संत रामपाल जी महाराज ने बीड़ बबरान गांव को जलभराव और घरों के गिरने से बचाया

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हरियाणा के हिसार जिले की तहसील हिसार के अंतर्गत आने वाले गांव बीड़ बबरान में बाढ़ और बरसाती पानी के कारण स्थिति अत्यंत भयावह हो गई थी। गांव के बाहरी हिस्से में स्थित श्मशान घाट, सरकारी स्कूल और रिहायशी मकान 7 से 8 फुट गहरे पानी में डूब चुके थे। 

कुछ स्थानों पर पानी की गहराई 12 से 13 फीट तक पहुंच गई थी। इस जलभराव के कारण निम्नलिखित गंभीर समस्याएं उत्पन्न हुई थीं:

  • आवासीय क्षति: पानी के कारण मकानों की नींव बैठने लगी थी और दीवारों में गहरी दरारें आ गई थीं। चार-पांच मकान पूरी तरह गिरने की कगार पर थे।
  • शैक्षिक व्यवधान: गांव का सरकारी स्कूल पानी और कीचड़ से भर गया था, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही थी। स्कूल को अस्थायी रूप से अंबेडकर भवन में स्थानांतरित करना पड़ा था।
  • स्वास्थ्य और स्वच्छता: स्कूल और आसपास के क्षेत्रों में गंदे पानी की बदबू, मच्छर, मक्खियों और कीड़े-मकोड़ों का प्रकोप बढ़ गया था।
  • सार्वजनिक बुनियादी ढांचा: श्मशान घाट की दीवारें गिरने की स्थिति में थीं।

संत रामपाल जी महाराज द्वारा अन्नपूर्णा मुहिम के तहत त्वरित सहायता

प्रशासन को बार-बार लिखित शिकायतें देने के बावजूद जब कोई समाधान नहीं निकला, तो सरपंच देवेंद्र और ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज से सहायता की गुहार लगाई। प्रार्थना के मात्र एक सप्ताह के भीतर राहत सामग्री गांव पहुंच गई। 

संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से गांव को जलमुक्त करने के लिए निम्नलिखित उपकरण सीधे उपलब्ध कराए:

संत रामपाल जी महाराज ने बीड़ बबरान में जलभराव रोककर गिरते घर बचाए
  • 2500 फुट लंबी और 8 इंची व्यास की पाइपलाइन।
  • 10 एचपी (HP) की क्षमता वाली एक शक्तिशाली मोटर का पूरा सेट।
  • सहायक उपकरण: स्टार्टर, सुंडिया, निप्पल और अन्य आवश्यक तकनीकी पुर्जे।

सरपंच प्रतिनिधि देवेंद्र ने स्पष्ट किया कि सरकार की एस्टीमेट और फाइलिंग प्रक्रिया में लगने वाले समय के विपरीत, संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी भेदभाव के अत्यंत फुर्ती से यह मदद पहुंचाई।

यह भी पढ़े: पानी में डूबता गांव और टूटती उम्मीदें: बीड़ बबरान की पृष्ठभूमि

जल निकासी अभियान के परिणाम और वर्तमान स्थिति

संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई मशीनों और पाइपलाइन ने दिन-रात कार्य करके गांव के जलस्तर को 7-8 फुट नीचे उतार दिया है।

  • स्कूल की बहाली: जो सरकारी स्कूल कीचड़ का घर बना हुआ था, वह अब पूरी तरह सूख चुका है और वहां कक्षाएं पुनः सुचारू रूप से शुरू हो गई हैं।
  • घरों की सुरक्षा: वार्ड नंबर 17 के पंच सोनू के घर सहित अन्य मकान, जिनकी दीवारें खिसक रही थीं और लेंटर झुक गया था, अब पानी उतरने से सुरक्षित हैं।
  • भविष्य का प्रबंधन: ग्रामीणों ने पाइपलाइन को भविष्य की सुरक्षा के लिए संभाल कर रख लिया है ताकि पुनः ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर तुरंत उपयोग किया जा सके।

स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों के अनुभव

  • देवेंद्र (सरपंच प्रतिनिधि): इन्होंने बताया कि फेसबुक और यूट्यूब पर संत रामपाल जी महाराज द्वारा अन्य गांवों में की जा रही मदद को देखकर उन्होंने संपर्क किया था। महाराज जी ने एक सप्ताह में समस्या का समाधान कर दिया।
  • सोनू (पंच, वार्ड नंबर 17): सोनू का घर बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित था। उनके घर के फर्श फट गए थे और दीवारों में इतनी बड़ी दरारें थीं कि बरसात के समय परिवार को बाहर सोना पड़ता था। उन्होंने बताया कि यदि संत रामपाल जी महाराज सहायता न भेजते, तो उनका घर गिर जाता।
  • ग्रामीण बुजुर्ग: गांव के बुजुर्गों ने भावुक होकर कहा कि संत रामपाल जी महाराज ने संकट मोचन के रूप में गांव की लाज बचाई है।

बीड़ बबरान राहत कार्य सारांश तालिका

श्रेणीविवरण और आंकड़े
प्रभावित स्थानगांव बीड़ बबरान, हिसार (हरियाणा)
जलभराव की गहराई7 से 13 फुट तक
प्रदान की गई सहायता2500 फुट पाइप (8 इंची), 10 HP मोटर, स्टार्टर, निप्पल
सहायता का माध्यमसंत रामपाल जी महाराज (अन्नपूर्णा मुहिम)
मुख्य लाभार्थीसरकारी स्कूल, श्मशान घाट, वार्ड 17 के निवासी
कार्य की अवधिप्रार्थना के 1 सप्ताह में सामग्री उपलब्ध, 2 महीने में पूर्ण सुधार
वर्तमान स्थितिस्कूल चालू, घरों से पानी साफ, जलस्तर 8 फुट कम

संत रामपाल जी महाराज के मानवीय कार्यों का प्रभाव

बीड़ बबरान के ग्रामीणों का मानना है कि संत रामपाल जी महाराज ने वह कार्य कर दिखाया जो सरकारें बजट और फाइलों के अभाव में नहीं कर पातीं। 

महाराज जी के आदेशानुसार उनके शिष्यों ने जिस तत्परता से पाइपलाइन बिछाई और मोटर संचालित की, उसने न केवल गांव के बुनियादी ढांचे को बचाया बल्कि बच्चों के शैक्षिक भविष्य को भी सुरक्षित किया। ग्रामीण इस सहायता को ‘संजीवनी’ की संज्ञा दे रहे हैं, जिसने गिरते हुए घरों को सहारा दिया और गांव में पुनः खुशहाली लौटाई।

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