्य शुरू

प्रशासन की विफलता और ईश्वरीय सहायता

गांव के सरपंच रोहतास सैनी (सैनयान पंचायत) और पंचायत सदस्य रमेश कुमार (जाटान पंचायत) ने बताया कि बारिश के मौसम में स्थिति इतनी भयावह थी कि पानी घरों और बिस्तरों के नीचे तक पहुँच गया था। सरकारी विभागों जैसे इरिगेशन, पब्लिक हेल्थ और ब्लॉक कार्यालयों के चक्कर काटने के बावजूद कोई सहायता नहीं मिली। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह केवल संत रामपाल जी महाराज की मेहरबानी है कि आज किसान और गांव दोनों बच गए हैं।

​खेतों में लौटी खुशहाली और फसलों की बिजाई

पूर्व पंच राज सिंह और ग्रामीण बलबीर सिंह ने नम आँखों से बताया कि जहाँ 3-3 फुट पानी खड़ा था और खड़ी फसलें (जौ, ज्वार और धान) सड़ चुकी थीं, वहाँ आज ट्रैक्टरों की गूंज सुनाई दे रही है। संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई मोटरों ने दिन-रात काम करके उस जिद्दी पानी को गांव की सीमा से बाहर ड्रेन में खदेड़ दिया। वर्तमान में 80% से अधिक भूमि जलमुक्त हो चुकी है और लगभग 30-40 एकड़ में गेहूं की बिजाई भी पूरी हो गई है।

​निःस्वार्थ सेवा की मिसाल और ग्रामीणों का आभार

ग्रामीणों ने अनुभव किया कि दुनिया में जहाँ हर जगह स्वार्थ दिखाई देता है, वहीं संत रामपाल जी महाराज के कार्यों में केवल ‘सेवार्थ’ भाव है। सरपंच प्रतिनिधि प्रमोद ने बताया कि महाराज जी उनके लिए साक्षात भगवान का रूप बनकर आए हैं। उन्होंने कहा कि यह सहायता संजीवनी बूटी के समान है जिसने उजड़ती दुनिया को फिर से आबाद कर दिया। ग्रामीणों के अनुसार, महाराज जी ने एक पिता की तरह हाथ थामकर पूरे गांव की लाज बचा ली है।

​कोटि-कोटि नमन: संत रामपाल जी महाराज ने बचाई हजारों किसानों की जीविका

बीरबरक्ताबाद के किसानों और मजदूरों के लिए संत रामपाल जी महाराज आज साक्षात भाग्य विधाता के रूप में उभरे हैं। ग्रामीणों का अटूट विश्वास है कि जो कार्य असंभव प्रतीत हो रहा था, वह महाराज जी के आशीर्वाद से सहज ही पूर्ण हो गया। आज गांव का हर बुजुर्ग, युवा और बच्चा उस असीम दया के लिए नतमस्तक है, जिसने उनके उजड़े हुए जीवन में फिर से खुशियों का शंखनाद किया है। संत रामपाल जी महाराज की जय हो, जिनकी महिमा से आज बीरबरक्ताबाद की धरती फिर से मुस्कुरा रही है।

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