हरियाणा के हिसार जिले के अलीपुर गांव में संत रामपाल जी महाराज ने बाढ़ की त्रासदी से बचाई डूबती खेती

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​हरियाणा के हिसार जिले का अलीपुर गांव एक गंभीर प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा था, जहाँ के हालात 1995 की बाढ़ से भी अधिक भयावह हो चुके थे। गांव की लगभग 200 से 300 एकड़ उपजाऊ भूमि जलमग्न हो चुकी थी और पूरा गांव डूबने के कगार पर था। रिटायर्ड सब-इंस्पेक्टर रघुवीर सिंह के अनुसार, उस समय की तबाही को लोग भूले नहीं थे कि कुदरत ने फिर वही मंजर सामने ला खड़ा किया। लेकिन इस निराशा के बीच, संत रामपाल जी महाराज ग्रामीणों के लिए आशा की एकमात्र किरण बनकर उभरे। प्रशासन की कागजी कार्यवाही और देरी के विपरीत, संत रामपाल जी महाराज ने तत्काल प्रभाव से सहायता भेजकर गांव को सुरक्षित किया।

ग्रामीणों द्वारा संत रामपाल जी महाराज से सहायता की गुहार और त्वरित कार्यवाही

​गांव के हालात बिगड़ते देख ग्रामीणों ने प्रशासन का इंतजार करने के बजाय संत रामपाल जी महाराज से संपर्क करने का निर्णय लिया। अलीपुर गांव का संत रामपाल जी महाराज से पुराना रिश्ता रहा है। किसान नेता बबलू ने बताया कि वर्ष 2018 में किसान धरने के दौरान भी संत जी ने 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद भेजी थी। इसी भरोसे के साथ जब ग्रामीणों ने नई मुसीबत में उन्हें याद किया, तो मदद का काफिला तुरंत अलीपुर की गलियों में दाखिल हुआ। यह दृश्य किसी उत्सव से कम नहीं था, जहाँ ट्रैक्टरों में भरकर पाइप और मोटरें संत जी की तस्वीर के साथ गांव में पहुंचीं।

राहत सामग्री का विवरण

​संत रामपाल जी महाराज ने बाढ़ के पानी की निकासी के लिए भारी मात्रा में संसाधन उपलब्ध कराए, ताकि किसान अगली फसल की बिजाई कर सकें। उपलब्ध कराई गई सामग्री का विवरण निम्न प्रकार है:

क्रमांकसामग्री का नामविवरण/मात्रा
1पाइप लाइन6000 फुट (8 इंच चौड़ी)
2पानी की मोटरें2 (10 एचपी क्षमता)
3अन्य उपकरणस्टार्टर, बिजली की डोरी
4सहायक सामग्रीपाइप

ग्रामीणों और किसान नेताओं की प्रतिक्रिया

​गाँव के बुजुर्गों और प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने संत रामपाल जी महाराज का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें भगवान का दर्जा दिया। रिटायर्ड सब-इंस्पेक्टर रघुवीर सिंह ने कहा कि 1995 की बाढ़ से भी ज्यादा पानी जमा होने के कारण फसलें नष्ट हो चुकी थीं, लेकिन संत जी द्वारा भेजी गई बड़ी मोटरें और पाइपलाइन 5-5 फुट जमा पानी को निकालने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि अब गांव में गेहूं की बिजाई संभव हो पाएगी।

​किसान संगठन से जुड़े बबलू ने कहा कि अन्य धार्मिक वक्ता और संस्थाएं केवल बातें करती हैं, लेकिन संत रामपाल जी महाराज जमीनी स्तर पर काम करते हैं। 

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उन्होंने बताया कि खरड़ और अलीपुर के लगभग 800 एकड़ क्षेत्र में नुकसान हुआ था, लेकिन अब इस मदद से रबी की फसल की उम्मीद जागी है। एक अन्य ग्रामीण सत्यदीप ने बताया कि बाढ़ के कारण लोग बेघर हो गए थे और पशु इधर-उधर भटक रहे थे, लेकिन यह मदद उनके लिए संजीवनी बनकर आई है।

संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट संदेश और शर्तें

​राहत सामग्री के साथ-साथ संत रामपाल जी महाराज की ओर से एक विशेष पत्र भी भेजा गया, जिसे पंचायत के सामने पढ़कर सुनाया गया। इसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए कि:

  1. दिखावा नहीं, काम: मदद का उद्देश्य केवल फोटो खिंचवाना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर पानी निकालना है।
  2. परिणाम की निगरानी: गांव की ड्रोन से वीडियोग्राफी की जाएगी-पहले पानी भरे होने की, फिर पानी निकलने के बाद, और अंत में जब फसल लहराएगी।
  3. भविष्य की चेतावनी: यदि निर्धारित समय में पानी नहीं निकाला गया और फसल की बिजाई नहीं हुई, तो भविष्य में ट्रस्ट द्वारा कोई मदद नहीं दी जाएगी।
  4. सामग्री का संरक्षण: उपयोग के बाद पाइपों को जमीन में दबाकर सुरक्षित रखा जाए ताकि भविष्य में बारिश के समय तुरंत पानी निकाला जा सके।

​यह सख्त अनुशासन यह सुनिश्चित करने के लिए था कि दान की एक-एक पाई का सदुपयोग हो और किसानों के घर में अनाज पहुंच सके।

सरकार और अन्य धार्मिक गुरुओं से तुलना

​ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार और प्रशासन उन्हें कागजों में उलझाए रखते हैं, जबकि संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी औपचारिकता के लाखों का सामान एक प्रार्थना पर भेज दिया। ग्रामीणों ने कथावाचकों पर भी कटाक्ष किया जो लाखों रुपये लेते हैं लेकिन समाज सेवा के नाम पर शून्य हैं। इसके विपरीत, संत रामपाल जी महाराज परोपकार के कार्यों में हमेशा अग्रणी रहते हैं। ग्रामीणों का कहना था कि संत रामपाल जी महाराज ही किसानों और मजदूरों के सच्चे मसीहा हैं।

जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज – मानवता के सच्चे रक्षक और पालनहार

​इस आपदा के समय में संत रामपाल जी महाराज ने जो कार्य किया है, वह किसी साधारण मनुष्य के बस की बात नहीं है। उन्होंने न केवल बाढ़ का पानी निकालने के लिए संसाधन दिए, बल्कि किसानों को जीने की नई उम्मीद भी दी। 6000 फुट पाइप और मोटरों का यह उपहार अलीपुर और आसपास के गांवों के लिए एक वरदान साबित हुआ है। जहाँ प्रशासन विफल रहा, वहाँ संत रामपाल जी महाराज की दयालुता और दूरदर्शिता ने जीत हासिल की। यह घटना सिद्ध करती है कि संत रामपाल जी महाराज केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि समाज के हर दुख-दर्द में ढाल बनकर खड़े रहते हैं। उनका यह उपकार अलीपुर का इतिहास हमेशा याद रखेगा।

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