​भाटला गांव: जहां मौत के समंदर को चीरकर लौटी खेतों की हरियाली

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​हरियाणा के हिसार जिले की हांसी तहसील में बसा ऐतिहासिक गांव भाटला पिछले कुछ महीनों से एक खौफनाक त्रासदी से गुज़र रहा था। जो खेत कभी सोने जैसी फसलें उगलते थे, वे एक ठहरे हुए सड़े समंदर में तब्दील हो गए थे। बाढ़ के ज़हरीले पानी ने न केवल किसानों की मेहनत पर पानी फेरा, बल्कि उनके भविष्य को भी अंधकार में धकेल दिया था। लेकिन जब हर तरफ से निराशा हाथ लगी, तब संत रामपाल जी महाराज की असीम कृपा ने इस डूबते हुए गांव को एक चमत्कारी जीवनदान दिया।

​तबाही और खौफ का वह खौफनाक समंदर

लगभग तीन से चार महीने तक भाटला गांव के हालात इतने बदतर थे कि इसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। गांव की 400 से 500 एकड़ अत्यधिक उपजाऊ ज़मीन 5 से 7 फुट गहरे पानी में समा गई थी। खरीफ की फसल (धान और कपास) पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी।

​पानी सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहा; यह घरों के अंदर तक घुस गया। मकानों में गहरी दरारें आ गईं और फर्श धंसने लगे। रास्ते ढाई फुट पानी में डूबे हुए थे, जिससे गांव का संपर्क बाहर की दुनिया से टूट सा गया था। 35 एकड़ ठेके की ज़मीन जोतने वाले किसान संजय अपनी व्यथा बताते हुए कहते हैं, “हम सीधे तौर पर 35 से 40 लाख रुपये के नुकसान का सामना कर रहे थे। समझ नहीं आ रहा था कि परिवार का पेट कैसे पालेंगे या जवान बेटियों की शादी कैसे करेंगे। यह हमारे लिए काले पानी की सज़ा जैसा था।”

​एक पुकार और ईश्वरीय सहायता

इस भीषण जलभराव से निपटने के लिए गांव की पंचायत ने हफ्तों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे, लेकिन उन्हें सिर्फ खोखले आश्वासन ही मिले। रबी (गेहूं) की बिजाई का समय तेज़ी से निकल रहा था और गांव भुखमरी की कगार पर खड़ा था।

​जब सांसारिक व्यवस्थाओं ने हार मान ली, तब पंचायत और ग्रामीणों ने एक आखिरी उम्मीद के साथ अपनी गुहार लगाई। उन्होंने एक औपचारिक एप्लीकेशन (प्रार्थना पत्र) तैयार की और उसे सीधे मुनींद्र धर्मार्थ ट्रस्ट ऑफिस में जमा कर दिया। इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे इलाके को अचंभित कर दिया।

​धरातल पर उतरा ‘परमेश्वर का संविधान’

एप्लीकेशन मिलने के मात्र 48 घंटे के भीतर, भाटला गांव की चौपाल पर मदद का एक विशाल काफिला पहुंच गया। संत रामपाल जी महाराज ने बिना एक पल गंवाए 9000 फुट लंबी 8-इंची उच्च गुणवत्ता वाली पाइपलाइन और तीन शक्तिशाली मोटरें (दो 10 HP और एक 7.5 HP) गांव भिजवा दीं। मदद इतनी मुकम्मल थी कि पाइप जोड़ने वाले सॉल्यूशन से लेकर स्टार्टर, केबल, और एक-एक नट-बोल्ट तक ट्रस्ट की ओर से बिल्कुल मुफ्त भेजा गया।

दुनिया की व्यवस्थाएं लालफीताशाही, जाति या वोट बैंक देखती हैं, लेकिन परमेश्वर केवल इंसान की पीड़ा देखता है। संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी भेदभाव के मदद की और साबित कर दिया कि असली भगवान वही है जो मुसीबत में बिना मांगे पिता की तरह हाथ थाम ले।

​दलदल से निकलकर फिर दौड़े ट्रैक्टर

संत जी द्वारा दी गई उन शक्तिशाली मोटरों ने दिन-रात काम किया। जो पानी पिछले कई महीनों से गांव को लीलने पर आमादा था, वह महज़ एक हफ्ते के भीतर गांव की सीमाओं से बाहर खदेड़ दिया गया।

​आज भाटला का नज़ारा पूरी तरह बदल चुका है। जहां कुछ दिन पहले नावें चलने की नौबत थी, वहां आज ट्रैक्टर धड़ल्ले से चल रहे हैं। पूरे गांव में गेहूं की बिजाई जोरों पर है और गांव का जो खेल स्टेडियम डूब चुका था, वह फिर से नज़र आने लगा है। जो किसान कल तक कर्ज़ के डर से खौफजदा थे, आज उनके चेहरों पर सुकून की बड़ी मुस्कान है।

​एक अमर मसीहा

भाटला गांव के हज़ारों परिवारों के लिए संत रामपाल जी महाराज आज साक्षात भाग्य विधाता बन चुके हैं। उन्होंने न सिर्फ इन खेतों को सूखने में मदद की है, बल्कि एक पूरे समाज को उजड़ने और बर्बाद होने से बचाया है। जिस वक्त सिस्टम ने किसानों को बेसहारा छोड़ दिया था, उस वक्त संत रामपाल जी महाराज ने उन्हें एक नई ज़िंदगी दी। भाटला के किसान आज नम आंखों से यही कहते हैं कि हमारे लिए संत रामपाल जी ही साक्षात् भगवान हैं, जिन्होंने हमारी बेटियों की शादियां और हमारे घरों की खुशियां बचा लीं।

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