Captain Amrinder Singh Resigned: कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिया मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा, कहा मेरा अपमान हुआ है

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कांग्रेस विधायक दल की बैठक से पहले ही कैप्टन अमरिंदर सिंह (Captain Amarinder Singh) ने पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। 48 विधायकों ने कथित तौर पर पार्टी आलाकमान को पत्र लिखकर उन्हें हटाने की मांग करने के बाद से ही इस्तीफे की अफवाहें आने लगी थीं। इसके चलते पंजाब के पार्टी प्रभारी हरीश रावत ने कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई। बैठक से पहले ही अमरिंदर सिंह ने राज्यपाल से मुलाकात कर इस्तीफा सौंप दिया।

Table of Contents

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिया इस्तीफा: मुख्य बिंदु 

  • कांग्रेस में भारी कलह के बीच कैप्टन अमरिंदर सिंह ने छोड़ा पंजाब के CM का पद
  • पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके मंत्रिपरिषद का इस्तीफा स्वीकार कर लिया
  • आलाकमान ये मानकर चल रहा था कि सिद्धू और अमरिंदर सिंह मिलकर काम करेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं और अंत में कैप्टन को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।
  • 1982 में जब वह अकाली दल से अलग हुए थे, तो उन्होंने अपना अलग दल बनाया था। उसका 1988 में कांग्रेस में विलय कर दिया गया था।
  • नवजोत सिद्धू और सुनील जाखड़ हो सकते हैं नए मुख्यमंत्री पद के दावेदार
  • कैप्‍टन बोले- सिद्धू का संबंध पाक से, बाजवा उसका साथी, CM बना तो पंजाब के ल‍िए घातक हो सकता है
  • पंजाब में कांग्रेस विधायक दल की बैठक में शनिवार को एक प्रपोजल पास कर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से गुज़ारिश की गई है कि वह विधायक दल के अगले नेता के बारे फैसला करें
  • पार्टी के प्रदेश प्रभारी हरीश रावत के मुताबिक, विधायक दल की बैठक में एक और प्रपोजल पास कर पंजाब और पार्टी के प्रति योगदान के लिए अमरिंदर सिंह का शुक्रिया किया गया
  • पंजाब के नए सीएम के नाम की आज हो सकती है घोषणा
  • पृथ्वी पर कोई सुखी नहीं है। भौतिकवाद से हट कर आध्यात्मिक मार्ग दे सकता है पूर्ण सुख

अमरिंदर सिंह का संक्षिप्त जीवन परिचय

अमरिंदर सिंह (जन्म 11 मार्च 1942),  जिन्हें सार्वजनिक रूप से कैप्टन अमरिंदर सिंह के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय राजनीतिज्ञ, सैन्य इतिहासकार, लेखक, पूर्व शाही और पूर्व दिग्गज हैं, जिन्होंने पंजाब के 15वें मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। पटियाला विधान सभा के एक निर्वाचित सदस्य, वे पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राज्य प्रभाग के अध्यक्ष भी थे। उन्होंने इससे पहले 2002 से 2007 तक पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में भी कार्य किया है। वह वर्तमान में सबसे उम्रदराज मुख्यमंत्री हैं। उनके पिता पटियाला रियासत के अंतिम महाराजा थे। उन्होंने 1963 से 1966 तक भारतीय सेना में सेवा की। 1980 में, उन्होंने पहली बार लोकसभा में सीट जीती। फरवरी 2021 तक, सिंह पंजाब उर्दू अकादमी के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 18 सितंबर, 2021 को पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। 

पंजाब विधानसभा चुनाव से महीनों पहले कैप्टन को जाने के लिए क्यों कहा गया था, इसके लिए कुछ ज़िम्मेदार कारक ठहराए जा रहे हैं।

अपनों ने छोड़ा कैप्टन का साथ

कैप्टन के कई पूर्व वफादारों ने भी उनका साथ छोड़ दिया। उदाहरण के लिए तृप्त राजिंदर बाजवा, सुखजिंदर रंधावा और सुखबिंदर सरकारिया जैसे नेता जिन्हें एक साथ ‘माझा एक्सप्रेस’ के रूप में जाना जाता है। माझा एक्सप्रेस ने कैप्टन को बाजवा के खिलाफ गुटीय संघर्ष जीतने में मदद की थी। लेकिन इस बार उन्होंने भी कैप्टन का साथ छोड़ दिया क्योंकि उन्हें एहसास हो गया था कि अगर कैप्टन के साथ बने रहे तो वो हार सकते हैं।

कैप्टन तक पहुंचना था मुश्किल

कैप्टन के खिलाफ सबसे बड़ी शिकायतों में से एक थी कि उन तक पहुंच पाना मुश्किल है। उन्हें शायद ही कभी विधायकों से मिलते या जनता तक पहुंचते देखा गया और वो ज्यादातर मोहाली के पास अपने फार्महाउस से ही काम-काज संचालित करते थे। पार्टी विधायकों की अक्सर शिकायत रही कि कैप्टन ने उनके अनुरोधों और याचिकाओं पर कार्रवाई नहीं की और ज्यादातर समय नौकरशाहों पर भरोसा करते थे।

सर्वे में घटती दिखी कैप्टन की लोकप्रियता

कैप्टन की अप्रूवल रेटिंग उनके कार्यकाल के मुश्किल से दो साल में ही गिरने लगी थी। 2019 की शुरुआत में कैप्टन की लोकप्रियता 19 फीसदी थी और 2021 की शुरुआत में ये गिरकर 9.8 फीसदी हो गई।

नवजोत सिंह सिद्धू ने मंत्रियों की माझा ब्रिगेड को कैप्टन के खिलाफ खड़ा किया

कहते हैं कैप्टन के धुर विरोधी कहे जाने वाले नवजोत सिंह सिद्धू ने यहां पर नंबर गेम खेला। नवजोत सिंह सिद्धू ने तीन मंत्रियों की माझा ब्रिगेड तृप्त राजेंद्र सिंह बाजवा, सुखबिंदर सरकारिया और सुखजिंदर रंधावा को कैप्टन के खिलाफ खड़ा कर दिया। हालांकि जून में तीन सदस्यीय पैनल ने सभी विधायकों से मुलाकात के बाद जुलाई में सिद्धू को पीपीसीसी प्रमुख नियुक्त किया था, लेकिन दोनों खेमे एक साथ काम नहीं कर सके।

प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कैप्टन अमरिंदर ने रखा अपना पक्ष

इस्तीफा सौंपने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आज सुबह ही मैंने सोच लिया था कि मैं इस्तीफा दूंगा और मैंने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी बता दिया था कि मैं इस्तीफा दूंगा। उन्होंने कहा कि पार्टी को मुझपर भरोसा नहीं रहा, अब सोनिया गांधी जिसे चाहें उसे सीएम बनाएं। ‘मैंने आज सुबह ही फैसला कर लिया था। इस बारे में सोनिया गांधी को भी बता दिया था। मेरे साथ ये तीसरी बार हो रहा है। मैं यहां ह्यूमिलेटेड फील कर रहा हूं। अब उन्हें जिस पर भरोसा होगा वो उसे मुख्यमंत्री बना लेंगे’।

■ Also Read: Captain Amrinder Singh Latest News [Hindi]: क्यों कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा?

कैप्टन ने यह भी कहा कि बार-बार विधायकों की बैठकें बुलाई जा रही हैं। मुझे लगता है कि आलाकमान को संदेह है कि मैं राज्य की सत्ता चला नहीं पा रहा हूं इसी वजह से बार-बार विधायकों की बैठक बुलाई जाती है। कैप्टन ने कहा कि मैं अपमानित महसूस कर रहा था। मेरे सामने बिना मुझको बताए विधायक दल की बैठक बुलाई जाती है ये एक सीएम का अपमान है।

सिद्धू के नाम का करूंगा विरोध : कैप्टन अमरिंदर सिंह

कैप्टन ने कहा कि सिद्धू एक आपदा है। सीएम पद के लिए सिद्धू के नाम का मैं विरोध करूंगा। कैप्टन ने सिद्धू की काबिलियत पर सवाल खड़ा किया और कहा कि जो एक मंत्रालय नहीं चला सकता, वह राज्य क्या संभालेगा। कैप्टन ने आगे कहा कि देश के खातिर, मैं पंजाब के सीएम पद के लिए नवजोत सिंह सिद्धू के नाम का विरोध करूंगा। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। पाकिस्तान के पीएम इमरान खान उनके दोस्त हैं। साथ ही उन्होंने कहा सिद्धू के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के साथ भी संबंध हैं।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस पार्टी छोड़ने के भी दिए संकेत

कैप्टन अमरिंदर सिंह जब इस्तीफा देने गवर्नर हाउस पहुंचे तो उस वक्त उनके साथ पत्नी परनीत कौर भी मौजूद थीं। राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को इस्तीफा सौंपने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने खुलकर कांग्रेस आलाकमान से अपनी नाराजगी जाहिर की। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि मैंने आज सुबह ही इस्तीफा देने का फैसला कर लिया था। 

बीते एक महीने में जिस तरह से तीन बार विधायकों की मीटिंग दिल्ली और पंजाब में बुलाई गई थी, उससे साफ था कि आलाकमान को मुझ पर संदेह है। ऐसे में मैंने पद से इस्तीफा दे दिया है और पार्टी अब जिसे चाहे सीएम बना सकती है। इसके अलावा उन्होंने भविष्य की राजनीति के विकल्प खुले होने की बात कहकर पार्टी छोड़ने के भी संकेत दे दिए हैं।

कैप्टन अमरिंदर सिंह वैकल्पिक व्यवस्था होने तक पंजाब के मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे

पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके मंत्रिपरिषद का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इससे पहले कैप्टन ने दिन में अपने मंत्रिपरिषद के साथ अपना इस्तीफा सौंपा था। एक लाइन के त्याग पत्र में कैप्टन ने लिखा था कि मैं मुख्यमंत्री और अपने मंत्रिपरिषद के रूप में अपना इस्तीफा देता हूं। हालांकि राज्यपाल ने उन्हें (कैप्टन अमरिंदर सिंह) और उनकी मंत्रिपरिषद को नियमित कामकाज के लिए तब तक अपने पद पर बने रहने को कहा है जब तक कि वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो जाती।

सुनील जाखड़ बन सकते है अगले मुख्यमंत्री

राहुल गांधी की पंजाब के बहाने हरियाणा और राजस्थान पर भी नजर है।  इस फेहरिस्त में सबसे अव्वल जो नाम आ रहा है वो है सुनील जाखड़ का। जाखड़ पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हैं और कांग्रेस का जाट चेहरा भी। सुनील जाखड़ का कांग्रेस के लिए प्रचार, कांग्रेस के साथ पुराने संबंध, कुछ चुनावों में जीत, हरियाणा और राजस्थान में जाट ज्यादा होने के कारण सुनील जाखड़ को मोहरा बनाकर प्रयोग करना, यह कुछ ऐसे कारण हैं जिसकी वजह से पंजाब में काफी उथल-पुथल देखी जा रही है।

कैप्टन के इस्तीफे के बाद लगने लगी हैं अटकलें

इस्तीफे के बाद कैप्टन ने कहा कि उन्होंने फिलहाल अपने सारे विकल्प खुले रखे हैं। 1982 में जब वह अकाली दल से अलग हुए थे, तो उन्होंने अपना अलग दल बनाया था। उसका 1988 में कांग्रेस में विलय कर दिया था। पिछले चुनाव में भी जब नेतृत्व के सवाल पर कांग्रेस के साथ तकरार शुरू हुई तो भी उनके पास अलग दल बनाने की संभावना थी। अब वह 80 साल के होने जा रहे हैं, नया दल बनाना कितना मुश्किल काम होगा, यह खुद कैप्टन भी जानते हैं। ऐसे में किसी दल का चेहरा बनना कहीं ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। आम आदमी पार्टी और बीजेपी, दोनों को इस वक्त राज्य में चेहरे की तलाश है।

पृथ्वी पर कोई सुखी नहीं, भौतिकवाद से हट कर आध्यात्मिक मार्ग दे सकता है पूर्ण सुख

जैसा कि हम अपने आसपास देख सकते हैं कि यहां पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, नेता, विधायक, अफसर, व्यापारी आदि जैसे लोग भी दुखी हैं तो आम गरीब जनसाधारण का क्या हाल होगा। कई बार हम अखबारों में पढ़ते हैं कि फलाने आईएएस, डॉक्टर, इंजीनियर ने आत्महत्या कर ली। इतनी पढ़ाई लिखाई के बाद पद प्राप्त करके भी लोगों के सामने दुखी रहने जैसी समस्या है। कबीर परमेश्वर जी हमें समझाते हुए बताते हैं इन सब समस्याओं का समाधान तत्वज्ञान यानी सतभक्ति और सतलोक प्राप्ति करने से हल होगा।

कबीर साहेब कहते हैं कि –

इच्छा रूपी खेलन आया, तातैं सुख सागर नहीं पाया।

इस काल ब्रह्म के लोक में शांति व सुख का नामोनिशान ही नहीं है। त्रिगुणी माया से उत्पन्न काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, राग-द्वेष, हर्ष-शोक, लाभ-हानि, मान-बड़ाई रूपी अवगुण हर जीव को परेशान किए हुए हैं। यहां एक जीव दूसरे जीव को मार कर खा जाता है, शोषण करता है, इज्ज़त लूट लेता है, धन लूट लेता है, शांति छीन लेता है। यहां पर चारों तरफ आग लगी है।

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यदि आप शांति से रहना चाहोगे तो दूसरे आपको नहीं रहने देंगे। आपके न चाहते हुए भी चोर चोरी कर ले जाता है, डाकू डाका डाल ले जाता है, दुर्घटना घट जाती है, किसान की फसल खराब हो जाती है, व्यापारी का व्यापार ठप्प हो जाता है, राजा का राज छीन लिया जाता है, स्वस्थ शरीर में बीमारी लग जाती है अर्थात् यहां पर कोई भी वस्तु सुरक्षित नहीं। राजाओं के राज, इज्जतदारों की इज्ज़त, धनवान का धन, ताकतवर की ताकत और यहां तक की हम सभी के शरीर भी अचानक छीन लिए जाते हैं। माता-पिता के सामने जवान बेटा-बेटी मर जाते हैं, दूध पीते बच्चों को रोते-बिलखते छोड़ कर मात-पिता मर जाते हैं, जवान बहनें विधवा हो जाती हैं और पहाड़ से दुःखों को भोगने को मजबूर होते हैं। 

विचार करें कि क्या यह स्थान रहने के लायक है? 

हम मजबूरी वश यहां रह रहे हैं क्योंकि इस काल के पिंजरे से बाहर निकलने का कोई रास्ता नजर नहीं आता और हमें दूसरों को दुःखी करने की व दुःख सहने की आदत सी बन गई। यदि आप जी को इस लोक में होने वाले दुःखों से बचाव करना है तो यहां के प्रभु काल से परम शक्ति युक्त परमेश्वर (परम अक्षर ब्रह्म) की शरण लेनी पड़ेगी। जिस परमेश्वर का खौफ काल प्रभु को भी है।

जिस के डर से यह उपरोक्त कष्ट उस जीव को नहीं दे सकता जो पूर्ण परमात्मा अर्थात् परम अक्षर ब्रह्म (सत्य पुरूष) की शरण पूर्ण सन्त के बताए मार्ग से ग्रहण करता है। वह जब तक संसार में भक्ति करता रहेगा, उसको उपरोक्त कष्ट आजीवन नहीं होते। जो व्यक्ति पुस्तक ‘‘ज्ञान गंगा’’ को पढ़ेगा उसको ज्ञान हो जाएगा कि हम अपने निज घर को भूल गए हैं। वह परम शांति व सुख यहां न होकर निज घर सतलोक में है जहां पर न जन्म है, न मृत्यु है, न बुढ़ापा, न दुःख, न कोई लड़ाई-झगड़ा है, न कोई बीमारी है, न पैसे का कोई लेन-देन है, न मनोरंजन के साधन खरीदना है। वहां पर सब परमात्मा द्वारा निःशुल्क व अखण्ड है।

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