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Chhattisgarh Bijapur Naxal Attack: छत्तीसगढ़ में हुआ नक्सली हमला, अब तक 24 जवान हुए शहीद, कैसे हो नक्सलवाद खत्म?

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Chhattisgarh Bijapur Naxal Attack: छत्तीसगढ़ के बीजापुर में रविवार दोपहर नक्सल प्रभावित क्षेत्र बीजापुर और सुकमा जिले की सीमा पर नक्सलियों एवं पुलिस के बीच हुई मुठभेड़ में 24 जवान शहीद हुए हैं। 31 घायल अस्पताल पहुंचाए गए।

Chhattisgarh Bijapur Naxal Attack के मुख्य बिंदु

  • छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में हुआ बड़ा नक्सली हमला। मुठभेड़ में हुए 22 जवान शहीद।
  • सर्च ऑपरेशन से बरामद किए शवों के अतिरिक्त लगभग 31 सुरक्षाकर्मियों को अस्पताल भेजा गया है।
  • मुठभेड़ में कई नक्सली भी हुए ढेर। मरने वालों की संख्या लगभग 15 बताई जा रही है।
  • तत्वदर्शी संत की शिक्षाएं ही समाज में शांति ला सकती हैं।

छत्तीसगढ़ में हुआ नक्सली हमला

छत्तीसगढ़ के नक्सल इलाके में एक बड़ा हमला सामने आया है जिसमे बीजापुर एसपी कमलोचन कश्यप ने 24 सुरक्षाकर्मियों के शहीद होने की पुष्टि की है। बक्सर जिले के बीजापुर इलाके के तारेम थाना के अंतर्गत उक्त घटना हुई है। नक्सलियों ने 3 प्रकार से जवानों पर हमला किया है, जिसमें बुलेट, नुकीले हथियार और रॉकेट लॉन्चर शामिल हैं। देसी लॉन्चर से लगभग 250-300 नक्सलियों का समूह सुरक्षाबलों की टुकड़ी पर टूट पड़ा था। 

सुरक्षाकर्मियों को लगी जानकारी नक्सलियों की

बताया गया है कि सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस को खबर थी कि नक्सलियों का बड़ा कमांडर हिडमा इस हमले से ही 1 किलोमीटर दूर पर था जिसके बाद एक ज्वाइंट ऑपरेशन चलाया गया। सुरक्षाबलों पर हुए इस हमले में कई नक्सली भी मारे गए हैं। कुख्यात नक्सली हिडमा ने घेराबंदी के बाद जवानों पर फायरिंग की थी। चूंकि घायल सुरक्षाकर्मी अधिक हैं इसलिए शहीदों की संख्या भी अधिक हो सकती है इस कारण से मुठभेड़ स्थल पर सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है।

Chhattisgarh Bijapur Naxal Attack: इस साल का सबसे बड़ा नक्सली हमला

यह इस वर्ष का सबसे बड़ा नक्सली हमला है जिसमें इतने सुरक्षाकर्मियों की जान गई और 31 घायल हुए। हमले में 8 सीआरपीएफ एवं 14 पुलिस जवान शहीद हुए है व एक जवान अब भी लापता है। यह हमला नक्सलियों के संगठन पीपुल्स लिबरेशन ग्रुप आर्मी प्लाटून वन की यूनिट ने किया है जिसका नेतृत्व भी हिडमा ही करता है। नक्सल काडर के 15 नक्सली मारे जाने की खबर है। सीआरपीएफ के डीजी रायपुर पहुंच चुके हैं एवं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने छतीसगढ़ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से बात की है।

Also Read: ब्लैक डे’ पुलवामा हमले (Pulwama Attack) को पूरे हुए 2 साल, परंतु जांच अभी भी अधूरी 

कौन हैं ये नक्सली एवं क्यों करते हैं ये हमले?

नक्सलवाद कम्युनिस्ट यानी साम्यवादी विचारधारा के क्रांतिकारियों के उस आंदोलन का अनौपचारिक नाम है जो भारतीय कम्युनिस्ट आन्दोल के फलस्वरूप उत्पन्न हुआ। इस आंदोलन में शामिल लोग कभी कभी माओवादी भी कहलाते हैं। इस आंदोलन की शुरुआत पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग के गांव नक्सलबाड़ी से हुई बताई जाती है। ये आंदोलन हिंसा पर आधारित है व आंदोलन के समर्थक भुखमरी, गरीबी और बेरोज़गारी से आजादी की मांग करते रहे हैं। यह आंदोलन देश में फैली सामाजिक और आर्थिक विषमता का आंदोलन है। सवाल ये है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी इस आंदोलन को सन्तुष्ट क्यों नहीं किया जा सका एवं क्यों हमारे सुरक्षाबल इन्हें संभालने में कम रह जाते है?

Chhattisgarh Bijapur Naxal Attack में शहीद हुए जवानो के नाम

Chhattisgarh Bijapur Naxal Attack (छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सली हमला) में शहीद हुए जवानों में से 14 शहीदों जवाने के नाम CRPF ने जारी कर दिए है, नीचे फ़ोटो में दी गयी सूची को देखें

Chhattisgarh Bijapur Naxal Attack: सरकारों ने किए कई प्रयत्न

बुद्धिजीवी कहेंगे कि इसमें सरकारों का दोष है लेकिन विभिन्न सरकारों ने अपना कार्य किया है उसके बाद भी नक्सली आंदोलनों को काबू नहीं किया जा सका। अमन और चैन को ये खत्म करते हैं। जिन आदिवासियों को काम नहीं मिलता उन्हें गुमराह करके नक्सली बनाना आसान होता है। इनके लिए कोई भी कामयाब कदम नहीं उठाया जा सका है। ऑक्सफेम की रिपोर्ट के अनुसार भारत के 73 फीसदी धन पर 1 फीसदी लोगों ने कब्जा किया है। इस तरह अंसतोष का बीज पनपना स्वाभविक है। और बीते कुछ समय से खासकर छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद दो राजनीतिक दलों का सियासी तवा हो गया है। आजादी के 70 सालों बाद भी सरकारें सन्तोष नहीं ला पाईं। स्पष्ट है कि अब कोई समाज का तारणहार ही इससे निजात दिला सकता है।

तत्वदर्शी संत रामपाल जी की शिक्षाएं कर सकती हैं नक्सलवाद का खात्मा

वाकई! बुद्धिजीवी वर्ग निश्चित रूप से अविश्वास से देखेगा क्योंकि उनके इस समस्या को खत्म करने के भिन्न भिन्न तर्क हो सकते हैं। लेकिन इस समस्या का मूल असन्तोष है जिससे अशांति फैलती है। अशांति, क्रांति, असंतोष समाज से केवल तत्वदर्शी सन्त अपने तत्वज्ञान के माध्यम से खत्म कर सकता है। सन्त रामपाल जी महाराज ने दहेज का ख़ात्मा जड़ से किया है। सन्त रामपाल जी के तत्वज्ञान से परिचित होने के बाद  दहेज को लोग स्वयं जहर की दृष्टि से देखते हैं। रिश्वत लेना और देना दोनों ही उनके अनुयायी छोड़ चुके हैं।

सन्त रामपाल जी का अद्भुत ज्ञान ऊंच नीच, जाति-पाति और ईर्ष्या से मानव को अलग कर देता है। क्या यह आश्चर्य नहीं है कि जिन बुराइयों को जाने कितने सामाजिक पुरोधा खत्म करवाते रहे लेकिन कर नहीं पाए वहां सन्त रामपाल जी महाराज के तत्वज्ञान को सुनकर व्यक्ति स्वयं ही इन बुराइयों से किनारा कर रहा है। इसका बहुत बड़ा उदाहरण है नशामुक्ति। नशे को सरकारें एक तरह से बढ़ावा देती रही हैं किंतु सन्त रामपाल जी ने सफल नशामुक्ति की ओर समाज को अग्रसर किया है। इसी तरह नक्सलवाद को खत्म करना अब सिर्फ उनके ही वश की बात है। अधिक जानकारी के लिए देखें सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल

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