संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम से पुर गाँव के किसानों को दी राहत

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हरियाणा राज्य के भिवानी जिले के अंतर्गत आने वाली बवानी खेड़ा तहसील के गाँव पुर में अत्यधिक वर्षा के कारण उत्पन्न हुई बाढ़ की स्थिति के पश्चात कृषि भूमि को पुनः उपजाऊ बनाने हेतु बड़े स्तर पर कार्य किया गया है। गाँव की लगभग 1000 से 1200 एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई थी, जिसके कारण रबी की फसल की बिजाई पर संकट मंडरा रहा था। 

इस विकट परिस्थिति में संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से गाँव को आवश्यक तकनीकी उपकरण और मशीनरी उपलब्ध कराई है। वर्तमान में गाँव की 95 प्रतिशत भूमि पर गेहूँ की बिजाई पूर्ण हो चुकी है और पौधों की ऊँचाई डेढ़ हाथ तक पहुँच गई है।

सहायता के तीन चरण और मशीनरी का वितरण

गाँव के सरपंच अजय कुमार और अन्य ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन और क्षेत्रीय विधायक से सहायता की गुहार लगाई थी, किंतु वहां से केवल आश्वासन प्राप्त हुए। इसके उपरांत ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के समक्ष सहायता हेतु अर्जी लगाई। संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से तीन चरणों में गाँव की सहायता की:

  • प्रथम और द्वितीय चरण: शुरुआती चरणों में पाइप और मोटरें भेजी गईं ताकि जल निकासी शुरू हो सके।
  • तृतीय चरण: जब बाढ़ का क्षेत्र विशाल होने के कारण पानी पूरी तरह नहीं निकला, तब तीसरी बार अर्जी लगाने पर मात्र 15 मिनट में स्वीकृति प्रदान की गई।
  • उपकरणों की कुल संख्या: संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से कुल 37,000 फुट (लगभग 11 किलोमीटर) पाइप और 20 एचपी की मोटर सहित कुल चार बड़ी मोटरें उपलब्ध कराईं। अंतिम चरण में 17,600 फुट 8 इंची पाइप और एक विशाल मोटर भेजी गई।

आर्थिक मूल्यांकन और सामुदायिक प्रभाव

सरपंच अजय कुमार के अनुसार, यदि यही कार्य सरकारी निविदा या पंचायत के माध्यम से किया जाता, तो इसकी अनुमानित लागत 1 करोड़ रुपये से अधिक होती। संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से यह समस्त सामग्री पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराई है। 

ग्रामीणों ने भविष्य में जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान हेतु इन पाइपों को जमीन के नीचे स्थायी रूप से दबा दिया है।

गाँव के विभिन्न व्यक्तियों ने इस सहायता पर अपने विचार व्यक्त किए हैं:

  • कमल (पंच, गाँव पुर): इन्होंने बताया कि खेतों में तीन-तीन फुट तक पानी भरा हुआ था। संत रामपाल जी महाराज द्वारा उपलब्ध कराई गई मोटर और पाइपों के कारण ही पानी उतरा और बिजाई संभव हो सकी।
  • सुरेश कुमार (ग्रामीण): इनका कहना है कि दो महीने पूर्व गाँव की स्थिति अत्यंत नाजुक थी और संत रामपाल जी महाराज के सहयोग से ही आज किसानों के चेहरे पर मुस्कान है।
  • राजेश कुमार (ग्रामीण): इन्होंने जानकारी दी कि प्रशासन द्वारा देरी किए जाने पर वे सतलोक आश्रम पहुंचे थे, जहाँ बिना किसी चंदे या पर्ची के तुरंत सहायता दल भेजा गया और दो दिन के भीतर सामान गाँव पहुँच गया।
  • संजय शर्मा और सोनू: इन्होंने खेतों में चल रहे ट्रैक्टरों और वर्तमान में लहलहा रही फसल की पुष्टि की।
  • रामवीर (ग्रामीण): इन्होंने बताया कि धान की फसल पहले ही खराब हो चुकी थी और यदि पानी नहीं निकलता, तो अगली फसल की बिजाई भी संभव नहीं थी। मोटरें लगातार डेढ़ महीने तक चलीं, तब जाकर जलस्तर कम हुआ।

बिजाई और राहत कार्य का संक्षिप्त विवरण

विवरणसांख्यिकीय डेटा / जानकारी
प्रभावित क्षेत्र1000 – 1200 एकड़ कृषि भूमि
बिजाई की वर्तमान स्थिति90% से 95% भूमि पर बिजाई पूर्ण
वितरित पाइप की कुल लंबाई37,000 फुट (लगभग 11 किलोमीटर)
वितरित मोटरों की संख्या4 बड़ी मोटरें (20 एचपी सहित)
सहायता के चरणों की संख्या3 चरण
अनुमानित लागत बचत1 करोड़ रुपये से अधिक
प्रमुख फसलगेहूँ और सरसों
पाइप का व्यास8 इंची

कृषि अर्थव्यवस्था की पुनर्बहाली और भावी योजना

जल निकासी के पश्चात गाँव की अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। गेहूँ के पौधों में बालें निकलने लगी हैं और पशुओं के लिए चारे की समस्या का भी समाधान हो गया है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से न केवल संसाधन प्रदान किए, बल्कि सहायता दल के सदस्यों के भोजन और विश्राम की व्यवस्था भी स्वयं ही संभाली। 

गाँव के किसान और मजदूर अब संत रामपाल जी महाराज को अपना रक्षक और अन्नदाता मान रहे हैं, क्योंकि उनकी सहायता के बिना भूमि आगामी कई वर्षों तक कृषि योग्य नहीं हो पाती। गाँव पुर के निवासियों ने भविष्य में भी संत रामपाल जी महाराज के प्रति अपनी निष्ठा और सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई है।

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